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वित्तीय वर्ष 2021-22- लघु वित्त बैंक (एसएफ़बी) के लिए योजनबद्ध ऋणिकरण हेतु पुनर्वित्त नीति
 
संदर्भ सं. राबैं. डीओआर/ 34 / पीपीएस-9/ 2021-22
12 अप्रैल 2021
परिपत्र सं. 67/ डीओआर-18/2021
मुख्य कार्यकारी अधिकारी 
सभी लघु वित्त बैंक 
 
महोदया/ महोदय 
 
1.  वित्तीय वर्ष 2021-22- लघु वित्त बैंक (एसएफ़बी) के लिए योजनबद्ध ऋणिकरण हेतु पुनर्वित्त नीति
लघु वित्त बैंक के लिए वर्ष  2021-22  हेतु योजनबद्ध ऋणिकरण हेतु पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दिया गया है और उक्त नीति को इस पत्र के साथ संलग्न किया जा रहा है. यह नीति इससे संबंधित वर्तमान नीतियों का अधिक्रमण करती है.
 
2. यह परिपत्र नाबार्ड की वेबसाइट www.nabard.org पर भी सूचना केंद्र टैब के अंतर्गत उपलब्ध है. 
 
3. कृपया पावती दें.  
 
भवदीय 
(एल.आर. रामचंद्रन)
मुख्य महाप्रबंधक 
संलग्न : यथोपरि 
 
वित्तीय वर्ष 2021-22  के लिए योजनाबद्ध ऋणीकरण हेतु पुनर्वित्त नीति
 
1. प्रस्तावना 
 
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981  की धारा25   (i) (क) के प्रावधानों के अंतर्गत  नाबार्ड  अनुमोदित वित्तीय संस्थानों को दीर्घावधि पुनर्वित्त उपलब्ध कराता रहा है, जिसका उद्देश्य उनके संसाधनों की अनुपूर्ति करना है ताकि  वे कृषि, अनुषंगी गतिविधियों, और ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र आदि मे निवेश कर सकें. 
 
2. दीर्घावधि पुनर्वित्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य निम्नानुसार हैं : 
 
कृषि में पूंजी निर्माण को सहयोग देना और इसके माध्यम से कृषि क्षेत्र में वृद्धि का संवर्धन करना.  
बल क्षेत्र की गतिविधियों के संवर्धन हेतु ऋण प्रवाह को दिशा देना. 
संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) और स्वयं सहायता समूह   (एसएचजी  ( की ऋण जरूरतों को पूरा करना. 
कृषीतर क्षेत्र की गतिविधियों की सहायता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना.
 
3. सहायता का स्वरूप 
 
बैंकों को उनके द्वारा विभिन्‍न प्रयोजनों के लिए किए गए संवितरण के संबंध में पुनर्वित्‍त सहायता निम्‍नलिखित दो प्रकार से प्रदान की जाती है:  
 
3.1  स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा )एआरएफ (
स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों को पूर्व-मंजूरी की औपचारिकताओं की विस्तृत प्रक्रिया से गुजरे बिना नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त करने में समर्थ बनाती है. बैंकों से अपेक्षा है कि वे अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन करें और उधारकर्ता को वित्त प्रदान करें. इसके बाद बैंक नाबार्ड से घोषणा (आहरण आवेदन) के आधार पर पुनर्वित्त के लिए दावा करें. आवेदन में उन विभिन्न प्रयोजनों को निर्दिष्ट करें जिनके लिए पुनर्वित्त का दावा किया गया है और संवितरित ऋण राशि का उल्लेख करें. ऐसे मामलों में नाबार्ड पुनर्वित्त की स्वीकृति और संवितरण एक साथ करेगा.
कृषि क्षेत्र(एफएस( और कृषीतर क्षेत्र के अंतर्गत सभी प्रकार की परियोजनाओं के लिए पुनर्वित्‍त, बैंक ऋण अथवा कुल वित्‍तीय परिव्‍यय की प्रमात्रा की किसी उच्‍चतम सीमा के बिना स्‍वतः पुनर्वित्‍त सहायता प्रदान की जाती है.  
 
3.2  पूर्व- मंजूरी 
यदि बैंक पूर्व-मंजूरी प्रक्रिया के तहत पुनर्वित्त प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें परियोजनाओं को नाबार्ड के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करना होगा. इन परियोजनाओं की मंजूरी से पहले नाबार्ड उनकी तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक योग्यता की जाँच के लिए उनका मूल्यांकन करता है.
 
4.  पात्रता मानदंड 
 
4.1 नाबार्ड से पुनर्वित्त के आहरण के लिए पात्रता मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है. वर्ष 2021-22  के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड निम्नानुसार हैं : 
 
क) न्यूनतम 15% सीआरएआर  [भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यथानिर्धारित]    मानदंड का पालन. 
ख) निवल अनर्जक आस्तियाँ बकाया निवल ऋणों और अग्रिमों के  5% अधिक न हों.  इसके अलावा  अनर्जक आस्तियों की स्थिति की गणना सम्पूर्ण बैंक के लिए की जाएगी. 
ग) बैंक निवल लाभ में होना चाहिए. 
 
4.2  पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन
 
01 अप्रैल  2021 से जून 2021 के दौरान उनकी 31.03.2020 अथवा 31.03.2021 (यदि 31.03.2021 की लेखापरीक्षित स्थिति उपलब्ध है) की स्थिति के अनुसार लेखापरीक्षित स्थिति के आधार पर किया जाएगा
01 जुलाई 2021  से 31   मार्च 2022   के लिए यह  31.03.2021  की लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर किया जाएग.   जिन बैंकों की लेखापरीक्षा की जा चुकी है केवल उन बैंकों को ही 01 जुलाई 2020 को अथवा उसके बाद मंजूरी और आहरण की अनुमति दी जाएगी. 
4.3    वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान वित्तीय मापदण्डों में किसी भी प्रकार की बेहतरी पर सीमित समीक्षा के बाद और सनदी लेखाकार से प्राप्त प्रमाणपत्र तथा उस पर नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा की गई अनुशंसा के आधार पर विचार किया जा सकता है. 
4.4  सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं सहित कृषि और कृषीतर दोनों क्षेत्रों के अंतर्गत पुनर्वित्त के आहरण के मामले में ये पात्रता मानदंड लागू होंगे. 
 
5.  पात्र प्रयोजन 
 
5.1 आहरण आवेदन की तारीख की स्थिति के अनुसार जो कृषि, एमएसएमई और अन्य पात्र ऋण बैंक की लेखा बहियों में बकाया हैं और जिनकी शेष बची परिपक्वता अवधि 18 महीनों से अधिक है, वे पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे. 
5.2 कृषि क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल गतिविधियों की सूची अनुबंध I में दी गई है. यह सूची निदर्शी है, सम्पूर्ण नहीं. इस सूची में जिन गतिविधियों का उल्लेख नहीं किया गया है वे यदि  कृषि और ग्रामीण विकास का संवर्धन करती हैं तो उन्हें भी शामिल किया जा सकता है. 
5.3  बल क्षेत्र 
हमारे पुनर्वित्त के माध्यम से बल क्षेत्र को सहायता प्रदान करने के प्रयास किए जाएँ. बल क्षेत्रों में भूमि विकास, लघु और सूक्ष्म सिंचाई, जल संरक्षण और जल संरक्षण के संसाधन, मत्स्यपालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह/ / रायतु मित्र समूह (आरएमजी) कृषि क्लिनिक और कृषि-व्यवसाय केंद्र, ग्रामीण आवास, कृषि प्रसंस्करण, बंजर भूमि विकास, शुष्क भूमि कृषि, ठेका खेती, क्षेत्र विकास योजनाएँ, वृक्षारोपण और बागबानी, कृषि-वानिकी, बीज उत्पादन, ऊतक संवर्धन पौध उत्पादन, कृषि-विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, भंडारगृह, मार्केट यार्ड आदि  सहित) कृषि औज़ार, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत, और पहले ही कार्यान्वित किए जा चुके वाटरशेड और आदिवासी विकास कार्यक्रमों के इलाकों में वित्तपोषण शामिल हैं. 
वृक्षारोपण और बागबानी क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों नामतः उच्च मूल्य की विदेशी सब्जियों के उत्पादन, नियंत्रित परिस्थितियों में कटफ्लावर अर्थात् पॉली हाउस/ ग्रीन हाउस, मशरूम जैसे उच्च-तकनीक निर्यातोन्मुख उत्पादन, टिशू कल्चर लैब, सब्जियों और फलों की उत्पादकता में वृद्धि के लिए प्रिसीजन फ़ार्मिंग, बगीचों और बागबानी फसलों के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना जैसे नवोन्मेषी/ बल क्षेत्रों के वित्तपोषण को  प्राथमिकता दी जाए. 
 
6.  पुनर्वित्त की सीमा 
 
सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मीज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा), पर्वतीय क्षेत्र (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड), पूर्वी राज्यों (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह), लक्षद्वीप और छत्तीसगढ़  तथा नाबार्ड द्वारा अधिसूचित अन्य क्षेत्रों के लिए पुनर्वित्त सहायता की सीमा निम्नानुसार होगी ;
क) क्रम सं.5.3 में किए गए उल्लेख के अनुसार सभी बल क्षेत्रों के लिए 95% ;   
ख) सभी अन्य विविधीकृत प्रयोजनों और कृषक साथी योजना के लिए 90%.
 
7.  ब्याज दर 
 
7.1    पुनर्वित्त पर ब्याज :  नाबार्ड, पुनर्वित्त की अवधि, वर्तमान बाजार दर, जोखिम अवधारणा इत्यादि के आधार पर पुनर्वित्‍त की ब्‍याज दर का निर्धारण करेगा और समय-समय पर इसमें संशोधन किया जाएगा. सभी लघु वित्‍त बैंकों को नाबार्ड द्वारा तैयार किए गए जोखिम आकलन मॉड्यूल के आधार पर 9 जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है. तदनुसार पुनर्वित्‍त पर निर्धारित ब्‍याज दर के अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम प्रभारित किया जाएगा.
7.2    दंडात्‍मक ब्‍याज :  चूक की स्थिति में, चूक की अवधि के लिए और चूक की राशि पर संवितरित पुनर्वित्‍त पर निर्धारित ब्‍याज दर के अतिरिक्त 2.00% प्रति वर्ष की दर से दंडात्‍मक ब्‍याज लिया जाएगा.
7.3    पुनर्वित्‍त की अवधि-पूर्व चुकौती के लिए दंड : अवधि-पूर्व चुकौती की स्थिति में शेष अवधि के लिए 2.50% प्रति वर्ष और प्रत्‍येक किस्‍त के लिए पूर्व चुकौती की तिथि से चुकौती की वास्‍तविक तिथि तक की पूर्ण अवधि (न्यूनतम 6 महिने) तक के लिए अलग से दंडात्मक ब्याज लिया जाएगा. न्‍यूनतम 3 कार्य दिवस की सूचना देने के बाद ही पूर्व-चुकौती की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.
 
8. चुकौती अवधि 
 
पुनर्वित्‍त के लिए चुकौती अवधि 18  महीने (न्यूनतम) से लेकर 5 वर्ष या उससे अधिक तक होगी. पुनर्वित्‍त के मूल धन की चुकौती की आवधिकता तिमाही होगी. महीने के किसी भी दिन मंजूर पुनर्वित्त के लिए मूलधन की राशि की पहली देय तिथि संवितरण की तारीख से छह माह पूरे होने के बाद अंतिम तारीख होगी और बाद में तिमाही आधार पर चुकौती की जाएगी. ब्याज के भुगतान की देय तारीखें मासिक अथवा छमाही आधार पर होंगी. चुकौती अनुसूची मंजूरी पत्र में निर्दिष्ट की जाएगी. 
 
9.   प्रतिभूति 
 
पुनर्वित्त अथवा अन्य माध्यम से लिये गये ऋण और अग्रिम के लिए प्रतिभूति नाबार्ड द्वारा सामान्य पुनर्वित्त करार )जीआरए/ मंजूरी पत्रों) में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार होगी.  साथ ही,  लघु वित्त बैंक को जिनके पास चालू खाता रखा गया है उस बैंक से नाबार्ड के पक्ष में एक विधिवत् अधिदेश भारतीय रिजर्व बैंक से  प्राप्‍त करना होगा.
 
10. अनुप्रवर्तन 
 
पुनर्वित्‍त के निबंधनों व शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए परियोजना स्थल पर सत्यापन/ जाँच का अधिकार नाबार्ड को होगा.
 
11.  वर्तमान में लागू अन्‍य सभी निबंधन व शर्तें अपरिवर्तित हैं..  
 
अनुबंध I
 
1. कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल हैं:
i. भूमि विकास 
ii. लघु और सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप सिंचाई 
iii. जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण 
iv. डेयरी 
v. मुर्गी पालन  
vi. मधुमक्खी पालन 
vii. रेशम उत्पादन 
viii. मत्स्यपालन 
ix. पशुपालन 
x. स्वयं सहायता समूहों / संयुक्त देयता समूहों/ रायतु मित्र समूहों को दिए गए ऋण   
xi. शुष्क भूमि कृषि 
xii. ठेका खेती 
xiii. बागान और बागबानी 
xiv. कृषि वानिकी 
xv. बीज उत्पादन 
xvi. टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन 
xvii. कृषि और अनुषंगी गतिविधियों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े कारपोरेट किसानों, अलग-अलग किसानों के कृषक उत्पादक संगठनों/ कंपनियों,  साझेदारी फ़र्मों और किसानों की सहकारी संस्थाओं और कृषक सहकारी संस्‍थाओं को समग्र रूप से ₹ 2 करोड़ प्रति उधारकर्ता तक के ऋण 
xviii. कृषि उपकरण 
xix. उच्च मूल्य/ विदेशी प्रजातियों की सब्जियों का उत्‍पादन, नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस में कट फ्लावर्स का उत्‍पादन
xx. मशरूम जैसे उच्च-तकनीक निर्यातोन्मुख उपादान इकाई, टिश्यूकल्चर प्रयोगशालाओं  की स्थापना करना, सब्जियों और फलों की उत्पादकता में वृद्धि के लिए प्रिसीजन फ़ार्मिंग. 
 
2. पुनर्वित्त के अंतर्गत निम्नलिखित अन्य गतिविधियाँ शामिल हैं :  
 
i. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने वाले निर्माण और सेवा क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) 
ii. कृषि क्लिनिक्स व कृषि व्यवसाय केन्द्र 
iii. ग्रामीण आवास 
iv. कृषि प्रसंस्करण 
v. मृदा संरक्षण और वाटरशेड विकास
vi. कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, गोदाम, मार्केट यार्ड, सिलोस आदि सहित) किसी भी क्षेत्र/ स्‍थान में  
vii. गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत,
viii. पहले से ही कार्यान्वित किए गए वाटर शेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के कार्यक्षेत्र में वित्तपोषण.
ix. प्लांट टिशू कल्चर और कृषि जैव प्रोद्यौगिकी, बीज उत्पादन, जैव कीटनाशक, जैव-उर्वरक और वर्मी कम्पोस्टिंग का उत्पादन
x. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), कृषि सेवा समिति (एफएसएस) और बडे आकार की आदिवासी बहुउद्देशीय समितियों  (एलएएमपीएस) को आगे ऋण देने के लिए बैंक ऋण  
xi. सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों को कृषि क्षेत्र में आगे ऋण देने के लिए बैंकों को ऋण की मजूरी 
खादी ग्राम उद्योग (केवीआई) 
xii. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रमीण विद्यालय, स्वास्थ्य उपचार सुविधा, पेयजल की सुविधा, स्वच्छता सुविधा और अन्य सामाजिक आधारभूत सुविधाएँ 
xiii. सौर आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, जैव खाद आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, पवन मिल, सूक्ष्म हाईडल प्लांट जैसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन और सड़क प्रकाश व्‍यवस्‍था और दूर दराज के गांवों में विद्युतीकरण जैसे अपारंपरिक ऊर्जा आधारित सार्वजनिक जन सुविधाएँ 
xiv. कृषक साथी योजना 
xv. क्षेत्र विकास योजनाएँ
 
3. कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक अन्य कोई गतिविधि जिसका उल्‍लेख ऊपर न किया हो, को भी शामिल किया जा सकता है.