Menu

मत्स्यपालन और जलचर पालन आधारभूत संरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) - पुनर्वित्त की उपलब्धता और ब्याज सहायता का दावा करने की प्रक्रिया
 
जैसा कि आप जानते हैं, भारत सरकार ने वर्ष 2018-19 के दौरान 5 वर्षों के लिए (2018-2019 से 2022-23) कुल निधि रु.7522.48 करोड़ के साथ  मत्स्यपालन और जलचर पालन आधारभूत  संरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) की स्थापना की है. एफ़आईडीएफ़ योजना के अंतर्गत, सभी अनुसूचित बैंकों/एनसीडीसी को ऋण देने वाली नोडल संस्थाओं(एनएलई) के रूप में प्राधिकृत गया है जो इस योजना के अंतर्गत निजी उद्यमियों/सहकारी संस्थाओं को सावधि ऋण सहायता प्रदान करेंगे.
 
2. एफआईडीएफ योजना के अंतर्गत, निजी उद्यमियों/सहकारी संस्थाओं को इस परियोजना का प्रस्ताव मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार को प्रस्तुत करना होगा, साथ ही प्रस्ताव की एक प्रति राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी), को भेजनी होगा, जो कि एफआईडीएफ के तहत नामित नोडल कार्यान्वयन संस्था (एनआईए) है. एनएफडीबी प्रस्ताव का तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन करेगा और इसे केंद्रीय अनुमोदन अनुप्रवर्तन समिति (सीएएमसी) के समक्ष प्रस्तुत करेगा. सीएएमसी द्वारा परियोजना प्रस्ताव के अनुमोदन पर, निजी उद्यमी/सहकारी संस्थाएं सावधि ऋण सहायता के लिए किसी भी अनुसूचित बैंक/एनसीडीसी से संपर्क कर सकते हैं.
 
3. व्यक्तिगत उद्यमियों और सहकारी संस्थाओं के संबंध में, ऋण अनुसूचित बैंकों/ एनसीडीसी द्वारा दिया जाएगा. नोडल कार्यान्वयन संस्था(एनआईए) के रूप में अनुसूचित बैंक/एनसीडीसी, एफ़आईडीएफ़ के तहत ऋण प्रदान करने के लिए स्वयं की निधि जुटा सकते हैं तथा अपने उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं. अनुसूचित बैंक एफआईडीएफ के कार्यान्वयन के लिए पात्र संस्थाओं (ईई) को ऋण संवितरण हेतु नाबार्ड से पुनर्वित्त का भी लाभ उठा सकते है. नाबार्ड के पुनर्वित्त पर ब्याज दर ग्राहक और अवधि विशिष्ट है और परिवर्तनशील है. उपर्युक्त योजना के अंतर्गत अभिनिर्धारित मत्स्यपालन आधारित आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु पात्र उधारकर्ताओं के लिए ऋण वितरण दर प्रति वर्ष 5.00% से कम नहीं होगी.
 
4. एफआईडीएफ के तहत ब्याज सहायता प्रति वर्ष 3.00% तक उपलब्ध होगी. इसके अलावा, भारत सरकार ने सभी नोडल ऋण संस्थाओं (एनएलई) को ब्याज अनुदान सहायता को वितरित करने के लिए नाबार्ड को पास थ्रू एजेंसी के रूप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत किया है और नाबार्ड ऐसे दावे प्राप्त करेगा, मिलान करेगा, संकलित करेगा और तिमाही आधार पर भारत सरकार को प्रस्तुत करेगा. इस संबंध में, एफआईडीएफ के तहत स्वीकृत ऋणों के संबंध में अनुसूचित बैंकों/एनसीडीसी द्वारा ब्याज सहायता का दावा करने के लिए उसकी प्रक्रिया और प्रारूप आपके सुलभ संदर्भ हेतु संलग्न हैं.
 
5. सभी एनएलई (एनसीडीसी/एससीबी) जिन्होंने एफआईडीएफ के तहत निजी उद्यमियों/ सहकारी संस्थाओं को ऋण दिया है, वे नाबार्ड, मुख्यालय, मुंबई से संपर्क करें और अपने नियंत्रक कार्यालयों के माध्यम से नाबार्ड, मुख्यालय को त्रैमासिक आईएस दावा प्रस्तुत करें.