Menu

वित्‍त वर्ष 2021-22 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति - नाबार्ड की सहायक कंपनियाँ

संदर्भ सं .राबैं.पुनर्वित्‍त /35/ पीपीएस -9/2021-22

 
12 अप्रैल 2021
परिपत्र सं. 68/ पुनर्वित्‍त -19/2021
 
प्रबंध निदेशक/ मुख्य कार्यपालक अधिकारी 
नैब्फिन्‍स/ नैबसमृद्धि/ नैबकिसान
 
महोदया / प्रिय महोदय
 
1.  नाबार्ड की सहायक कंपनियों हेतु वर्ष 2021-22 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण संबंधी पुनर्वित्‍त नीति को अंतिम रूप दे दिया गया है. नीति इसके साथ संलग्न है. यह नीति इस संबंध में वर्तमान सभी नीतियों का अतिक्रमण करती है. 
 
2. यह निर्णय लिया गया है कि आगे से सभी सहायक कं‍पनियों के पुनर्वित्‍त प्रस्ताव स्वीकृति  और निर्गमन हेतु पुनर्वित्‍त विभाग, प्रधान कार्यालय को प्रस्‍तुत किए जाएंगे न कि संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों को, जैसा कि वर्तमान पद्धति के अनुसार किया जा रहा है. 
 
3. यह परिपत्र नाबार्ड की वेबसाइट www.nabard.org पर इन्‍फॉर्मेशन सेंटर टैब के अंतर्गत भी उपलब्‍ध है.
 
4. कृपया पावती दें. 
 
भवदीय
(एल आर रामचंद्रन)
मुख्‍य महाप्रबंघक
संलग्‍न : यथोपरि
 
वित्‍त वर्ष 2021-22 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति - नाबार्ड की सहायक कंपनियाँ
 
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध ऋणवितरण हेतु पुनर्वित्त नीति -  नाबार्ड की सहायक कंपनियाँ
 
1. प्रस्‍तावना
 
नाबार्ड अपनी सहायक कंपनियों नामत: नैबसमृद्धि, नैबफिंस और नैबकिसान को कृषि और ग्रामीण विकास संबंधी कार्यकलापों के लिए ऋण सहायता प्रदान करने हेतु पुनर्वित्त प्रदान करता है. कृषि क्षेत्र (एफएस) और कृषीतर क्षेत्र (एनएफएस) कार्यकलापों के अंतर्गत स्वत: पुनर्वित्त सुविधा और पूर्व-स्वीकृति ऋण सुविधा दोनों माध्‍यमों से पुनर्वित्त प्रदान किया जाता है.
 
2. उद्देश्‍य
 
कृषि और अनुषंगी क्षेत्रों में पूँजी निर्माण को सहायता प्रदान करना.
बल कार्यकलापों के संवर्धन के लिए ऋण प्रवाह को दिशा देना.
संयुक्त देयता समूहों, स्वयं-सहायता समूहों, किसान उत्‍पादक संगठनों और अन्‍य की ऋण आवश्यकताओं 
 की पूर्ति.
कृषीतर क्षेत्र के कार्यकलापों को सहायता देकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों मेँ रोज़गार के वैकल्पिक अवसरों का संवर्धन करना.
 
3. सहायता का स्वरूप
 
सहायक कंपनियों को विभिन्‍न प्रयोजनों के लिए उनके संवितरणों के समक्ष निम्नलिखित दो सुविधाओं के अंतर्गत पुनर्वित्त सहायता प्रदान की जाती है:
 
3.1 स्वत: पुनर्वित्त सुबिधा (एआरएफ)
स्वत: पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ़) के अंतर्गत एजेसियों को स्वीकृति-पूर्व की विस्तृत औपचारिकताओं के बिना नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती है. सहायक कंपनियों अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन कर उधारकर्ताओं को वित्तीय सहायता  प्रदान करेंगी. वे घोषणा (आहरण आवेदन) के आधार पर नाबार्ड से पुनर्वित्त के लिए दावा कर सकते हैँ. इन आवेदनों में प्रयोजनों और संवितरित ऋण राशि का उल्लेख पुनर्वित्त के लिए दावा किया जाता है. ऐसे मामलों में नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्त की स्वीकृति और संवितरण साथ-साथ किए जाते हैं. कृषि क्षेत्र और कृषीतर क्षेत्र के अंतर्गत सभी प्रकार की परियोजनाओं के लिए, पुनर्वित्त की प्रमात्रा, बैंक ऋण या कुल वित्तीय परिव्यय की किसी ऊपरी सीमा के बिना स्वत: पुनर्वित्त सुविधा प्रदान की जाती है.
 
3.2 पूर्व-स्वीकृति  
 
सहायक कपनियाँ पूर्व-मंजूरी के अंतर्गत भी पुनर्वित्त प्राप्‍त कर सकती हैं जहाँ उन्हें नाबार्ड के अनुमोदन के लिए परियोजनाएँ प्रस्तुत करनी होती हैं. स्वीकृति प्रदान करने से पहले, नाबार्ड इन परियोजनाओं की तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक-योग्यता का मूल्‍यांकन करता है. ऐसे मामलों में विधिवत् मूल्‍यांकन के बाद ही ऋण स्वीकृत  किया जाएगा.
 
4. पुनर्वित्त की प्रमात्रा
 
इन संस्थाओं (जिन्‍हें सामान्यतया बाज़ार/ अन्‍य स्रोतों से निधियाँ उपलब्ध नहीं होती हैं) के लिए पुनर्वित्त की प्रमात्रा निम्नानुसार  होगी:
 
i. पैरा सं. 5.2 में उल्लिखित सभी बल क्षेत्रों के लिए 95%.
ii. अन्य विविध प्रयोजनों के लिए 90%. 
भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार संचयी आधार पर एक्सपोजर जोखिम का ध्यान रखने की दृष्टि से कुल बकाया पुनर्वित्त सहायक कंपनियों द्वारा दिए गए अर्जक ऋणों की प्रमात्रा से अधिक न हो.
 
4.1 पात्रता मानदंड - नाबार्ड से पुनर्वित्त के आहरण हेतु पात्रता मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है. वर्ष 2021-22 हेतु  निर्धारित पात्रता मानदंड निम्नानुसार  हैं:
 
4.2 पंजीकरण: अनुमोदित गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था के रूप में कार्य करने के लिए एजेंसी के पास भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-1ए के अंतर्गत पंजीकरण का प्रमाणपत्र होना चाहिए.
 
4.3 सीआरएआर : भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित न्यूनतम पूँजी पर्याप्तता अनुपात (वर्तमान में 15%) का पालन किया जाना चाहिए.
 
4.4 निवल लाभ : पिछले चार वितीय बर्षों में से कम-से-कम तीन वर्षों में (2017-18, 2018-19 2019-20 और 2020-21 में से 3 वित्तीय वर्ष) संस्था को निवल लाभ में होना चाहिए.
 
4.5 निवल अनर्जक आस्तियां: 4% से अधिक नहीं होनी चाहिए.
 
4.6 संस्था के बहिर्नियमों में नाबार्ड जैसी उच्चतर वित्तीय एजेंसियों सहित अन्य वित्तीय एजेंसियों से उधार लेने के लिए प्रावधान होना चाहिए.
 
4.7 31.03.2021 के बाद वित्तीय मानदंडों में यदि किसी प्रकार के सुधार की स्थिति में उस पर सनदी लेखाकार द्वारा सीमित समीक्षा और प्रमाण पत्र  के आधार पर विचार किया जाएगा. 
 
5. पात्र प्रयोजन
 
आहरण आवेदन की तारीख को सहायक कंपनी की लेखा बहियों में 18 महीनों से अधिक की शेष परिपक्वता अवधि वाले बकाया कृषि, एमएसएमई, सूक्ष्म वित्त और अन्‍य पात्र ऋण पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगें.
  
5.1  कृषि क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल गतिविधियों की निदर्शी सूची अनुबंध I में दी गई है. सूची निदर्शी है, सम्पूर्ण नहीं. उक्त सूची में शामिल न की गई गतिविधियों को भी शामिल किया जा सकता है यदि वे  कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देती हों तो. 
 
5.2  बल क्षेत्र 
 
बल क्षेत्रों को सहायता प्रदान करने के प्रयास किए जाएं. बल क्षेत्रों में भूमि विकास, लघु एवं सूक्ष्म सिंचाई, जल रक्षण और जल संरक्षण उपकरण, मत्‍स्‍यपालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह/ रैतु मित्र समूह (आरएमजी), कृषि क्लीनिक और कृषि व्यवसाय केन्‍द्र, ग्रामीण आवासन, कृषि-प्रसंस्‍करण, बंजर भूमि विकास,  शुष्क भूमि विकास, ठेका खेती, क्षेत्र विकास योजनाएँ, बागान और बागवानी, कृषि-वानिकी, बीज उत्‍पादन, ऊतक संवर्धन पौध उत्पादन, कृषि-विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण,  भंडारागार, मार्केट यार्ड आदि सहित) कृषि उपकरण, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत, पहले से कार्यान्वित वाटरशेड के क्षेत्रों और जनजाति विकास कार्यक्रम में वित्तपोषण शामिल हैं.
 
6. निधीयन के लिए निबंधन और शर्तें
 
नाबार्ड द्वारा समय-समय पर निर्धारित मानक निबंधन और शर्तें लागू होंगी. यह सुनिश्चित करने के लिए कि नैबसमृद्धि, नैबफिन्स और नैबकिसान द्वारा पुनर्वित्त के निबंधनों और शर्तों का पालन किया जा रहा है, स्थल पर जाकर सत्यापन करने/ जाँच करने का अधिकार नाबार्ड के पास सुरक्षित रहेगा. 
 
6.1 पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज : पुनर्वित्त पर ब्‍याज की दरें  नाबार्ड द्वारा निर्धारित किया जाएगी और यह समय-समय पर संशोधन के अधीन होगी. 
6.2 दंडात्मक ब्‍याज : चूक की स्थिति में, जिस ब्याज दर पर पुनर्वित्‍त संवितरित किया गया था उसके अलावा चूक की राशि पर और चूक की अवधि के लिए 2% प्रति वर्ष की दर से दंडात्‍मक ब्‍याज प्रभारित किया जाएगा.
6.3 पुनर्वित्त की समय-पूर्व चुकौती के लिए दंड : समय-पूर्व चुकौती के दंड की दर 2.50% प्रति वर्ष रहेगी और दंड, समय-पूर्व चुकौती की तारीख से चुकौती के लिए देय किश्‍त की वास्तविक विहित तारीख तक समग्र अवधि के लिए देय प्रत्येक किश्‍त के लिए अलग- अलग न्यूनतम छह महीनों की अवधि के साथ प्रभारित किया जाएगा. न्यूनतम 3 कार्य दिवसों की अवधि की संसूचना के पश्चात् ही पूर्व अदायगी की जा सकती है तथापि, यदि समय-पूर्व चुकौती की स्थिति वास्‍तविक वसूलियों के कारण उत्पन्न हुई है तो नाबार्ड की सहायक कंपनियों के लिए इस दंड से छूट देने पर विचार किया जाएगा.
 
7. चुकौती अवधि 
 
पुनर्वित्‍त के लिए चुकौती की अवधि 18 महीनों (न्यूनतम) से 5 वर्षों तक अथवा इससे अधिक की अवधि के बीच रहती है. मूलधन और ब्‍याज की चुकौती की अंतिम तिथि तिमाही आधार पर होगी और मूल धन के लिए अंतिम तिथियां होंगी 30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसंबर और 31 मार्च और ब्‍याज के लिए अंतिम तिथियां होंगी 01 जुलाई, 01 अक्‍तूबर, 01 जनवरी और 01 अप्रैल. तिमाही की किसी भी तारीख को मंजूर पुनर्वित्‍त के मूलधन की चुकौती की पहली अंतिम तिथि उसकी अगली तिमाही में रहेगी. 
 
8. प्रतिभूति
 
नाबार्ड की सहायक कंपनियों के लिए निर्धारित किए गए प्रतिभूति मानदंड निम्‍नानुसार हैं :
 
क. नाबार्ड के साथ सामान्‍य पुनर्वित्‍त करार (जीआरए) का निष्पादन.
 
ख. सहायक कंपनी के अपने प्रमुख बैंकर के पास रखे गए चालू खाते को नामे करने से संबंधित अधिदेश, जो प्रमुख बैंकर द्वारा विधिवत् प्राधिकृत हो.
 
ग. नाबार्ड की सहायक कंपनियां, नाबार्ड से ली गई पुनर्वित्त सहायता के बराबर प्रतिभूतियां लेकर न्यास के रूप में अपने पास रखना. 
 
घ. बोर्ड का संकल्प जिसमें एजेंसी की उधार लेने की शक्ति, नाबार्ड से उधार लेने के लिए प्राधिकार, प्राधिकृत हस्‍ताक्षरकर्ताओं की सूची और नमूना हस्‍ताक्षर दिए जाएं और इस बात की पुष्टि करते हुए प्रमाण-पत्र भी प्रस्‍तुत किया जाए कि नाबार्ड से लिया जाने वाला मौजूदा उधार एजेंसी की उधार लेने की समग्र सीमा के भीतर है. 
नाबार्ड ने अपने द्वारा मंजूर पुनर्वित्‍त के लिए नाबार्ड की सहायक कंपनियों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली किसी अतिरिक्‍त प्रतिभूति का अधित्‍याग करने का निर्णय लिया है. 
 
9. परियोजनाओं की पूर्व-लेखापरीक्षा, अनुप्रवर्तन और पर्यवेक्षण
 
वर्तमान नियमों और विनियमों का अनपालन और पुनर्वित्‍त के नियम व‍ शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के‍ लिए नाबार्ड को स्‍वयं या (उधारकर्ता के खर्च पर) किसी अन्‍य संस्‍था के माध्‍यम से बैंक की बहियों और अन्‍य संबंधित सामग्री की विशेष लेखापरीक्षा का अधिकार होगा. नाबार्ड को यह अधिकार भी होगा कि वह मौके पर सत्यापन/ जाँच करे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पुनर्वित्‍त से संबंधित निबंधनों और शर्तों का पालन किया जा रहा है.
 
9.1 नाबार्ड की सहायक कंपनियों को किए जाने वाले सभी संवितरणों को जारी करने से पूर्व बैंक के समवर्ती लेखापरीक्षकों द्वारा इनकी पूर्व-लेखापरीक्षा की जाएगी.
अनुबंध I 
 
1. कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियां शामिल हैं: 
i. भूमि विकास 
ii. लघु और सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप सिंचाई 
iii. जल रक्षण और जल संरक्षण उपकरण 
iv. डेयरी 
v. मुर्गी पालन 
vi. मधुमक्खी पालन 
vii. रेशम उत्पादन 
viii. मत्स्यपालन 
ix. पशुपालन 
x. स्वयं सहायता समूहों / संयुक्त देयता समूहों / रैतु मित्र समूहों को दिए गए ऋण 
xi. शुष्क भूमि कृषि 
xii. ठेका खेती 
xiii. बागान और बागवानी
xiv. कृषि वानिकी 
xv. बीज उत्पादन 
xvi. टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन 
xvii. कारपोरेट किसानों, कृषक उत्‍पादक संगठनों/ वैयक्तिक किसानों की कंपनियों, साझेदारी फर्मों तथा सीधे कृषि और अनुषंगी गतिविधियों में लगे हुए किसानों की सहकारी संस्‍थाओं को समग्र रूप से रु.2 करोड़ प्रति उधारकर्ता तक के ऋण 
xviii. कृषि उपकरण 
xix. उच्च मूल्य/ विदेशी प्रजातियों की सब्जियों का उत्‍पादन, नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉलीहाउस/ ग्रीनहाउस में कट फ्लावर्स का उत्‍पादन 
xx. सब्जियों और फलों की उत्पादकता में वृद्धि के लिए मशरूम, टिश्यूकल्चर प्रयोगशालाओं, प्रेसिज़न फार्मिंग जैसी उच्‍च प्रोद्योगिकी वाली निर्यातोन्‍मुख उत्‍पादन इकाइयों की स्‍थापना. 
 
2. पुनर्वित्त के अंतर्गत निम्नलिखित अन्य गतिविधियां शामिल हैं: 
 
i. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का सृजन करने वाले निर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) 
ii. कृषि क्लिनिक्स व कृषि व्यवसाय केन्द्र 
iii. ग्रामीण आवास 
iv. कृषि-प्रसंस्करण 
v. मृदा संरक्षण और वाटरशेड विकास
vi. किसी भी क्षेत्र/ स्‍थान में स्थित कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, गोदाम, मार्केट यार्ड, साइलों आदि सहित). 
vii. गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत
viii. पहले से ही कार्यान्वित किए गए वाटर शेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में वित्तपोषण
ix. प्लांट टिशू कल्चर और कृषि जैव प्रौद्योगिकी, बीज उत्पादन, जैव कीटनाशकों, जैव-उर्वरकों का उत्‍पादन और वर्मी कम्पोस्टिंग.
x. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), कृषक सेवा समितियों (एफएसएस) और बड़े आकार की आदिवासी बहुउद्देश्‍यीय समितियों (एलएएमपीएस) को आगे ऋण देने के लिए बैंक ऋण
xi. सूक्ष्म वित्त संस्‍थाओं को कृषि क्षेत्र में आगे ऋण देने के लिए बैंकों द्वारा मंजूर ऋण. 
xii. खादी ग्रामोद्योग (केवीआई)  
xiii. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण विद्यालय, स्वास्थ्य उपचार सुविधा, पेयजल की सुविधा, स्वच्छता सुविधा और अन्य सामाजिक आधारभूत सुविधाएं 
xiv. सौर आधारित पावर जनरेटर, जैव ईंधन आधारित पावर जनरेटर, पवन चक्कियाँ, सूक्ष्म हाईडल प्लांट जैसी नवीकरणीय ऊर्जा और सड़क प्रकाश व्‍यवस्‍था और दूर दराज के गांवों में विद्युतीकरण जैसी गैर पारंपरिक ऊर्जा आधारित सार्वजनिक जन सुविधाएं 
xv. कृषक साथी योजना 
xvi. क्षेत्र विकास योजनाएँ
 
3. कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक अन्य कोई गतिविधि जिसका उल्‍लेख ऊपर न किया गया हो, को भी शामिल किया जा सकता है.