Menu

वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति – नाबार्ड के सहकार्य संस्थायों के लिए
संसं.राबैं.पुनर्वित्‍त / 2594 / मोन - 79 / 2019-20
29 जनवरी 2020 
परिपत्र सं. 27 / डीओआर - 07 / 2020 
                        
प्रबंध निदेशक/ सीईओ 
 
नेबफिन्स / नेबसमृद्धि / नेबकिसान
 
महोदया / प्रिय महोदय
 
वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति – नाबार्ड के सहकार्य संस्थायों के लिए
 
30 दिसम्बर 2019 की प्रबंध समिति की 640 वी बैठक में राष्ट्रीय बैंक के सहकार्य संस्थायों के लिए वित्त वर्ष 2019-20 हेतु योजनाबद्ध ऋण नीति की चर्चा की गयी. ऋण नीति को अंतिम रूप दिया गया है और इसे हम उक्त पत्र के साथ संलग्न कर रहें हैं. 
 
2. यह परिपत्र नाबार्ड की वेबसार्इट www.nabard.org पर टैब इन्फर्मेशन सेंटर के अंतर्गत उपलब्ध है. 
 
3.  कृपया पावती दें.
 
भवदीय 
(जिजि माम्मेन)
मुख्य महाप्रबंधक  
संलग्‍नक : 4 पृष्‍ठ
 
वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए योजनाबद्ध ऋणीकरण के लिए पुनर्वित्त नीति – नाबार्ड की सहायक कंपनियाँ 
 
1. प्रस्तावना 
नाबार्ड अपनी सहायक कंपनियों नामतः नैबसमृद्धि, नैबफिन्स और नैबकिसान को कृषि और ग्रामीण विकास संबंधी कार्यकलापों के लिए ऋण सहायता प्रदान करने हेतु पुनर्वित्त देता है. कृषि क्षेत्र (एफ़एस) और कृषीतर क्षेत्र (एनएफ़एस) दोनों कार्यकलापों के अंतर्गत स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा के माध्यम से पुनर्वित्त प्रदान किया जाता है. 
दीर्घावधि पुनर्वित्त प्रदान करने के लिए प्रयोजन निम्नानुसार हैं: 
 
कृषि क्षेत्र की प्रगति को बढ़ावा देने के लिए कृषि में पूँजी निर्माण को सहायता प्रदान करना.
प्रमुख कार्यकलापों के संवर्धन के लिए ऋण प्रवाह को दिशा देना. 
संयुक्त देयता समूहों और स्वयं सहायता समूहों की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करना. 
कृषीतर क्षेत्र कार्यकलापों को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के वैकल्पिक अवसरों का निर्माण करना. 
 
2. सहायता का स्वरूप 
 
सहायक कंपनियों को नीचे दी गई दो सुविधाओं के अंतर्गत विभिन्न प्रयोजनों के लिए उनके संवितरणों के समक्ष पुनर्वित्त सहायता प्रदान की जाती है: 
2.1 स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ़) 
स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ़) के अंतर्गत  एजेंसियों को विस्तृत मंजूरी-पूर्व औपचारिकताओं के बिना नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है. सहायक कंपनियों से यह अपेक्षित है कि वे अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन करें और उधारकर्ताओं को वित्त प्रदान करें.  वे घोषणा (आहरण आवेदन) के आधार पर नाबार्ड से पुनर्वित्त के लिए दावा कर सकते हैं. इन आवेदनों में पुनर्वित्त के लिए दावागत प्रयोजनों और संवितरित ऋण राशि का उल्लेख किया जाए. इस तरह के मामलों में, नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्त की मंजूरी और संवितरण साथ-साथ किए जाते हैं. कृषि क्षेत्र और कृषीतर क्षेत्र के अंतर्गत सभी प्रकार की परियोजनाओं के लिए स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा, पुनर्वित्त की प्रमात्रा, बैंक ऋण या कुल वित्तीय परिव्यय पर बिना किसी ऊपरी सीमा के प्रदान की जाती है. 
2.2 पूर्व-मंजूरी 
सहायक कंपनियाँ पूर्व-मंजूरी के अंतर्गत भी पुनर्वित्त प्राप्त कर सकती हैं जहाँ उन्हें नाबार्ड के अनुमोदन के लिए परियोजनाएँ प्रस्तुत करनी होती हैं. मंजूरी प्रदान करने से पहले, नाबार्ड इन परियोजनाओं की तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक-योग्यता का मूल्यांकन करता है. ऐसे मामलों में विधिवत् मूल्यांकन के बाद ऋण मंजूर किया जाएगा. 
 
3. पुनर्वित्त की प्रमात्रा 
 
इन एजेंसियों (सामान्यतया जिन्हें बाजार/ अन्य स्रोतों से निधियाँ उपलब्ध नहीं होतीं) को पुनर्वित्त की प्रमात्रा निम्नानुसार होगी:  
 
i) पैरा 5.3 में उल्लिखित सभी बल क्षेत्रों के लिए 100% 
ii) अन्य विविधीकृत प्रयोजनों के लिए 95% 
भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार संचयी आधार पर एक्सपोजर जोखिम का ध्यान रखने की दृष्टि से यह आवश्यक है कि कुल बकाया पुनर्वित्त सहायक कंपनियों द्वारा दिए गए अर्जक ऋणों की प्रमात्रा से अधिक न हो. 
 
4. पात्रता मानदंड – नाबार्ड से पुनर्वित्त के आहरण के लिए पात्रता मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है. वर्ष 2019-20 के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड निम्नानुसार हैं: 
 
4.1 पंजीकरण: अनुमोदित वित्तीय संस्था के रूप में कार्य करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-Iए के अंतर्गत पंजीकरण का प्रमाणपत्र होना चाहिए. 
4.2 सीआरएआर: भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित पूँजी पर्याप्तता अनुपात (वर्तमान में 15%) का पालन किया जाना चाहिए. 
4.3 निवल लाभ: पिछले चार वित्तीय वर्षों में से कम से कम तीन वर्षों में (2015-16, 2016-17, 2017-18, 2018-19 में से 3 वित्तीय वर्ष) संस्था निवल लाभ में होनी चाहिए बशर्ते चालू वर्ष के पूर्ववर्ती वर्ष (2018-19) संस्था को निवल हानि न हुई हो. 
4.4 निवल अनर्जक आस्ति:  4% से अधिक नहीं होनी चाहिए. 
4.5 संस्था के बहिर्नियमों में नाबार्ड जैसी उच्चतर वित्तीय एजेंसियों सहित अन्य वित्तीय एजेन्सियों से उधार लेने के लिए प्रावधान होना चाहिए.  
4.6 यदि इन एजेंसियों में से कोई एजेंसी 31.03.2019 की स्थिति के अनुसार उक्त मानदंडों के आधार पर पात्र नहीं पाई जाती है किन्तु 31.03.2019 के बाद वित्तीय मानदंडों में यदि किसी भी प्रकार का कोई सुधार देखा जाता है और उसे सनदी लेखाकार द्वारा प्रमाणित किया जाता है तो उस पर विचार किया जा सकता है. 
 
5. पात्र प्रयोजन 
 
5.1 आहरण आवेदन की तारीख को सहायक कंपनी की लेखा बहियों में 18 महीनों से अधिक की शेष परिपक्वता अवधि वाले बकाया कृषि, एमएसएमई, सूक्ष्म वित्त और अन्य पात्र ऋण पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे. 
5.2 कृषि क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल गतिविधियों की सूची अनुबंध I में दी गई है. सूची केवल निदर्शी है, सम्पूर्ण नहीं. उक्त सूची में शामिल न की गई गतिविधियों को भी शामिल किया जा सकता है यदि वे कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देती हैं. 
5.3 बल क्षेत्र 
बल क्षेत्र में भूमि विकास, लघु और सूक्ष्म सिंचाई, जल रक्षण और जल संरक्षण उपकरण, मत्स्यपालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह/ रायतु मित्र समूह (आरएमजी), कृषि क्लीनिक और कृषि-व्यवसाय केंद्र, ग्रामीण आवासन, कृषि-प्रसंस्करण, बंजर भूमि विकास, शुष्क भूमि विकास, ठेका खेती, क्षेत्र विकास योजनाएँ, बागान-बागवानी, कृषि-वानिकी, बीज उत्पादन, ऊतक संवर्धन पौध उत्पादन, कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, भंडारागार, मार्केट यार्ड आदि सहित), कृषि उपकरण, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत, पहले कार्यान्वित किए गए वाटरशेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के क्षेत्रों में वित्तपोषण. 
 
6. निधीयन के लिए निबंधन और शर्तें
 
नाबार्ड द्वारा समय-समय पर निधारित मानक निबंधन और शर्तें लागू हैं. यह सुनिश्चित करने के लिए कि नैबसमृद्धि, नैबफिन्स और नैबकिसान द्वारा पुनर्वित्त के निबंधनों और शर्तों का पालन किया जा रहा है, मौके पर जाकर सत्यापन करने/ जाँच करने का अधिकार नाबार्ड के पास सुरक्षित है. 
6.1 पुनर्वित्‍त पर ब्‍याजः नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज की दर को अवधि, मौजूदा बाजार दर इत्‍यादि के आधार पर निर्धारित किया जाएगा और यह समय-समय पर संशोधन के अधीन होगी.
 
6.2 दंडात्‍मक ब्‍याजः चूक की स्थिति में, जिस दर पर पुनर्वित्‍त संवितरित किया गया था उसके अलावा चूक की राशि पर और चूक की अवधि के लिए 2% वार्षिक की दर से दंडात्‍मक ब्‍याज प्रभारित किया जाएगा.
  
6.3 पुनर्वित्‍त की समय-पूर्व चुकौती के लिए दंडः समय-पूर्व चुकौती के दंड की दर 2.5% वार्षिक रहेगी और दंड समय-पूर्व चुकौती की तारीख से चुकौती के लिए देय किस्‍त की वास्तविक विहित तारीख तक समग्र अवधि के लिए देय प्रत्‍येक किस्‍त के लिए न्‍यूनतम छह महीनों की अवधि के साथ अलग से प्रभारित किया जाएगा. न्‍यूनतम 03 कार्य दिवसों की अवधि की संसूचना के पश्‍चात् ही पूर्व अदायगी की जा सकती है. तथापि, यदि समय-पूर्व चुकौती की स्थिति वास्तविक वसूलियों के कारण उत्पन्न हुई है तो नाबार्ड की सहायक कंपनियों के लिए इस दंड से छूट देने पर विचार किया जाएगा.  
 
7. चुकौती अवधि 
 
पुनर्वित्‍त के लिए चुकौती की अवधि 18 महीनों (न्‍यूनतम) से 5 वर्षों तक अथवा इससे अधिक की अवधि के बीच रहती है और उसकी चुकौती छमाही आधार पर प्रति वर्ष 31 जनवरी/ 31 जुलाई को की जाती है. पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज की अदायगी छमाही आधार पर प्रति वर्ष 01 फरवरी और 01 अगस्‍त को की जाती है. 
मासिक/ तिमाही आधार पर भी मूलधन / ब्‍याज की चुकौती का विकल्‍प उपलब्‍ध है. 
 
8. प्रतिभूति 
 
नाबार्ड की सहायक कंपनियों के लिए प्रतिभूति मानदंडों का निर्धारण निम्‍नानुसार हैः 
 
क) नाबार्ड के साथ सामान्‍य पुनर्वित्‍त करार (जीआरए) का निष्‍पादन 
ख) सहायक कंपनी के प्रमुख बैंकर के पास चालू खाता को नामे करने संबंधी अधिदेश 
ग) निर्धारित प्रोफार्मा में बोर्ड का संकल्‍प 
नाबार्ड ने स्‍वयं के द्वारा मंजूर किए गए पुनर्वित्‍त के लिए 3 सहायक कंपनियों से कोई अतिरिक्‍त प्रतिभूति प्रस्‍तुत करने से छूट देने का निर्णय लिया है.  
 
9. परियोजनाओं की पूर्व-लेखापरीक्षा, अनुप्रवर्तन और पर्यवेक्षण 
 
नाबार्ड को यह अधिकार होगा कि वह स्‍वयं अथवा अन्‍य एजेंसियों (उधारकर्ता संस्‍था की लागत पर) के माध्‍यम से लेखा-बहियों और अन्‍य संबद्ध सामग्री की विशेष लेखापरीक्षा कराए जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह वर्तमान नियमों और विनियमों के अनुरूप है और बैंक द्वारा पुनर्वित्‍त के निबंधनों और शर्तों का पालन किया जा रहा है.  नाबार्ड को यह अधिकार होगा कि वह मौके पर सत्‍यापन/ जाँच करे जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पुनर्वित्‍त से संबंधित निबंधनों और शर्तों का पालन किया जा रहा है.  
 
9.1 नाबार्ड की सहायक कंपनियों से संबंधित सभी संवितरणों को जारी करने से पूर्व बैंक के समवर्ती लेखापरीक्षक द्वारा इसकी पूर्व-लेखापरीक्षा की जाएगी.