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वर्ष 2020-21 के दौरान अंतरिम आधार पर अल्पावधि ऋणों पर ब्याज सहायता योजना जारी रखना
कृपया (क) वर्ष 2018-19 और 2019-20 के दौरान अल्पावधि फ़सल ऋणों के लिए संशोधित ब्याज सहायता योजना पर हमारे दिनांक 15 फरवरी 2019 के परिपत्र संख्या 38 (संदर्भ सं राबैं.डोर –नीति / 2967 / आईएस-1 / 2018-19) और (ख) वर्ष 2018-19 और 2019-20 के दौरान मत्स्य और पशुपालन किसानों को केसीसी सुविधा के विस्तार के लिए ब्याज सहायता योजना पर हमारे दिनांक 24 जून 2019 के परिपत्र संख्या 56 (संदर्भ   सं राबैं.डोर –नीति / 933 / आईएस-1 / 2019-20) का संदर्भ ग्रहण करें। 
 
2. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने दिनांक 28 मई 2020 के पत्र सं 1-4 / 2020-Credit-I द्वारा सलाह दी हैं कि अंतरिम उपाय के रूप में, अगले निर्देश तक, ब्याज सहायता योजना को उनही नियम और शर्तों पर लागू किया जाएगा जैसा कि वर्ष 2018-19 और 2019-20 मे किया गया था । तदनुसार, आपको निम्नानुसार सलाह दी जाती है: -
 
क. आधार स्तर पर किसानों को दिए जाने वाले ₹3.00 लाख तक के (अधिकतम 2 लाख रु प्रति किसान तक के पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों के लिए कार्यशील पूंजी ऋण) अल्पावधि ऋणों (फ़सली ऋण और पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों के लिए कार्यशील पूंजी ऋण) के लिए अपनी निजी निधियों का उपयोग करने वाले राज्य सहकारी बैंकों को 2% प्रति वर्ष की ब्याज सहायता उपलब्ध होगी बशर्ते ऋण दाता संस्थाएं 7% प्रति वर्ष की दर से आधार स्तर पर अल्पावधि ऋण उपलब्ध कराएं. फ़सली ऋण/कार्यशील पूंजी ऋण की राशि पर 2% ब्याज सहायता की गणना अधिकतम एक वर्ष की अवधि के अधीन संवितरण/ आहरण तिथि से किसान द्वारा चुकौती की वास्तविक तिथि अथवा बैंक द्वारा निर्धारित भुगतान की विहित तिथि में जो भी पहले होगी, उस अवधि तक के लिए की जाएगी.
 
ख. समय पर फ़सली/कार्यशील पूंजी ऋणों की चुकौती करने वाले किसानों के लिए अधिकतम एक वर्ष की अवधि के अधीन संवितरण /आहरण तिथि से किसान द्वारा चुकौती की वास्तविक तिथि अथवा बैंक द्वारा निर्धारित भुगतान की विहित तिथि में से जो भी कम हो उस अवधि के लिए 3% की अतिरिक्त ब्याज सहायता उपलब्ध होगी. अर्थात्‌ समय पर से ऋण की चुकौती करने वाले किसानों को वर्ष 2020-21 के दौरान 4% प्रति वर्ष की ब्याज दर पर अल्पावधि ऋण मिलेगा. इस प्रकार के ऋण लेने के एक वर्ष बाद चुकौती करने वाले किसानों को यह लाभ नहीं मिलेगा।
 
ग. किसान क्रेडिट कार्ड धारक-छोटे और सीमांत किसानों को गरजू बिक्री से रोकने और अपनी उपज भंडारागारों में रखने के लिए उन्हें बढ़ावा देने के प्रयोजन से भंडारागार विकास विनियामक प्रधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) द्वारा प्रमाणीकृत भंडारागारों में उपज भंडारित करने पर परक्राम्य भंडारागार रसीदों के समक्ष फसल लेने के बाद और 06 माह की अवधि के लिए उसी दर पर ब्याज सहायता दी जाएगी जिस दर पर फ़सल ऋणों पर दी जाती है।
 
घ. प्रकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने हेतु पुनःसंरचित राशि पर पहले वर्ष के लिए उपलब्ध 2% ब्याज सहायता की सुविधा जारी रहेगी। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित नीति के अनुसार इस प्रकार के पुनःसंरचित ऋणों पर दूसरे वर्ष से सामान्य ब्याज दर लागू होगी।
 
ङ. हालांकि, गंभीर आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए, पुनःसंरचित ऋण राशि पर बैंकों को पहले तीन वर्षों / संपूर्ण अवधि (अधिकतम 5 वर्ष की अवधि) के लिए 2% की ब्याज सहायता उपलब्ध होगी। इसके अलावा, ऐसे सभी मामलों में, प्रभावित किसानों को प्रति वर्ष @ 3% प्रति वर्ष का पुनर्भुगतान पर ब्याज प्रोत्साहन का लाभ भी प्रदान किया जाएगा। हालांकि, गंभीर आपदाओं के ऐसे मामलों का अनुदान, एक उच्च-स्तरीय समिति (HLC) द्वारा तय किया जाना जाएगा, जो अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) और राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति (SC-NEC) की उप समिति की सिफारिश पर आधारित होगा।
 
3. इसके अलावा, हमारे दिनांक 13.03.2020 के परिपत्र संख्या -62 द्वारा, 01.04.2020 से वितरित अल्पावधि ऋणों पर ब्याज सहायता का लाभ उठाने के लिए केसीसी को अनिवार्य बनाया गया है।
 
4. बैंकों को योजना के तहत लाभार्थियों का श्रेणी-वार डेटा अनिवार्य रूप से बनाए रखने और, जब भी जरूरत हो, प्रस्तुत करने की सलाह दी जाती है।
 
5. भारत सरकार की ब्याज सहायता योजना के तहत लाभ उठाने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया गया है। इसलिए बैंक द्वारा इस संबंध में डेटा बनाए रखा जाए।