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वर्ष 2019-20 के दौरान केन्द्रीय प्रायोजित योजना – "राष्ट्रीय पशुधन मिशन - ईडीईजी घटक" के कार्यान्वयन हेतु प्रशासनिक अनुमोदन.
संदर्भ सं. राबैं.पु.वि./जीएसएस/ 942 /एनएलएम-1/2019-20 27 जून 2019
 
परिपत्र सं.205 /पु. वि.- 58 / 2019
अध्यक्ष/ प्रबंध निदेशक
सभी अनुसूचित बैंक/
सभी अनुसूचित शहरी बैंक/
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक / एडीएफसी/
राज्य सहकारी बैंक/ 
राज्य सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक/ 
नाबार्ड पुनर्वित्त के लिए पात्र अन्य संस्थाएं अन्य.
 
प्रिय महोदय,
 
वर्ष 2019-20 के दौरान केन्द्रीय प्रायोजित योजना – "राष्ट्रीय पशुधन मिशन - ईडीईजी घटक" के कार्यान्वयन हेतु प्रशासनिक अनुमोदन.
 
हम सहर्ष सूचित करते है कि भारत सरकार के कृषि, डेयरी और मत्स्त्यपालन मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग ने दिनांक 26 अप्रैल 2019 के अपने पत्र सं.99-6/2018/एनएलएम/ एडिएम. अप्रूवल के माध्यम से वर्ष 2019-20 के दौरान उपर्युक्त योजना को जारी रखने के लिए अनुमोदन दिया है
 
वर्ष 2019-20 के लिए कुल रु.199.89 करोड़ का बजट आबंटित किया गया है और अनुबंध I मे भारत सरकार के कृषि,डेयरी और मत्स्त्यपालन मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग के दिनांक 12 जून 2019 के पत्र सं.99-23/2014/एलएम/एलडी/ईडीईजी Vol-I के द्वारा राज्य-वार, श्रेणी-वार आंबटित राशि का विवरण दिया गया है. इस योजना को मूल्यांकन/योजना के अनुमोदन के लंबित रहते, 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि से आगे विस्तार दिया गया है बशर्ते 12वीं योजना के लिए अनुमोदित इस योजना के प्रकृति, संभावना और व्याप्ति में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. इसके विस्तृत परिचालनात्मक दिशानिर्देश www.dahd.nic.in पर उपलब्ध हैं.
 
2. राष्ट्रीय पशुधन मिशन के उद्यमिता विकास और रोजगार सृजन (ईडीईजी) के अधीन नाबार्ड कार्यान्वयक एजेंसी होगी. इसमें पोल्ट्री वेंचर कैपिटल फंड (पीवीसीएफ), छोटे रोमन्थक और खरगोश समन्वित विकास (आईडीएसआरआर), सूअर विकास (पीडी), भैंस के नर बछड़ों का संरक्षण (एसएमबीसी) शामिल हैं. 
 
3. (i) पशु अवशिष्ट का प्रभावी प्रबंधन और (ii) खाद एवं चारा सुविधा के लिए भण्डार निर्माण, इन दो घटकों कों भारत सरकार के कृषि, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा लागू किया गया. इस घटकों के लिए राज्य सरकार कार्यान्वयक एजेंसी होगी और नाबार्ड फ़ंड चानलाइज़िंग एजेंसी के रूप मे काम करेगा. 
उपर्युक्त संख्या 2 और 3 के उप-घटक अनुबंध - ए-I-(बी) में दिए गए हैं. विभिन्न क्षेत्रों के लिए सब्सिडी की दर और लाभार्थियों की विभिन्न श्रेणियां अनुबंध - ए-I-(सी) में दिए गए हैं.
 
4.परिचालनात्मक दिशानिर्देशों का सार नीचे दिया गया है:-
 
I) लाभार्थी:- कृषक, उद्यमीय व्यक्ति, गैर-सरकारी संगठन, कंपनिया, सहकारिता, संगठित और असंगठित क्षेत्र के समूह जिस मे स्वय:सहायता समूह तथा संयुक्त देयता समूह भी शामिल है.
 
II) पात्र वित्तीय संस्थाएं:- वाणिज्य बैंक, शहरी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य सहकारी बैंक, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक और अन्य संस्थाएं जो नाबार्ड से पुनर्वित्त प्राप्त करने के लिए पात्र हैं.
 
III) बैंकों / वित्तीय संस्थाओ द्वारा परियोजना की स्वीकृति और सब्सिडी जारी करना:- उद्यमी योजना के मानदंडों के अनुसार, परियोजना रिपोर्ट तैयार करेंगे और इसकी स्वीकृति के लिए बैंक/ वित्तीय संस्था को प्रस्तुत करेंगे. पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा समय-समय पर जारी प्रशासनिक अनुमोदन के अनुसार बैंक / वित्तीय संस्था परियोजना का मूल्यांकन करेंगे और पात्र पाए जाने पर ऋण कि स्वीकृति देंगे (कुल वित्तीय परिव्यय – मार्जिन राशि). बैंक/ वित्तीय संस्थाओ द्वारा प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद नियंत्रक कार्यालय स्वीकृति के 30 दिन के भीतर ईडीईजी पोर्टल में निर्धारित टेम्प्लेट के अनुसार जानकारी अपलोड करेंगे और पात्र सब्सिडी राशि ब्लॉक करेंगे. अपलोड करने और वेलिडेशन के बाद बैंक ऋण की पूरी राशि/ पहली किस्त, जैसा मामला हो, जारी करेगा. पूरे ऋण/ पहली किस्त की जानकारी पहले अपलोड के 30 दिन के भीतर अपलोड की जानी चाहिए. इसके बाद, ऋण की राशि इकाई की प्रगति के आधार पर उचित किस्तों में वितरित की जाएगी.
 
बैंक/ वित्तीय संस्थाओं के नियंत्रक कार्यालय निर्धारित समय-सीमा के भीतर सब्सिडी के दावे अपलोड करना सुनिश्चित करेंगे, अन्यथा आवेदन सिस्टम से अपने आप हट जाएंगे, चूंकि बजट असीमित अवधि के लिए नहीं रखा जाता है. 
 
अपूर्ण जानकारी या अन्य किसी कारणवश रद्द किए गए आवेदनों को आवश्यक सुधार करने के बाद नए सिरे से फिर से अपलोड किया जाना होगा.
 
IV) आधार विवरण प्रस्तुत करना:- बैंक/संस्थाओ द्वारा सभी लाभार्थियो का आधार पत्र संख्या (12 नंबर) एनएलएम – पोर्टल के टेम्पलेट मैं प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा.
 
V) परियोजना स्वीकृति समिति (पीएससी):-नाबार्ड प्रधान कार्यालय में गठित परियोजना स्वीकृति समिति (पीएससी) संबंधित वित्तपोषक बैंक/ संस्थाओं द्वारा पोर्टल में अपलोड किए गए प्रस्तावों पर विचार करेगी और प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद एक महीने के भीतर पात्र आवेदकों के सब्सिडी के मामले अनुमोदित करेगी.
 
VI) सब्सिडि जारी करना:- राज्यों को श्रेणी-वार आबंटित बजट की उपलब्धता के अनुसार सब्सिडी जारी की जाएगी. 
VII) सब्सिडि का समायोजन:- वित्तपोषक बैंक/ वित्तीय संस्था अपने बही खातों में सब्सिडी आरक्षित निधि खाते में उधारकर्ता-वार सब्सिडी राशि रखेंगे और नाबार्ड से सब्सिडी प्राप्त होने के बाद सात दिन के भीतर लाभार्थी के सब्सिडी आरक्षित निधि खाते में सब्सिडी की राशि का समायोजन करेंगे अन्यथा वित्तपोषक बैंक/ वित्तीय संस्था को लाभार्थी से लिए गए अतिरिक्त ब्याज की क्षतिपूर्ति करनी होगी. वित्तपोषक बैंक/ वित्तीय संस्था के नियंत्रक कार्यालय इस आशय का उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेंगे कि उन्होंने लाभार्थी संबंधी विस्तृत जानकारी सहित लाभार्थी के सब्सिडी आरक्षित निधि खाते (एसआरएफए) में सब्सिडी राशि जमा की है. सब्सिडी प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर नाबार्ड को यह प्रमाणपत्र प्रस्तुत / ऑनलाइन अपलोड करना होगा.
 
VIII) चुकौती अवधि/ अनुग्रह अवधि:-
 
ईडीईजी घटक चुकौती अवधि छूट अवधि
पोल्ट्री वेंचर पूंजी निधि (पीवीसीएफ) 5 से 9 वर्ष 6 माह से 1 वर्ष
छोटे रोमन्थक और खरगोश समन्वित विकास (आईडीएसआरआर) अधिकतम 9 वर्ष 2 वर्ष
सूअर विकास (पीडी) 5 से 6 वर्ष 1 वर्ष
 
भैंस के नर बछड़ों का संरक्षण (एसएमबीसी) (एसएमबीसी) 4 से 6 वर्ष 1 वर्ष
 
IX) परियोजना पूर्ण करने की समय-सीमा:- परियोजना में किए गए प्रावधान के अनुसार ऋण की पहली किस्त के वितरण तिथि के बाद अधिकतम 12 महीने के भीतर परियोजना पूरी करनी होगी. लाभार्थी द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण पर्याप्त पाए जाने पर वित्तपोषक बैंक/वित्तीय संस्था अधिकतम अवधि को 3 महीने तक बढ़ा सकता है.
 
X) सब्सिडी के लिए लॉक-इन अवधि:- सब्सिडी आरक्षित निधि खाते में उधारकर्ता-वार रखी गयी सब्सिडी राशि का 3 वर्ष की अवधि के बाद उधारकर्ता के खाते में समायोजन किया जा सकता है और अगर उधारकर्ता का ऋण खाता अनर्जक आस्ति खाता (एनपीए) बनने के स्वरूप मैं सब्सिडि राशि को लौटान होगा.
 
XI) मार्जिन राशि:- इस के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देश लागू होंगे.
 
XII) सहायता प्रदान करने में प्राथमिकता:- सहायता प्रदान करने में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, भूमिहीन, छोटे, सीमांत और गरीबी रेखा की श्रेणी के किसान, मे आनेवाले लाभार्थीयों के साथ देश के सूखा और बाढ़ग्रस्त इलाकों के किसानों को भी प्राथमिकता दी जाय.
 
5. अनुप्रवर्तन और रिपोर्टिंग:- स्थापित की गई इकाइयों का नमूना आधार पर अनुप्रवर्तन नाबार्ड करेगा और प्रमुख टिप्पणियाँ परियोजना स्वीकृति समिति (पीएससी) के समक्ष प्रस्तुत करेगा.
 
6. अपनी संबंधित शाखाओं को इस परिपत्र की विषय-वस्तु के अवगत कराएं.
 
कृपया पावती दें.
भवदीय
(जी.आर.चिंताला)
मुख्य महाप्रबंधक
संलग्नक : यथोपरि