नाबार्ड अधिनियम की प्रस्ताना के अनुसार इसकी स्थापना, '' समेकित ग्रामीण विकास के संवर्धन और ग्रामीण क्षेत्र की उन्नति को सुनिश्चित करने की दृष्टि से कृषि, लघु उद्योगों, हस्त शिल्प और अन्य ग्राम्य शिल्पों और ग्रामीण क्षेत्र में अन्य सहबद्ध आर्थिक कार्यकलापों के संवर्धन और विकास के लिए उधार और अन्य प्रसुविधाएँ देने और उनका विनियमन करने के लिए और उनसे संबद्ध तथा उनसे आनुषंगिक विषयों के लिए ...'' की गई थी.
नाबार्ड की स्थापना संबंधी विधेयक संसद में प्रस्तुत करते समय दिए गए उद्देश्य विवरण में इसके उद्देश्यों को निम्नानुसार वर्गीकृत किया गया था:
1. राष्ट्रीय बैंक ग्रामीण इलाकों में कृषि, लघु उद्योग, कुटीर और ग्रामीण उद्योग, हस्त शिल्प और अन्य ग्रामीण शिल्प तथा संबद्ध आर्थिक गतिविधियों के संवर्धन हेतु दिए जाने वाले ऋण के क्षेत्र में नीति, आयोजना और परिचालन पक्षों से जुड़े सभी मामलों के लिए शीर्ष संगठन होगा.
2. यह बैंक ग्रामीण इलाकों में कार्यकलापों के संवर्धन हेतु दिए जाने वाले संस्थागत ऋण, जैसे दीर्घावधि और अल्पावधि ऋण, के लिए एक पुनर्वित्त संस्थ के रूप में काम करेगा.
3. केन्द्र सरकार के अनुमोदन पर यह बैंक किसी संस्था को प्रत्यक्ष ऋण भी उपलब्ध करा सकेगा.
4.इस बैंक का भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ सांगठनिक संबंध रहेगा और यह उसके साथ निकटता से जुड़ा रहेगा.
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