इस अवधारणा को आधार बनाते हुए कि विकास की प्रक्रिया के लक्ष्य को अकेले ऋण / पुनर्वित्त द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता, अधिनियम के निम्नलिखित प्रावधानों में स्पष्ट रूप से, बैंक के विकासात्मक अधिदेश के स्कोप तथा प्रकृति का उल्लेख किया गया है.
अपनी संक्रियाओं और ग्रामीण प्रत्यय के क्षेत्र में लगी विभिन्न संस्थाओं की
संक्रियाओं का समन्वय करेगा और कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित सभी समस्याओं का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ कर्मचारिवृन्द रखेगा और केन्द्रीय सरकार, रिज़र्व बैंक, राज्य सरकारों और ऐसी संस्थाओं को, जो ग्रामीण विकास के क्षेत्र में लगी हैं परामर्श के लिए उपलभ्य रहेगा.
ग्रामीण बैंककारी, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए, जानकारी के प्रसार के लिए और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए, जिसके अंतर्गत अध्ययन, तकनीकी, आर्थिक और अन्य सर्वेक्षण भी है, सुविधाओं का उपबंध कर सकेगा.
कृषि और ग्रामीण विकास क्रियाकलाप में लगे हुए किसी व्यक्ति को तकनीकी, विधिक, वित्तीय, विपणन और प्रशासनिक सहायता दे सकेगा;
भारत में या उसके बाहर ऐसे निबंधनों और ऐसे पारिश्रमिक पर जिन पर सहमति हो, कृषि और ग्रामीण विकास तथा संबंधित अन्य विषयों के क्षेत्र में परामर्श संबंधी सेवाएँ दे सकेगा;
इस संदर्भ में नाबार्ड द्वारा स्वयं अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण, तथा ग्राहक संस्थाओं, पार्टनर एजेन्सियों और अन्य विकास एजेंसियों के क्षमता निर्माण में निभायी जाने वाली भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है.
''विशेषज्ञ स्टाफ'' बनाए रखने के लिए, अपने आधारिक कार्यों में अपने अधिकारियों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाने के लिए बैंक को अपने स्टाफ को निरन्तर एक्सपोज़र देने की ज़रूरत है. तथापि प्रारंभिक वर्षों में बैंक ने विभिन्न तकनीकी विषयों के विशेषज्ञ स्टाफ की भर्ती की थी तथा ऐसे अधिकारियों का एक अलग संवर्ग बनाया था. ये अधिकारी विभिन्न प्रकार की कृषि परियोजनाएँ बनाने उनका अप्रेजल करने, तथा मॉनिटरिंग और मूल्यांकन का कार्य करते थे जिनका कार्यान्वयन विभिन्न ऋण एजेंसियों द्वारा किया जाता था. इन अधिकारियों को, चाहे उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, उसी प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता था जैसा कि अन्य सभी अधिकारियों को दिया जाता था. उनकी पदस्थापनाओं तथा नियमित कार्यांतरण (जॉब रोटेशन) से उनमें सक्षमता आई जिनसे वे निधारित सौंपे गए कार्यों को कुशलतापूर्वक पूरा कर पाए तथा ऋण संबंधी और विकासात्मक, प्रोत्साहनात्मक एवं पर्यवेक्षणात्मक कार्यों में अपनी विभिन्न भूमिकाओं को कुशलता से निभा सके. ऐसे प्रशिक्षणों से उन्हें निर्णय लेने की अपनी भूमिका को जानने और मजबूत करने में भी मदद मिली. इनके अलावा बैंकों को उन विशेषज्ञों के कौशल का भी लाभ मिला जिसका बैंक ने आवश्यकतानुसार उपयोग किया.
अधिनियम में उल्लिखित बैंक के अधिदेश के अनुसरण में, बैंक ग्रामीण वित्तपोषण संस्थाओं और ग्रामीण विकास में शामिल एजेंसियों के लिए बैंकर ग्रामीण विकास संस्थान (बर्ड) और दो क्षेत्रीय प्रशिक्षण महाविद्यालयों के माध्यम से प्रशिक्षण की सुविधाएँ प्रदान करता है. बैंक प्रशिक्षण को व्यापक बनाने और क्षमता निर्माण के प्रयासों की दृष्टि से ग्रामीण वित्तपोषण संस्थाओं को अपनी स्वयं की प्रशिक्षण प्रणाली स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है तथा इन प्रशिक्षण संस्थाओं को अर्थपूर्ण एवं गुणावन्तात्मक प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करता है. ग्राहक स्तर पर प्रशिक्षण सहयोगों को मजबूत करने के लिए विकल्पों और अवसरों की लगातार जांच की जाती है ताकि इन संस्थाओं में कार्यरत मानव संसाधन चुनौतियों का सामना करने के लिए विकसित हो सकें, प्रतिस्पर्धा को समझ सकें, ग्राहक सेवा सुधार सकें, पहँुच को बढ़ा सकें, उपयुक्त उत्पाद विकसित कर सकें और ऐसा करके ग्रामीण विकास में अपना योगदान दे सकें.
चूँकि नाबार्ड मुख्यत: अन्य एजेंसियों के माध्यम से कार्य करता है , इसलिए नाबार्ड अधिकारियों के ज्ञान और कौशल की आवश्यकताएँ काफी इद तक ग्राहक संस्थाओं की जरूरतें निर्धारित करती हैं.
नाबार्ड, ग्राहक बैंकों में प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों का अपने अधिकारियों के प्रशिक्षण के साथ सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करता है जिससे प्रशिक्षण अर्थपूर्ण हो और उनकी भूमिका के लिए युक्तिसंगत हो. प्रशिक्षण प्रयासों में किए गए निवेश के समग्र प्रभाव को आवधिक रूप से मापने के लिए प्रशिक्षण की निष्पत्ति के साथ अध्ययन निष्कर्षों का सामंजस्य स्थापित करने के भी प्रयास किए जाते हैं.
National Bank for Agriculture and Rural Development