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वित्‍तीय वर्ष 2021-22 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति - एनबीएफ़सी-एमएफ़आई
 
संदर्भ सं. राबैं. डीओआर/33/ पीपीएस -156/ 2021-22
12 अप्रैल 2021
परिपत्र सं. 66/डीओआर -17/2021
                       
मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी 
सभी गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी- सूक्ष्‍म वित्‍त संस्‍थाएँ (एनबीएफ़सी-एमएफ़आई) 
 
महोदया/ प्रिय महोदय,
 
वित्‍तीय वर्ष 2021-22 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति  - एनबीएफ़सी-एमएफ़आई 
 
1.  वित्त वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए एनबीएफ़सी-एमएफ़आई हेतु पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दिया गया है और इसे हम इसके साथ भेज रहे हैं. यह नीति इससे संबंधित सभी  वर्तमान नीतियों का अधिक्रमण करती है.
 
2.  इस परिपत्र को नाबार्ड की वेबसाइट www.nabard.org पर इन्फॉर्मेशन सेंटर टैब के अंतर्गत उपलब्ध है. 
 
3.  पुनर्वित्त संबंधी प्रस्ताव नाबार्ड के उन क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से प्रस्तुत किये जा सकते हैं जहाँ संबन्धित गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी - सूक्ष्म वित्त संस्था का कॉर्पोरेट कार्यालय/ प्रधान कार्यालय स्थित है.
 
कृपया पावती दें.
भवदीय 
(एल.आर. रामचंद्रन)
मुख्‍य महाप्रबंधक 
संलग्‍नक : यथोपरि
 
योजनाबद्ध ऋण-वितरण के लिए पुनर्वित्त नीति  - वित्तीय वर्ष 2021-22
 
1. प्रस्तावना 
 
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 की धारा 25 (i) (क) के प्रावधानों के अंतर्गत नाबार्ड  अनुमोदित वित्तीय संस्थाओं को, नाबार्ड को दिए गए अधिदेश के अनुसार, दीर्घावधि पुनर्वित्त उपलब्ध कराता रहा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किसानों, स्वयं सहायता समूहों, संयुक्त देयता समूहों  और अन्य समूहों के लिए कृषि और अनुषंगी गतिविधियों, ग्रामीण आवास, एमएसएमई तथा अन्य संबंधित गतिविधियों के निमित्त उनके द्वारा दिए गए दीर्घकालिक ऋणों के लिए उनके संसाधनों की अनुपूर्ति करना है. 
 
2. उद्देश्य  
 
कृषि और अनुषंगी क्षेत्रों में पूँजी निर्माण को सहयोग देना.  
ऋण प्रवाह को बल क्षेत्र की गतिविधियों के संवर्धन हेतु ले जाना. 
कृषीतर क्षेत्र की गतिविधियों के लिए सहयोग देकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में  वैकल्पिक रोजगार की सुविधाओं का संवर्धन. 
संयुक्त देयता समूहों (जेएलजी), स्वयं सहायता समूहों  (एसएचजी), कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और अन्य संस्थाओं की ऋण जरूरतों को पूरा करना. 
 
3.   पुनर्वित्त सुविधा  का स्वरूप 
 
गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थाओं (एनबीएफसी-एमएफआई) को उनके द्वारा विभिन्‍न पात्र प्रयोजनों के लिए किए गए संवितरण के समक्ष पुनर्वित्‍त सहायता निम्‍नलिखित दो प्रकार से प्रदान की जाती है:
 
3.1 स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ) 
 
स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा एनबीएफसी-एमएफआई को पूर्व-स्वीकृति की औपचारिकताओं की व्यापक प्रक्रिया से गुजरे बिना नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त कराती है. एनबीएफसी-एमएफआई से अपेक्षा है कि वे अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन करेंगी और उधारकर्ता को वित्त प्रदान करेंगी. इसके बाद एनबीएफसी-एमएफआई नाबार्ड से घोषणा (आहरण आवेदन) के आधार पर पुनर्वित्त के लिए दावा करेंगी. आवेदन में पुनर्वित्त दावे के विभिन्न उद्देश्यों और संवितरित ऋण राशि का उल्लेख रहेगा. ऐसे मामलों में नाबार्ड पुनर्वित्त की स्वीकृति और संवितरण एक साथ करेगा.
 
3.2 पूर्व मंजूरी 
गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थाएँ  (एनबीएफसी-एमएफआई) अगर पूर्व-मंजूरी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्वित्त का लाभ लेना चाहें तो उन्हें नाबार्ड के अनुमोदन हेतु परियोजनाएँ प्रस्तुत करना आवश्यक है. मंजूरी से पूर्व इनकी तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक-योग्यता का निर्णय करने के लिए नाबार्ड इन परियोजनाओं का मूल्यांकन करेगा. 
 
4. पात्रता मानदंड
 
नाबार्ड से पुनर्वित्त आहरण के लिए पात्रता मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है.  वर्ष 2021-22 के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं:
 
4.1 पंजीकरण 
संस्‍था के पास भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1949 की धारा 45-1(क) के अधीन एक अनुमोदित वित्‍तीय संस्‍था के रूप में कार्य करने के लिए जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र होना चाहिए और एनबीएफसी-एमएफआई के रूप में पंजीकृत होना चाहिए.
4.2 कारोबार अवधि 
ऋण स्‍वीकृति तिथि को संस्था कम-से-कम पिछले 5 वर्ष से ऋण देने के कारोबार में कार्यरत होनी चाहिए. 
4.3 सीआरएआर
संस्था का पूँजी पर्याप्‍तता अनुपात भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित सीमा के अनुसार होनी चाहिए (वर्तमान में यह 15% है).
4.4 निवल लाभ
संस्था को गत 4 वित्‍तीय वर्षों (वर्ष 2017-18, वर्ष 2018-19, वर्ष 2019-20 और 2020-21) में से कम से कम 3 वित्‍तीय वषों में निवल लाभ में होना चाहिए.
4.5 निवल एनपीए
निवल एनपीए स्तर 4% या उससे कम होना चाहिए.  
4.6 संस्था के संगम ज्ञापन (मेमोरैंडम ऑफ़ एसोसिएशन) में उच्‍चतर वित्‍तीय संस्‍थाओं से ऋण लेने का प्रावधान होना चाहिए. 
4.7 एनबीएफसी-एमएफ़आई की ग्रेडिंग
क) नाबार्ड से पुनर्वित्‍त प्राप्‍त करने के लिए एनबीएफ़सी-एमएफ़आई की पात्रता के लिए उसकी न्‍यूनतम ग्रेडिंग सर्वोच्‍च ग्रेडिंग से एक पायदान कम हो (अर्थात् एमएफआर 2/ एमएफ2 या इसके बराबर तक). यह ग्रेडिंग भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी)/ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित किसी भी ग्रेडिंग संस्‍था से दी हुई होनी चाहिए.
ख) सिक्किम सहित पूर्वोत्‍तर राज्यों के मामले में पात्रता मानदंड में रियायत दी गई है और वह सर्वोच्‍च ग्रेडिंग से दो पायदान कम हो सकती है (अर्थात् एमएफआर 3 तक).
ग) एनबीएफ़सी-एमएफ़आई के लिए वांछनीय है कि कोड ऑफ कंडक्ट असेसमेंट (सीओसीए) रिपोर्ट प्राप्त करे और आवेदन की प्रस्तुति के समय उसे प्रस्तुत करे. 
4.8 दिनांक 01 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 अवधि के लिए 31 मार्च 2020 अथवा 31 मार्च 2021 की (यदि 31 मार्च 2021 की स्थिति की लेखापरीक्षा उपलब्‍ध हो तो) लेखापरीक्षित वित्‍तीय स्थिति के आधार पर पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन किया जाएगा.  01 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2022 तक की अवधि के लिए 31 मार्च 2021 की लेखापरीक्षित वित्‍तीय स्थिति पर पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन आ‍धारित होंगे. 01 जुलाई 2021 को या इसके बाद केवल उन्‍हीं एनबीएफ़सी-एमएफ़आई को स्‍वीकृति और आहरण की अनुमति होगी जिन्‍होंने लेखापरीक्षा पूरी कर ली है. 
 
4.9   वित्‍तीय वर्ष 2021-22 के दौरान यदि कोई सुधार होता है तो सनदी लेखाकार (चार्टर्ड एकाउंटंट) से विधिवत् प्रमाणपत्र और क्षेत्रीय कार्यालय से उस पर सिफारिश प्राप्‍त होने पर प्रस्‍तावों पर विचार किया जाएगा.  
4.10    उधारकर्ता के लिए ऋण के मूल्य निर्धारण के मामले में एनबीएफसी-एमएफआई को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 01 सितंबर 2016 को जारी मास्‍टर परिपत्र सं. आरबीआई/ डीएनबीआर/ 2016-17/44 (मास्‍टर डायरेक्‍शन डीएनबीआर. पीडी.007/ 03.10.119/ 2016-17) और आरबीआई/ डीएनबीआर/ 2016-17/ 45 (मास्‍टर डायरेक्‍शन डीएनबीआर. पीडी. 008/ 03.10.119/ 2016-17) (समय-समय पर यथा संशोधित) का पालन करना चाहिए.  
 
5. पात्र प्रयोजन 
 
कृषि और अनुषंगी गतिविधियों, ग्रामीण आवास, ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र की गतिविधियों, एमएसएमई, और अन्य पात्र गतिविधियों के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किसानों, स्‍वयं सहायता समूहों, संयुक्‍त देयता समूहों, रायतु मित्र समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों और अन्‍य समूहों को दिए गए दीर्घावधि ऋण, जिनकी शेष परिपक्वता  अवधि आहरण आवेदन की तिथि को 18 महीने से अधिक हो और जो एनबीएफ़सी-एमएफ़आई के बही-खातों में बकाया हों, पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे. 
 
6. ब्‍याज दर
 
6.1 पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज दरः पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज की दर का निर्धारण पुनर्वित्त की अवधि, प्रचलित बाजार दर, जोखिम अवधारणा इत्यादि के आधार पर किया जाएगा और यह समय-समय पर परिवर्तन के अधीन है. सभी एनबीएफ़सी-एमएफ़आई  को नाबार्ड द्वारा तैयार किए गए जोखिम आकलन मॉड्यूल के आधार पर 9 जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा. पुनर्वित्त की मात्रा और जोखिम प्रीमियम इसी पर आधारित होंगे. ऋण की अवधि के दौरान आतंरिक रेटिंग/ बाह्य ग्रेडिंग घटने की स्थिति में, जोखिम प्रीमियम के लिए अतिरिक्त ब्याज डाउनग्रेड के समय पर प्रचलित ब्याज दर पर वसूल किया जाएगा.
6.2 दंडात्‍मक ब्‍याजः चूक की स्थिति में, चूक की अवधि के लिए और चूक की राशि पर संवितरित पुनर्वित्‍त की निर्धारित ब्‍याज दर के अतिरिक्त 2% प्रति वर्ष की दर से दंडात्‍मक ब्‍याज लिया जाएगा.
6.3 पुनर्वित्‍त की अवधि-पूर्व चुकौती के लिए दंडः अवधि-पूर्व चुकौती की स्थिति में शेष अवधि के लिए 2.50% प्रति वर्ष और प्रत्‍येक किस्‍त के लिए पूर्व चुकौती की तिथि से चुकौती की वास्‍तविक तिथि तक की पूर्ण अवधि (न्‍यूनतम 6 महीने) तक के लिए अलग से दंडात्मक ब्याज लिया जाएगा. न्‍यूनतम 3 कार्य दिवस की सूचना देने के बाद अवधि-पूर्व चुकौती की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. 
 
7. चुकौती अवधि 
 
पुनर्वित्‍त के लिए चुकौती अवधि न्‍यूनतम 18 महीने से लेकर 5 वर्ष या उससे अधिक समय तक होगी. मूलधन एवं ब्याज की चुकौती के लिए देय तिथियाँ तिमाही आधार पर होंगी. मूलधन की चुकौती के लिए देय तिथियाँ 30 जून, 30 सितम्बर, 31 दिसंबर एवं 31 मार्च और ब्याज के लिए देय तिथियाँ 1 जुलाई, 1 अक्टूबर, 1 जनवरी तथा 1 अप्रैल होंगी. तिमाही में किसी भी तिथि को स्वीकृत किये गए पुनर्वित्त के लिए मूल धन राशि की चुकौती हेतु पहली देय तिथि अगली तिमाही में होगी. मासिक आधार पर मूलधन और ब्याज भुगतान के विकल्प भी उपलब्ध हैं.
 
8. प्रतिभूति मानदंड 
 
एनबीएफ़सी-एमएफ़आई  के लिए प्रतिभूति मानदंड निम्‍नानुसार निर्धारित किए गए हैं:
क) प्रतिभूति निम्‍नानुसार होगी 
 
i. एमएफआर1 या एमएफ1 ग्रेड वाली  एजेंसियों के लिए उन्हें जारी पुनर्वित्‍त का 1.12 गुना 
ii. एमएफआर2 या एमएफ2 ग्रेड वाली एजेंसियों के लिए उन्हें जारी पुनर्वित्‍त का 1.18 गुना 
iii. एफआर3 या उसके समान ग्रेड वाली एजेंसियों के लिए जारी पुनर्वित्‍त का 1.25 गुना (केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र की संस्थाओं के लिए)
ख)प्रतिभूति के मूल्‍य में कमी यदि कोई हो, की पूर्ति अतिरिक्‍त प्रतिभूतियों के माध्‍यम से की जाएगी ताकि नाबार्ड की देयताओं के संबंध में उपर्युक्‍त पुनर्वित्‍त बकाया के लिए न्‍यूनतम 1.12/ 1.18/ 1.25 गुना तक पर्याप्‍त प्रतिभपूति उपलब्‍ध हो सके. 
ग) सभी प्रतिभूतियाँ अर्जक आस्तियाँ ही होनी चाहिए.
घ) पुनर्वित्त से दिए गये ऋणों के लिए एनबीएफ़सी-एमएफ़आई को उधारकर्ताओं से ली गई प्रतिभूतियों को नाबार्ड के न्‍यास के रूप में अपने पास रखनी होगा.
ङ) नाबार्ड के साथ सामान्‍य पुनर्वित्‍त क़रार का निष्‍पादन करना.  
च) एनबीएफ़सी-एमएफ़आई के मुख्‍य बैंकर के पास चालू खाते को नामे करने का अधिदेश जो मुख्य बैंकर द्वारा विधिवत् प्राधिकृत हो. 
छ) निदेशक मंडल का संकल्प जिसमें एजेंसी की उधार लेने की शक्तियों, उच्चतर संस्थाओं/ वित्तीय संस्थाओं/ नाबार्ड से उधार लेने के प्राधिकार, नमूना हस्ताक्षरों के साथ प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की सूची निर्दिष्ट की गई हो और यह पुष्टि करते हुए एक प्रमाणपत्र संलग्न हो कि नाबार्ड से लिया गया उधार एनबीएफसी-एमएफआई की उधार ले सक्ने की समग्र सीमा के भीतर है.
ज) नाबार्ड के पक्ष में बही ऋण का समनुदेशन और पुनर्वित्‍त से बनी आस्तियों पर कंपनी निबंधक के पास भार का पंजीकरण. तथापि, आवश्‍यकता हो तो पुनर्वित्‍त की आस्तियों पर पूर्ण अधिकार देने के बजाय विशेष मामले के रूप में हम एनबीएफ़सी_एमएफ़आई की आस्तियों पर समरूप (पारी-पासू) अधिकार को स्‍वीकार कर सकते हैं.
झ) बही ऋण के समनुदेशन के लिए विधिवत्  हस्ताक्षरित और मुद्राकिंत करार, सुपुर्दगी पत्र, मांग वचन पत्र (डीपीएन) और ऋण/ प्रतिभूति की पावती.
ञ) नाबार्ड द्वारा आवश्यक समझे जाने पर वैयक्तिक गारंटी/ कार्पोरेट गारंटी/ ग्रहणाधिकार-युक्त तरल संपार्श्विक जमानत/ एस्क्रो मेकानिज़्म जैसी अतिरिक्त प्रतिभूति दी जानी है.
 
9. अनुप्रवर्तन  
 
पुनर्वित्‍त के निबंधनों व शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्थल पर सत्यापन/ जाँच का अधिकार नाबार्ड को होगा. पुनर्वित्त पूल के सत्यापन और विश्लेषण हेतु नाबार्ड अपने एजेंट के रूप में किसी तीसरे पक्ष को भी नियुक्त कर सकता है.
 
10.  वर्तमान में लागू अन्‍य सभी निबंधन व शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी