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वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति – क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (क्षेग्रा बैंक)
 
सं.सं. राबैं. डीओआर /28 / पीपीएस -9/2021-22       
12 अप्रैल 2021
परिपत्र सं. 61/ पुनर्वित्‍त विभाग - 12 / 2021
अध्यक्ष 
सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक  
 
महोदया/ महोदय,
 
वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति – क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (क्षेग्रा बैंक)
 
1.  वित्त वर्ष 2021-22  हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दिया गया है जो हम इसके साथ भेज रहे हैं. यह नीति इस संबंध में सभी वर्तमान नीतियों का अधिक्रमण करती है. 
 
2. यह परिपत्र नाबार्ड की वेबसाइट www.nabard.org  पर ‘सूचना केंद्र’ टैब के अंतर्गत भी उपलब्ध है. 
 
3. कृपया पावती दें.
 
भवदीय 
(एल आर रामचंद्रन)
मुख्य महाप्रबंधक
संलग्‍नक : यथोपरि
 
योजनाबद्ध ऋण वितरण के लिए पुनर्वित्त नीति - वित्तीय वर्ष  2021-22
 
1. परिचय
 
नाबार्ड, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 की धारा 25(i)(क) के प्रावधानों के अधीन अनुमोदित वित्तीय संस्थाओं को कृषि क्षेत्र में निवेश गतिविधियों, अनुषंगी गतिविधियों और ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र आदि को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त ऋण प्रदान करने के लिए उनके संसाधनों के अनुपूरक के रूप में दीर्घावधि पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता है.
 
2. दीर्घावधि पुनर्वित्त प्रदान करने के उद्देश्य निम्नानुसार हैं:  
 
  • कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में पूँजी निर्माण को सहयोग देना.  
  • बल क्षेत्र की गतिविधियों के संवर्धन हेतु ऋण प्रवाह दिशा देना.
  • संयुक्त देयता समूहों  (जेएलजी), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), कृषक उत्पादन संगठनों (एफ़पीओ) और अन्य की ऋण जरूरतों को पूरा करना. 
  • कृषीतर क्षेत्र की गतिविधियों के लिए सहयोग देकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वैकल्पिक रोजगार की सुविधाओं का संवर्धन. 
3. सहायता का स्वरूप 
 
बैंकों को उनके द्वारा विभिन्‍न प्रयोजनों के लिए किए गए संवितरण के संबंध में पुनर्वित्‍त सहायता निम्‍नलिखित दो प्रकार से प्रदान की जाती है:   
 
3.1  स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ) 
 
स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा के अंतर्गत बैंकों को पूर्व-स्वीकृति की औपचारिकताओं की व्यापक प्रक्रिया से गुजरे बिना नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है. बैंकों से अपेक्षा है कि वे अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन करेंगे और उधारकर्ता को वित्त प्रदान करेंगे. इसके बाद बैंक नाबार्ड से घोषणा (आहरण आवेदन) के आधार पुनर्वित्त के लिए दावा करेंगे. आवेदन में पुनर्वित्त दावे के विभिन्न उद्देश्यों और संवितरित ऋण राशि का उल्लेख किया जाएगा. ऐसे मामलों में नाबार्ड पुनर्वित्त की स्वीकृति और संवितरण एक साथ करेगा.
 
कृषि क्षेत्र (एफएस) और कृषीतर क्षेत्र के अंतर्गत सभी परियोजनाओं के लिए पुनर्वित्‍त, बैंक ऋण अथवा कुल वित्‍तीय परिव्‍यय की प्रप्रमात्रा की किसी उच्‍चतम सीमा के बिना ही स्‍वचालित पुनर्वित्‍त सहायता प्रदान की जाती है.
 
3.2  पूर्व मंजूरी 
 
बैक अगर पूर्व मंजूरी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्वित्त का लाभ लेना चाहे तो उसे नाबार्ड के अनुमोदन हेतु परियोजना प्रस्तुत करना आवश्यक है. मंजूरी से पूर्व इसकी तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक-योग्यता का निर्णय करने के लिए नाबार्ड इन परियोजनाओं का मूल्यांकन करेगा. 
 
4. पात्रता मानदंड 
 
4.1 अधिक से अधिक, विशेषकर जरूरतमंद कृषि क्षेत्र को ऋण प्रदान करने को अनुप्रेरित करने के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए सी आर ए आर शुद्ध अनर्जक आस्तियों  (नेट एनपीए) और शुद्ध लाभ संबंधी पात्रता मानदंडों में छूट देने और आभ्यंतरीन जोखिम रेटिंग श्रेणी एनबीडी1 से एनबीडी7 तक आधारित सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अल्पावधि और दीर्घावधि पुनर्वित्त प्रदान करने का निर्णय किया गया है.
 
4.2 जोखिम आकलन 
 
01 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 के दौरान पात्रता मानदंड और जोखिम मूल्यांकन 31.03.2020 या 31.03.2021 के अनुसार उनकी लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति पर आधारित होगी (यदि 31.03.2021) की लेखा परीक्षित स्थिति उपलब्ध हो तो). 01 जुलाई 2021 अथवा उसके बाद की मंजूरी और आहरण केवल ऐसे क्षेग्रा बैंकों को दिए जाएँगे, जिन्होंने लेखा परीक्षा पूर्ण कर ली हो और संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को सौंप दी हो. लेखा परीक्षा रिपोर्ट और नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट में उल्लिखित वित्तीय मानदंडों में किसी भी प्रकार के अंतर की स्थिति में पात्रता निर्धारण के लिए नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट को मान्य किया जाएगा.
 
4.3 वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान वित्तीय मानदंडों में किसी भी प्रकार की बेहतरी पर तभी विचार किया जाएगा जब एक सीमित समीक्षा की जाए और नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय की संस्तुति के साथ सनदी लेखाकार विधिवत् प्रमाणपत्र दे. सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं सहित कृषि और कृषीतर क्षेत्र दोनों के अंतर्गत पुनर्वित्त आहरण के लिए ये पात्रता मानदंड लागू होंगे. 
 
5. पात्र प्रयोजन 
 
5.1 आहरण आवेदन तिथि को कृषि, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग के जो ऋण बैंक के बही खातों में बकाया होंगे और जिनकी 18 महीनों से अधिक की परिपक्वता अवधि शेष होगी, वे ऋण पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.
5.2 कृषि क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल की गई गतिविधियों की सूची अनुबंध I में दी गई है. सूची निदर्शी है, सम्पूर्ण नहीं. अनुबंध में उल्लेख न की गई गतिविधियों को भी शामिल किया जा सकता है यदि वे कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक हों.
5.3 बल क्षेत्र 
हमारे पुनर्वित्त के माध्यम से बल-क्षेत्रों का सहयोग करने का प्रयास किया जा सकता है. बल क्षेत्र में भूमि विकास, लघु व सूक्ष्म सिंचाई, जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण, मत्स्यपालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह /रैतु मित्र समूह (आरएमजी), एग्री  क्लिनिक  और एग्री बिजनेस सेंटर, ग्रामीण आवास, कृषि प्रसंस्करण, बंजर भूमि विकास, शुष्क भूमि कृषि, ठेका कृषि, क्षेत्र विकास योजनाएँ, बागान और बागबानी, कृषि वानिकी, बीज उत्पादन, टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन सहित कृषि विपणन आधारभूत संरचना, शीतगृह, गोदाम, मार्केट यार्ड आदि, कृषि उपकरण, अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत, पहले लागू किए गए वाटरशेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में वित्तपोषण शामिल हैं.  
बैंकों को बागान और बागवानी क्षेत्रों के अंतर्गत विविध गतिविधियों के लिए नवोन्मेषी/ बल क्षेत्रों जैसे उच्च मूल्यवाली विदेशी प्रजातियों वाली सब्जियाँ, नियंत्रित स्थितियों जैसे पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस में उगने वाले कटफ्लावर्स, मशरूम, टिश्यूकल्चर लैब जैसे हाइटेक निर्यातोन्मुख उत्पाद यूनिटों की स्थापना, सब्जियों और फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रीसीज़न फार्मिंग, फलोद्यान और बागान फसलों के लिए ड्रिप जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना हेतु वित्तपोषण को प्राथमिकता देनी चाहिए.
 
6. पुनर्वित्त की सीमा  
 
सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मीज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा), पर्वतीय क्षेत्र (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड), पूर्वी राज्यों (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह), लक्षद्वीप और छत्तीसगढ़ के लिए पुनर्वित्त की प्रमात्रा सभी प्रयोजनों के लिए पात्र बैंक ऋणों के 95% होगी. अन्य क्षेत्रों के लिए पुनर्वित्त की सीमा निम्नानुसार होगी ;
 
क) क्रम सं.5.3 में किए गए उल्लेख के अनुसार सभी बल क्षेत्रों के लिए 95% ;   
ख) सभी अन्य विविधीकृत प्रयोजनों और कृषक साथी योजना के लिए 90%.
 
7. पुनर्वित्त की प्रमात्रा 
 
7.1 पुनर्वित्त की प्रमात्रा जोखिम रेटिंग मॉड्यूल के अनुसार निर्धारित की जाएगी और एनबीडी 1 से एनबीडी 9 में वर्गीकृत की जाएगी. पुनर्वित्त की प्रप्रमात्रा का वर्ग-वार विवरण नीचे दिया गया है: 
मानदंड पुनर्वित्त की प्रप्रमात्रा
एनबीडी 1 से एनबीडी 3 (अंक >60 और ≤ 100)
राज्य/ बैंक के लिए समग्र आबंटन के अधीन पुनर्वित्त की प्रमात्रा अप्रतिबंधित रहेगी
एनबीडी 4 और एनबीडी 5 (अंक > 40 और ≤ 60)
पुनर्वित्त की प्रमात्रा पिछले वर्ष के दौरान आहरित पुनर्वित्त से 40 % अधिक / संबंधित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा वर्ष 2020-21 के दौरान मीयादी ऋणों हेतु वितरित आधार स्तरीय ऋण का 90%, इसमें से जो भी अधिक हो, रहेगी. 
एनबीडी 6 और एनबीडी 7  (अंक > 20 और ≤ 40)
पुनर्वित्त की प्रमात्रा पिछले वर्ष के दौरान आहरित  पुनर्वित्त से 25% अधिक / संबंधित  क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा वर्ष 2020-21 के दौरान मीयादी ऋणों हेतु वितरित आधार स्तरीय ऋण का 80%, इसमें से जो भी अधिक हो, रहेगी.
एनबीडी 8 से एनबीडी 9 (अंक ≤ 20)
बैंक पुनर्वित्त के लिए पात्र नहीं होगा
7.2 पूर्वी क्षेत्र के राज्यों (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह), सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र, पर्वतीय राज्यों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) लक्षद्वीप तथा छत्तीसगढ़ में ऋण-प्रवाह में वृद्धि करने की दृष्टि से श्रेणी-वार पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं :
मानदंड Criteria पुनर्वित्त की प्रमात्रा Quantum of refinance
एनबीडी 1 से एनबीडी3 (अंक >60 और < 100) राज्य/बैंक के लिए समग्र आबंटन की शर्त पर पुनर्वित्त की प्रमात्रा असीमित रहेगी.
एनबीडी 4, एनबीडी 5, एनबीडी 6 और एनबीडी 7 (अंक >20 और < 60) पुनर्वित्त की प्रमात्रा पिछले वर्ष के दौरान आहरित  पुनर्वित्त से 40% अधिक / संबंधित  क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा वर्ष 2020-21 के दौरान मीयादी ऋणों हेतु वितरित आधार स्तरीय ऋण का 90%, इसमें से जो भी अधिक हो, होगी.
एनबीडी 8 से एनबीडी 9 (अंक < 20) बैंक पुनर्वित्त के लिए पात्र नहीं होगा.
 
8. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का विलयन
 
8.1 विलय किए गए बैंकों हेतु वर्ष 2021-22 के लिए पुनर्वित्त की मंजूरी नए/ विलय किए गए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की अधिसूचना की तिथि को 31 मार्च 2020  की स्थिति के अनुसार की गर्इ विशेष लेखापरीक्षा या समेकित लेखापरीक्षा की स्थिति के अनुसार निर्दिष्ट वित्तीय स्थिति के आधार पर होगी. इसके अलावा, यदि 31.03.2021 की स्थिति के अनुसार सांविधिक लेखा परीक्षा की स्थिति उपलब्ध हो, तो बैंको को ऋण सीमा मंजूर करने पर विचार किया जाएगा. 
 
8.2 समामेलित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को जिन्हें अभी भारतीय रिजर्व बैंक के द्वितीय अनुसूची में शामिल किया जाना है, उन्हें विशेष मामले के रूप में पुनर्वित्त प्रदान किया जाएगा जब तक कि उनका अनुसूचीकरण नहीं हो जाता है. अनुसूचित क्षेग्रा बैंकों तथा अनुसूचित किए जाने हेतु नाबार्ड द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक को अनुशंसित क्षेग्रा बैंकों को हमेशा की तरह पुनर्वित्त प्रदान किया जाएगा. अनुसूचित न हों ऐसे क्षेग्रा बैंकों को अतिरिक्त संपार्श्विक सुरक्षा जैसे कि ग्रहणाधिकारयुक्त एफडी या सरकारी प्रतिभूतियों या नाबार्ड को उचित लगे ऐसी किसी भी अन्य तरल प्रतिभूति के समक्ष पुनर्वित्त प्रदान किया जाएगा.
 
9. ब्याज दर
 
9.1 पुनर्वित्त पर ब्याज  
 
नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्त पर ब्याज की दरों का निर्धारण समयावधि, वर्तमान बाजार दर, जोखिम अवधारणा आदि के आधार पर किया जाएगा और समय-समय पर इसमें संशोधन किया जा सकता है. सभी क्षेग्रा बैंकों को नाबार्ड द्वारा तैयार किए गए आंतरिक जोखिम आकलन मॉड्यूल के अनुसार 9 जोखिम वर्गों में वर्गीकृत किया गया है. तदनुसार निर्धारित जोखिम प्रीमियम, पुनर्वित्त पर मौजूदा ब्याज की दर से अधिक प्रभारित किया जाएगा. 
 
9.2 दंडात्मक ब्याज:
 
चूक होने पर, जिस दर पर पुनर्वित्त वितरित किया गया था उससे वार्षिक 2.00% अधिक अतिरिक्त ब्याज दर, चूक की राशि पर चूक की अवधि के लिए लगार्इ जाएगी.
 
9.3 पुनर्वित्त के अवधि-पूर्व भुगतान के लिए दंड : पुनर्वित्त के अवधि-पूर्व भुगतान पर दंड की दर  2.50% प्रति वर्ष होगी और भुगतान की निर्धारित तारीख से पहले किए गए भुगतान से देय किस्त की वास्तविक तारीख तक की सम्पूर्ण अवधि (न्यूनतम 6 माह) के लिए प्रत्येक देय किस्त के लिए दंडात्मक ब्याज प्रभारित किया जाएगा. अवधि पूर्व भुगतान तीन कार्य दिवस का नोटिस दिए जाने के बाद ही किया जा सकता है.  
 
10. चुकौती अवधि 
 
पुनर्वित्त की चुकौती अवधि 18 महीनों (न्यूनतम) से 5 वर्ष या उससे अधिक होगी. मूलधन और ब्याज की अदायगी की नियत तारीख त्रैमासिक होगी. मूलधन के लिए देय तिथियाँ 30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसंबर और 31 मार्च होंगी. ब्याज के लिए देय तिथियाँ 1 जुलाई, 1 अक्टूबर, 1 जनवरी और 1 अप्रैल होंगी. किसी तिमाही में किसी भी तिथि को मंजूर पुनर्वित्त के लिए मूलधन की राशि की पहली देय तिथि अगली तिमाही के आखिरी दिन होगी.
 
11. प्रतिभूति 
 
पुनर्वित्त या अन्य माध्यमों से दिए गए ऋणों और अग्रिमों के लिए प्रतिभूति नाबार्ड द्वारा सामान्य पुनर्वित्त करार (जीआरए)/ मंजूरी पत्र में विनिर्दिष्ट मानदंडों के अनुसार रहेगी. इसके अलावा, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक से नाबार्ड के पक्ष में एक विधिवत अधिदेश प्राप्त किया जाना होगा, जिसमें इसका चालू खाता हो.
 
12. अनुप्रवर्तन  
 
12.1 नाबार्ड को पुनर्वित्त के निबंधन व शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजन से परियोजना स्थल पर सत्यापन/ जांच करने का अधिकार होगा.  
 
12.2 बैंकों के बही खातों और अन्य संबन्धित सामग्री का रख रखाव लागू नियम व विनियमों के अनुसार हो रहा है तथा पुनर्वित्त के नियम और शर्तों का बैंक द्वारा पालन किया जा रहा है यह सुनिश्चित करने हेतु नाबार्ड को स्वयं अथवा अन्य एजेंसियों के माध्यम (उधारकर्ता की लागत पर) से बैंकों के बही खातों और अन्य संबन्धित सामग्री की विशेष लेखा परीक्षा का अधिकार होगा. 
 
13. अन्य वर्तमान निबंधनों व शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं होगा.
अनुबंध I
 
1. कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल हैं
 
i. भूमि विकास
ii. लघु और सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप सिंचाई
iii. जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण 
iv. डेयरी
v. मुर्गी पालन  
vi. मधुमक्खी पालन 
vii. रेशम उत्पादन 
viii. मत्स्यपालन 
ix. पशुपालन 
x. स्वयं सहायता समूहों / संयुक्त देयता समूहों / रैतु मित्र समूहों को दिए गए ऋण 
xi. शुष्क भूमि कृषि 
xii. ठेका खेती 
xiii. बागान और बागबानी 
xiv. कृषि वानिकी 
xv. बीज उत्पादन 
xvi. टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन 
xvii. कारपोरेट किसानों, कृषि और संबद्ध गतिविधियों में प्रत्‍यक्ष रूप से संलग्‍न किसानों के कृषक उत्‍पादक संगठन/ कंपनियाँ/ साझेदार फर्म और कृषक सहकारी संस्‍थाओं को समग्र रूप से ₹2 करोड़ प्रति उधारकर्ता तक के ऋण
xviii. कृषि उपकरण
xix. उच्च मूल्य/ विदेशी प्रजातियों की सब्जियों का उत्‍पादन, नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस में कट फ्लावर्स का उत्‍पादन 
xx. मशरूम, जैसे उच्‍च निर्यात उन्‍मुख उत्‍पादन इकाई लगाना, टिश्यूकल्चर प्रयोगशालाएँ सब्जियों और फलों की उत्पादकता में वृद्धि के लिए प्रीसीज़न फार्मिंग 
 
2. पुनर्वित्त में निम्नलिखित अन्य गतिविधियाँ शामिल हैं:  
 
i. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने वाले निर्माण और सेवा क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) 
ii. कृषि क्लिनिक्स व कृषि व्यवसाय केन्द्र 
iii. ग्रामीण आवास 
iv. कृषि प्रसंस्करण 
v. मृदा संरक्षण और वाटरशेड विकास
vi. कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, गोदाम, मार्केट यार्ड, सिलोस आदि सहित) किसी भी क्षेत्र/ स्‍थान में  
vii. गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत,
viii. पहले से ही कार्यान्वित किए गए वाटर शेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के कार्यक्षेत्र में वित्तपोषण
ix. प्लांट टिशू कल्चर और कृषि जैव प्रोद्यौगिकी, बीज उत्पादन, जैव कीटनाशक, जैव-उर्वरक और वर्मी कम्पोस्टिंग का उत्पादन
x. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), कृषि सेवा समिति (एफएसएस) और बडे आकार की आदिवासी बहुउद्देशीय समितियों  (एलएएमपीएस) को आगे ऋण देने के लिए बैंक ऋण  
xi. सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों को कृषि क्षेत्र में आगे ऋण देने के लिए बैंकों द्वारा  ऋण की स्वीकृति
xii. खादी ग्राम उद्योग (केवीआई)
xiii. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण विद्यालय, स्वास्थ्य उपचार सुविधा, पेयजल की सुविधा, स्वच्छता सुविधा और अन्य सामाजिक आधारभूत सुविधाएँ 
xiv. सौर आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, जैव खाद आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, पवन चक्की, सूक्ष्म हाईडल प्लांट जैसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन और सड़क प्रकाश व्‍यवस्‍था और दूर दराज के गांवों में विद्युतीकरण जैसे अपारंपरिक ऊर्जा आधारित सार्वजनिक जन सुविधाएँ 
xv. कृषक साथी योजना 
xvi. क्षेत्र विकास योजना
 
3. कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक अन्य कोई गतिविधि जिसका उल्‍लेख ऊपर न किया हो, को भी शामिल किया जा सकता है.