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मौसमी कृषि परिचालन (मौकृप) के वित्तपोषण के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को नाबार्ड द्वारा अतिरिक्त अल्पावधि (एसटी) पुनर्वित्त का प्रावधान – वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए नीति

कृपया दिनांक 15 अप्रैल 2020 के राबै.डॉर/25/ ए-1(सामान्य)/2020-21 (परिपत्र संख्या 102/डॉर-30/2020)) और इसके बाद जारी संशोधनों का संदर्भ ग्रहण करें, जिसमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अतिरिक्त मौसमी कृषि परिचालनों के वित्तपोषण हेतु अतिरिक्त अल्पावधि पुनर्वित्त की मंजूरी संबंधी नीति के बारे में सूचित किया गया था. इन नीतिगत दिशानिर्देशों को वर्तमान वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भी जारी रखा गया हैं जिसका विवरण अनुबंध I में इंगित हैं. अतिरिक्त अल्पावधि पुनर्वित्त के तहत स्वीकृत कुल सीमा, सामान्य अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन) सहित आरएलपी के 50% तक या अनुलग्नक- I के पैरा ’4 के अनुसार होगी.

2.क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक इस ऋण व्यवस्था के तहत, एसटीआरआरबी निधि के अंतर्गत आहरित राशि सहित, जीएलसी के पात्र सीमा तक तक या मामले के अनुसार राशि आहरित कर सकते हैं.

3. आप अतिरिक्त अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालान) ऋण सीमा की स्वीकृति के लिए निर्धारित प्रोफॉर्मा में अपना आवेदन अपने राज्य के नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं.

4. कृपया इस परिपत्र की पावती हमारे क्षेत्रीय कार्यालय को भिजवाएं.

अनुबंध I

मौसमी कृषि परिचालनों (एसएओ) के वित्तपोषण के लिए नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को अतिरिक्त अल्पावधि (एसटी) पुनर्वित्त का प्रावधान - वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए नीति

1. अतिरिक्त अल्पावधि (एसएओ) सीमा की परिचालन अवधि

वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए अतिरिक्त अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालनों) सीमा की परिचालन अवधि 01.04.2021 से 31.03.2022 तक होगी. अतिरिक्त अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालनों) पुनर्वित्त केवल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को इस परिचालन अवधि के दौरान संवितरित फसल ऋण के लिए प्रदान किया जाएगा.

2.सीमा की मंजूरी

a.क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए अतिरिक्त एसटी (एसएओ) की सीमा नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21(4) के साथ पठित धारा 21(1)(i) के अंतर्गत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा निष्पादित डीपीएन के समक्ष मंजूर की जाएगी.

b.क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को प्रत्येक आहरण के समय लिखित रूप में घोषित करना होता है कि प्रस्तावित आहरण और पहले से प्राप्त पुनर्वित्त क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा प्रदान किए गए ऋणों के समक्ष है और पर्याप्त गैर-अतिदेय ऋणों द्वारा कवर किया गया है. बैंकों को नाबार्ड को नियमित रूप से भौतिक रूप में या डिजीटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एनओडीसी विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है.

3.3.पात्रता मानदंड

3.1लेखा परीक्षा

वर्ष 2019-20 के लिए आरआरबी की लेखापरीक्षा पूरी हो जानी चाहिए थी और वित्तीय विवरणों के साथ संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट वर्ष की पहली तिमाही में ऋण आवेदन पर विचार करने के लिए नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की जानी चाहिए. इसके अलावा 2020-21 के लिए, आरआरबी की लेखा परीक्षा पूरी की जानी चाहिए और उसकी रिपोर्ट 30.06.2021 तक प्रस्तुत की जानी चाहिए. 01.07.2021 को या उसके बाद पुनर्वित्त की स्वीकृति/आहरण की अनुमति केवल उन्हीं आरआरबी को दी जाएगी, जिन्होंने लेखा परीक्षा पूरी की है और संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत कर दी है जो पात्रता मानदंडों की दृष्टि से संतोषजनक है.

3.2नाबार्ड द्वारा आरआरबी की आंतरिक जोखिम रेटिंग

3.2.1विशेष रूप से जरूरतमंद कृषि क्षेत्र को अधिक ऋण देने को प्रोत्साहित करने की भावना को ध्यान में रखते हुए, यह निर्णय लिया गया है कि आरआरबी के लिए सीआरएआर, शुद्ध एनपीए और शुद्ध लाभ के प्रारंभिक मानदंड को छोड़ दिया जाए और उन सभी आरआरबी को अल्पावधि पुनर्वित्त प्रदान किया जाए जिनकी आंतरिक जोखिम रेटिंग श्रेणी एनबीडी1 से एनबीडी7 है.

3.2.2सभी आरआरबी की जोखिम रेटिंग नाबार्ड द्वारा जोखिम प्रबंधन विभाग (आरएमडी) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के आधार पर की जाएगी और एनडीबी1 से एनडीबी7 की जोखिम रेटिंग प्राप्त करने वाले आरआरबी अतिरिक्त एसटी (एसएओ) के तहत पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.

3.3जोखिम रेटिंग का मूल्यांकन सांविधिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट में दर्शाये वित्तीय आधार पर किया जाएगा. हालांकि, लेखापरीक्षा रिपोर्ट और नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट के बीच किसी भी भिन्नता की स्थिति में, नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट को जोखिम रेटिंग के लिए मान्य किया जाएगा. बैंक के नियंत्रण से बाहर किसी भी कारण से, यदि बैंक पात्रता मानदंड को पूरा करने में असमर्थ है तो नाबार्ड पर्याप्त सुविधा/सुरक्षा के साथ कम पात्रता मानदंडों पर विचार कर सकता है.

3.4पहली तिमाही अर्थात 01 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 के दौरान पात्रता मानदंडों का निर्धारण 31.03.2020 या 31.03.2021 (यदि उपलब्ध हो) के अनुसार बैंक की लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति पर आधारित होगा. 01 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2022 तक के लिए, पात्रता मानदंडों का निर्धारण 31.03.2021 को लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति पर आधारित होगा. 01.07.2021 को या उसके बाद मंजूरी/आहरण की अनुमति केवल उन्हीं आरआरबी को दी जाएगी, जिन्होंने लेखा परीक्षा पूरी कर ली है और नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को संतोषजनक लेखा परीक्षा रिपोर्ट जमा कर दी है, जब तक कि विशेष मामले के रूप में अन्यथा अनुमति न दी जाए.

4.पुनर्वित्त की मात्रा

4.1 मंजूरी के लिए पुनर्वित्त की मात्रा निम्नानुसार रहेगी:
सामान्य क्षेत्र
नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की जोखिम रेटिंग पात्र सीमा
[वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
एनबीडी1 – एनडीबी4 50%
एनबीडी5 – एनडीबी7 45%
एनबीडी8 – एनडीबी9 पात्र नहीं
4.2उत्तर पूर्वी क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक निम्नानुसार 25% की अतिरिक्त ऋण सीमा के लिए पात्र होंगे:
नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की जोखिम रेटिंग पात्र सीमा
[ वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
एनबीडी1 – एनडीबी4 75%
एनबीडी5 – एनडीबी7 70%
एनबीडी8 – एनडीबी9 पात्र नहीं
4.3पूर्वी क्षेत्र अर्थात बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ राज्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28 जिलों (भारत सरकार की बीजीआरईआई योजना के अंतर्गत) में आरआरबी निम्नानुसार 5% की अतिरिक्त ऋण सीमा के लिए पात्र होंगे:
नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की जोखिम रेटिंग पात्र सीमा
[वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
एनबीडी1 – एनडीबी4 55%
एनबीडी5 – एनडीबी7 50%
एनबीडी8 – एनडीबी9 पात्र नहीं

4.3वर्ष 2021-22 के लिए आरएलपी पिछले तीन वर्षों के दौरान संवितरित फसल ऋण में औसत वृद्धि दर के आधार पर निकाला जा सकता है (पिछले चार वर्षों के संवितरित फसल ऋण आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए). हालांकि, जमीनी स्तर की वास्तविकताओं और अन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, यदि कोई हो, नाबार्ड ऐसा आरएलपी स्वीकार कर सकता है जो आरआरबी द्वारा निर्धारित आरएलपी से कम या अधिक हो सकता है.

4.4आरआरबी को जीएलसी के 50% (एसटीआरआरबी निधि के तहत आहरित राशि घटाकर) तक या इस ऋण व्यवस्था के अंतर्गत मामले के आधार पर आहरण की अनुमति दी जा सकती है.

4.5यह सीमा केवल किसान स्तर पर ₹3 लाख तक के लिए जारी केसीसी फसल ऋण के लिए उपलब्ध होगी.

4.6इस ऋण व्यवस्था के अंतर्गत पुनर्वित्त को बैंक के स्वामित्व वाली निधि के रूप में माना जाएगा जो भारत सरकार के मौजूदा ब्याज सहायता योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार ब्याज सहायता के लिए पात्र है.

5.क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको का विलय

विलय किए गए बैंकों के मामले में, अधिसूचना/ विलय की तिथि के अनुसार नए/ विलय किए गए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की वित्तीय स्थिति, विशेष लेखा परीक्षा के आधार पर या 31.03.2020 को पूर्ववर्ती क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की कुल लेखा परीक्षा की स्थिति, ऐसे नए आरआरबी के लिए वर्ष 2021-22 के दौरान सीमा की मंजूरी का आधार बनेगी. इसके अलावा, यदि 31.03.2021 की तिथि में सांविधिक लेखापरीक्षा स्थिति उपलब्ध है, तो इस आधार पर बैंकों को ऋण सीमा की स्वीकृति के लिए विचार किया जाएगा.

6.पुनर्वित्त पर ब्याज दर

6.1ब्याज दर

पुनर्वित्त पर ब्याज दरें नाबार्ड द्वारा समय-समय पर तय की जाएंगी. ब्याज अब तक की तरह 01 अक्टूबर और 01 अप्रैल को अर्धवार्षिक अंतराल पर देय है. बैंक द्वारा पूरी मूलधन राशि चुकाने की स्थिति में मूलधन के साथ ब्याज देय होगा.

6.2चूक की स्थिति में दंडात्मक ब्याज

जो क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक मूलधन की चुकौती, ब्याज और/ या अन्य देय राशि के भुगतान में अपनी प्रतिबद्धताओं को निर्धारित देय तिथियों तक पूरा करने में विफल रहते हैं, वे नाबार्ड से किसी भी प्रकार की पुनर्वित्त सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे. बैंक द्वारा की गई चूक को समाप्त करने के बाद ही पुनर्वित्त की बहाली पर विचार किया जा सकता है. चूक की स्थिति में, जिस ब्याज दर पर पुनर्वित्त वितरित किया गया था, उससे 2% प्रति वर्ष अधिक दंडात्मक ब्याज, चूक राशि पर और उस अवधि के लिए जिसके लिए चूक बनी रहती है, वसूल किया जाएगा. दंडात्मक ब्याज दरें समय-समय पर संशोधन के अधीन हैं.

7.चुकौती के लिए नोटिस

सीमा के समक्ष आहरित राशि मांग करने पर चुकाने योग्य है. तथापि, ऋण सीमा पर प्रत्येक आहरण को एक अलग ऋण के रूप में माना जाएगा और जिसे आमतौर पर आहरण की तारीख से 12 महीने की अवधि के भीतर चुकाया जाएगा. 12 महीने की समाप्ति से पहले चुकौती (आंशिक या पूर्ण) 15 कार्य दिवसों की न्यूनतम नोटिस अवधि या मूलधन के साथ 15 दिनों के ब्याज भुगतान के साथ नाबार्ड द्वारा स्वीकार की जा सकती है. तथापि, यदि आहरण की तिथि के 30 दिन बाद चुकौती की जाती है तो नोटिस अवधि में छूट दी जा सकती है.

8.परिचालनात्मक अनुशासन

8.1अतिरिक्त एसटी (एसएओ) सीमा के अंतर्गत आरआरबी द्वारा पुनर्वित्त का आहरण वर्ष 2021-22 के दौरान जारी किए गए ऋण के पुनर्वित्त के लिए लागू प्रतिशत तक सीमित होगा.

8.2अधिक आहरण

फसल ऋण संवितरण या एनओडीसी के बारे में गलत डेटा की रिपोर्टिंग के कारण पुनर्वित्त की अनुमेय मात्रा से अधिक आहरण के मामले पर नाबार्ड गंभीरता से विचार करेगा. ऐसे मामलों में, नाबार्ड बैंक द्वारा लिए गए अतिरिक्त पुनर्वित्त को 3 दिनों के भीतर 1% प्रति वर्ष के दंडात्मक ब्याज के साथ वापस माँग सकता है.

8.3गैर अतिदेय कवर

ऋण सीमा पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा आहरण की अनुमति कुल एनओडीसी (सामान्य सीमा के एओडीसी सहित) की उपलब्धता के अधीन होगी. इस प्रयोजन के लिए, आरआरबी को नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को मासिक एनओडीसी विवरण प्रस्तुत करना होगा ताकि वह अगले महीने की 20 तारीख तक प्रत्यक्ष रूप से या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहुंच सकें.

प्रत्येक आहरण के समय, बैंक द्वारा आहरण की तिथि को कुल एनओडीसी की उपलब्धता के संबंध में निर्धारित प्रारूप में एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा. इसके अलावा, बैंक द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी दिन, कुल सामान्य एसटी (एसएओ) बकाया और अतिरिक्त एसटी (एसएओ) बकाया उस तारीख को उपलब्ध कुल एनओडीसी से अधिक नहीं होना चाहिए.

8.4एनओडीसी की कमी पर दंडात्मक ब्याज

आरआरबी को एनओडीसी में कमी, यदि कोई हो, को तुरंत दूर करना चाहिए, ताकि नाबार्ड से उधार के लिए पर्याप्त गैर-अतिदेय कवर की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके. यदि आरआरबी इस तरह की कमी के घटित होने की तारीख से एक महीने के भीतर इस कमी को पूरा करने में विफल रहता है, तो @ 1% प्रति वर्ष की दर से अतिरिक्त ब्याज एनओडीसी में कमी पर कमी की अवधि के लिए यानी उस तारीख तक प्रभारित किया जाएगा जब तक कमी की राशि को नियमित नहीं किया जाता है.

8.5बकाया ऋणों में मूलधन और ब्याज का पृथक्करण

आरआरबी बकाया राशि से ब्याज घटक (अतिदेय / गैर-अतिदेय ब्याज) को अलग कर सकते हैं और नाबार्ड से पुनर्वित्त सहायता की पात्रता तय करने के लिए, ऋण सीमा आवेदन और आहरण आवेदन दोनों के लिए अपने आवेदन में केवल मूल ऋण राशि का उल्लेख करें. इसके अलावा, मासिक एनओडीसी विवरण में केवल ऋण के मूल भाग (जारी, वसूल, बकाया और अतिदेय) की सूचना दी जानी चाहिए.

9.चूक की निकासी

मूलधन के पुनर्भुगतान, ब्याज के भुगतान और/ या किसी अन्य देय राशि के भुगतान में नाबार्ड के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, नाबार्ड से किसी भी पुनर्वित्त सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे, जब तक कि संबंधित चूक की दूर नहीं की जाती.

10.निरीक्षण का अधिकार

नाबार्ड आरआरबी के खातों की पुस्तकों का निरीक्षण करने/ करवाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

11. विशेष लेखा परीक्षा करवाने का अधिकार

नाबार्ड के पास स्वयं या अन्य एजेंसियों के माध्यम से आरआरबी के खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री की विशेष लेखा परीक्षा कराने का अधिकार यह सुनिश्चित करने के लिए होगा कि बैंक द्वारा खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री को नियम और विनियमों के अनुसार बनाए रखा जाता है और पुनर्वित्त के नियमों और शर्तों का पालन किया जाता है.

12.अन्य

एसटी (एसएओ) के तहत पुनर्वित्त प्रदान करने के लिए लागू अन्य सभी नियम और शर्तें अतिरिक्त एसटी (एसएओ) पुनर्वित्त पर भी लागू होंगी.

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