नाबार्ड की स्थापना भारत सरकार द्वारा एक विकास बैंक के रूप में की गई है. इसे कृषि, लघु उद्योगों, कुटीर एवं ग्रामोद्योगों, हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण शिल्पों के विकास और संवर्धन हेतु ऋण प्रवाह सुगम बनाने का अधिदेश दिया गया है. इसे ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य सभी अनुषंगी आर्थिक गतिविधियों के लिए सहायता देने, समन्वित और दीर्घकालिक ग्रामीण विकास के संवर्धन और ग्रामीण क्षेत्रों की समृद्धि के साथ-साथ इससे संबंधित और आनुषंगिक विषयों के लिए सहायता देने का अधिदेश भी प्राप्त है. ग्रामीण समृद्धि सुनिश्चित करने की नाबार्ड की भूमिका के निर्वहन के लिए उसे निम्नलिखित कार्य सौंपे गए हैं :-
1. ग्रामीण क्षेत्रों की ऋणदाता संस्थाओं को पुनर्वित्त उपलब्ध कराना
2. संस्थागत विकास प्रवर्तित या संवर्धित करना और
3. ग्राहक बैंकों का मूल्यांकन, अनुप्रवर्तन और निरीक्षण करना
इनप्रमुखकार्योंकेअतिरिक्तनाबार्डनिम्नलिखितकार्यभीकरताहै :
- ग्रामीण ऋणदाता संस्थाओं के परिचालन में समन्वय करना
- ग्रामीण विकास से जुड़े मामलों में सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक तथा अन्य संगठनों को सहायता प्रदान करना.
- बैंकों, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों को प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की सुविधाएं प्रदान करना
- कृषि एवं ग्रामीण विकास में संलग्न पात्र संस्थाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लक्ष्य की प्राप्ति में राज्य सरकारों को सहायता प्रदान करना
- सहकारी बैंकों एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए विनियामक का कार्य करता है.
नाबार्डकेक्रियाकलापोंमेंकुछप्रमुखउपलब्धियांनिम्नलिखितहैं :
- वर्ष 2004-2005 से शुरू कर तीन वर्ष की अवधि में कृषि हेतु ऋण प्रवाह को दुगुना करने की भारत सरकार की योजना के कार्यान्वयन की प्रभावशाली रूप से देखरेख और मॉनिटरिंग के कारण वर्ष 2004-2005 के दौरान कुल ऋण वितरण रु.125309 करोड़ तक पहुंच गया. कृषि और संबद्ध कार्यकलापों के लिए आधार स्तरीय ऋण प्रवाह बढ़कर 2005-2006 में रु.1,57,480 करोड़ हो गया.
- 330 वाणिज्य बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा अन्य पात्र वित्तीय संस्थाओं को कुल रु.8622.37 करोड़ पुनर्वित्त वितरित किया गया.
- 31 जनवरी 2007 तक सिंचाई, ग्रामीण सड़क और पुल, स्वास्थ्य एवं शिक्षा, भूमि संरक्षण, पेय जल योजना से संबंधित 231702 परियोजनाओं के लिए ग्रामीण आधारभूत सुविधा विकास निधि (आरआईडीएफ) से रु.59795.35 करोड़ की मंजूरी दी गयी है. अन्य कई आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ आरआईडीएफ द्वारा 20971 विद्यालयों, 6239 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का निर्माण किया जाएगा एवं 7267 गावों में पेय जल उपलब्ध कराया जाएगा.
- वाटरशेड विकास निधि से 14 राज्यों के 124 जिलों में 427 परियोजनाओं के लिए संचयी रूप में रु.578.95 करोड़ की स्वीकृति से ग्रामीण भारत में एक जन आन्दोलन की शुरुआत हुई है.
- विस्तृत ग्रामीण बैंकिंग नेटवर्क द्वारा जारी 582.50 किसान क्रेडिट कार्ड के कारण किसानों को वित्त और सुरक्षा उपलब्ध हो सकी है.
- जिला ग्रामीण उद्योग परियोजना से 105 जिलों में 10.95 लाख इकाइयों से 23.34 लाख व्यक्तियों के रोजगार का सृजन हुआ .
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