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वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति – राज्य सहकारी बैंक (रास बैंक)
 
सं.राबैं.पुनर्वित्‍त / 27/ पीपीएस - 9/2021-22
12 अप्रैल 2021 
परिपत्र सं. 60/ डीओआर –11/ 2021 
                        
प्रबंध निदेशक 
सभी राज्य सहकारी बैंक 
महोदया / प्रिय महोदय
 
वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति – राज्य सहकारी बैंक (रास बैंक) 
 
1.  वित्त वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए राज्य सहकारी बैंक के पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दिया गया है और इसे हम इसके साथ संलग्न कर रहे हैं. यह नीति इस संबंध में मौजूदा सभी नीतियों का अधिक्रमण करती है.
 
2. यह परिपत्र नाबार्ड की वेबसार्इट www.nabard.org पर टैब इन्फर्मेशन सेंटर के अंतर्गत उपलब्ध है. 
 
3.  कृपया पावती दें.
 
भवदीय 
(एल आर रामचंद्रन)
मुख्य महाप्रबंधक  
अनुलग्नक :  यथोपरि
 
योजनाबद्ध ऋण वितरण के लिए पुनर्वित्त नीति  - वित्तीय वर्ष 2021-22
 
1. परिचय 
 
नाबार्ड राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981  की धारा 25(i)(क) के प्रावधानों के अंतर्गत अनुमोदित वित्तीय संस्थानों को दीर्घावधि पुनर्वित्त उपलब्ध करा रहा है, जिसका उद्देश्य उनके संसाधनों में वृद्धि करना है ताकि वे कृषि तथा संबद्ध गतिविधियों और ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र आदि में निवेश गतिविधियों के लिए पर्याप्त ऋण उपलब्ध करा सकें.
 
2. दीर्घावधि पुनर्वित्‍त प्रदान करने के उद्देश्‍य निम्‍नानुसार हैं :  
 
  • कृषि और संबद्ध क्षेत्र में पूंजी निर्माण के लिए सहायता देना.  
  • बल क्षेत्र की गतिविधियों के संवर्धन हेतु ऋण प्रवाह को निर्देशित करना.  
  • संयुक्त देयता समूह (जेएलजी), स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), कृषक उत्पादक संगठन (एफ़पीओ) और अन्य की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करना. 
  • कृषीतर क्षेत्र की गतिविधियों को सहयोग प्रदान कर ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में वैकल्पिक रोजगार की सुविधाओं का संवर्धन करना. 
3. सहायता का स्वरूप
 
बैंकों को उनके द्वारा विभिन्‍न प्रयोजनों के लिए किए गए संवितरण के संबंध में निम्‍नलिखित दो प्रकार से पुनर्वित्‍त सहायता प्रदान की जाती है:   
 
3.1  स्व:  पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ) 
 
स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ़)  में बैंकों को पूर्व-स्वीकृति औपचारिकताओं की व्यापक प्रक्रिया से गुजरे बिना नाबार्ड से वित्तीय निभाव प्राप्त करने में समर्थ बनाती है.  बैंकों से अपेक्षित है कि वे अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन करें और उधारकर्ता को वित्त प्रदान करें. इसके बाद बैंक नाबार्ड से     घोषणाआहरण आवेदन)  ) के आधार पर पुनर्वित्त के लिए प्रस्तुत करेगा. आवेदन में संवितरित ऋण राशि के साथ-साथ उन प्रयोजनों का उल्लेख किया जाए जिनके लिए पुनर्वित्त का दावा किया गया है. ऐसे मामलों में नाबार्ड पुनर्वित्त की स्वीकृति और उसका संवितरण एक साथ करता है.
 
स्व:  पुनर्वित्त सुविधा कृषि क्षेत्र  )एफएस( और कृषीतर क्षेत्र के अधीन सभी परियोजनाओं के लिए प्रदान की जाती है. इसके तहत पुनर्वित्‍त की प्रमात्रा, बैंक ऋण अथवा कुल वित्‍तीय परिव्‍यय की कोई उच्‍चतम सीमा नहीं होती.
 
3.2  पूर्व मंजूरी 
 
बैंक अगर पूर्व मंजूरी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्वित्त का लाभ लेना चाहें, तो उन्हें परियोजना का प्रस्ताव नाबार्ड के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करना होगा मंजूरी से पूर्व नाबार्ड इन परियोजनाओं का मूल्यांकन कर उनकी तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक साध्यता तय करता है.
 
4.   पात्रता मानदंड 
 
4.1   नाबार्ड से पुनर्वित्‍त आहरण हेतु पात्रता मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है
वर्ष 2021-22 के लिए  पात्रता मानदंड निम्‍नानुसार निर्धारित किए गए हैं :
क) न्यूनतम 9सीआरएआर का अनुपालन करने वाले ‍ % राज्य सहकारी बैंकों को ही पुनर्वित्त मंजूर किए जाने पर विचार किया जाएगा. जिन जिला मध्यवर्ती सहकारी (जिमस) बैंकों का सीआरएआर 9% से कम होगा, उन जिमस बैंकों के लिए एकल रास बैंकों को कोई पुनर्वित्त उपलब्ध नहीं होगा.  
ख) निवल अनर्जक आस्तियां (एनपीए) निवल ऋणों और बकाया अग्रिमों के  12% से अधिक न हों इसके अलावा अनर्जक आस्तियों की स्थिति की गणना संपूर्ण बैंक के लिए समग्रत की जाएगी.
ग) बैंक को पिछले तीन वित्तीय वर्षों, अर्थात 2018-19, 2019-20 और 2020-21  में  से दो वर्षों के लिए निवल लाभ में होना चाहिए. 
घ) सिर्फ ‘ए’ या ‘बी’ लेखा परीक्षा वर्गीकरण वाले रास बैंक/ जिमस बैंक पात्र हैं.
4.2विशेष फोकस वाले क्षेत्रों जैसे कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा चयनित महत्वाकांक्षी और ऋण सुविधा से रहित जिले,  वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिले, पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य, पर्वतीय क्षेत्र, पूर्वी क्षेत्र, लक्ष्यद्वीप और छत्तीसगढ़ हेतु रास बैंकों के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड में निम्नानुसार छूट दी गई है. 
क) न्यूनतम 9% सीआरएआर का अनुपालन करने वाले राज्‍य सहकारी बैंकों को पुनर्वित्त मंजूर किए जाने पर विचार किया जाएगा. जिन जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों का सीआरएआर 9% से कम होगा, उन जिमस बैंकों के लिए एकल रास बैंकों को कोई पुनर्वित्त उपलब्ध नहीं होगा.
ख) निवल अनर्जक आस्तियां (एनपीए) बकाया निवल ऋणों और अग्रिमों के 15% से अधिक न हों. इसके अलावा अनर्जक आस्तियों की स्थिति की गणना पूरे बैंक के लिए समग्रत: की जाएगी.   
ग) बैंक को पिछले तीन वित्तीय वर्षों अर्थात (2018-19, 2019-20  और 2020-21) में से दो वर्षों के लिए निवल लाभ में होना चाहिए.
4.3इसके अतिरिक्त, यदि रास बैंक अपने नियंत्रण से परे कारणों के चलते अपेक्षित सीआरएआर मानदंड की अनुपालना नहीं करते हैं, तो केवल एक बार के लिए सीआरएआर में छूट देकर इसे 7% तक किए जाने पर विचार किया जा सकता है. यह छूट अतिरिक्त अर्थसुलभ संपार्श्विक प्रतिभूति के समक्ष या शेयरधारकों द्वारा बैंक में अतिरिक्त पूंजी लगाए जाने के संबंध में बैंक के प्रबंध निदेशक/ मुख्य कार्यकारी अधिकारी से पत्र प्राप्त होने पर दी जा सकती है. यह अर्थसुलभ संपार्श्विक प्रतिभूति ग्रहणाधिकारयुक्त मियादी जमा, सरकारी प्रतिभूतियाँ अथवा सरकारी गारंटी या कोई अन्य अर्थसुलभ प्रतिभूति के रूप में हो सकती है जिससे वह संतुष्ट हो.
 
4.4 1 अप्रैल 2021 से 30 सितंबर 2021 की अवधि के लिए पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन 31.03.2020 अथवा 31.03.2021 (यदि 31.03.2021 की लेखा परीक्षित स्थिति उपलब्ध है) के अनुसार उनकी लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाएगा. 1 अक्तूबर 2021 से 31 मार्च 2022 तक यह आकलन 31.03.2021 की लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर निर्धारित किया  जाएगा. 01 अक्तूबर 2021 या उससे बाद स्वीकृति और आहरण को अनुमति उन्ही रास बैंकों कों होगी, जाएगी जिनकी लेखा परीक्षा पूर्ण हो चुकी हो और जिन्होंने संबन्धित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबन्धित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की हो.   
4.5 लेखा परीक्षा रिपोर्ट और नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट में उल्लिखित वित्तीय मानदंडों में किसी भी प्रकार के अंतर की स्थिति में पात्रता निर्धारण के लिए नाबार्ड के निरीक्षण रिपोर्ट को आधार माना जाएगा. 
4.6 किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा सीमित समीक्षा किए जाने और इस आशय का प्रमाणपत्र प्राप्त होने तथा इस संबंध में नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय की अनुशंसा के बाद वित्त वर्ष 2021-22          के दौरान वित्तीय मानदंडों में किसी तरह के परिवर्धन पर   विचार किया जा सकता है. पात्रता मानदंड सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं सहित कृषि और कृषीतर - दोनों क्षेत्रों के अंतर्गत पुनर्वित्त आहरण के लिए लागू होंगे.
 
5.    पात्र प्रयोजन 
 
5.1  पुनर्वित्‍त के लिए कृषि, सूक्ष्‍म ,छोटे और मध्‍यम उद्यम )एमएसएमई( और अन्‍य पात्र गतिविधियों हेतु प्रदत्त ऋण पात्र होंगे जो आहरण आवेदन तिथि को बैंक के बही खातों में बकाया होंगे और जिनकी परिपक्वता की शेष अवधि 18 महीने से अधिक  होगी.
5.2   कृषीतर क्षेत्र और अन्‍य क्षेत्रों में शामिल गतिविधियों की सूची अनुबंध1     में दी गई है. यह सूची निदर्शी है, व्यापक नहीं. पुनर्वित्त की पात्रता के लिए ऐसी गतिविधियों पर भी विचार किया जा सकता है जो कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक हैं किन्तु इस सूची में शामिल नहीं हैं.  
5.3    बल क्षेत्र 
हमारे पुनर्वित्त के माध्यम से बल क्षेत्रों को सहायता प्रदान करने के प्रयास किए जाने चाहिए. बल क्षेत्र में निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:  भूमि विकास, लघु व सूक्ष्म सिंचाई, जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण, मत्स्यपालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह /रैतु मित्र समूह (आरएमजी), एग्री  क्लिनिक  और एग्री बिजनेस सेंटर, ग्रामीण आवास, कृषि प्रसंस्करण, बंजर भूमि विकास, शुष्क भूमि कृषि, ठेका कृषि, क्षेत्र विकास योजनाएं, बागान और बागबानी, बीज उत्पादन, टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन, कृषि विपणन  आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, गोदाम, मार्केट यार्ड सहित) कृषि उपकरण, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत, पहले कार्यान्वित वाटरशेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में वित्तपोषण.  
बागान और बागवानी क्षेत्रों की विविध गतिविधियों के अंतर्गत नवोन्मेषी/बल क्षेत्रों के वित्तपोषण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जैसे - उच्च मूल्यवाली विदेशी प्रजातियों वाली सब्जियां, नियंत्रित स्थितियों जैसे पॉलीहाउस/ ग्रीनहाउस   में उगने वाले कटफ्लावर्स का उत्पादन; सब्जियों और फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मशरूम, टिश्यूकल्चर, प्रिसीज़न फार्मिंग लैब जैसी हाइटेक निर्यातोन्मुख उत्पादन इकाइयों की स्थापना, फलोद्यान और बागान फसलों के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना.
 
6.   पुनर्वित्त की प्रमात्रा 
 
सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मीजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा), पर्वतीय क्षेत्र (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), पूर्वी क्षेत्र (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और अंडमान निकोबार द्वीप समूह), लक्ष्‍वद्वीप और छत्तीसगढ़ हेतु सभी प्रयोजनों के लिए पुनर्वित्‍त सहायता की प्रमात्रा पात्र बैंक ऋणों का 95% होगी. अन्य क्षेत्रों के लिए पुनर्वित्त सहायता की प्रमात्रा निम्नानुसार होगी: 
क पैरा क्र. 5.3 में इंगित सभी बल क्षेत्रों के लिए 95%;
ख सभी अन्य विविध प्रयोजनों और कृषक साथी योजना के लिए 90%.
 
7.   पुनर्वित्‍त की प्रमात्रा  
 
7.1 पुनर्वित्त  की प्रमात्रा जोखिम रेटिंग मॉड्यूल के अनुसार निर्धारित की जाएगी और एनबीडी 1 से एनबीडी 9  में वर्गीकृत  की जाएगी. पुनर्वित्त की  प्रमात्रा का वर्ग-वार विवरण नीचे दिया गया है.
मानदंड पुनर्वित्त की मात्रा 
एनबीडी 1 से एनबीडी 3 (अंक >60 और < 100)
पुनर्वित्त की प्रमात्रा अप्रतिबंधित रहेगी - राज्य/ बैंक के लिए समग्र आबंटन के अधीन. 
एनबीडी 4 और एनबीडी 5 (अंक > 40 और < 60) 
पुनर्वित्त की मात्रा होगी - पिछले वर्ष आहरित पुनर्वित्त से 25% अधिक/  संबंधित राज्‍य सहकारी बैंक/ जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक द्वारा वर्ष 2020-21 के दौरान सावधि ऋणों हेतु वितरित आधार स्तरीय ऋण का 90% - इनमें से जो भी अधिक हो. 
एनबीडी 6 और एनबीडी 7 (अंक > 20 और < 40) पुनर्वित्त की मात्रा होगी - पिछले वर्ष के दौरान आहरित पुनर्वित्त से 10% अधिक/ संबंधित राज्‍य सहकारी बैंक/ जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक द्वारा वर्ष 2020-21 के दौरान सावधि ऋणों हेतु वितरित आधार स्तरीय ऋण का 80%, - इनमें से जो भी अधिक हो. 
एनबीडी 8 और एनबीडी 9 (अंक < 20) बैंक पुनर्वित्त के लिए पात्र नहीं होगा. 
7.2 पूर्वी क्षेत्र  (पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, ओड़ीशा और अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ), पुर्वौत्तर क्षेत्र सहित सिक्किम, पर्वतीय राज्य (जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) लक्षद्वीप और छत्तीसगढ़ में ऋण प्रवाह में वृद्धि के लिए श्रेणीवार पात्रता मानदंड निम्नानुसार हैं:
मानदंड पुनर्वित्त की मात्रा 
एनबीडी 1 से एनबीडी3 (अंक >60 और < 100)
पुनर्वित्त की प्रमात्रा अप्रतिबंधित रहेगी - राज्य/ बैंक के लिए समग्र आबंटन के अधीन. 
 
एनबीडी 4, एनबीडी 5, एनबीडी 6 और एनबीडी 7 (अंक >20 और < 60) पुनर्वित्त की मात्रा होगी - पिछले वर्ष आहरित पुनर्वित्त से 25%  अधिक/  संबंधित राज्‍य सहकारी बैंक/ जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक द्वारा वर्ष 2020-21 के दौरान सावधि ऋणों हेतु वितरित आधार स्तरीय ऋण का 90% - इनमें से जो भी अधिक हो. 
एनबीडी 8 से एनबीडी9 (अंक < 20) बैंक पुनर्वित्त के लिए पात्र नहीं होगा.
 
8.    ब्याजदर 
 
8.1    पुनर्वित्त पर ब्याज:  नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्त पर ब्याज की दरों का निर्धारण समयावधि, वर्तमान बाजार दर, जोखिम अवधारणा आदि के आधार पर किया जाएगा और समय-समय पर इसमें संशोधन किया जा सकता है. सभी रास बैंकों को नाबार्ड द्वारा किए गए जोखिम आकलन मापांक  के अनुसार  9 जोखिम वर्गों में वर्गीकृत किया गया है. तदनुसार पुनर्वित्त पर जोखिम प्रीमियम निर्धारित किया जाएगा  जो ब्याज दर  के अलावा प्रभारित किया जाएगा.
8.2    दंडात्‍मक ब्‍याजः (पुनर्वित्त की चुकौती में) चूक  की स्थिति में, चूक की अवधि के लिए और चूक की राशि पर संवितरित पुनर्वित्‍त पर निर्धारित ब्‍याज दर से 2.00 % प्रति वर्ष अधिक की दर से दंडात्‍मक ब्याज लिया जाएगा.
8.3  पुनर्वित्त के समय-पूर्व भुगतान के लिए दंड 
पुनर्वित्त के समय से पहले भुगतान पर दंड की दर  2.50% प्रति वर्ष होगी. यह राशि, प्रत्येक देय किस्त के लिए अलग-अलग प्रभारित होगी और पूरी अवधि (न्यूनतम 6 माह) अर्थात् समय पूर्व भुगतान की तिथि से उस तिथि तक के लिए प्रभारित की जाएगी जिस तिथि पर किस्त वास्तव में देय होती. समय-पूर्व भुगतान 3 कार्य दिवसों के न्यूनतम नोटिस के बाद ही किया जा सकता है.
 
9.   चुकौती अवधि 
 
पुनर्वित्‍त की चुकौती अवधि 18 महीने  5  से लेकर(न्यूनतम) वर्ष अथवा इससे अधिक होगी. मूलधन और ब्याज की चुकौती तिमाही आधार पर की जाएगी जिसमें मूलधन की देय तिथि 30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसंबर और 31  मार्च होगी और ब्याज की देय तिथि 1 जुलाई, 1 अक्तूबर, 1 जनवरी और 1 अप्रैल होगीतिमाही में किसी भी तिथि को मंजूर पुनर्वित्त के लिए मूलधन राशि की देय  में  अगली तिमाही  को आखिरी दिन में होगी
 
10.   प्रतिभूति  
 
रास बैंकों को पुनर्वित्त या अन्य माध्यमों से दिए गए ऋणों और अग्रिमों के लिए प्रतिभूति नाबार्ड द्वारा सामान्य पुनर्वित्त करार (जीआरए)/ मंजूरी पत्र में विनिर्दिष्ट मानदंडों के अनुसार रहेगी. इसके अलावा, बैंक को भारतीय रिज़र्व बैंक, जहां उसका चालू खाता है, से नाबार्ड के पक्ष में विधिवत एक अधिदेश प्राप्त करना होगा.
निचे दिये गए पैरा संख्या 11 में  इंगित मानदंडों को पूरा न करने वाले राज्य सहकारी बैंकों को कृषि क्षेत्र और कृषीतर क्षेत्र दोनों के लिए पुनर्वित्त राज्य सरकार की गारंटी पर ही दिया जाएगा. सरकारी गारंटी (जहां आवश्यक हो) प्राप्‍त न होने की स्थिति में वैकल्पिक प्रतिभूति के रूप में सरकारी प्रतिभूतियों या अनुसूचित बैंकों या अच्छा काम कर रहे राज्य सहकारी बैंकों द्वारा जारी की गर्इ सावधि जमा रसीदों को, इस संबंध में नाबार्ड द्वारा निर्धारित नियम और शर्तों की अनुपालन के अधीन, स्वीकार किया जा सकता है.
11.सरकारी गारंटी से छूट के लिए नियम एवं शर्तें 
 
11.1 द्वि-स्तरीय और त्रि-स्तरीय संरचना वाले अनुसूचित राज्‍य सहकारी बैंक जिनका लेखा-परीक्षा वर्ग `ए' श्रेणी का है :
क. जिस योजना के अंतर्गत पुनर्वित्‍त की मांग की गई है उसे तकनीकी रूप से साध्य और वित्तीय रूप से व्यवहार्य होनी चाहिए.
ख. प्राप्त की जानेवाली प्रतिभूति भारतीय रिजर्व बैंक/ नाबार्ड द्वारा जारी अनुदेशों के अनुसार होनी चाहिए. 
ग. राज्‍य सहकारी बैंक को लेखा परीक्षा श्रेणी `ए' में होना चाहिए.
11.2 त्रि-स्तरीय ढांचे के अंतर्गत अनुसूचित राज्‍य सहकारी बैंक जिनका’ लेखा परीक्षा वर्ग ‘बी’ श्रेणी का है  
क. जिस योजना के अंतर्गत पुनर्वित्‍त की मांग की गई है उसे तकनीकी रूप से साध्य और वित्तीय रूप से व्यवहार्य होनी चाहिए. 
ख. योजना का वित्‍तपोषण करने वाला जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक लेखापरीक्षा श्रेणी `ए'  में होना चाहिए और उसे उन निर्धारित मानदंडों को पूरा करना चाहिए जिनसे राज्‍य सहकारी बैंक श्रेणी `ए' में शामिल किया जा सके. 
ग. प्राप्त की जानेवाली प्रतिभूति भारतीय रिजर्व बैंक/ नाबार्ड द्वारा जारी अनुदेशों के अनुसार होनी चाहिए.
 
12.  अनुप्रवर्तन 
 
12.1 पुनर्वित्‍त के नियम व शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नाबार्ड को राज्‍य सहकारी बैंकों के स्‍थल सत्यापन/ जांच का अधिकार होगा.  
12.2 नाबार्ड को यह अधिकार होगा कि वह स्वयं अथवा अन्य एजन्सियों के माध्यम से (उधारकर्ता की लगतपर ) रासबैंक/ जिमस बैंक के बही खातों और अन्य संबन्धित दस्तावेजों को विशेष लेखा परीक्षा कारवा सके ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके बही खाते  तथा अन्य संबन्धित दस्तावेज़ विद्यमान नियम और विनियम के अनुसार रखे जा रहे है तथा बैंक द्वारा पुनर्वित्त के नियम और शर्तों का अनुपालन किया जा रहा है.
12.3 अंतर-बैंक और अंतर-शाखा खातों का समाधान छह महीने से अधिक लंबित नहीं होना चाहिए अन्‍यथा नाबार्ड पुनर्वित्‍त सहायता देने से मना कर सकता है. 
 
 13.  अन्‍य नियम और शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं होगा.
अनुबंध I
 
1. कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल हैं: 
 
i. भूमि विकास 
ii. लघु और सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप सिंचाई
iii. जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण 
iv. डेयरी 
v. मुर्गी पालन  
vi. मधुमक्खी पालन 
vii. रेशम उत्पादन 
viii. मत्स्यपालन 
ix. पशुपालन 
x. स्वयं सहायता समूहों / संयुक्त देयता समूहों / रैतु मित्र समूहों को दिए गए ऋण 
xi. शुष्क भूमि कृषि 
xii. ठेका खेती 
xiii. बागान और बागबानी 
xiv. कृषि वानिकी 
xv. बीज उत्पादन 
xvi. टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन 
xvii. कारपोरेट किसानों, कृषक उत्‍पादक संगठनों/ कंपनियों/ कृषि और संबद्ध गतिविधियों में प्रत्‍यक्ष रूप से संलग्‍न किसानों की साझेदार फर्मों और कृषक सहकारी संस्‍थाओं को समग्र रूप से प्रति उधारकर्ता ₹2 करोड़ तक के ऋण 
xviii. कृषि उपकरण 
xix. उच्च मूल्य वाली/ विदेशी प्रजातियों की सब्जियों का उत्‍पादन, नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस में कट फ्लावर्स का उत्‍पादन 
xx. सब्जियों और फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मशरूम, टिश्यू कल्चर, प्रिसीज़न फार्मिंग लैब जैसी हाइटेक निर्यातोन्मुख उत्पादन इकाइयों की स्थापना 
 
2. पुनर्वित्त में निम्नलिखित अन्य गतिविधियाँ शामिल हैं :
 
i. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने वाले निर्माण और सेवा क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) 
ii. कृषि क्लिनिक्स व कृषि व्यवसाय केन्द्र 
iii. ग्रामीण आवास 
iv. कृषि प्रसंस्करण 
v. मृदा संरक्षण और वाटरशेड विकास
vi. कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, गोदाम, मार्केट यार्ड, सिलोस आदि सहित) किसी भी क्षेत्र/ स्‍थान में  
vii. गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत,
viii. पहले से ही कार्यान्वित किए गए वाटर शेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के कार्यक्षेत्र में वित्तपोषण
ix. प्लांट टिशू कल्चर और कृषि जैव-प्रोद्यौगिकी, बीज उत्पादन, जैव-कीटनाशक/ जैव-उर्वरक का उत्पादन और वर्मी कम्पोस्टिंग 
x. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), कृषि सेवा समिति (एफएसएस) और बडे आकार की आदिवासी बहुउद्देशीय समितियों  (एलएएमपीएस) को आगे ऋण देने के लिए बैंक ऋण  
xi. कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण के लिए बैंकों द्वारा सूक्ष्म वित्तीय संस्थाओं को मंजूर किए गए ऋण 
xii. खादी ग्राम उद्योग (केवीआई)
xiii. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रमीण विद्यालय, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल सुविधाएं, स्वच्छता सुविधाएं और अन्य सामाजिक आधारभूत सुविधाएं
xiv. नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन के स्रोत जैसे - सौर आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, जैव खाद आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, पवन चक्की, माइक्रो-हाईडल प्लांट, और गैर-पारंपरिक ऊर्जा पर आधारित सार्वजनिक जन सुविधाएं, जैसे - सड़कों पर प्रकाश की व्‍यवस्‍था तथा दूर दराज के गांवों में विद्युतीकरण
xv. कृषक साथी योजना 
xvi. क्षेत्र विकास योजना 
 
3.  कृषि  और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक किसी अन्य गतिविधि को भी इसमें शामिल किया जा सकता है जिसका  उल्‍लेख ऊपर न किया हो.