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वित्तीय

पुनर्वित्‍त

कृषीतर क्षेत्र के तहत पुनर्वित्त के लिए पात्र योजनाएं
स्वतः पुनर्वित्त योजना (एआरएफ़) 
 
पिछले कई वर्षों से तैयार की गई विभिन्न योजनाओं को पाँच अलग-अलग और संक्षिप्त योजनाओं में वर्गीकृत किया गया है.  
 
i. सम्मिश्र ऋण योजना (सीएलएस) 
 
इस योजना के तहत, छोटे/ सूक्ष्म उद्यमियों को थोक पूंजी और/अथवा कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पुनर्वित्त दिया जाता है. उपलब्ध अधिकतम पुनर्वित्त प्रति इकाई ` 10 लाख है. 
 
ii. एकीकृत ऋण योजना (आईएलएस) 
 
इस योजना के तहत, एक परिचालन चक्र के लिए थोक पूंजी और कार्यशील पूंजी के लिए पुनर्वित्त दिया जाता है.  
 
iii. पूर्व सैनिकों के लिए स्वरोजगार योजना (एसईएमएफ़ईएक्स) – सेम्फ़ेक्स  
 
यह योजना 15 जनवरी 1988 से लागू है. पूर्व सैनिकों को प्रोत्साहित करने हेतु अपनी आजीविका अर्जित करने तथा सम्मानित जीवन जीने के लिए कृषि और सम्बद्ध कार्यकलाप शुरू करने अथवा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषीतर इकाई स्थापित करने के लिए सेम्फ़ेक्स को विशेष रूप से ऋण का व्यापक पैकेज प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है. नाबार्ड ग्रामीण गैर कृषि क्षेत्र (निवेश ऋण) के तहत उत्पादन, प्रसंस्करण और सेवा क्षेत्र गतिविधियों के व्यापक विस्तार के लिए पात्र बैंकों को स्वतः पुनर्वित्त योजना (एआरएफ़) के तहत पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता है.  
 
iv. मार्जिन राशि के लिए सुलभ ऋण सहायता (एसएलएएमएम) 
 
इस योजना का उद्देश्य उन भावी उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है जिनके पास आवश्यक योग्यता और उद्यमिता का कौशल है परंतु नाबार्ड की संबंधित पुनर्वित्त योजनाओं के तहत आवश्यक निर्धारित मार्जिन को पूरा करने के लिए आवश्यक मौद्रिक संसाधन नहीं है.
 
v. छोटे सड़क और जल परिवहन परिचालक (एसआरडबल्यूटीओ) 
 
इस योजना के तहत, परिवहन वाहनों के अधिग्रहण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है जो यात्री परिवहन वाहनों और जल परिवहन इकाइयों सहित कृषि उत्पाद/औद्योगिक उत्पाद के ग्रामीण/शहरी बाजार केन्द्रों तक परिवहन के लिए प्रयोग में लाए जाते है.   
 
ग्रामीण आवास 
 
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और गैर किसानों, दोनों के लिए आवास कारोबार तथा आवास दोनों आवश्यकताओं को पूरा करते हैं जिससे समग्र ग्रामीण विकास की और आगे बढ़ा जा सकता है. नाबार्ड ग्रामीण आवास को सहायता के लिए पात्र बैंकों को पुनर्वित्त (निवेश ऋण) प्रदान करता है.  
 
अक्षय ऊर्जा 
 
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई), भारत सरकार और जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (जेएनएनएसएम) भारत की ऊर्जा सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए काम कर रहे हैं. इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, एमएनआरई ने फोटो वोल्टेइक प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से विकेन्द्रीकृत सौर ऊर्जा चालित ऊर्जा संचयन उपकरण ऑफ ग्रिड के निर्माण के लिए एक पूंजी सह ब्याज सब्सिडी योजना शुरू की है. ये उपकरण घरेलू और मिनी व्यावसायिक एप्लीकेशनों के स्तर पर प्रकाश, ताप, आदि के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे. नाबार्ड व्यवहार्यता का आकलन करने और पात्र परियोजनाओं के लिए पुनर्वित्त प्रदान करने के लिए नोडल एजेंसी है.