Menu

वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए पुनर्वित्त नीति: निजी क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्य बैंक
 
संदर्भ सं. राबैं. डीओआर/ 26/ पीपीएस – 9/2021-22  
12 अप्रैल 2021
परिपत्र सं. 59/ डीओआर – 10 / 2021
मुख्य कार्यकारी अधिकारी
निजी क्षेत्र के सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक    
)लघु वित्‍त बैंकों को छोड़कर(
महोदया / प्रिय महोदय,
वित्तीय वर्ष  2021-22  हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए पुनर्वित्त नीति: 
निजी क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्य बैंक
 
1.  वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए निजी क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्य बैंकों से संबन्धित पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दे दिया गया है और हम इसे इसके साथ भेज रहे हैं. यह नीति इस संबंध में वर्तमान की सभी नीतियों का अधिक्रमण करती है. 
2. यह परिपत्र नाबार्ड की वेबसाइट www.nabard.org पर सूचना केंद्र टैब के अंतर्गत भी उपलब्ध है. 
3. कृपया पावती दें. 
 
भवदीय
( एल आर रामचंद्रन ) 
मुख्य महाप्रबंधक 
संलग्‍नक : यथोपरि
 
योजनाबद्ध ऋण के लिए पुनर्वित्त नीति  - वित्तीय वर्ष 2021-22
 
1. परिचय 
 
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 की धारा 25 (i) (क) के प्रावधानों के अंतर्गत  नाबार्ड अनुमोदित वित्तीय संस्थाओं को दीर्घावधि पुनर्वित्त उपलब्ध कराता रहा है, जिसका उद्देश्य उनके संसाधनों की अनुपूर्ति करना है ताकि वे कृषि और अनुषंगी गतिविधियों और ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र आदि में निवेश के लिए पर्याप्त ऋण उपलब्ध करा सकें.
 
2. उद्देश्‍य:  
 
  • कृषि और सम्बद्ध क्षेत्र में पूंजी निर्माण को सहयोग देना.  
  • बल क्षेत्र की गतिविधियों के संवर्धन हेतु ऋण उपलब्ध कराना.   
  • संयुक्त देयता समूहों, स्वयं सहायता समूहों, एफ़पीओ और अन्यों की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करना. 
  • कृषीतर क्षेत्र की गतिविधियों के लिए सहयोग देकर ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के वैकल्पिक अवसरों का संवर्धन करना. 
  
3. सहायता का स्वरूप
 
बैंकों को उनके द्वारा विभिन्‍न प्रयोजनों के लिए प्रदत्त  संवितरण के लिए निम्नलिखित दो प्रकार  के तहत पुनर्वित्‍त सहायता प्रदान की जाती है:   
 
3.1  स्व: पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ) 
स्व: पुनर्वित्त सुविधा के तहत बैंकों को पूर्व-मंजूरी की औपचारिकताओं की व्यापक प्रक्रिया से गुजरे बिना नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है. इसके तहत बैंकों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन करें और उधारकर्ताओं को वित्त प्रदान करें. इसके बाद बैंक, नाबार्ड से घोषणा (आहरण आवेदन) के आधार पुनर्वित्त के लिए दावा करते हैं.  आवेदन में पुनर्वित्त दावे के विभिन्न उद्देश्यों और संवितरित ऋण राशि का उल्लेख होता है. ऐसे मामलों में, नाबार्ड पुनर्वित्त की स्वीकृति और संवितरण साथ-साथ करता है. 
स्वचालित पुनर्वित्‍त सुविधा कृषि क्षेत्र और कृषीतर के अंतर्गत सभी परियोजनाओं के लिए पुनर्वित्‍त, बैंक ऋण अथवा कुल वित्‍तीय परिव्‍यय की मात्रा की किसी उच्‍चतम सीमा के बिना प्रदान की जाती है.  
3.2  पूर्व-मंजूरी 
यदि बैंक पूर्व-मंजूरी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्वित्त प्राप्त करना चाहें, तो उन्हें नाबार्ड के अनुमोदन हेतु परियोजना प्रस्तुत करना आवश्यक है. मंजूरी से पूर्व इसकी तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक-योग्यता का निर्णय करने के लिए नाबार्ड इन परियोजनाओं का मूल्यांकन करता है.  
 
4. पात्रता मानदण्ड 
 
4.1 नाबार्ड से पुनर्वित्त आहरण प्राप्त करने संबंधी  पात्रता मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है. वर्ष 2021-2022 के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं.  
i. न्यूनतम सीआरएआर मानदंड 11.50% (बेसल III के अनुसार) का अनुपालन.
ii. निवल अनर्जक आस्तियाँ, निवल बकाया ऋण और बकाया अग्रिम के 6% से अधिक न हों. अनर्जक आस्तियों की स्थिति की गणना पूरे  बैंक के लिए की जाएगी. 
iii. बैंक नेट लाभ की स्थिति में हो.
पात्रता मानदंड का निर्धारण और जोखिम का  आकलन : 01 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 की  अवधि के लिए 31  मार्च 2020  अथवा 31 मार्च 2021 की (यदि 31  मार्च 2021 की लेखा परीक्षित स्थिति उपलब्‍ध हो तो) लेखापरीक्षित वित्‍तीय स्थिति के आधार पर किया जाएगा.  01 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2022  तक की अवधि के लिए ये 31 मार्च 2021 की लेखापरीक्षित वित्‍तीय स्थिति पर आ‍धारित होंगे. 01 जुलाई 2020 को या इसके बाद केवल उन्‍हीं बैंकों को स्‍वीकृति और आहरण की अनुमति होगी जिन्‍होंने लेखापरीक्षा पूरी कर ली हो. 
4.2 वित्तीय वर्ष 2021-2022 के दौरान यदि वित्‍तीय स्थिति में कोई सुधार होता है, तो बैंक के तिमाही लेखापरीक्षित वित्तीय परिणाम और सनदी लेखाकार से प्राप्‍त विधिवत् प्रमाणपत्र के आधार पर प्रस्‍तावों पर विचार किया जाएगा.  
4.3 सरकार-प्रायोजित योजनाओं सहित कृषि और कृषीतर दोनों क्षेत्रों के अधीन पुनर्वित्त आहरण के लिए पात्रता मानदंड लागू होंगे. 
 
5. पात्र प्रयोजन 
 
5.1 आहरण की आवेदन तिथि को बैंक के  खातों में 18 महीने से अधिक  की बकाया परिपक्‍वता अवधि वाले  कृषि, सूक्ष्‍म, लघु, मध्‍यम उद्यम (एमएसएमई) और अन्‍य पात्र ऋण पुनर्वित्‍त के लिए पात्र होंगे.   
5.2 कृषि क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल की गई गतिविधियों की सूची अनुबंध I में दी गई है. यह सूची केवल निदर्शी है, सम्पूर्ण नहीं. इसमें शामिल न की गई गतिविधियों को भी कवर किया जा सकता है यदि वे कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक हों. 
5.3 बल क्षेत्र  
हमारे पुनर्वित्त से बल क्षेत्र में सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाना चाहिए. बल क्षेत्र में भूमि विकास, लघु व सूक्ष्म सिंचाई, जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण, मत्स्यपालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह/ रायतु मित्र समूह (आरएमजी), एग्री  क्लिनिक  और एग्री बिजनेस सेंटर, ग्रामीण आवासन, कृषि प्रसंस्करण, बंजर भूमि विकास, शुष्क भूमि कृषि, ठेका कृषि, क्षेत्र विकास योजनाएँ, बागान और बागबानी, कृषि वानिकी, बीज उत्पादन, टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन, कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीतगृह, गोदाम, मार्केट यार्ड आदि सहित) कृषि उपकरण, अपरंपरागत ऊर्जा स्रोत, पहले लागू किए गए वाटरशेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में वित्तपोषण शामिल हैं.  
बैंकों को बागान और बागवानी क्षेत्रों के अंतर्गत विविध गतिविधियों के लिए नवोन्मेषी/ बल क्षेत्रों जैसे उच्च मूल्यवाली/ विदेशी प्रजाति की सब्जियाँ, नियंत्रित वातावरण,  जैसे पॉलीहाउस/ ग्रीनहाउस में उगने वाले कटफ्लावर्स, मशरूम, टिश्यूकल्चर लैब जैसे हाइटेक निर्यातोन्मुख उत्पाद यूनिटों की स्थापना, सब्जियों और फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रीसीज़न फार्मिंग, फलोद्यान और बागान फसलों के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना हेतु वित्तपोषण को प्राथमिकता देनी चाहिए. 
 
6.  पुनर्वित्त की प्रमात्रा 
 
सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा), पर्वतीय क्षेत्र (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), पूर्वी क्षेत्र (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह), लक्षद्वीप और छत्तीसगढ़ और नाबार्ड द्वारा अधिसूचित किसी अन्य क्षेत्र में सभी प्रयोजनों के लिए पुनर्वित्‍त की प्रमात्रा, पात्र बैंक ऋण के 95% होगी. अन्य क्षेत्रों के लिए पुनर्वित्त सहायता निम्नानुसार होगी:
 
क) पैरा क्र. 5.3 में उल्लिखित सभी बल क्षेत्रों के लिए 95% 
ख) अन्य सभी विविध प्रयोजनों और कृषक साथी योजना के लिए 90% 
 
7. ब्याज दर 
 
7.1 पुनर्वित्त पर ब्याज दर: नाबार्ड, पुनर्वित्त की अवधि, बाजार में प्रचलित दर, जोखिम अवधारणा इत्यादि के आधार पर पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज दर का निर्धारण करेगा और इसमें समय-समय पर संशोधन   किया जाएगा. नाबार्ड द्वारा तैयार किए गए जोखिम आकलन मॉड्यूल के आधार पर निजी क्षेत्र के सभी अनुसूचित वाणिज्‍य बैंकों को 9 जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है. तद्नुसार, पुनर्वित्‍त पर ब्याज दर के अलावा निर्धारित जोखिम प्रीमियम प्रभारित किया जाएगा. 
7.2 दंडात्‍मक ब्‍याजः चूक की स्थिति में, चूक की अवधि के लिए और चूक की राशि पर संवितरित पुनर्वित्‍त पर निर्धारित ब्‍याज दर के अलावा 2.00 % वार्षिक का अतिरिक्त दंडात्‍मक ब्‍याज लिया जाएगा.
7.3 पुनर्वित्‍त की अवधि-पूर्व चुकौती के लिए दंडः अवधि-पूर्व चुकौती की स्थिति में शेष अवधि के लिए 2.50% वार्षिक और प्रत्‍येक किस्‍त के लिए पूर्व चुकौती की तिथि से चुकौती की वास्‍तविक तिथि तक की पूर्ण अवधि (न्‍यूनतम 6 महीने) तक के लिए अलग से दंडात्मक ब्याज लिया जाएगा. न्‍यूनतम 3 कार्य दिवस की सूचना देने के बाद ही पूर्व चुकौती की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.
8.चुकौती अवधि 
 
पुनर्वित्‍त की चुकौती अवधि 18 महीने (न्यूनतम) और 5 वर्ष या उससे अधिक होगी. पुनर्वित्‍त के मूलधन की चुकौती की आवधिकता तिमाही होगी.  महीने के किसी भी दिन स्‍वीकृत पुनर्वित्त के मूलधन की चुकौती की पहली देय तिथि संवितरण तिथि के बाद छह महीने पूर्ण होने के महीने की अंतिम तिथि को होगी और इसके बाद की चुकौती तिमाही आधार पर होगी. ब्‍याज के भुगतान की देय तिथि मासिक या  तिमाही आधार पर तय होगी. चुकौती अनुसूची स्‍वीकृति पत्र में विनिर्दिष्‍ट की जाएगी.
9.प्रतिभूति 
 
पुनर्वित्त अथवा अन्य रूप में प्रदत्त  ऋण और अग्रिम के लिए प्रतिभूति का निर्धारण नाबार्ड द्वारा सामान्य पुनर्वित्त करार (जीआरए)/ मंजूरी पत्र (त्रों) में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार होगा. साथ ही, बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक, जिसके पास चालू खाता रखा गया है, से नाबार्ड के पक्ष में एक विधिवत् अधिदेश प्राप्‍त करना होगा. 
 
10.    अनुप्रवर्तन 
 
पुनर्वित्‍त के निबंधनों व शर्तों का पालन सुनिश्चित करने की दृष्टि से नाबार्ड को स्थल पर सत्यापन/ जाँच का अधिकार होगा.
11.वर्तमान में लागू अन्‍य सभी निबंधन व शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी.
 
अनुबंध I
 
1. कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल हैं: 
 
i. भूमि विकास 
ii. लघु और सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप सिंचाई
iii. जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण 
iv. डेयरी 
v. मुर्गी पालन  
vi. मधुमक्खी पालन 
vii. रेशम उत्पादन 
viii. मत्स्यपालन 
ix. पशुपालन 
x. स्वयं सहायता समूहों / संयुक्त देयता समूहों / रायतु मित्र समूहों को दिए गए ऋण 
xi. शुष्क भूमि कृषि 
xii. ठेका खेती 
xiii. बागान और बागबानी 
xiv. कृषि वानिकी 
xv. बीज उत्पादन 
xvi. टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन 
xvii. कारपोरेट किसानों, कृषि और संबद्ध गतिविधियों में प्रत्‍यक्ष रूप से शामिल  कृषक उत्‍पादक संगठन/ किसानों की व्यक्तिगत कंपनियाँ/ साझेदार फर्म  और कृषक सहकारी संस्‍थाओं को समग्र रूप से रु.2 करोड़ प्रति उधारकर्ता तक के ऋण 
xviii. कृषि उपकरण 
xix. नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉलीहाउस/ ग्रीनहाउस में उच्च मूल्य/ विदेशी प्रजाति की सब्जियों,   कट फ्लावर्स का उत्‍पादन 
xx. मशरूम जैसी उच्‍च निर्यातोन्‍मुख उत्‍पादन इकाई लगाना, सब्जियों और फलों की उत्पादकता में वृद्धि के लिए टिश्यूकल्चर प्रयोगशालाएँ, प्रीसीज़न फार्मिंग.  
 
2. निम्नलिखित अन्य गतिविधियाँ पुनर्वित्त के अंतर्गत शामिल हैं:  
 
i. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने वाले निर्माण और सेवा क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) 
ii. कृषि क्लिनिक्स व कृषि व्यवसाय केन्द्र 
iii. ग्रामीण आवासन 
iv. कृषि प्रसंस्करण 
v. मृदा संरक्षण और वाटरशेड विकास
vi. कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, वेयरहाउस, गोदाम, मार्केट यार्ड, सिलोस आदि सहित), चाहे ये  किसी भी क्षेत्र/ स्‍थान में हों.   
vii. गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत
viii. पहले से कार्यान्वित वाटरशेड और जनजाति विकास कार्यक्रम वाले क्षेत्रों  में वित्तपोषण. 
ix. प्लांट टिशू कल्चर और कृषि जैव प्रोद्यौगिकी, बीज उत्पादन, जैव कीटनाशक, जैव-उर्वरक और वर्मी कम्पोस्टिंग का उत्पादन. 
x. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), कृषक सेवा समिति (एफएसएस) और बडे आकार की आदिवासी बहुउद्देशीय समितियों  (एलएएमपीएस) को आगे ऋण देने के लिए बैंक ऋण  
xi. कृषि क्षेत्र में ऋण देने के लिए सूक्ष्म वित्त संस्थानों को बैंकों द्वारा मंजूर  ऋण.  
xii. खादी ग्राम उद्योग (केवीआई)
xiii. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रमीण विद्यालय, स्वास्थ्य उपचार सुविधा, पेयजल की सुविधा, स्वच्छता सुविधा और अन्य सामाजिक आधारभूत सुविधाएँ.  
xiv. सौर आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, जैव-उत्पन्न आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, पवन मिल, सूक्ष्म हाईडल प्लांट जैसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन और सड़क प्रकाश व्‍यवस्‍था और दूर-दराज के गाँवों में विद्युतीकरण जैसे अपरंपरागत ऊर्जा आधारित सार्वजनिक जन सुविधाएँ.  
xv. कृषक साथी योजना.  
xvi. क्षेत्र विकास योजनाएँ. 
 
3. कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक अन्य कोई गतिविधि, जिसका उल्‍लेख ऊपर न किया हो, को भी शामिल किया जा सकता है.