Menu

मौसमी कृषि परिचालन (एसएओ) के वित्तपोषण के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अल्पावधि (एसटी) पुनर्वित्त का प्रावधान - वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए नीति

कृपया दिनांक 11 अगस्त 2020 का हमारा परिपत्र संख्या 219/डॉर-74/2020 देखें जिसके माध्यम से नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21(1) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को मौसमी कृषि परिचालनों (एसएओ) के वित्तपोषण हेतु अल्पावधि पुनर्वित्त के लिए नाबार्ड की नीति संप्रेषित की गई थी. हम यह सूचित करते हैं कि वित्त वर्ष 2021-22 की अल्पावधि (मौ.कृ.प.) पुनर्वित्त नीति के तहत पात्रता मानदंड अनुलग्नक I (पैरा 3.2) में दिए गए विवरण के अनुसार आंतरिक जोखिम रेटिंग मानदंडों पर आधारित होंगे. यह आरआरबी को ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि ऋण प्रवाह में वृद्धि करने और निर्दिष्ट जिलों (सूची संलग्न) में जहां ऋण प्रवाह तुलनात्मक रूप से कम है, किफायती ऋण को बढ़ावा देने में सक्षम करेगा

2. वर्ष 2021-22 के दौरान, पुनर्वित्त पर ब्याज दर 4.5% प्रति वर्ष (भारत सरकार द्वारा संशोधन के अधीन, यदि कोई हो) होगी - केवल उन्हीं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए जो अपनी भागीदारी सहित, 7% प्रति वर्ष या उससे कम की दर से प्रति उधारकर्ता 3.00 लाख रुपए तक का फसल ऋण प्रदान करते हैं. इस संबंध में, बैंक को अनुबंध II के अनुसार एक वचन-पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है.

3. आप सभी शाखाओं को सूचित करें कि वे केसीसी योजना के कार्यान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और उधार लेने वाले सदस्यों को रुपे कार्ड जारी करें. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को केसीसी के संबंध में मासिक प्रगति की रिपोर्ट भी एन्श्योर पोर्टल पर देनी है.

4. वर्ष 2021-22 के लिए आपके बैंक को पुनर्वित्त आबंटन के बारे में हमारे क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा आपको सूचित किया जाएगा. आप ऋण-सीमा की मंजूरी के आवेदन के साथ-साथ पहले आहरण के लिए अपना आवेदन निर्धारित प्रोफार्मा में नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत कर सकते हैं.

5. कृपया इस पत्र की प्राप्ति सूचना हमारे क्षेत्रीय कार्यालय को दें.

मौसमी कृषि परिचालनों (एसएओ) के वित्तपोषण के लिए नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को अल्पावधि (एसटी) पुनर्वित्त का प्रावधान - वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए नीति

1.अल्पावधि (एसएओ) सीमा की परिचालन अवधि

वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालनों) सीमा की परिचालन अवधि 01.04.2021 से 31.03.2022 तक होगी. केवल परिचालन अवधि के दौरान संवितरित फसल ऋण के लिए बैंकों को अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालनों) पुनर्वित्त प्रदान किया जाएगा.

2. समेकित सीमा की मंजूरी Sanction of consolidated limit

a. बैंकों को यह ऋण सीमा नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21(4) के साथ पठित धारा 21(1)(i) के अंतर्गत बैंक द्वारा निष्पादित डीपीएन के समक्ष मंजूर की जाएगी.

b. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को प्रत्येक आहरण के समय लिखित रूप में घोषित करना है कि प्रस्तावित आहरण और पहले से प्राप्त पुनर्वित्त क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा प्रदान किए गए ऋणों के समक्ष है और पर्याप्त अनतिदेय ऋणों द्वारा कवर किया गया है. बैंकों को नाबार्ड को नियमित रूप से भौतिक रूप में या डिजीटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एनओडीसी विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है.

3.पात्रता मानदंड

3.1 लेखा परीक्षा

वर्ष 2019-20 के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की लेखापरीक्षा पूरी हो जानी चाहिए थी और वित्तीय विवरणों के साथ संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट, वर्ष की पहली तिमाही में ऋण आवेदन पर विचार करने के लिए नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की जानी चाहिए थी. इसके अलावा वर्ष 2020-21 के लिए, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की लेखा परीक्षा पूरी हो जानी चाहिए और उसकी रिपोर्ट 30.06.2021 तक प्रस्तुत की जानी चाहिए. 01.07.2021 को या उसके बाद पुनर्वित्त की मंजूरी/आहरण की अनुमति केवल उन्हीं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को दी जाएगी, जिनके पात्रता मानदंडों की स्थिति संतोषजनक है और जिन्होंने लेखा परीक्षा पूरी की है और संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत कर दी है.

3.2 नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की आंतरिक जोखिम रेटिंग

3.2.1 विशेष रूप से जरूरतमंद कृषि क्षेत्र को अधिक ऋण देने के लिए, यह निर्णय लिया गया है कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए सीआरएआर(CRAR), निवल एनपीए (Net NPA) और निवल लाभ (Net Profit) के मानदंड में छूट प्रदान की जाए और उन सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अल्पावधि पुनर्वित्त प्रदान किया जाए जिनकी आंतरिक जोखिम रेटिंग श्रेणी एनबीडी1 से एनबीडी7 है.

3.2.2. जोखिम प्रबंधन विभाग (आरएमडी) जारी दिशानिर्देशों के आधार पर नाबार्ड द्वारा सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की जोखिम रेटिंग की जाएगी और एनडीबी1 से एनडीबी7 की जोखिम रेटिंग प्राप्त करने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अल्पावधि (मौ.कृ.प.) के तहत पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.

3.2.3 जोखिम रेटिंग का मूल्यांकन सांविधिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट में इंगित वित्तीय आधार पर किया जाएगा. हालांकि, लेखापरीक्षा रिपोर्ट और नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट के बीच किसी भी भिन्नता की स्थिति में, नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट जोखिम रेटिंग के लिए मान्य होगी. बैंक के नियंत्रण से बाहर किसी भी कारण से, यदि बैंक पात्रता मानदंड को पूरा करने में असमर्थ है तो नाबार्ड पर्याप्त सुविधा/प्रतिभूति के साथ कमतर पात्रता मानदंडों पर विचार कर सकता है.

3.3 पहली तिमाही अर्थात 01 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 के दौरान पात्रता मानदंडों का निर्धारण 31.03.2020 या 31.03.2021 (यदि उपलब्ध हो) के अनुसार बैंक की लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति पर आधारित होगा. 01 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2022 तक के लिए, पात्रता मानदंडों का निर्धारण 31.03.2021 को लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति पर आधारित होगा. 01.07.2021 को या उसके बाद मंजूरी/आहरण की अनुमति केवल उन्हीं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को दी जाएगी, जिन्होंने लेखा परीक्षा पूरी कर ली है और नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को संतोषजनक लेखापरीक्षा रिपोर्ट जमा कर दी है, अथवा ऐसे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक जिन्हें विशेष मामले के रूप में अन्यथा अनुमति प्रदान की गई हो.
3.4. बैंकों द्वारा प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में ऋण प्रवाह में सुधार करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों का पालन करते हुए, नाबार्ड एसटीआरआरबी की समूह निधि के 25% का उपयोग उन निर्दिष्ट जिलों (सूची संलग्न) के लिए करेगा जहां ऋण प्रवाह तुलनात्मक रूप से कम है. नाबार्ड द्वारा चिन्हित जिलों में उपयोग की निगरानी आरआरबी द्वारा की जाएगी . इसके के लिए तिमाही के पूरा होने के 7 दिनों के भीतर, संलग्न प्रारूप (अनुलग्नक III) में त्रैमासिक एमआईएस जमा करने होंगे. तीसरी तिमाही के अंत में कॉर्पस के कम उपयोग के मामले में, यदि कोई हो, उस राशि को अन्य जिलों में पुन: आबंटित किया जा सकता है.

4. पुनर्वित्त की मात्रा

4.1 मंजूरी के लिए पुनर्वित्त की मात्रा निम्नानुसार होगी:

4.1.1 सामान्य क्षेत्र

नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की जोखिम रेटिंग पात्र सीमा
[वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
एनबीडी1 – एनडीबी4 20%
एनबीडी5 – एनडीबी7 15%
एनबीडी8 – एनडीबी9 पात्र नहीं

4.1.2पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 25% के अतिरिक्त पुनर्वित्त के लिए निम्नानुसार पात्र होंगे:

नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की जोखिम रेटिंग पात्र सीमा
[वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
एनबीडी1 – एनडीबी4 45%
एनबीडी5 – एनडीबी7 40%
एनबीडी8 – एनडीबी9 पात्र नहीं

4.1.3 पूर्वी क्षेत्र अर्थात बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ राज्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28 जिलों (भारत सरकार की बीजीआरईआई योजना के अंतर्गत) में स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक पुनर्वित्त के लिए लागू सामान्य मात्र के अलावा 5% की अतिरिक्त ऋण सीमा के लिए निम्नानुसार पात्र होंगे:

नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की जोखिम रेटिंग पात्र सीमा
[वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
एनबीडी1 – एनडीबी4 25%
एनबीडी5 – एनडीबी7 20%
एनबीडी8 – एनडीबी9 पात्र नहीं
4.2एक वर्ष के लिए वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) को वर्ष के दौरान संवितरित किए जाने वाले अनुमानित फसल ऋण के रूप में परिभाषित किया गया है (अर्थात बकाया राशि को छोड़कर जिसमें अतिदेय शामिल हैं). वर्ष 2021-22 के लिए पिछले तीन वर्षों के दौरान संवितरित फसल ऋण में औसत वृद्धि दर के आधार पर आरएलपी निकाला जा सकता है (पिछले चार वर्षों के फसल ऋण संवितरण आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए). हालांकि, जमीनी स्तर की वास्तविकताओं और अन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, यदि कोई हो, नाबार्ड ऐसे आरएलपी स्वीकार कर सकता है जो बैंक द्वारा निर्धारित आरएलपी से कम या अधिक हो.

5. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको का विलय

विलय किए गए बैंकों के मामले में तत्कालीन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की 31 मार्च 2020 की स्थिति पर विशेष लेखा परीक्षा या समग्र लेखापरीक्षित स्थिति के आधार पर अधिसूचना/विलयन की तारीख पर नए/विलय किए गए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की वित्तीय स्थिति के आधार पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का वर्ष 2021-22 के लिए ऋण सीमा का निर्धारण होगा. इसके साथ ही, यदि 31 मार्च 2021 की स्थिति के अनुसार सांविधिक लेखापरीक्षा की रिपोर्ट उपलब्ध हो तो उस बैंक को ऋण सीमा प्रदान करने पर विचार किया जा सकता है.

6. पुनर्वित्त का उद्देश्य

6.1इस सुविधा के तहत पुनर्वित्त का उद्देश्य लघु और सीमांत किसानों को अल्पावधि फसल ऋण के संवितरण को बढ़ाना है.
6.2काश्तकार किसानों (टीएफ) / मौखिक पट्टेदारों (ओएल) का वित्तपोषण

काश्तकार किसानों और मौखिक पट्टेदारों के वित्तपोषण के लिए भारत सरकार द्वारा दिए गए महत्व को ध्यान में रखते हुए, नाबार्ड ने संयुक्त देयता समूह योजना तैयार की है और इसे बैंकों के बीच परिचालित किया है. बैंकों को इस योजना के तहत या अन्य योजना के तहत काश्तकार किसानों/मौखिक पट्टेदारों को अधिकतम वित्तपोषण सुनिश्चित करना चाहिए.

6.3उप-सीमाओं की स्वीकृति

वित्तीय वर्ष के दौरान नाबार्ड द्वारा, अल्पावधि (मौ.कृ.प.) ऋण-सीमा के अंतर्गत, नीचे दी गई गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए अलग उप-सीमा स्वीकृत की जाएगी. तदनुसार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ऋण-सीमा आवेदन में उपर्युक्त उद्देश्यों के लिए ऋण-सीमा आवश्यकताओं को अलग से इंगित कर सकते हैं.

क) अन्य फसलों की खेती (ओसी)

ख) राष्ट्रीय तिलहन और पाम ऑयल मिशन (एनएमओओपी- तिलहन) के अंतर्गत चिन्हित जिलों में तिलहन की खेती,

ग) चिन्हित जिलों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत दलहन की खेती - दलहन (एनएफएसएम - दलहन) और

घ) जनजातीय समुदाय विकास (डीटीपी) के तहत जनजातीय वर्ग की उत्पादन संबंधी ऋण आवश्यकताएं.

7.पुनर्वित्त पर ब्याज दर

वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान, जो क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अपनी सहभागिता राशि सहित 7% दर से प्रति उधारकर्ता 3.00 लाख रुपए तक का फसल ऋण प्रदान करेंगे उनके लिए पुनर्वित्त पर ब्याज दर 4.5% प्रति वर्ष होगी (सरकार द्वारा संशोधन, यदि कोई हो, के अधीन)यह 01.04.2021 से आहरित पुनर्वित्त पर लागू होगा. ब्याज पहले की तरह 01 अक्टूबर और 01 अप्रैल को छमाही अंतराल पर देय है. बैंक को इस संबंध में अनुबंध II के अनुसार वचनपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है.

8.परिचालनात्मक अनुशासन

8.1 आहरण और चुकौती

ऋण-सीमा के समक्ष आहरित राशि मांग करने पर चुकानी होगी है. तथापि, ऋण-सीमा पर प्रत्येक आहरण को एक अलग ऋण के रूप में माना जाएगा और जिसे आम तौर पर आहरण की तारीख से 12 महीने की अवधि में चुकाया जाएगा. नाबार्ड द्वारा 12 महीने की समाप्ति से पहले चुकौती (पूर्ण अथवा आंशिक रूप से) न्यूनतम 15 कार्य-दिवसों के नोटिस या मूलधन के साथ 15 दिनों के ब्याज भुगतान के साथ स्वीकार कि जा सकती है. तथापि, यदि आहरण की तिथि से 30 दिन के बाद चुकौती की जाती है तो नोटिस अवधि में छूट दी जा सकती है.

8.2 अल्पावधि (मौ.कृ.प.) सीमा के अंतर्गत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा पुनर्वित्त का आहरण वित्तीय वर्ष के दौरान जारी ऋण में पुनर्वित्त के प्रतिशत तक सीमित होगा.

8.3अनतिदेय कवर

ऋण-सीमा पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा आहरण की अनुमति सभी उप-सीमाओं (उप-सीमा वार एनओडीसी के बजाय) के अंतर्गत कुल एनओडीसी की उपलब्धता के अधीन होगी. इस प्रयोजन के लिए, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को मासिक एनओडीसी विवरण प्रस्तुत करना होगा ताकि वह अगले महीने की 20 तारीख तक प्रत्यक्ष रूप से या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहुंच सकें. यदि समग्र एनओडीसी उपलब्ध है तो एनओडीसी में उप-सीमावार कमी के लिए कोई दंडात्मक ब्याज प्रभारित नहीं होगा.

प्रत्येक आहरण के समय, आहरण की तिथि को कुल एनओडीसी की उपलब्धता के संबंध में बैंक को निर्धारित प्रारूप में एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा. इसके अलावा, बैंकों द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी दिन, कुल सामान्य अल्पावधि (मौ.कृ.प.) बकाया और अतिरिक्त अल्पावधि (मौ.कृ.प.) बकाया उस तारीख को उपलब्ध कुल एनओडीसी से अधिक न हो.

8.4 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को एनओडीसी में कमी, यदि कोई हो, को तुरंत दूर करना चाहिए, ताकि नाबार्ड से उधार के लिए पर्याप्त अनतिदेय कवर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके. यदि कमी एक महीने के भीतर पूरी नहीं होती है, तो संबंधित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को इस तरह की कमी के होने की तारीख से कमी के पूरा होने की तिथि तक एनओडीसी में कमी की राशि पर, कमी की अवधि के लिए 1% का अतिरिक्त ब्याज देना होगा.
8.5 बकाया ऋण में मूलधन और ब्याज को अलग-अलग रखना

वर्तमान में प्रचलित प्रक्रिया के अनुसार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक बकाया राशि से ब्याज घटक (अतिदेय/अनतिदेय ब्याज) को अलग रख सकते हैं और नाबार्ड से पुनर्वित्त सहायता की पात्रता तय करने के लिए, ऋण-सीमा और आहरण आवेदन दोनों के लिए अपने आवेदनों में केवल मूल ऋण राशि का उल्लेख करें. इसी प्रकार, मासिक एनओडीसी विवरण में ऋण के केवल मूलधन के अंश (जारी, वसूली गई राशि, बकाया और अतिदेय) की सूचना दी जानी चाहिए.

8.6 चूक को दूर करना

जो बैंक निर्धारित देय तिथियों तक मूलधन, ब्याज और/या किसी अन्य देय राशि के भुगतान में नाबार्ड के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने में विफल रहते हैं, वे उस चूक के दूर होने तक नाबार्ड से किसी भी पुनर्वित्त सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे. मूलधन के पुनर्भुगतान और/या ब्याज के भुगतान में चूक की स्थिति में, बैंक नाबार्ड को 10% प्रति वर्ष की दर से चूक की अवधि के लिए ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा और यह राशि चूक की अवधि तक देय होगी. दंडात्मक ब्याज दरें समय-समय पर संशोधन के अधीन हैं.

8.7निरीक्षण का अधिकार

नाबार्ड बैंक के बही-खातों का निरीक्षण करने/करवाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

8.8 विशेष लेखा परीक्षा करवाने का अधिकार
.

नाबार्ड के पास स्वयं या अन्य एजेंसियों के माध्यम से बैंकों के खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री की विशेष लेखा परीक्षा कराने का अधिकार होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बैंक द्वारा खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री को नियम और विनियमों के अनुसार बनाए रखा जाता है और पुनर्वित्त के नियमों और शर्तों का पालन किया जाता है.

8.9अधिक आहरण

फसल ऋण संवितरण या एनओडीसी के बारे में गलत डेटा की रिपोर्टिंग के कारण पुनर्वित्त की अनुमेय सीमा से अधिक आहरण के मामले पर नाबार्ड गंभीरता से विचार करेगा. ऐसे मामलों में, नाबार्ड बैंक द्वारा लिए गए अतिरिक्त पुनर्वित्त को 3 दिनों के भीतर 1% प्रति वर्ष के दंडात्मक ब्याज के साथ वापस माँग सकता है.

9. सीमा का अंतिम-उपयोग

निधियों के विपथन, ब्याज सहायता/फसल ऋण के दुरूपयोग को टालने और स्वीकृत प्रयोजन के लिए निधियों के उचित अंतिम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए बैंकों को सूचित किया गया है कि वे दिनांक 20 अगस्त 2015 के हमारे परिपत्र सं. 175/डॉर-47/2015 में निहित निर्देशों का पालन करें और यह सुनिश्चित करें कि इन निर्देशों का अनुपालन किया जाता है.

10. विवरणियाँ

एसटीआरआरबी के दिशानिर्देशों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मांगी गई निधि की जानकारी संबंधित तिमाही के पूरा होने के बाद 07 दिनों के भीतर संलग्न निर्धारित प्रारूप (अनुलग्नक-IV) में तिमाही आधार पर नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की जाए.

अनुबंध II

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से उनके लेटरहेड पर लिया जाने वाला वचन-पत्र

मुख्य महाप्रबंधक / महाप्रबंधक
नाबार्ड
--------------- क्षेत्रीय कार्यालय

प्रिय महोदय

हमें यह विदित है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान अल्पावधि (मौ.कृ.प.) के लिए नाबार्ड द्वारा प्रदान की गई पुनर्वित्त पर ब्याज दर 4.5% प्रति वर्ष है जो भारत सरकार/भारतीय रिजर्व बैंक/नाबार्ड द्वारा समय-समय पर परिवर्तन, यदि कोई हो, के अधीन है. हमें यह भी विदित है कि भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई ब्याज सहायता की सुविधा भी समय-समय पर परिवर्तन के अधीन है.

हम समय-समय पर भारत सरकार/भारतीय रिजर्व बैंक/नाबार्ड द्वारा किए गए परिवर्तनों, यदि कोई हो, का पालन करेंगे.

सधन्यवाद,

आपका विश्वासी,

नाम

पद : अध्यक्ष

दिनांक:

अनुबंध III

NABARD Utilisation (amount disbursed) towards credit deficient districts (Amount in Rs. Cr.)

Sr. No State District STRRB FY2021-22
1 Andaman Nicobar Nicobar No RRB
2 Arunachal Pradesh Anjaw
3 Arunachal Pradesh Chunglang
4 Arunachal Pradesh Dibang Valley
5 Arunachal Pradesh East Kameng
6 Arunachal Pradesh East Siang
7 Arunachal Pradesh Kra Daadi
8 Arunachal Pradesh Kurung Kumey
9 Arunachal Pradesh Lohit
10 Arunachal Pradesh Longding
11 Arunachal Pradesh Lower Dibang Valley
12 Arunachal Pradesh Lower Siang
13 Arunachal Pradesh Lower Subansiri
14 Arunachal Pradesh Namsai
15 Arunachal Pradesh Pakke Kesang
16 Arunachal Pradesh Siang
17 Arunachal Pradesh Tawang
18 Arunachal Pradesh Tirap
19 Arunachal Pradesh Upper Siang
20 Arunachal Pradesh Upper Subansiri
21 Arunachal Pradesh West Kameng
22 Arunachal Pradesh West Siang
23 Assam Baksa
24 Assam Charaideo
25 Assam Chirang
26 Assam Dhemaji
27 Assam Dhubri
28 Assam Goalpara
29 Assam Hailakandi
30 Assam Hojai
31 Assam Karbi Anglong
32 Assam Kokrajhar
33 Assam North Cachar Hills
34 Assam South Salmara-Mankachar
35 Assam Udalguri
36 Assam West Karbi Anglong
37 Bihar Araria
38 Bihar Arwal
39 Bihar Aurangabad
40 Bihar Banka
41 Bihar Bhojpur
42 Bihar Darbhanga
43 Bihar Gaya
44 Bihar Gopalganj
45 Bihar Jamui
46 Bihar Jehanabad
47 Bihar Katihar
48 Bihar Khagaria
49 Bihar Kishanganj
50 Bihar Lakhisarai
51 Bihar Madhepura
52 Bihar Madhubani
53 Bihar Munger
54 Bihar Nalanda
55 Bihar Nawada
56 Bihar Paschimi Champaran
57 Bihar Purbi Champaran
58 Bihar Saharsa
59 Bihar Samastipur
60 Bihar Saran
61 Bihar Sheohar
62 Bihar Sitamarhi
63 Bihar Siwan
64 Bihar Supaul
65 Bihar Vaishali
66 Chhattisgarh Balod
67 Chhattisgarh Balrampur
68 Chhattisgarh Bastar
69 Chhattisgarh Bemetara
70 Chhattisgarh Bijapur
71 Chhattisgarh Dakshin Bastar Dantewada
72 Chhattisgarh Gariyaband
73 Chhattisgarh Jashpur
74 Chhattisgarh Kondagaon
75 Chhattisgarh Mungeli
76 Chhattisgarh Narayanpur
77 Chhattisgarh Sukma
78 Chhattisgarh Surajpur
79 Chhattisgarh Surguja
80 Chhattisgarh Uttar Bastar Kanker
81 Delhi North-East Delhi No RRB
82 Gujarat Dangs
83 Gujarat Dohad
84 Haryana Mewat
85 Jharkhand Chatra
86 Jharkhand Dumka
87 Jharkhand Garhwa
88 Jharkhand Giridih
89 Jharkhand Gumla
90 Jharkhand Jamtara
91 Jharkhand Khunti
92 Jharkhand Latehar
93 Jharkhand Pakur
94 Jharkhand Palamau
95 Jharkhand Sahebganj
96 Jharkhand Simdega
97 Lakshadweep Lakshadweep
98 Madhya Pradesh Alirajpur
99 Madhya Pradesh Anuppur
100 Madhya Pradesh Bhind
101 Madhya Pradesh Dindori
102 Madhya Pradesh Mandla
103 Madhya Pradesh Niwari
104 Madhya Pradesh Panna
105 Madhya Pradesh Sidhi
106 Madhya Pradesh Singrauli
107 Madhya Pradesh Tikamgarh
108 Madhya Pradesh Umaria
109 Maharashtra Gadchiroli
110 Manipur Bishenpur
111 Manipur Chandel
112 Manipur Churachandpur
113 Manipur Imphal East
114 Manipur Kakching
115 Manipur Kamjong
116 Manipur Kangpokpi
117 Manipur Noney
118 Manipur Pherzawal
119 Manipur Senapati
120 Manipur Tamenglong
121 Manipur Tengnoupal
122 Manipur Thoubal
123 Manipur Ukhrul
124 Meghalaya East Garo Hills
125 Meghalaya East Jaintia Hills
126 Meghalaya Jaintia Hills
127 Meghalaya North Garo Hills
128 Meghalaya South Garo Hills
129 Meghalaya South West Garo Hills
130 Meghalaya South West Khasi Hills
131 Meghalaya West Garo Hills
132 Meghalaya West Khasi Hills
133 Mizoram Champhai
134 Mizoram Kolasib
135 Mizoram Lawngtlai
136 Mizoram Lunglei
137 Mizoram Mamit (Satha)
138 Mizoram Serchhip
139 Nagaland Kiphire
140 Nagaland Longleng
141 Nagaland Mon
142 Nagaland Peren
143 Nagaland Phek
144 Nagaland Tuensang
145 Nagaland Wokha
146 Nagaland Zunheboto
147 Odisha Gajapati
148 Odisha Kandhamal
149 Odisha Kendrapara
150 Odisha Malkangiri
151 Odisha Nawapara
152 Odisha Nawrangpur
153 Sikkim West Sikkim No RRB
154 Telangana Komram Bheem (Asifabad)
155 Tripura Dhalai
156 Tripura Gomati
157 Tripura Khowai
158 Tripura Sepahijala
159 Tripura Unakoti
160 Uttar Pradesh Ambedkar Nagar
161 Uttar Pradesh Auraiya
162 Uttar Pradesh Azamgarh
163 Uttar Pradesh Ballia
164 Uttar Pradesh Balrampur
165 Uttar Pradesh Banda
166 Uttar Pradesh Basti
167 Uttar Pradesh Chandauli
168 Uttar Pradesh Deoria
169 Uttar Pradesh Farrukhabad
170 Uttar Pradesh Gonda
171 Uttar Pradesh Ghazipur
172 Uttar Pradesh Jaunpur
173 Uttar Pradesh Jyotiba Phule Nagar(Amroha)
174 Uttar Pradesh Kanpur Dehat
175 Uttar Pradesh Kaushambi
176 Uttar Pradesh Kushi Nagar
177 Uttar Pradesh Maharajganj
178 Uttar Pradesh Mau
179 Uttar Pradesh Pratapgarh
180 Uttar Pradesh Sant Kabir Nagar
181 Uttar Pradesh Shravasti
182 Uttar Pradesh Sidharthanagar
183 Uttar Pradesh Sitapur
184 Uttar Pradesh Sultanpur
185 Uttar Pradesh Unnao
186 Uttarakhand
187 Uttarakhand Rudraprayag
188 Uttarakhand Tehri Garhwal
189 West Bengal
190 West Bengal Jhargram
191 West Bengal Puruliya

अनुबंध IV

30 सितंबर/31 दिसंबर/31 मार्च को समाप्त तिमाही

राज्य बैंक का नाम औसत ऋण राशि (रु.लाख में) औसत ऋण राशि (रु.लाख में) प्रभारित प्रसंस्करण शुल्क (रुपए)