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उपलब्धियां

अ. व्यवसाय 

वर्ष 2015-16 के दौरान नाबार्ड का पुनर्वित्त परिचालन बढ़कर रु.1,19,280.72  करोड़ हो गया है.  मध्यावधि  और दीर्घावधि ऋण के समक्ष रु.48,063.72  करोड़ का दीर्घावधि पुनर्वित्त प्रदान किया गया, जो पिछले वर्ष से 50 % से अधिक  की वृद्धि दर्शाता है.  यह कृषि क्षेत्र में पूंजी निर्माण का संकेत है. नाबार्ड ने वर्ष 2015-16 में ग्रामीण आधारभूत सुविधा विकास निधि के अंतर्गत रु.23,510.19 करोड़ का संवितरण किया है, जो पिछले वर्ष से 19.54 % की वृद्धि दर्शाता है. भंडारागार सुविधा निधि(डब्ल्यूआईएफ) के तहत संचयी रूप से रु.10,692 करोड़ की राशि मंजूर की गई है. इसके अंतर्गत 15.21 मिलियन मीट्रिक टन के शुष्क भंडारण और 0.10 मिलियन मीट्रिक टन के आर्द्र भंडारण क्षमता के निर्माण हेतु कुल 9,215 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं. भंडारागार सुविधा निधि(डब्ल्यूआईएफ) के अंतर्गत संचयी रूप से रु. 2,361.91 करोड़ की राशि संवितरित की गई है. इसमें से रु.1,361.47 करोड़ की राशि वर्ष 2015-16 के दौरान संवितरित की गई है. यह उपलब्धि रु.10,000 करोड़ के आबंटित लक्ष्य के समक्ष है.  
 
नाबार्ड आधारभूत सुविधा विकास सहायता (नीडा) के अंतर्गत हमने 12 परियोजनाओं के लिए रु. 5919   करोड़ की राशि मंजूर की है और इस प्रकार इसके तहत 41 परियोजनाओं के लिए संचयी रूप से रु.10,567  करोड़ की  राशि मंजूर की जा चुकी है. 
नाबार्ड द्वारा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर अम्ब्रेला कार्यक्रम (यूपीएनआरएम ) के तहत अब तक रु.604.91 करोड़ की राशि मंजूर की गई है. इसका उद्देश्य  प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े परियोजनाओं के दीर्घकालिक प्रबंधन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देना है. वर्ष 2015-16  के दौरान 26  परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिसके लिए रु.9.05  करोड़  ऋण के रूप में और रु.2.68  करोड़ अनुदान सहायता के  रूप में दिए गए. 
 
नाबार्ड ने उत्पादक संगठनों  के सहायतार्थ एक बड़ी पहल करते हुए  52 उत्पादक संगठनों के लिए रु.92.11 करोड़ मंजूर किए हैं.  

आ. विकासात्मक कार्य  

वर्ष 2014-15 के केंद्रीय बजट में माननीय वित्त मंत्री ने उत्पादक संगठन विकास निधि के लिए रु. 200 करोड़ की घोषणा की है, इसका उपयोग 2000 कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के निर्माण करने में किया जाएगा. वर्ष 2015-16 में 1,371 एफपीओ को अनुमोदन दिया गया है और इस प्रकार कुल एफपीओ की संख्या 2173 हो गई है. इन एफपीओ के संवर्धन और क्षमता निर्माण/ पोषण के लिए वर्ष 2015-16 में रु. 125.97 करोड़ की अनुदान सहायता मंजूर की गई है.
 
नाबार्ड ने ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक और सम्यक समृद्धि लाने के अपने अधिदेश के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका से संबन्धित गतिविधियों के संचालन में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों  से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं. जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्र संघ फ्रेमवर्क कन्वेन्शन (यूएनएफसीसीसी) के अंतर्गत गठित अनुकूलन निधि (एएफ) के लिए नाबार्ड को भारत का राष्ट्रीय कार्यान्वयनकर्ता एजेंसी(एनआईई) बनाया गया है.  राष्ट्रीय कार्यान्वयनकर्ता एजेंसी के रूप में नाबार्ड ने  जलवायु परिवर्तन अनुकूलन से संबन्धित कई संभाव्य परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार किए हैं. इनमें से अनुकूलन निधि (एएफ) द्वारा $7.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर की पाँच परियोजनाएं मंजूर की जा चुकी हैं.  
 
नाबार्ड को ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) के लिए राष्ट्रीय कार्यान्वयनकर्ता एजेंसी के रूप में मान्यता दी गई है और इसका उद्देश्य जीसीएफ के संसाधनों का उपयोग भारत में जलवायु अनुकूल विकास गतिविधियों के लिए करना है.
 
वर्ष 2014-15 के केंद्रीय बजट में घोषणा के बाद एक 'जलवायु परिवर्तन अनुकूलन पर राष्ट्रीय निधि' (एनएएफसीसी) की स्थापना की गई है, जिसमें नाबार्ड राष्ट्रीय कार्यान्वयनकर्ता एजेंसी है और इसका कार्य कृषि, जल और वानिकी जैसे क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए समुचित कार्य योजना के लिए सहयोग देना है. इसके तहत परियोजनाओं की मंजूरी भारत सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में गठित जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससीसीसी)  द्वारा की जाती है. एनएएफसीसी के अंतर्गत एनएससीसीसी द्वारा 12 परियोजनाओं के लिए रु. 235.19 करोड़ का ऋण मंजूर किया गया है. 
 
भारत सरकार ने वर्ष 2014 -15 में राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) की शुरुआत की है और इसके लिए रु.2,800 करोड़ निर्धारित किए  गए हैं. पॉल्ट्री उद्यम पूंजी निधि, जुगाली करने वाले छोटे पशुओं और खरगोशों के समन्वित विकास, शूकर विकास और भैंसों के नर बछड़ों  के संरक्षण और पालन संबंधी उद्यमिता विकास और रोजगार सृजन योजनाओं के लिए सब्सिडी का संचालन नाबार्ड के माध्यम से किया जाता है. वर्ष 2015-16  के दौरान पॉल्ट्री उद्यम पूंजी निधि  के अंतर्गत 2961 इकाइयों के लिए रु. 42.47 करोड़ और  जुगाली करने वाले छोटे पशुओं और खरगोशों के समन्वित विकास योजना के अंतर्गत 9092 इकाइयों के लिए रु.31.91  करोड़ की सब्सिडी जारी की गई है. 
 
इसके अतिरिक्त, नाबार्ड द्वारा डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत 18,177  इकाइयों के लिए रु.89.76  करोड़ मंजूर किये गए हैं.  
 
वर्ष 2014-15 में  नाबार्ड की ओर से बैंकिंग उद्योग में एक ऐतिहासिक प्रयास किया गया है जिसके तहत सहकारी बैंकों में कोर बैंकिंग प्रणाली (सीबीएस) लागू करने की प्रक्रिया तेज की गई है. 31 मार्च 2015 की स्थिति में देश के कुल 380 लाइसेंसीकृत बैंकों (रास बैंकों और जिमस बैंकों) को सीबीएस प्लेटफार्म पर लाया गया है.  
 
नाबार्ड की ओर से कोर बैंकिंग प्रणाली (सीबीएस) को सुचारु ढंग कार्यान्वित करने में हुए व्यय के लिए बैंकों को प्रति शाखा रु.2.00 लाख की सीमा तक एक बार के लिए प्रतिपूर्ति सहायता दी गई है.  इस योजना के तहत अब तक रु. 88.32 करोड़ की राशि मंजूर की गई है. 
 
सूक्ष्म वित्त के क्षेत्र में वर्ष 2014-15  के दौरान पूरे देश में स्वयं सहायता समूहों को रु. 27,582  करोड़ की राशि संवितरित की गई, जो वर्ष 2013-14  से 14.84 % की सकारात्मक वृद्धि दर्शाता  है.
 
वर्ष 2015-16  के दौरान, नाबार्ड वाटरशेड कार्यक्रम के अंतर्गत 49 नई परियोजनाएं मंजूर की गई हैं और इस प्रकार, संचयी रूप से इन परियोजनाओं की संख्या 547 हो गई है. इन परियोजनाओं के माध्यम से 18  राज्यों में 5.24  लाख हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है और इसके लिए प्रतिबद्ध राशि रु.398.90 करोड़ है. 
 
वर्ष 2015-16  के दौरान नाबार्ड के आदिवासी विकास कार्यक्रम (वाडी) के अंतर्गत 23 परियोजनाएं मंजूर की गई है. इसके तहत संचयी रूप से 633 परियोजनाओं के लिए रु.1952.95 करोड़  की राशि मंजूर की गई है और  इसके अंतर्गत 4.85 लाख परिवार शामिल हैं. वर्ष 2015-16  में लाभग 5,016 नए किसान क्लब बनाए गए हैं. 

इ. पर्यवेक्षण 

वर्ष के दौरान नाबार्ड ने 298  बैंकों ( क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों और जिला मध्यवर्ती  सहकारी बैंकों) का निरीक्षण किया.