राजभाषा प्रभाग
उद्देश्य:
भारत सरकार की राजभाषा नीति का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) में राजभाषा प्रभाग की स्थापना बैंक की स्थापना के समय ही की गयी. राजभाषा प्रभाग का उद्देश्य, भारत सरकार की राजभाषा नीति का अनुपालन सुनिश्चित करना है अर्थात् भारतीय संविधान में किए गए राजभाषा संबंधी प्रावधानों (भाग XVII के अनुच्छेद 343 से 351), अप्रैल 1960 में जारी राष्ट्रपति के आदेश, राजभाषा अधिनियम 1963, राजभाषा संकल्प, 1968 तथा राजभाषा नियम, 1976 की विभिन्न अपेक्षाओं का अनुपालन सुनिश्चित करवाना है. इसके अलावा, हिन्दी के प्रगामी प्रयोग के लिए भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले वार्षिक समयबद्ध कार्यक्रम में निर्धारित विभिन्न लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्टाफ सदस्यों को प्रेरित करना है. प्रमुख कार्य
(क) प्रशिक्षण:
राजभाषा प्रभाग स्टाफ सदस्यों को निम्नलिखित प्रशिक्षण दिलवाने की व्यवस्था करता है :
(1) हिंदी शिक्षण (हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान न रखने वाले स्टाफ सदस्यों के लिए)
(2) हिंदी टंकण प्रशिक्षण
(3) हिंदी आशुलिपि प्रशिक्षण,
(ख) क्षमता निर्माण :
(1) हिंदी कार्यशालाएँ :
हिंदी में कार्यालयीन कामकाज करने में स्टाफ सदस्यों को सक्षम बनाने के लिए नियमित रूप से हिंदी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है.
(2) वरिष्ठ अधिकारियों के लिए राजभाषा उन्मुखीकरण कार्यक्रम : राजभाषा नीति के कार्यान्वयन में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका एवं दायित्वों से उन्हें परिचित कराने के उ ेश्य से वरिष्ठ अधिकारियों के लिए राजभाषा उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है.
(3) कम्प्यूटर पर हिंदी में काम करने का प्रशिक्षण दिया जाता है.
(ग) प्रोत्साहन :
(1) नकद पुरस्कार योजना :
स्टाफ सदस्यों को मूल रूप से हिंदी में कार्य करने के लिए नकद पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं.
(2) हिंदी में मूल पुस्तक लेखन योजना :
हिंदी में कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित विषयों पर पुस्तक लिखने के लिए अनुदान सहायता प्रदान की जाती है.
(3) राजभाषा शील्ड :
हिंदी में सर्वोत्कृष्ट कार्य करने के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों/प्रशिक्षण संस्थानों /प्रधान कार्यालय के विभागों को राजभाषा शील्ड और प्रमाणपत्र प्रदान किये जाते हैं.
(4) भारत सरकार/ भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की जाने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं और योजनाओं का प्रचार प्रसार किया जाता है.
(5) नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के तत्वावधान में आयोजित विभिन्न हिंदी प्रतियोगिताओं में स्टाफ सदस्यों को प्रतिनियुक्त किया जाता है तथा समिति द्वारा प्रकाशित पत्रिकाओं में भी स्टाफ सदस्यों की रचनाएं प्रकाशनार्थ भेजी जाती है.
घ) वातावरण निर्माण :
(1) हिंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन :
हिंदी के प्रति अभिरुचि पैदा करने और उनके हिंदी ज्ञान का परिमार्जन करने के लिए विभिन्न प्रकार की हिंदी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं. प्रतियोगिताओं का आयोजन केन्द्रीय और विभागीय दोनों स्तरों पर किया जाता है.
(2) हिंदी दिवस समारोह का आयोजन :
प्रति वर्ष 14 सितंबर अर्थात् हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी समारोह का आयोजन किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता स्टाफ सदस्यों को पुरस्कृत किया जाता है.
(3) सृजना प्रतियोगिता :
रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने और उसे निखारने के लिए प्रतिवर्ष कविता, कहानी, लेख, फोटो फीचर आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं.
(4) हिंदी पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध करवाना :
स्टाफ सदस्यों को हिंदी भाषा के समसामायिक प्रयोग से परिचित कराने के लिए विभिन्न प्रकार की हिंदी पत्रिकाएं और समाचार पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है.
(5) हिंदी पुस्तकों की खरीद :
इस संबंध में पुस्तकालय के बजट की 50% राशि हिंदी पुस्तकों की खरीद के लिए सुनिश्चित करवाई जाती है.
(6) आज का विचार एवं आज का शब्द :
प्रतिदिन नियमित रूप से इन्हें परिसर में प्रवेश द्वार के समीप महत्वपूर्ण स्थान पर प्रदर्शित किया जाता है.
(ङ) अनुप्रवर्तन :
(1) अप्रत्यक्ष निगरानी :
प्रधान कार्यालय के विभिन्न विभागों/ क्षेत्रीय कार्यालयों/ प्रशिक्षण संस्थानों से प्राप्त होने वाली तिमाही/ वार्षिक प्रगति रिपोर्टों के माध्यम से सांविधिक अपेक्षाओं के अनुपालन तथा हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की समीक्षा की जाती है.
(2) प्रत्यक्ष निरीक्षण :
प्रत्यक्ष निरीक्षण के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यालयों/ प्रशिक्षण संस्थानों और प्रधान कार्यालय के विभिन्न विभागों में विनिर्दिष्ट अवधि के दौरान हिंदी के प्रयोग की स्थिति का अवलोकन करके उनके निष्पादन के संबंध में प्रबंधतंत्र को प्रतिसूचना दी जाती है. निरीक्षण निष्कर्षों के आधार पर कमियों को दूर करने के लिए समुचित उपायों का सुझाव दिया जाता है. निरीक्षण की समाप्ति पर आयोजित होने वाली समापन बैठक में संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय/ प्रशिक्षण संस्थान/ प्रधान कार्यालय के विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को राजभाषा नीति की विभिन्न अपेक्षाओं से सुग्राहीकृत किया जाता है.
(3) राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक :
प्रत्येक तिमाही में राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक का आयोजन कार्यपालक निदेशक की अध्यक्षता में किया जाता है जिसमें सभी विभागों में हिंदी प्रयोग की स्थिति की समीक्षा की जाती है और हिंदी का प्रयोग बढ़ाने के विभिन्न उपायों पर विचार विमर्श के बाद निर्णय लिए जाते हैं. उक्त समिति में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष सदस्य होते हैं. क्षेत्रीय कार्यालयों एवं प्रशिक्षण संस्थानों में भी प्रभारी अधिकारियों की अध्यक्षता में ऐसी समितियाँ गठित की गई हैं, जिनकी बैठक प्रत्येक तिमाही में आयोजित की जाती है.
(4) विभागीय समीक्षा बैठक :
विभिन्न विभागों में तिमाही आधार पर विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में हिंदी प्रगति की समीक्षा के लिए बैठक का आयोजन किया जाता है जिसमें हिंदी के प्रयोग में आने वाली समस्याओं पर विचार विमर्श किया जाता है और निराकरण के उपाय सोचे जाते हैं. उक्त बैठकों में राजभाषा प्रभाग के नोडल अधिकारी भाग लेते हैं.
(5) नोडल अधिकारियों की बैठक :
विभागों में राजभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने में सहायता करने और प्रगति सतत निगरानी रखने के लिए प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी को नामित किया जाता है जिनकी तिमाही/छमाही आधार पर बैठकें आयोजित की जाती हैं जिसमें संबंधित विभाग में हिंदी के प्रयोग में आने वाली समास्याओं पर विचार विमर्श किया जाता है और उनके निराकरण के उपाय सोचे जाते हैं.
(च) संदर्भ सामग्री तैयार करना :
हिंदी में कार्यालयीन कामकाज करने को सुगम बनाने के लिए राजभाषा प्रभाग द्वारा कृषि बैंकिंग शब्दावली, डॉस शब्दावली, मानक मसौदे, अंग्रेजी और हिंदी समानार्थी अभिव्यक्तियों का संकलन तथा अन्य अनेक प्रकार की सहायक सामग्री हिंदी में तैयार की जाती हंै और समय समय पर उनको अद्यतनित किया जाता है तथा स्टाफ सदस्यों को उपलब्ध कराया जाता है. प्रबंध सूचना प्रणाली : हिंदी के प्रगामी प्रयोग से संबंधित विभिन्न प्रकार के आंकड़ों का रखरखाव किया जाता है. इसके अंतर्गत हिंदी स्टाफ सदस्यों के हिंदी ज्ञान, हिंदी टंकण/ आशुलिपि ज्ञान से संबंधित सूचनाएं एकत्र कर रोस्टर तैयार किया जाता है और समय समय पर अद्यतनित किया जाता है. भारत सरकार, गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा वार्षिक कार्यक्रम में निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने से संबंधित सूचनाएं विभिन्न कार्यालयों/ विभागों से तिमाही / छमाही/ वार्षिक आधार पर मंगाई जाती हैं और उनका समेकन कर वित्तीय सेवाएं विभाग,वित्त मंत्रालय,भारत सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, केन्द्रीय हिंदी सलाहकार समिति, भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय (राजभाषा), नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति को भेजा जाता है.
(ज) प्रकाशन :
(1) सृजना का प्रकाशन :
हिंदी गृह पत्रिका सृजना का प्रकाशन तिमाही आधार पर किया जाता है जिसका उद्देश्य हिंदी के माध्यम से कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित बैंक की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी स्टाफ सदस्यों और हिताधिकारियों तक पहुंचाना तथा स्टाफ सदस्यों की प्रतिभा को मंच प्रदान करना तथा उसे निखारना एवं हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देना है.
(2) अन्य प्रकाशन :
संसद के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली बैंक की वार्षिक रिपोर्ट, नाबार्ड प्रोफाइल, नाबार्ड न्यूज लेटर, विभिन्न प्रकार की योजनाओं के पैम्फलेट, ब्रोशर, बुकलेट, बैंक के कामकाज से संबंधित मैन्युअल,फार्म और प्रक्रिया साहित्य इत्यादि द्विभाषिक रूप से प्रकाशित किए जाते हैं.
(झ) बाह्य संस्थाओं द्वारा बैंक में हिंदी प्रगति की स्थिति का अनुप्रवर्तन
(1) संसदीय राजभाषा समिति (प्रत्यक्ष तथा साक्ष्य एवं प्रारूप) द्वारा बैंक में हिंदी के प्रगामी प्रयोग की स्थिति का निरीक्षण,
(2) (अ) वित्तीय सेवाएं विभाग द्वारा बैंक में हिंदी के प्रगामी प्रयोग की स्थिति का निरीक्षण किया जाता है, (आ) बैंक द्वारा प्रस्तुत हिंदी के प्रगामी प्रयोग से संबंधित तिमाही प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा वित्तीय सेवाएं विभाग,वित्त मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा आयोजित बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठकों में की जाती है.
(3) क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय (राजभाषा) :
भारत सरकार, गृह मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय (राजभाषा) द्वारा बैंक में हिंदी के प्रयोग की स्थिति का निरीक्षण किया जाता है.
(4) नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठकों में बैंक द्वारा प्रस्तुत छमाही प्रगति रिपोर्टों की समीक्षा की जाती है.
(ञ) राजभाषा नीति का कार्यान्वयन :
(1) भारत सरकार द्वारा प्रेषित वार्षिक कार्यक्रम में निर्धारित विभिन्न लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न कार्यालयों/ विभागों को अपेक्षित अनुदेश दिए जाते हैं.
(2) वार्षिक कार्यक्रम में निर्धारित लक्ष्यों के आलोक में विभिन्न कार्यालयों के लिए (माहवार) वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने हेतु राजभाषा अधिकारियों की एक कार्ययोजना बैठक आयोजित की जाती है. उक्त बैठक में विगत वर्ष की कार्ययोजना के अनुपालन की समीक्षा की जाती है और उसी के परिप्रेक्ष्य में आगामी वर्ष के लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं.
(3) भारत सरकार, गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग एवं वित्त मंत्रालय,भारत सरकार के वित्तीय सेवाएं विभाग से प्राप्त विभिन्न आदेशों, अनुदेशों तथा राष्ट्रपति के आदेशों आदि का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कार्यालयों /विभागों को यथापेक्षा अनुदेश दिए जाते हैं.
(ट) अनुवाद कार्य धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कागजात, कोड, मैन्युअल, प्रक्रिया साहित्य, लेखन सामग्री, प्रकाशन, विज्ञापन, होर्डिंग, ब्रोशर, स्लोगन, विभिन्न विभागों द्वारा जारी किए जाने वाले नीतिगत परिपत्र/ परिपत्र, मार्गनिर्देश, संकल्प, दैनिक पत्राचार, कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित विभिन्न प्रकार की योजनाएं,़ वेबसाइट, प्रचार सामग्री, प्रशिक्षण सामग्री, वार्षिक रिपोर्ट, नाबार्ड प्रोफाइल, नाबार्ड न्यूज लेटर, प्रेस विज्ञप्तियां, आदि सामग्री का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा यथापेक्षा हिंदी से अंग्रेजी में भी उपलब्ध कराया जाता है.
(ठ) प्रशासनिक कार्य :
(1) संशोधित बजट अनुमान तथा आगामी वर्ष के लिए बजट अनुमान संबंधी विवरण विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों /प्रशिक्षण संस्थानों से मंगवाए जाते हैं और प्राप्त विवरणों की समीक्षा की जाती है तथा उनका समेकन करके प्रधान कार्यालय के लेखा विभाग को भेजा जाता है. लेखा विभाग द्वारा अनुमोदित बजट की सूचना सभी कार्यालयों को दी जाती है. सभी कार्यालयों से प्रत्येक तिमाही में आबंटित बजट के समक्ष व्यय का विवरण मंगवाया जाता है और उसका समेकन करके लेखा विभाग को भेजा जाता है.
(2) प्रभाग से संबंधित समस्त दैनंदिन कार्यों जैसे उपस्थिति, अवकाश से संबंधित समस्त कार्य, अनुशासन, लेखन सामग्री मंगाना, जड़ वस्तुओं का रखरखाव और सत्यापन तथा उससे संबंधित सूचना का प्रेषण, प्रशासनिक बैठकों का आयोजन, मासिक समीक्षा बैठक का आयोजन और प्रशासन से संबंधित पत्राचार तथा अन्य समस्त प्रशासनिक कार्य किया जाता है.
(3) राजभाषा प्रभाग से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं, प्रतियोगिताओं तथा पत्र-पत्रिकाओं इत्यादि के बिलों का निपटान किया जाता है.

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