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गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध पुनर्वित्त ऋण नीति
 
संदर्भ. संख्य राबैं.पुनर्वित्त /151/ पीपीएस -156/ 2021-22
14 मई 2021
परिपत्र सं. 96/ पुनर्वित्त – 31/2021
प्रबंध निदेशक/ मुख्य कार्यकारी अधिकारी
 
महोदया / प्रिय महोदय 
 
गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध पुनर्वित्त ऋण नीति
 
1.  वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दिया गया है और उसे हम इसके साथ संलग्न कर रहे हैं.
 
2.  यह परिपत्र नाबार्ड के वेबसाइट www.nabard.org के सूचना केंद्र के अंतर्गत भी उपलब्ध है.
 
3.  पुनर्वित्त प्रस्तावों को नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से भेजा जा सकता है, जहां गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी का कारपोरेट/ प्रधान कार्यालय स्थित है.
 
4.   कृपया पावती दें.
 
भवदीय
(एल आर रामचंद्रन)
मुख्य महाप्रबंधक
संलग्नक : यथोपरि
 
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु  योजनाबद्ध ऋण के लिए पुनर्वित्त नीति
 
1. परिचय
 
नाबार्ड अपने अधिदेश के अनुसार राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के अधिनियम, 1981 की धारा 25 (1) (क) के प्रावधानों के अंतर्गत अनुमोदित वित्तीय संस्थाओं को उनके द्वारा ग्रामीण  और अर्ध शहरी क्षेत्रों में  कृषि, संबद्ध गतिविधियों, ग्रामीण आवास, सूक्ष्म लघु मद्यम उद्यमों  और अन्य संबंधित गतिविधियों हेतु किसानों, स्व-सहायता समूहों, संयुक्त देयता समूहों और अन्यों को दिए गए ऋणों के संबंध में उनके संसाधनों की पूर्ति के लिए उनके  दीर्घावधि पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता है. 
 
2. उद्देश्य
 
कृषि क्षेत्रों में पूंजी निर्माण को सहायता करना जिससे कृषि क्षेत्र के  प्रगती का संवर्धन को सके 
बल क्षेत्र गतिविधियों के संवर्धन हेतु  ऋण  प्रवाह को दिशा देना.
संयुक्त देयता समूहों, स्वंय सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों और अन्य की ऋण आवश्यकताओं की पूर्ति.  
कृषितर गतिविधियों को सहायता प्रदान कर ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में वैकल्पिक रोज़गार अवसर प्रदान करना. 
 
3. पुनर्वित्त सुविधा का स्वरूप
 
नाबार्ड, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी)  को निवेश ऋण के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के प्रयोजनों के लिए उनके द्वारा किये गए संवितरणों के समक्ष निम्नलिखित दो प्रकार की व्यवस्था में पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता है.
 
3.1 स्वत: पुनर्वित्त सहायता  (एआरएफ) 
स्वत : पुनर्वित्त सहायता   (एआरएफ) गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों  (एनबीएफसी) पूर्व औपचारिकताओं की विस्तृत प्रक्रिया  के बिना नाबार्ड से  वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती है. गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) अपने स्तर पर प्रस्ताव का मूल्यांकन कर उधारकर्ताओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर सकती हैं. इसके बाद गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों  (एनबीएफसी) विभिन्न प्रयोजनों हेतु संवितरित  ऋण राशि की सूचना देते हुए घोषणा के आधार पर ( आहरण आवेदन में) नाबार्ड से पुनर्बित्त का दावा कर सकते है. ऐसे मामलों में, नाबार्ड पुनर्वित्त की स्वीकृति और संवितरण साथ साथ करता है.
3.2   पूर्व मंजूरी
यदि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों  (एनबीएफसी) पूर्व मंजूरी प्रक्रिया के अधीन पुनर्वित्त सहायता प्राप्त करना चाहती है तोह उन्हें नाबार्ड के अनुमोदन के लिए परियोजनाएं प्रस्तुत करनी होगी. इनकी स्वीकृति से पहले नाबार्ड इन परियोजनाओं की तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवयहार्यता और बैंकिंग योग्यता का आकलन करता है.
 
4.  पात्रता मानदंड
 
नाबार्ड से पुनर्वित्त आहरण के लिए पात्रता मानदंडों की समय समय पर समीक्षा की जाती है. रु 50,000 करोड़ से अधिक एयूएम वाली गैर बैंकिंग वित्त कंपनी को बड़ी, रु 10,000 करोड़ से रु 50,000 करोड़ के बीच एयूएम को मद्यम और रु 500 करोड़ से रु 10,000 करोड़ तक के एयूएम वाली  गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों  (एनबीएफसी) को छोटी श्रेणी  में रखा गया है. वर्ष 2021-22 के लिए संशोधित पात्रता मानदंड इस प्रकार है. 
4.1 पंजीकरण
संस्था के पास, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45 1A के अधीन एक अनुमोदित वित्तीय संस्था के रूप में कार्य करने के लिए जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र होना चाहिए.
4.2  गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों  (एनबीएफसी) का प्रकार
जमाराशियाँ लेनेवाली और जमाराशियाँ न लेनेवाली दोनों ही प्रकार की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां  नाबार्ड से पुनर्वित्त लेने के लिए पात्र होंगी.
4. 3  कारोबार अवधि 
ऋण स्वीकृति तिथि  को बडी़ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों  (एनबीएफसी) के मामले में उन्हें कम से कम पिछले 10 वर्ष, मध्यम और छोटी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों  (एनबीएफसी) के मामले में उन्हें कम से कम पिछले 5 वर्ष से ॠण देने के कारोबार में कार्यरत होनी चाहिये . 
4.4 पूंजी  पर्याप्तता अनुपात  (सीआरएआर) गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी   की पूंजी पर्याप्तता अनुपात  (सीआरएआर) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय समय पर  निर्धारित सीमा के  अनुसार होना चाहिये (वर्तमान में यह 15% है)
4.5 निवल लाभ  : गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी को 4 वर्षों में (वर्ष 2017-18, वर्ष 2018-19, वर्ष 2019-20 और वर्ष 2020-21 में से तीन वित्तीय वर्ष ) से कम से कम 3 वित्तीय वर्षों में निवल लाभ में होना चाहिए.
4.6  निवल अनर्जक आस्तियों (एनपीए) निवल अनर्जक आस्तियों (एनपीए) का स्तर (क) बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के मामले में 6% ( ख) मध्यम  गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए 5%  और (ग) छोटी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए 4% होना चाहिए.
4.7  संस्था के बहिर्नियम ( मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन) में उच्चतर वित्तपोषक संस्थाओं से ऋण लेने का प्रावधान होना चाहिए.
4.8  गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों  को एन बी डी 1 से एन बी डी 5 तक की आंतरिक जोखिम रेटिंग का पालन करना होगा.
4.9  गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की रेटिंग
i. नाबार्ड से पुनर्वित्त प्राप्त करने के लिए  गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी की न्यूनतम रेटिंग ( दीर्घावधि ऋण प्रलेखों और बैंक सुविधाओं और मर्यादित निक्षेप कार्यक्रम पर) "ए ए" (+, - सहित) होनी चाहिए बशर्ते वे अन्य नियम और शर्तों को पूरा करते हों. यह रेटिंग भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)/ भारतीय रिज़र्व बैंक ( आर बी आई) द्वारा अनुमोदित किसी रेटिंग संस्था से प्राप्त की जानी चाहिए.
ii. सिक्किम सहित पूर्वोत्तर राज्यों के मामले में पात्रता मानदंडों में रियायत देते हुए 'ए' (+, - सहित) तक
iii. प्रस्ताव की प्रस्तुति के समय रेटिंग की वैधता कम से कम 3 महिने तक की होनी चाहिए.
4.10  01 अप्रैल 2020 से 30 जून 2020 अवधि के लिए पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन 31 मार्च 2020 अथवा 31 मार्च 2021 की (यदि 31 मार्च 2021 की स्थिति की लेखापरीक्षा उपलब्ध हो तो) लेखपरिक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर किया जाएगा. 01 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2022 तक कि अवधि के लिए पात्रता मानदंडों और जोखिम का आकलन 31 मार्च 2021 की लेखपरिक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर किया जाएगा. 01 जुलाई  2021 को या इसके बाद केवल उन्हीं गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को स्वीकृति और आहरण की अनुमति होगी जिनकी लेखा परीक्षा पूरी कर ली गई है.
4.11 वित्तीय वर्ष 2021-22 में वित्तीय मानदंड में किसी परिवर्तन को सीमित समीक्षा और सनदी लेखाकार (चार्टर्ड अकाउंटेंट) से विधिवत प्रमाणन और नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से इसकी सिफारिश के आधार पर विचार किया जाएगा.
4.12  गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के उधारकर्ताओं को दिए जानेवाले ऋण पर ब्याज की दर का निर्धारण करने के लिए गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भारतीय रिज़र्व बैंक के 01 सिंतबर 2016 को जारी मास्टर परिपत्र सं आर बी आई/ डी एन बी आर / 2016-17/ 45( मास्टर डायरेक्शन डी एन बी आर. पी डी.008/03.10.119/2016-17(समय समय पर यथा संशोधित) में दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करना होगा.
 
5.  पात्र प्रयोजन
 
ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षत्रों में कृषि और अनुषंगी गतिविधियों, ग्रामीण आवास, ग्रामीण कृषितर क्षेत्र, सूक्ष्म लघु, मध्यम उद्यम, सूक्ष्म वित्त और भारतीय रिज़र्व बैंक के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण दिशानिर्देशों के अंतर्गत आनेवाले ऐसे सभी अन्य पात्र ऋण जिनकी परिपक्वता अवधि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के बही खातों में आहरण आवेदन की तिथि को 18 महीने से अधिक है, वे पुनर्वित्त के लिए पात्र है.
 
6.  ब्याज दर
 
6.1 पुनर्वित्त पर ब्याज दर : पुनर्वित्त की ब्याज दर का निर्धारण पुनर्वित्त की अवधि, प्रचलित बाज़ार दर, जोखिम अवधारणा इत्यादि के आधार पर किया जाएगा और  इस में समय समय पर परिवर्तन किया जा सकता है. गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को नाबार्ड द्वारा तैयार किये गए आंतरिक जोखिम आकलन मोड्यूल के अनुसार 9 जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है. पुनर्वित्त की प्रमात्रा और जोखिम प्रीमियम को इसी आधार पर तय किया जाएगा. ऋण की अवधि के दौरान आंतरिक/ बाह्य रेटिंग में कमी आने पर ऐसी कमी के समय, विद्यमान जोखिम प्रीमियम की दर से अतिरिक्त ब्याज प्रभारित किया जाएगा.
6.2  दंडात्मक ब्याज : चूक की स्थिति में, चूक की अवधि के लिए और चूक की राशि पर दंडात्मक ब्याज संवितरित पुनर्वित्त की निर्धारित ब्याज दर से 2% प्रति वर्ष अधिक की दर से लिया जाएगा.
6.3  पुनर्वित्त की अवधि-पूर्व चुकौती के लिए दंड : अवधि-पूर्व चुकौती की स्थिति में शेष अवधि के लिए 2.50% प्रति वर्ष और प्रत्येक किस्त के लिए  पूर्व चुकौती की तिथि से चुकौती की वास्तविक तिथि तक की पूर्ण अवधि (न्यूनतमे 6 महीने) तक के लिए अलग से  दंडात्मक ब्याज लिया जाएगा. न्यूनतम 3 कार्य दिवस की नोटिस देने के बाद ही पूर्व चुकौती की प्रक्रिया शुरु की जा सकती है.  
 
7.  चुकौती अवधि 
 
पुनर्वित्त के लिए चुकौती अवधि 18 महीने (न्यूनतम) से 5 वर्ष या इससे अधिक होगी. मूलधन और ब्याज की चुकौती के लिए देय तिथि तिमाही आधार पर होगी. मूलधन की देय तिथि 30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसम्बर और 31 मार्च  होगी और ब्याज के लिए देय तिथि 01 जुलाई, 01 अक्तूबर, 01 जनवरी  और 01 अप्रैल होगी. तिमाही के दौरान किसी भी तारीख को स्वीकृत पुनर्वित्त के लिए मूलधन के पहली चुकौती अगली तिमाही में देय होगी.  मासिक आधार पर मूलधन और ब्याज की चुकौती का विकल्प भी उपलब्ध है.
 
8.  प्रतिभूति मानदंड
 
गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के लिए प्रतिभूति के मानदंड निम्नानुसार निर्धारित किए गए हैं.
 
क) प्रतिभूति निम्नानुसार होगी
(i) बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को जारी पुनर्वित्त राशि का 1.10 गुना
(ii) मध्यम गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को जारी पुनर्वित्त राशि का 1.20 गुना
(iii) छोटी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को जारी पुनर्वित्त राशि का 1.25 गुना
(ख) प्रतिपभूति के मूल्य में कमी यदि कोई हो, की पूर्ति अतिरिक्त प्रतिभूतियों के माध्यम से की जाएगी ताकि नाबार्ड के देयतायों के संबंध में उपर्युक्त बकाया पुनर्वित्त के न्यूनतम 1.10/ 1.20/ 1.25 गुना तक की पर्याप्त प्रतिभूति उपलब्ध हो सके.
(घ)   पुनर्वित्त से दिये गए ऋणों के लिए गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी को उधारकर्ताओं से ली गई प्रतिभूतियों को नाबार्ड के न्यास के रूप में अपने पर रखना होगा.
(ड)  नाबार्ड के साथ सामान्य पुनर्वित्त करार का निष्पादन करना.
(च)   गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के प्रमुख बैंकर के पास रखे चालू खाते को नामे करने का अधिदेश जो प्रमुख बैंकर द्वारा विधिवत रूप से प्राधिकृत किया गया हो और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी से इस आशय का वचन पत्र की पुनर्वित्त की पूर्ण चुकौती किए जाने तक इसी चालू खाते का परिचालन किया जाएगा.
(छ) गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के ऋण लेने की शक्तियों को इंगित करते जुए निदेशक मंडल का संकल्प, उच्चतर संस्थाओं / वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेने का प्राधिकार, नमूना हस्ताक्षर सहित प्राधिकृत  हस्ताक्षरकर्ताओं की सूची और नाबार्ड से लिया जाने वाला ऋण गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के ऋण लेने की समग्र सीमा के भीतर होने के आशय का एक प्रमाण पत्र.
(ज)  नाबार्ड के पक्ष में बही ऋण  का समनुदेशन  और पुनर्वित्त से बनी आस्तियों पर कंपनी निबंधक के पास भार का पंजीकरण. नाबार्ड के जोखिम रेटिंग मोडयूल के अनुसार एनबीडी 1 से एनबीडी 5 तक की श्रेणियों में आनेवाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को उनके द्वारा दी गई प्रतिभूति पर पूर्ण भार के निर्माण के बाद पुनर्वित्त सहायता दी जाएगी. यदि पूर्ण भार उपलब्ध न हो तो नाबार्ड द्वारा अतिरिक्त प्रतिभूति और अन्य संबंधित दस्तावेजों को लेकर पुनर्वित्त सहायता दी जाएगी.
(झ)    ऐसी सभी आस्तियां जिनके समक्ष नाबार्ड से पुनर्वित्त प्रदान किया है, उन पर नाबार्ड का पूर्णाधिकार होगा. ऐसी आस्तियों को नाबार्ड अधिनियम धारा 29 के अनुसार नाबार्ड के न्यास के रूप में रखा जाएगा. इस संबंध में एनबीएफसी के सभी वर्तमान ऋणदाताओं को सूचना प्रेषित दी जाएगी.
(ञ)    बही ऋण के समनुदेशन के लिए विधिवत हस्ताक्षरित और मुद्रांकित करार, सुपुर्दगी पत्र और मांग वचन पत्र (डीपीएन), ऋण/ प्रतिभूति की पावती.
(ट)   नाबार्ड द्वारा आवश्यक समझे जाने पर अतिरिक्त प्रतिभूति नामत: व्यक्तिक गारंटी/ कारपोरेट गारंटी/ ग्राहणाधिकारयुक्त तरल संपार्श्विक प्रतिभूति प्रस्तुत करने होंगे और एस्क्रो व्यवस्था करनी होगी.
 
9. अनुप्रवर्तन
 
पुनर्वित्त के निबंधनों व शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नाबार्ड को स्थल पर सत्यापन / जांच का अधिकार होगा.
 
10.  वर्तमान में लागू अन्य सभी निबंधन व शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी.