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मौसमी कृषि परिचालनों (एसएओ) के वित्तपोषण के लिए राज्य सहकारी बैंकों को नाबार्ड द्वारा अतिरिक्त अल्पावधि (एसटी) पुनर्वित्त का प्रावधान–वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए नीति

कृपया दिनांक 15 अप्रैल 2020 के हमारा परिपत्र पत्र संख्या राबैं.डॉर.एसटी नीति/27/ए-1 (सामान्य)/2020-21(परिपत्र संख्या 103/डॉर -31/2020) देखें, जिसमें वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए मौसमी कृषि परिचालनों (एसएओ) के वित्तपोषण हेतु राज्य सहकारी बैंकों को अतिरिक्त अल्पावधि (एसटी) पुनर्वित्त की मंजूरी संबंधी नीति की जानकारी दी गयी थी. यह नीतिगत दिशानिर्देश वर्तमान वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जारी रखी गई है जिसका ब्यौरा अनुबंध-I में दिया गया है. अतिरिक्त अल्पावधि पुनर्वित्त के तहत स्वीकृत कुल ऋण सीमा त्रिस्तरीय संरचना में पात्र जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों और द्विस्तरीय संरचना में राज्य सहकारी बैंक के वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के 60% तक, जिसमें सामान्य अल्पावधि (एसएओ) के तहत बकाया राशि भी शामिल होगी या अनुबंध- I के पैरा '4' के अनुसार होगी.

2. इस ऋण सुविधा के अंतर्गत, राज्य सहकारी बैंक आधार स्तरीय ऋण (जीएलसी) के 60% तक (एसटीसीआरसी निधि के अंतर्गत आहरित राशि सहित) या जैसे भी मामला हो, आहरित कर सकते हैं.

3. आप सभी पात्र (जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों – त्रिस्तरीय संरचना में / राज्य सहकारी बैंक-द्विस्तरीय संरचना में) बैंकों हेतु अतिरिक्त अल्पावधि (मौकृप) ऋण सीमा की स्वीकृति के लिए निर्धारित प्रोफॉर्मा में उस राज्य के नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय को आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं.

4. कृपया इस परिपत्र की पावती हमारे क्षेत्रीय कार्यालय को भिजवाएं.

अनुबंध I

नाबार्ड द्वारा राज्य सहकारी बैंकों को मौसमी कृषि परिचालनों के वित्तपोषण के लिए अतिरिक्त अल्पावधि पुनर्वित्त का प्रावधान - वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए नीति

1. अतिरिक्त एसटी (एसएओ) सीमा की परिचालन अवधि

अतिरिक्त एसटी (एसएओ) सीमा की परिचालन अवधि वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 01.04.2021 से 31.03.2022 तक होगी. अतिरिक्त एसटी (एसएओ) पुनर्वित्त राज्य सहकारी बैंक को केवल इस परिचालन अवधि के दौरान संवितरित फसल ऋणों के लिए प्रदान किया जाएगा.

2. समेकित सीमा की मंजूरी

क.अतिरिक्त एसटी (एसएओ) के अंतर्गत इनके लिए एक समेकित सीमा निम्नानुसार स्वीकृत की जाएगी

i. 3 स्तरीय संरचना में पात्र जिमस बैंकों के लिए एसटीसीबी को.

ii. 2 स्तरीय संरचना के मामले में या कमजोर जिमस बैंकों (जो पैक्स को वित्त देने की स्थिति में नहीं हैं) के मामले में पात्र एसटीसीबी को.

ख.राज्य सहकारी बैंकों के लिए अतिरिक्त एसटी (एसएओ) की सीमा नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21(4) के साथ पठित धारा 21(1)(i) के अंतर्गत राज्य सहकारी बैंकों द्वारा निष्पादित डीपीएन के समक्ष मंजूर की जाएगी.

ग.एसटीसीबी को प्रत्येक आहरण के समय लिखित रूप में यह घोषित करना होता है कि एसटीसीबी द्वारा 3 स्तरीय संरचना में पात्र जिमस बैंकों को / 2 स्तरीय संरचना में एसटीसीबी शाखाओं को एसएओ के वित्तपोषण के लिए प्रदान किए गए ऋण जो डीसीसीबी/एसटीसीबी शाखा स्तर पर पैक्स के समक्ष बकाया पर्याप्त गैर-अतिदेय ऋण से कवर किए गए हैं. बैंकों को नाबार्ड को नियमित रूप से या तो भौतिक रूप में या डिजीटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एनओडीसी विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है.

घ. एसटीसीबी के पक्ष में डीसीसीबी द्वारा निष्पादित टीपीएन नाबार्ड के पक्ष में करना जारी रहेगा और एसटीसीबी अनुमोदित टीपीएन को नाबार्ड के एजेंट के रूप में अपने पास रखेगा.

3. राज्य सहकारी बैंक

3.1लेखा परीक्षा

वर्ष 2019-20 के लिए एसटीसीबी/ डीसीसीबी की लेखा परीक्षा पूरी हो जानी चाहिए थी और वित्तीय विवरणों के साथ संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट वर्ष की पहली छमाही में ऋण आवेदन पर विचार करने के लिए नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की जानी चाहिए. 2020-21 के लिए डीसीसीबी / एसटीसीबी की लेखा परीक्षा को पूरा किया जाना चाहिए और 30.09.2021 तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी चाहिए. 01.10.2021 को या उसके बाद केवल उन्हीं एसटीसीबी को उनकी शाखाओं या डीसीसीबी के समक्ष मंजूरी और आहरण की अनुमति दी जाएगी, जिन्होंने वर्ष 2020-21 के लिए लेखा परीक्षा को पूरा कर लिया है और संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की है और यह पात्रता मानदंड के संबंध में संतोषजनक स्थिति के अधीन है.

3.2 लाइसेंसिंग और सीआरएआर मानदंडों का अनुपालन

सभी लाइसेंस प्राप्त एसटीसीबी (अनुसूचित/ गैर अनुसूचित) और लाइसेंस प्राप्त डीसीसीबी जो सीआरएआर शर्तों को पूरा करते हैं, जैसा कि नीचे उल्लिखित आरबीआई के मौजूदा दिशानिर्देशों द्वारा निर्धारित किया गया है, अतिरिक्त एसटी (एसएओ) के अंतर्गत पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.

3.3अनुसूचित एसटीसीबी और संबद्ध सीसीबी के लिए सीमाएं

3.3.1 केवल 9% और उससे अधिक के सीआरएआर वाले एसटीसीबी/ डीसीसीबी पात्र होंगे.

3.3.2 9% और उससे अधिक के सीआरएआर वाले एसटीसीबी लेकिन 9% से कम वाले व्यक्तिगत डीसीसीबी के मामले में, ऐसे डीसीसीबी के लिए कोई ऋण सीमा उपलब्ध नहीं होगी.

3.3.3 9% से कम सीआरएआर वाले एसटीसीबी और 9% से अधिक सीआरएआर वाले डीसीसीबी के मामले में, सरकारी गारंटी या सरकार द्वारा अनुमोदित प्रतिभूतियों/अनुसूचित बैंकों की एफडीआर की गिरवी पर ऋण सीमा सीधे डीसीसीबी को स्वीकृत की जाएगी. डीसीसीबी को सीधे पुनर्वित्त प्रदान करने के मामले में, दिनांक 09.09.2011 के हमारे परिपत्र संख्या 172 द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें.

3.4गैर-अनुसूचित एसटीसीबी के लिए सीमाएं

ऊपर दिए गए सीआरएआर मानदंड को पूरा करने वाले गैर-अनुसूचित एसटीसीबी, सरकारी गारंटीयों के समक्ष नाबार्ड अधिनियम 1981 की धारा 21(3)(ए) या सरकारी / अनुमोदित प्रतिभूतियों के समक्ष (बैंककारी विनिमयन अधिनियम, 1949 की धारा 5(ए) में परिभाषित) उपर्युक्त अधिनियम
की धारा 21(2)(i) और/ या अनुसूचित बैंकों की सावधि जमा रसीदों के समक्ष उपर्युक्त अधिनियम की धारा 33 के अंतर्गत ऋण सीमा की मंजूरी के लिए पात्र होंगे.

3.5अनर्जक आस्तियों के लिए मानदंड

पात्रता, अन्य बातों के साथ साथ, 31.03.2020 की स्थिति में एसटीसीबी की शुद्ध एनपीए स्थिति पर आधारित होगी. जिन बैंकों का निवल एनपीए, निवल ऋणों और बकाया अग्रिमों के 12% से अधिक नहीं होगा, वे पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे. पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एसटीसीबी के लिए शुद्ध एनपीए मानदंड को शुद्ध ऋण और बकाया अग्रिम के 15% तक शिथिल किया गया है.

3.601 अप्रैल 2021 से 30 सितंबर 2021 के दौरान पात्रता मानदंडों का निर्धारण 31.03.2020 या 31.03.2021 (यदि 31.03.2021 को लेखा परीक्षित स्थिति उपलब्ध है) के अनुसार उनकी लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति के अनुसार किया जाएगा. 01 अक्टूबर 2021 से 31 मार्च 2022 तक के लिए पात्रता मानदंडों का निर्धारण 31.03.2021 को उनकी लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति के अनुसार किया जाएगा. 01.10.2021 को या उसके बाद पुनर्वित्त की स्वीकृति और आहरण की अनुमति केवल उन्हीं एसटीसीबी/ डीसीसीबी को दी जाएगी, जिन्होंने लेखा परीक्षा पूरी कर ली है और नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को संतोषजनक लेखा परीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की है.

3.7 सांविधिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट में इंगित की गई सीआरएआर और एनपीए की स्थिति पात्रता का आधार बनेगी. हालांकि, लेखापरीक्षा रिपोर्ट और नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट के बीच किसी भी भिन्नता की स्थिति में, पात्रता निर्धारित करने के लिए नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट मान्य होगी. बैंक के नियंत्रण से परे किसी भी कारण से यदि बैंक पात्रता मानदंडों को पूरा करने में असमर्थ है तो नाबार्ड पर्याप्त सुविधा /सुरक्षा के साथ कम पात्रता मानदंडों पर विचार कर सकता है.

3.8 एसटीसीबी की पात्रता के उद्देश्य से शुद्ध एनपीए स्थिति की गणना एसटीसीबी शाखाओं के स्तर पर न करते हुए एसटीसीबी स्तर पर की जाएगी. डीसीसीबी को सीधे पुनर्वित्त प्रदान करने के मामलों में भी, पात्रता के उद्देश्य से, शुद्ध एनपीए स्थिति की गणना डीसीसीबी स्तर पर ही की जाएगी न कि डीसीसीबी शाखाओं के स्तर पर.

4. पुनर्वित्त की मात्रा

4.1. मंजूरी के लिए पुनर्वित्त की मात्रा निम्नानुसार रहेगी:
एसटीसीबी का निवल एनपीए पात्र सीमा
[पात्र जिमस बैंकों / राज्य सहकारी बैंकों (द्विस्तरीय / कमजोर जिमस बैंकों) के वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
6% तक 60%
6% से ऊपर और 10% तक 55%
10% से ऊपर और 12% तक 50%
12% से ऊपर पात्र नहीं

4.2. पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एसटीसीबी शुद्ध एनपीए में छूट के साथ 20% के अतिरिक्त पुनर्वित्त के लिए निम्नानुसार पात्र होंगे:

एसटीसीबी का निवल एनपीए पात्र सीमा
[पात्र जिमस बैंकों / राज्य सहकारी बैंकों (द्विस्तरीय / कमजोर जिमस बैंकों) के वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
10% तक 80%
10% से ऊपर और 15% तक 75%
15% से ऊपर पात्र नहीं

4.3. पूर्वी क्षेत्र अर्थात बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ राज्यों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28 जिलों (भारत सरकार की BGREI योजना के तहत) में एसटीसीबी पुनर्वित्त की लागू सामान्य मात्रा से अधिक 5% के अतिरिक्त पुनर्वित्त के लिए निम्नानुसार पात्र होंगे:

एसटीसीबी का निवल एनपीए पात्र सीमा
[पात्र जिमस बैंकों / राज्य सहकारी बैंकों (द्विस्तरीय / कमजोर जिमस बैंकों) के वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
6% तक 65%
6% से ऊपर और 10% तक 60%
10% से ऊपर और 15% तक 55%
15% से ऊपर पात्र नहीं

4.4 वर्ष 2021-22 के लिए आरएलपी पिछले तीन वर्षों के दौरान संवितरित फसल ऋण में औसत वृद्धि दर (पिछले चार वर्षों में संवितरित फसल ऋणों के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए) के आधार पर निकाला जा सकता है. हालांकि, जमीनी स्तर की वास्तविकताओं और अन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, यदि कोई हो, नाबार्ड ऐसा आरएलपी स्वीकार कर सकता है जो एसटीसीबी द्वारा निर्धारित आरएलपी से कम या अधिक हो सकता है.

4.5. इस ऋण व्यवस्था के अंतर्गत एसटीसीबी 60% जीएलसी तक आहरित कर सकते हैं, जिसमें एसटीसीआरसी निधि के अंतर्गत आहरित राशि शामिल है या जैसा भी मामला हो.

4.6. यह सीमा किसान के स्तर पर जारी केवल ₹3 लाख तक के फसल ऋण के लिए उपलब्ध होगी.

4.7. इस ऋण व्यवस्था के अंतर्गत पुनर्वित्त को बैंक के स्वामित्व वाली निधि के रूप में माना जाएगा जो भारत सरकार के मौजूदा ब्याज सहायता योजना दिशानिर्देशों के अनुसार ब्याज सहायता के लिए पात्र है.

5. पुनर्वित्त पर ब्याज की दर

5.1. ब्याज दर

पुनर्वित्त पर ब्याज दरें नाबार्ड द्वारा समय-समय पर तय की जाएंगी. ब्याज अब तक की तरह 01 अक्टूबर और 01 अप्रैल को अर्धवार्षिक अंतराल पर देय है. बैंक द्वारा पूरी मूलधन राशि चुकाने की स्थिति में मूलधन के साथ ब्याज देय होगा.

5.2.चूक की स्थिति में दंडात्मक ब्याज

एसटीसीबी जो निर्धारित देय तिथियों तक मूलधन की चुकौती, ब्याज और/या अन्य देय राशि के भुगतान में नाबार्ड के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने में विफल रहते हैं, वे नाबार्ड से किसी भी प्रकार की पुनर्वित्त सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे. बैंक द्वारा चूक को समाप्त करने के बाद ही पुनर्वित्त की बहाली पर विचार किया जा सकता है. चूक की स्थिति में, जिस ब्याज दर पर पुनर्वित्त वितरित किया गया था, उससे 2% प्रति वर्ष अधिक दंडात्मक ब्याज, चूक की राशि पर और उस अवधि के लिए जिसके लिए चूक बनी रहती है, वसूल किया जाएगा. दंडात्मक ब्याज दरें समय-समय पर संशोधन के अधीन हैं.

6.चुकौती का नोटिस

सीमा के समक्ष आहरित राशि मांग पर चुकाई जानी है. हालांकि, ऋण सीमा पर प्रत्येक आहरण को एक अलग ऋण के रूप में माना जाएगा और जो आम तौर पर आहरण की तारीख से 12 महीने की अवधि में चुकाया जाएगा. 12 महीने की समाप्ति से पहले चुकौती (पूर्ण या आंशिक) न्यूनतम 15 कार्य दिवसों की नोटिस अवधि या मूलधन के साथ 15 दिनों के ब्याज भुगतान के साथ नाबार्ड द्वारा स्वीकार किया जा सकता है. तथापि, यदि आहरण की तिथि के 30 दिन बाद चुकौती की जाती है तो नोटिस अवधि में छूट दी जा सकती है.

7.परिचालनात्मक अनुशासन

7.1 अतिरिक्त एसटी (एसएओ) सीमा के अंतर्गत एसटीसीबी द्वारा पुनर्वित्त का आहरण वर्ष 2021-22 के दौरान जारी किए गए ऋण के पुनर्वित्त के लिए लागू प्रतिशत तक सीमित होगा.

7.2अधिक आहरण

फसल ऋण संवितरण या एनओडीसी के बारे में गलत डेटा की रिपोर्टिंग के कारण पुनर्वित्त की अनुमेय मात्रा से अधिक आहरण के मामले पर नाबार्ड गंभीरता से विचार करेगा. ऐसे मामलों में, नाबार्ड बैंक द्वारा लिए गए अतिरिक्त पुनर्वित्त को 3 दिनों के भीतर 1% प्रति वर्ष के दंडात्मक ब्याज के साथ वापस माँग सकता है.

7.3. गैर अतिदेय कवर

नाबार्ड द्वारा एसटीसीबी को स्वीकृत सीमा पर आहरण की अनुमति पात्र डीसीसीबी से संबंधित कुल एनओडीसी (सामान्य सीमा के एनओडीसी सहित) के आधार पर दी जाएगी, जिनके पास अब तक की तरह एसटीसीबी से उधार बकाया है. तथापि, बैंकों को एनओडीसी की निगरानी करने की आवश्यकता होगी और समग्र एनओडीसी उपलब्ध होने पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं लिया जाएगा. एसटीसीबी
को अगले महीने की 20 तारीख तक प्रत्यक्ष रूप से या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मासिक एनओडीसी विवरण डीसीसीबी-वार स्थिति दर्शाते हुए प्रस्तुत करना होगा.

प्रत्येक आहरण के समय, बैंक द्वारा आहरण की तिथि को कुल एनओडीसी की उपलब्धता के संबंध में निर्धारित प्रारूप में एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा. इसके अलावा, बैंक द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी दिन, कुल सामान्य एसटी (एसएओ) बकाया और अतिरिक्त एसटी (एसएओ) बकाया उस तारीख को उपलब्ध कुल एनओडीसी से अधिक नहीं होना चाहिए.

7.4. एनओडीसी की कमी पर दंडात्मक ब्याज

एनओडीसी में कमी के मामले में, एसटीसीबी को एनओडीसी में कमी को पूरा करना होगा. यदि एसटीसीबी इस तरह की कमी के घटित होने की तारीख से एक महीने के भीतर कमी को पूरा करने में विफल रहता है, तो 1% प्रति वर्ष की दर से अतिरिक्त ब्याज एनओडीसी में कमी की राशि पर, कमी की अवधि के लिए यानी उस तारीख तक प्रभारित किया जाएगा जब तक कमी की राशि को नियमित नहीं किया जाता है.

7.5 बकाया ऋणों में मूलधन और ब्याज का पृथक्करण

एसटीसीबी को बकाया राशि से ब्याज घटक (अतिदेय/गैर-अतिदेय ब्याज) को अलग करके रखना चाहिए सकता है और नाबार्ड से पुनर्वित्त सहायता के लिए पात्रता निर्धारण के लिए, ऋण सीमा और आहरण आवेदन दोनों में केवल मूलधन ऋण राशि का उल्लेख करना चाहिए. इसके अलावा, मासिक एनओडीसी विवरण में ऋण के केवल मूलधन (जारी, वसूल, बकाया और अतिदेय) की सूचना दी जानी चाहिए.

8.डीसीसीबी द्वारा एसटीसीबी के प्रति चूक

यदि इस ऋण व्यवस्था के तहत कोई डीसीसीबी लगातार 3 महीने से अधिक की अवधि के लिए एसटीसीबी के प्रति चूक करता है, तो संबंधित एसटीसीबी को उस डीसीसीबी की सीमा को परिचालित करने की अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी, जब तक कि चूक का नियमन न किया जाए.

9.चूक की राशि की अदायगी

मूलधन की चुकौती, ब्याज के भुगतान और/ या किसी अन्य देय राशि के भुगतान में नाबार्ड के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहने वाले राज्य सहकारी बैंक, नाबार्ड से किसी भी पुनर्वित्त सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे, जब तक कि संबंधित चूक दूर नहीं की जाती.

10.निरीक्षण का अधिकार

नाबार्ड सहकारी बैंकों (राज्य सहकारी बैंक /पात्र मध्यवर्ती सहकारी बैंकों) के बही-खातों का निरीक्षण करने/ करवाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

11. विशेष लेखा परीक्षा करवाने का अधिकार

नाबार्ड के पास स्वयं या अन्य एजेंसियों के माध्यम से सहकारी बैंकों के खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री की विशेष लेखा परीक्षा कराने का अधिकार यह सुनिश्चित करने के लिए होगा कि बैंक द्वारा खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री को लागू नियमों और विनियमों के अनुसार बनाए रखा जाता है और पुनर्वित्त के नियमों और शर्तों का पालन किया जाता है.

12.अन्य

एसटी (एसएओ) के तहत पुनर्वित्त प्रदान करने के लिए लागू अन्य सभी नियम और शर्तें अतिरिक्त एसटी (एसएओ) पुनर्वित्त पर भी लागू होंगी.

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