ग्रामीण आधारभूत सुविधा विकास के क्षेत्र में एक प्रमुख पहल तब हुई जब 90 दशक के मध्य में ग्रामीण आधारभूत सुविधा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए ग्रामीण आधारभूत सुविधा विकास निधि आरआईडीएफ) की स्थापना हुई. इस निधि की स्थापना निम्नलिखित पृष्ठभूमि में की गई :
कृषि और ग्रामीण आधारभूत सुविधा के क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश घटने लगा था. ग्रामीण आधारभूत संरचनाओं का विकास और रखरखाव करने वाली राज्य सरकारें संसाधनों की गम्भीर कमी का सामना कर रही थीं.
प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के दिशानिर्देशों के अनुसार वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल उधार राशियों की 18 प्रतिशत राशि कृषि क्षेत्र को देना अपेक्षित है लेकिन ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण वे इस निर्धारित राशि को उन्हें नहीं दे पा रहे थे.
अतः भारत सरकार ने वर्ष 1995-96 के अपने बजट में एक योजना की घोषणा की जिसके तहत नाबार्ड की देखरेख में ग्रामीण आधारभूत सुविधा विकास निधि (आरआईडीएफ) का गठन किया गया. इसके अंतर्गत उस समय सिंचाई क्षेत्र के अंतर्गत चल रही चालू परियोजनाओं को वित्तपोषण दिया जाना था.
''कृषि क्षेत्र में अपर्याप्त सार्वजनिक निवेश आज आम चिंता का विषय है. यह ऐसा क्षेत्र है जो राज्यों की जिम्मेदारी है. परंतु कई राज्यों ने कृषि संबंधी आधारभूत सुविधाओं में निवेश पर ध्यान नहीं दिया है. ऐसी कई ग्रामीण आधारभूत परियोजनाएँ हैं जो शुरू तो की गईं परंतु संसाधनों के अभाव में अपूर्ण स्थिति में पड़ी हैं. जिसके फलस्वरूप संभावित आय और ग्रामीण जनसंख्या के लिए रोजगार का भारी नुकसान हुआ है.''
माननीय वित्त मंत्री का केंद्रीय
बजट भाषण - 1995-96
बाद में, आरआईडीएफ को नई परियोजनाओं के लिए भी उपलब्ध करा दिया गया तथा साथ ही इसकी परिधि को व्यापक बनाते हुए इसके अंतर्गत ग्रामीण आधारभूत संरचना के लगभग सभी पहलुओं को शामिल कर दिया गया.
National Bank for Agriculture and Rural Development