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संयुक्त देयता समूहों के वित्त पोषण के लिए मॉडल व्यवसाय योजना - लघु वित्त बैंक और अनुसूचित निजी क्षेत्र के बैंक- प्रायोगिक परियोजना

संयुक्त देयता समूह (जेएलजी), भूमिहीन किसानों जैसे काश्तकार किसानों, मौखिक पट्टेदारों, बटाईदारों और छोटे/सीमांत किसानों और अन्य गरीब व्यक्तियों को कृषि, कृषीतर और गैर-कृषि गतिविधियों को शुरू करने हेतु ऋण प्रवाह को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप मे कार्य करता है. यद्यपी जेएलजी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग प्रणाली व्दारा संपार्श्विक मुक्त ऋण देना एक सफल पहल साबित हुई है, भूमिहीन गरीबों, किरायेदार किसानों, छोटे / सीमांत किसानों को ऋण उपलब्धता अभी भी अपर्याप्त है. जेएलजी के माध्यम से वित्तपोषण बढ़ाने के लिए लघु वित्त बैंकों, अनुसूचित निजी क्षेत्र के बैंको के लिए “संयुक्त देयता समूहों के वित्तपोषण के लिए मॉडल व्यवसाय योजना” का परिचालन किया जा रहा है, जिसके द्वारा, नाबार्ड पारस्परिक रूप से तय किए

गए निबंधन और शर्तों पर संयुक्त देयता समूहों के वित्तपोषण के लिए सुनिश्चित समर्थन के साथ बैंकों से सीधे या बिजनेस करेस्पोंडेन्ट / गैर सरकारी संगठनों के साथ एक द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन करेगा. नाबार्ड की सहायता राशि वित्तीय प्रोत्साहन के रूप में दि जाएगी जो जेएलजी के संवर्धन और बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और सलाह आदि के लिए प्रति जेएलजी रु.4,000/- होगी. ज्ञापन के अनुसार, संयुक्त देयता समूहों के गठन, संवर्धन, ऋण सहायता प्रदान करने का दायित्व संबन्धित बैंक का होगा. इस मॉडल के अंतर्गत बैंकों को जेएलजी पोर्टफोलियो बनाने के लिए कार्यनीति रूपरेखा का विवरण अनुबंध में दिया गया है. आपसे अनुरोध हैं कि नाबार्ड की सुनिश्चित समर्थन के साथ इस योजना का लाभ उठाएँ.