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वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध ऋण हेतु पुनर्वित्त नीति – सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्य बैंक
 
सं.राबैं.पुनर्वित्‍त/ 25/ पीपीएस-9/ 2021-22   
परिपत्र सं. 58/ पुनर्वित्‍त -09/2021          
12 अप्रैल 2021
मुख्य कार्यकारी अधिकारी  
सार्वजनिक क्षेत्र के सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) 
 
महोदया  / प्रिय महोदय 
 
1.  वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध ऋण हेतु पुनर्वित्त नीति – सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्य बैंक 
वित्त वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्य बैंकों की पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दिया गया है और उसे हम इसके साथ संलग्न कर रहे हैं. यह नीति इस संबंध में सभी वर्तमान नीतियों का अधिक्रमण करती है.
 
2. यह परिपत्र नाबार्ड की वेबसार्इट www.nabard.org पर सूचना केंद्र टैब के अंतर्गत भी उपलब्ध है.
 
3.  कृपया पावती दें.
 
भवदीय 
(एल.आर रामचंद्रन)
मुख्य महाप्रबंधक 
अनुलग्नक :  यथोपरि
 
वित्तीय  वर्ष-2021-2022 हेतु योजनाबद्ध ऋण वितरण के लिए पुनर्वित्त नीति 
 
1. परिचय  
 
नाबार्ड राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 की धारा 25(i) (क) के प्रावधानों के अंतर्गत अनुमोदित वित्‍तीय संस्‍थाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, संबंधित गतिविधियों और ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र आदि में निवेश गतिविधियों हेतु उनके द्वारा दिए गए  दीर्घावधि ऋणों के संबंध में उनके संसाधनों की अनुपूरकता के दीर्घावधि पुनर्वित्‍त सहायता प्रदान करता है.
 
2. दीर्घावधि पुनर्वित्‍त सहायता प्रदान करने के उद्देश्‍य निम्‍नानुसार हैं-  
  
कृषि और संबद्ध क्षेत्र में पूंजी निर्माण के लिए सहायता देना.
बल क्षेत्र गतिविधियों के प्रसार हेतु ऋण प्रवाह को दिशा देना. 
संयुक्त देयता समूहों (जेएलजी), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों तथा अन्य की ऋण आवश्यकताओं की पूर्ति.
कृषीतर क्षेत्र की गतिविधियों को सहायता प्रदान कर ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार प्रदान करना. 
 
3. सहायता का स्वरूप  
 
बैंकों को उनके द्वारा विभिन्‍न प्रयोजनों के लिए किए गए संवितरण के लिए निम्‍नलिखित दो प्रकार से पुनर्वित्‍त सहायता प्रदान की जाती है:
 
3.1 स्व: पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ)
 
स्व: पुनर्वित्त सुविधा में बैंकों को स्वीकृति से पूर्व की औपचारिकताओं की व्यापक प्रक्रिया के बिना नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं.  बैंक अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन कर उधारकर्ता को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं. इसके बाद बैंक विभिन्‍न प्रयोजनों हेतु संवितरित ऋण राशि की सूचना देते हुए घोषणा के आधार पर (आहरण आवेदन में) नाबार्ड से पुनर्वित्‍त का दावा कर सकते हैं. ऐसे मामलों में नाबार्ड पुनर्वित्त की स्वीकृति और उसका संवितरण साथ-साथ करता है.
कृषि क्षेत्र (एफएस) और कृषीतर के अधीन सभी परियोजनाओं के लिए पुनर्वित्‍त, बैंक ऋण अथवा कुल वित्‍तीय परिव्‍यय की मात्रा की किसी उच्‍चतम सीमा के बिना स्‍वतः पुनर्वित्‍त सहायता प्रदान की जाती है. 
 
3.2 पूर्व मंजूरी  
 
यदि बैंक पूर्व-मंजूरी प्रक्रिया के अधीन पुनर्वित् सहायता प्राप्त करना चाहता है तो उन्हें नाबार्ड के अनुमोदन के लिए परियोजनाएं प्रस्‍तुत करनी होंगी. इनकी स्‍वीकृति से पहले नाबार्ड इन परियोजनाओं की तकनीकी साध्‍यता, वित्‍तीय व्‍यवहार्यता और बैंकिंग-योग्‍यता का आकलन करता है.   
 
4. पात्रता मानदण्ड 
 
4.1 नाबार्ड से पुनर्वित्त आहरण के लिए पात्रता मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है. वर्ष 2021-22 के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं:  
a) न्यूनतम सीआरएआर मानदंड 11.50% (बेसल III के अनुसार) का अनुपालन.
b) निवल अनर्जक आस्तियां बकाया निवल ऋण और अग्रिम के 9% से अधिक नहीं होनी चाहिए. अनर्जक आस्तियों की स्थिति की गणना संपूर्ण बैंक के लिए समग्रत: की जाएगी. 
c) बैंक निवल लाभ में होना चाहिए.  
 
4.2 01 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 की अवधि के लिए पात्रता मानदंड और जोखिम का आकलन 31 मार्च 2020 अथवा 31 मार्च 2021 की (यदि 31 मार्च 2021 की स्थिति में लेखापरीक्षित स्थिति उपलब्‍ध हो तो) लेखापरीक्षित वित्‍तीय स्थिति के आधार पर किया जाएगा.  01 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2022 तक की अवधि के लिए पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन 31 मार्च 2021 की लेखापरीक्षित वित्‍तीय स्थिति पर आ‍धारित होंगे. 01 जुलाई 2021 को या उसके बाद केवल उन्‍हीं बैंकों को स्वीकृति और आहरण की अनुमति होगी जिन्‍होंने लेखापरीक्षा पूरी कर ली है.
 
4.3 वर्ष 2021-22 के दौरान यदि वित्‍तीय स्थिति में कोई सुधार होता है, तो बैंक के लेखापरीक्षित वित्‍तीय परिणाम और सनदी लेखाकार (चार्टर्ड एकाउंटंट) से प्राप्‍त प्रमाणपत्र के आधार पर उस पर विचार किया जाएगा.  
 
4.4 सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं सहित कृषि और कृषीतर- दोनों क्षेत्रों के अधीन पुनर्वित्त आहरण के लिए पात्रता यह मानदंड, लागू होंगे. 
 
5. पात्र प्रयोजन  
 
5.1 पुनर्वित्‍त के लिए कृषि, सूक्ष्म , छोटे और मध्‍यम उद्यम (एमएसएमई) और अन्‍य पात्र गतिविधियों हेतु प्रदत्त ऋण जो आहरण आवेदन तिथि को बैंक के बही खातों में बकाया पात्र होंगे और जिनकी परिपक्वता की शेष अवधि 18 महीने से अधिक  होगी.
 
5.2 कृषि क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल की गई गतिविधियों की सूची अनुबंध I में दी गई है. यह सूची केवल निदर्शी है, व्यापक नहीं.  कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक किन्तु इस सूची में शामिल नहीं की गई गतिविधियों पर भी विचार किया जा सकता है. 
 
5.3 बल क्षेत्र   
 
पुनर्वित्त के माध्यम से बल क्षेत्रों को सहायता देने के प्रयास किए जाएँ. बल क्षेत्र में भूमि विकास, लघु और सूक्ष्म सिंचाई, जल की बचत और जल संरक्षण में प्रयुक्त उपकरण, मत्स्य पालन, पशु पालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह /रैतु मित्र समूह (आरएमजी), एग्री  क्लिनिक  और एग्री बिजनेस सेंटर, ग्रामीण आवास, कृषि प्रसंस्करण, बंजर भूमि विकास, शुष्क भूमि कृषि, ठेका कृषि, क्षेत्र विकास योजनाएं, बागान और बागबानी, कृषि वानिकी, बीज उत्पादन, टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन, कृषि विपणन हेतु आधारभूत संरचना (शीतगृह, गोदाम, मार्केट यार्ड आदि) कृषि उपकरण, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत, पूर्व में कार्यान्वित वाटरशेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में वित्तपोषण शामिल क्षेत्र हैं.  
 
बागान और बागवानी क्षेत्रों की विविध गतिविधियों के अंतर्गत उच्च मूल्यवाली विदेशी प्रजातियों वाली सब्जियां, नियंत्रित पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस जैसी स्थितियों में उगने वाले कटफ्लावर्स का उत्पादन; सब्जियों और फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मशरूम, टिश्यूकल्चर, प्रिसीज़न फार्मिंग लैब जैसी हाइटेक निर्यातोन्मुख उत्पादन इकाइयों की स्थापना, फलोद्यान और बागान फसलों के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना जैसे नवोन्मेषी/बल क्षेत्रों के वित्तपोषण को प्राथमिकता दी जाए.
 
6. पुनर्वित्त की प्रमात्रा   
 
सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मीजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा), पर्वतीय क्षेत्र (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), पूर्वी क्षेत्र (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और अंडमान निकोबार द्वीप समूह), लक्ष्‍वद्वीप,  छत्तीसगढ़ और नाबार्ड द्वारा अधिसूचित किसे अन्य क्षेत्र हेतु सभी प्रयोजनों के लिए पुनर्वित्‍त सहायता की प्रमात्रा पात्र बैंक ऋणों का 95% होगी. अन्य क्षेत्रों के लिए पुनर्वित्त सहायता की प्रमात्रा निम्नानुसार होगी: 
क. पैरा क्र. 5.3 में उलैखित सभी बल क्षेत्रों के लिए 95% 
ख. अन्य सभी विविध प्रयोजनों और कृषक साथी योजना के लिए 90%
 
7. ब्याज दर  
 
7.1 पुनर्वित्त पर ब्याज की दर: पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज की दर का निर्धारण पुनर्वित्त की अवधि, वर्तमान बाजार दर, जोखिम अवधारणा आदि के आधार पर किया जाएगा और इसमें समय-समय पर परिवर्तन किया जाएगा. सार्वजनिक क्षेत्र के सभी अनुसूचित वाणिज्‍य बैंकों को नाबार्ड द्वारा तैयार किए गए जोखिम आकलन मॉड्यूल के आधार पर 9 जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है. तद्नुसार, पुनर्वित्‍त पर जोखिम प्रीमियम निर्धारित किया जाएगा. यह जोखिम प्रीमियम ब्‍याज की दर के अलावा प्रभारित किया जाएगा. 
दंडात्‍मक ब्‍याजः (पुनर्वित्त चुकौती के) चूक की स्थिति में, चूक की अवधि के लिए और चूक की राशि पर संवितरित पुनर्वित्‍त पर निर्धारित ब्‍याज दर से 2.00% प्रति वर्ष अधिक की दर से दंडात्‍मक ब्‍याज लिया जाएगा. 
 
7.2 पुनर्वित्‍त की समय-पूर्व चुकौती के लिए दंडः समय-पूर्व चुकौती पर दंड की दर 2.50% होगी. यह राशि, प्रत्येक देय किस्त के लिए अलग-अलग प्रभारित होगी और पूरी अवधि (न्यूनतम 6 माह) अर्थात् समय-पूर्व भुगतान की तिथि से भुगतान की वास्तविक देय तिथि तक के लिए प्रभारित की जाएगी. न्यूनतम 3 कार्य दिवसों की सूचना के बाद ही समय-पूर्व भुगतान किया जा सकता है.
 
8. चुकौती की अवधि 
 
पुनर्वित्‍त की चुकौती की अवधि 18 माह (न्यूनतम) से 5 वर्ष या उससे अधिक होगी. पुनर्वित्‍त के मूल धन की चुकौती की आवधिकता तिमाही होगी. महीने में किसी भी दिन मंजूर किए गए पुनर्वित्त के मूलधन की चुकौती की प्रथम देय तिथि उस माह की आखरी तिथि होगी जिस माह में संवितरण की तिथि से छह माह की अवधि पूर्ण होती हो. इसके बाद तिमाही आधार पर चुकौती की जाएगी. ब्‍याज के भुगतान की देय तिथि मासिक या तिमाही आधार पर होगी. चुकौती अनुसूची मंजूरी पत्र (पत्रों) में निर्दिष्ट की जाएगी.
 
9. प्रतिभूति  
 
पुनर्वित्त अथवा अन्य माध्यम से प्रदत्त ऋण और अग्रिम के लिए प्रतिभूति नाबार्ड द्वारा सामान्य पुनर्वित्त करार (जीआरए)/ मंजूरी पत्र (त्रों) में विनिर्दिष्टि के अनुसार होगी. साथ ही, बैंक को भारतीय रिज़र्व बैंक (के पास रखे उसके चालू खाते) से नाबार्ड के पक्ष में विधिवत एक अधिदेश प्राप्त करना होगा.
 
10. अनुप्रवर्तन  
 
नाबार्ड को पुनर्वित्‍त के निबंधनों व शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्थल पर सत्यापन/ जांच का  अधिकार होगा.
 
11. वर्तमान में लागू अन्‍य सभी निबंधन व शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी. 
 
अनुबंध  I
 
1. कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियों को शामिल हैं : 
i. भूमि विकास 
ii. लघु और सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप सिंचाई
iii. जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण 
iv. डेयरी 
v. कुक्कुट पालन 
vi. मधुमक्खी पालन  
vii. रेशम उत्पादन  
viii. मत्स्यपालन  
ix. पशुपालन  
x. स्वयं सहायता समूहों / संयुक्त देयता समूहों / रैतु मित्र समूहों को दिए गए ऋण 
xi. शुष्क भूमि कृषि  
xii. ठेका खेती
xiii. बागान और बागबानी 
xiv. कृषि वानिकी  
xv. बीज उत्पादन  
xvi. टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन 
xvii. कारपोरेट किसानों, कृषक उत्‍पादक संगठनों/ कंपनियों/ कृषि और संबद्ध गतिविधियों में प्रत्‍यक्ष रूप से संलग्‍न किसानों की साझेदार फर्मों और कृषक सहकारी संस्‍थाओं को समग्र रूप से प्रति उधारकर्ता ₹2 करोड़ तक के ऋण 
xviii. कृषि उपकरण  
xix. उच्च मूल्य वाली/ विदेशी प्रजातियों की सब्जियों का उत्‍पादन, नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉलीहाउस/ ग्रीनहाउस में कट फ्लावर्स का उत्‍पादन 
xx. सब्जियों और फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मशरूम, टिश्यूकल्चर, प्रिसीज़न फार्मिंग लैब जैसी हाइटेक निर्यातोन्मुख उत्पादन इकाइयों की स्थापना 
 
2. पुनर्वित्त में निम्नलिखित अन्य गतिविधियां हैं:
 
i. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने वाले निर्माण और सेवा क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) 
ii. कृषि क्लिनिक्स व कृषि व्यवसाय केन्द्र 
iii. ग्रामीण आवास 
iv. कृषि प्रसंस्करण 
v. मृदा संरक्षण और वाटरशेड विकास
vi. कृषि विपणन आधारभूत संरचनाएं (कोल्ड स्टोरेज, गोदाम, मार्केट यार्ड, सिलोस आदि) - किसी भी क्षेत्र/ स्‍थान में 
vii. गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत 
viii. जिन क्षेत्रों में पहले ही वाटरशेड और जनजाति विकास कार्यक्रम कार्यान्वित किए गए हैं उन क्षेत्रों में वित्तपोषण 
ix. प्लांट टिशू कल्चर और कृषि जैव-प्रोद्यौगिकी, बीज उत्पादन, जैव-कीटनाशक/ जैव-उर्वरक का उत्पादन और वर्मी कम्पोस्टिंग 
x. कृषि हेतु ऋण वितरण के लिए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), कृषि सेवा समितियों (एफएसएस) और बडे आकार की आदिवासी बहुउद्देशीय समितियों  (एलएएमपीएस) को प्रदत्त बैंक ऋण.
xi. कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण के लिए बैंकों द्वारा सूक्ष्म वित्तीय संस्थाओं को मंजूर किए गए ऋण 
xii. खादी ग्राम उद्योग (केवीआई) 
xiii. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रमीण विद्यालय, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल सुविधाएं, स्वच्छता सुविधाएं और अन्य सामाजिक आधारभूत सुविधाएं 
xiv. सौर आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, जैव खाद आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, पवन मिल, सूक्ष्म हैडल प्लांट जैसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन और सड़क प्रकाश व्‍यवस्‍था और दूर दराज के गांवों में विद्युतीकरण जैसे अपारंपरिक ऊर्जा आधारित सार्वजनिक जन सुविधाएं
xv. कृषक साथी योजना  
xvi. क्षेत्र विकास योजना 
 
3. कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक किसी अन्य गतिविधि, जिसका  उल्‍लेख ऊपर न किया हो, को भी इसमें शामिल किया जा सकता है.