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नाबार्ड द्वारा राज्य सहकारी बैंकों को अल्पावधि (अन्य) के तहत विभिन्न प्रयोजनों के वित्तपोषन हेतु अल्पावधि पुनर्वित्त का प्रावधान - वर्ष 2021-22 के लिए नीति

कृपया दिनांक 16अप्रैल 2020के हमारे परिपत्र पत्र सं.राबैं.डॉर/33/ए-1(सामान्य)/2020-21 (परिपत्र संख्या 107/ डॉर-32/2020) का संदर्भ लें, जिसके माध्यम से वर्ष 2020-21 के लिए फसलों के विपणन और मौसमी कृषि परिचलनों से इतर कुछ अन्य अनुमोदित प्रयोजनों के लिए वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के आधार पर संबन्धित प्रयोजनों के वित्तपोषण के लिए पात्र मध्यवर्ती सहकारी बैंकों के लिए राज्य सहकारी बैंकों को समेकित अल्पावधि (अन्य) सीमाओं की मंजूरी के लिए नाबार्ड की नीति की सूचना दी गई थी.

2. यह नीति वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जारी रखी गई है. वर्ष 2021-22 के दौरान नाबार्ड द्वारा अल्पावधि (अन्य) पुनर्वित्त के प्रावधान अनुबंध-I में दिए गए है. विभिन्न प्रयोजनों के लिए लागू मूल्यांकन मानदंड आवश्यक परिवर्तनों के साथ यथावत जारी रहेंगे, और इनका ब्यौरा अनुबंध II में दिया गया है.

3.नाबार्ड से राज्य सहकारी बैंकों को पुनर्वित्त सहायता नाबार्ड द्वारा समय-समय पर सूचित ब्याज दर पर उपलब्ध होगी.

4. कृपया इस परिपत्र की विषयवस्तु से नियंत्रक कार्यालयों/ अपने कार्यक्षेत्र में कार्यरत मध्यवर्ती सहकारी बैंकों को अवगत कराएं.

5. राज्य सहकारी बैंकअल्पावधि (अन्य) ऋण सीमा की मंजूरी के लिए निर्धारित प्रोफ़ार्मा में पूर्ण रूप से भरे अपने आवेदन नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को तुरंत भिजवाने की व्यवस्था करें, ताकि वर्ष 2021-22 के लिए ऋण सीमाओं की स्वीकृति समय पर की जा सके.

6. कृपया इस परिपत्र की पावती हमारे संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को भिजवाएं.

अनुबंध - I

सामान्य नियम व शर्तें – सहकारी बैंक

1.अल्पावधि (अन्य) सीमा की परिचालन अवधि

वर्ष 2021-22 के लिए एसटी (अन्य) सीमा की परिचालन अवधि 01.04.2021 से 31.03.2022 तक होगी.

2.समेकित सीमा की स्वीकृति

(i)अतिरिक्त एसटी (अन्य) के अंतर्गत इनके लिए एक समेकित सीमा निम्नानुसार स्वीकृत की जाएगी

a. 3 स्तरीय संरचना में पात्र मध्यवर्ती सहकारी बैंकों के लिए एसटीसीबी को/

b. 2 स्तरीय संरचना के मामले में या कमजोर जिमस बैंकों (जो पैक्स को वित्त देने की स्थिति में नहीं हैं) के मामले में पात्र एसटीसीबी को.

(ii)राज्य सहकारी बैंकों के लिए अतिरिक्त एसटी (एसएओ) की सीमा नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21(4) के साथ पठित धारा 21(1)(i) से (iv) के अंतर्गत राज्य सहकारी बैंकों द्वारा निष्पादित डीपीएन के समक्ष मंजूर की जाएगी और प्रत्येक आहरण के समय लिखित रूप में घोषणा के अधीन कि प्रस्तावित आहरण और पहले से प्राप्त पुनर्वित्त एसटी(अन्य) के तहत पात्र उद्देश्यों के वित्तपोषण के लिए पात्र सीसीबी को प्रदान किए गए ऋण के समक्ष है और सीसीबी/एसटीसीबी (दो स्तरीय संरचना में) स्तर पर बकाया पर्याप्त गैर-अतिदेय ऋण द्वारा कवर किया गया है.

(iii)एसटीसीबी के पक्ष में सीसीबी द्वारा निष्पादित टीपीएन नाबार्ड के पक्ष में प्रष्ठांकन करना जारी रहेगा और एसटीसीबी इस प्रष्ठांकित टीपीएन को नाबार्ड के एजेंट के रूप में अपने पास रखेगा.

3.राज्य सहकारी बैंक/ मध्यवर्ती सहकारी बैंक के लिए पात्रता मानदंड

3.1लेखा परीक्षा

वर्ष 2019-20 के लिए एसटीसीबी/ डीसीसीबी की लेखा परीक्षा पूरी हो जानी चाहिए और वित्तीय विवरणों के साथ संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट वर्ष की पहली छमाही में ऋण आवेदन पर विचार करने के लिए नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की जानी चाहिए जो वित्तीय वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में सीमा को अंतिम रूप देने का आधार बनेगा, हालांकि, यदि 2020-21 की लेखा परीक्षा पूरी हो जाती है, तो इसे पहली छमाही में सीमा तय करने के लिए ध्यान में रखा जाएगा. 30.03.2021 की स्थिति में 2020-21 के लिए एसटीसीबी की लेखा परीक्षा को पूरा किया जाना चाहिए और उसकी रिपोर्ट 30.09.2021 तक प्रस्तुत की जानी चाहिए. 01.10.2021 को या उसके बाद केवल उन्हीं एसटीसीबी को उनकी शाखाओं या डीसीसीबी के समक्ष मंजूरी/आहरण की अनुमति दी जाएगी, जिन्होंने वर्ष 2020-21 के लिए लेखा परीक्षा को पूरा कर लिया है और संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की है और यह पात्रता मानदंड के संबंध में संतोषजनक स्थिति के अधीन है.

अनर्जक आस्तियों के लिए मानदंड

यह पात्रता, अन्य बातों के साथ साथ, 31.03.2020 की स्थिति में राज्य सहकारी बैंकों की निवल एनपीए स्थिति पर आधारित होगी. 31.03.2020 की स्थिति में, राज्य सहकारी बैंक का निवल एनपीए 12% से अधिक नहीं होना चाहिए. लेकिन, पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ऋण प्रवाह को बढ़ाने की दृष्टि से इन राज्यों में निवल एनपीए मानदंड को 15% तक शिथिल किया गया है.

3.3 एसटीसीबी की पात्रता के उद्देश्य से, निवल एनपीए स्थिति की गणना एसटीसीबी की शाखाओं के स्तर पर न करके एसटीसीबी के स्तर पर की जाएगी. डीसीसीबी को सीधे पुनर्वित्त प्रदान करने के मामले में, पात्रता के उद्देश्य से निवल एनपीए स्थिति की गणना डीसीसीबी शाखाओं के स्तर पर न करके डीसीसीबी के स्तर पर की जाएगी.

3.4 लाइसेंसिंग और सीआरएआर मानदंडों का अनुपालन

सभी लाइसेंस प्राप्त एसटीसीबी (अनुसूचित/ गैर अनुसूचित) और लाइसेंस प्राप्त डीसीसीबी, जो नीचे उल्लिखित आरबीआई के मौजूदा दिशानिर्देशों द्वारा निर्धारित सीआरएआर शर्तों को पूरा करते हैं, एसटी (अन्य) के अंतर्गत पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे

क.केवल 9% और उससे अधिक सीआरएआर वाले एसटीसीबी/ डीसीसीबी ही पात्र होंगे.

ख.9% और उससे अधिक के सीआरएआर वाले एसटीसीबी लेकिन 9% से कम सीआरएआर वाले एकल डीसीसीबी के मामले में, ऐसे डीसीसीबी के लिए कोई ऋण सीमा उपलब्ध नहीं होगी.

3.5 गैर-अनुसूचित एसटीसीबी के लिए सीमाएं

ऊपर दिए गए सीआरएआर मानदंड को पूरा करने वाले गैर-अनुसूचित एसटीसीबी, सरकारी गारंटीयों के समक्ष नाबार्ड अधिनियम 1981 की धारा 21(3)(ए) या सरकारी / अनुमोदित प्रतिभूतियों के समक्ष (बैंककारी विनिमयन अधिनियम, 1949 की धारा 5(ए) में परिभाषित) उपर्युक्त अधिनियम की धारा 21(2)(i) और/ या अनुसूचित बैंकों की सावधि जमा रसीदों के समक्ष उपर्युक्त अधिनियम की धारा 33 के अंतर्गत ऋण सीमा की मंजूरी के लिए पात्र होंगे.

3.6 01 अप्रैल 2021 से 30 सितंबर 2021 के दौरान पात्रता मानदंडों का निर्धारण 31.03.2020 या 31.03.2021 (यदि उपलब्ध है) के अनुसार उनकी लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति के अनुसार किया जाएगा. 01 अक्टूबर 2021 से 31 मार्च 2022 तक के लिए पात्रता मानदंडों का निर्धारण 31.03.2021 की स्थिति में उनकी लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति के अनुसार किया जाएगा. 01.10.2021 को या उसके बाद पुनर्वित्त की स्वीकृति और आहरण की अनुमति केवल उन्हीं एसटीसीबी/ डीसीसीबी को दी जाएगी, जिन्होंने लेखा परीक्षा पूरी कर ली है और संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की है जब तक कि विशेष मामले के रूप में अन्यथा अनुमति न दी जाए.

3.7 सांविधिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट में इंगित की गई सीआरएआर और एनपीए की स्थिति पात्रता का आधार बनेगी. लेकिन, लेखापरीक्षा रिपोर्ट और नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट के बीच किसी भी भिन्नता की स्थिति में, पात्रता निर्धारित करने के लिए नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट मान्य होगी. बैंक के नियंत्रण से परे किसी भी कारण से यदि बैंक पात्रता मानदंडों को पूरा करने में असमर्थ है तो नाबार्ड पर्याप्त सुविधा /सुरक्षा के साथ कम पात्रता मानदंडों पर विचार कर सकता है.

4.पुनर्वित्त की मात्रा

नाबार्ड विभिन्न पात्र उद्देश्यों के लिए उनके वास्तविक ऋण कार्यक्रम के आधार पर समेकित सीमा को मंजूरी देगा. प्रत्येक उद्देश्य/गतिविधि के लिए निर्धारित मानदंडों के अनुसार बैंक अपने वास्तविक ऋण कार्यक्रम का मूल्यांकन करेंगे. आरएलपी को पिछले वर्ष के दौरान सभी उद्देश्यों के तहत जारी ऋण के रूप में माना जा सकता है, जिसमें उचित वृद्धि (पिछले 3 वर्षों के दौरान औसत वृद्धि) शामिल है. यदि पिछले वर्ष के दौरान कोई संवितरण नहीं हुआ है, तो बैंक वित्तीय वर्ष के दौरान एसटी (अन्य) गतिविधियों के लिए अपने अनुमानों/योजना के आधार पर अपने आरएलपी का आकलन करेंगे. उद्देश्य पर ध्यान दिए बिना 12 महीने की अवधि के लिए आहरण की अनुमति दी जा सकती है.

4.1मंजूरी के लिए पुनर्वित्त की मात्रा (सामान्य क्षेत्रों के लिए) निम्नानुसार रहेगी:
एसटीसीबी का निवल एनपीए पात्र सीमा
[पात्र जिमस बैंकों / राज्य सहकारी बैंक (द्विस्तरीय / कमजोर जिमस बैंकों) के वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
6% तक 90%
6% से ऊपर और 10% तक 85%
10% से ऊपर और 12% तक 80%
12% से ऊपर पात्र नहीं

4.2 पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एसटीसीबी निवल एनपीए में छूट के साथ अतिरिक्त पुनर्वित्त के लिए निम्नानुसार पात्र होंगे:

एसटीसीबी का निवल एनपीए पात्र सीमा
[पात्र जिमस बैंकों / राज्य सहकारी बैंक (द्विस्तरीय / कमजोर जिमस बैंकों) के वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
10% तक 95%
10% से ऊपर और 15% तक 90%
15% से ऊपर पात्र नहीं

4.3पूर्वी क्षेत्र अर्थात बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ राज्यों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28 जिलों (भारत सरकार की बीजीआरईआई योजना के तहत) में एसटीसीबी पुनर्वित्त की लागू सामान्य मात्रा से अधिक अतिरिक्त पुनर्वित्त के लिए निम्नानुसार पात्र होंगे:

एसटीसीबी का निवल एनपीए पात्र सीमा
[पात्र जिमस बैंकों / राज्य सहकारी बैंक (द्विस्तरीय / कमजोर जिमस बैंकों) के वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
6% तक 95%
6% से ऊपर और 10% तक 90%
10% से ऊपर और 15% तक 85%
15% से ऊपर पात्र नहीं

4.4इस ऋण व्यवस्था के अंतर्गत, पुनर्वित्त को बैंक के स्वामित्व वाली निधि के रूप में माना जाएगा और ब्याज सहायता योजना दिशानिर्देशों के अनुसार, केसीसी पशुपालन और मत्स्य पालन डब्ल्यूसी ऋण के 2 लाख रुपये तक के संवितरित ऋण और केसीसी के अंतर्गत 3 लाख रुपये तक की कुल सीमा के लिए संवितरित एसटी ऋण ब्याज सहायता के लिए पात्र होंगे.

5.उद्देश्य-वार उप-सीमाओं की मंजूरी

नाबार्ड द्वारा एसटीसीबी को मंजूर की जाने वाली समेकित सीमा को जहां आवश्यक हो, संबंधित उद्देश्यों के लिए सीसीबी-वार वास्तविक ऋण कार्यक्रम के आधार पर एसटीसीबी द्वारा उप-सीमाओं में अलग किया जाएगा. इन विभिन्न उद्देश्यों में शामिल हैं:

1. अल्पावधि फसल ऋण प्रति किसान 3 लाख रुपये से अधिक

2.अल्पावधि - कृषि और संबद्ध गतिविधियां

3.कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए अल्पावधि स्वर्ण ऋण

4.अल्पावधि - वास्तविक वाणिज्यिक या व्यापारिक लेनदेनों के वित्तपोषण के लिए (नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21(1)(iv) में निहित)

5.अल्पावधि - सूक्ष्म उद्यम, लघु उद्यम और मध्यम उद्यम

6.अल्पावधि - फसलों का विपणन ST

7.अल्पावधि - औद्योगिक सहकारी समितियां (बुनकरों के अलावा)

8.पेशेवरों और स्वरोजगारों की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए अल्पावधि ऋण

9.एसआरटीओ के लिए वार्षिक रखरखाव की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए अल्पावधि ऋण

10.अल्पावधि - सूक्ष्म उद्यमों, लघु उद्यमों और मध्यम उद्यमों, कुटीर और ग्रामोद्योगों, हथकरघा, लघु वन उपज के संग्रह और विपणन में लगी वन श्रम सहकारी समितियों के 22 स्वीकृत व्यापक समूहों में से किसी एक या अधिक में लगे श्रम अनुबंध, ग्रामीण क्षेत्रों में सिविल कार्य में लगी श्रम अनुबंध सहकारिताएं

11.अल्पावधि - पैक्स / एफएसएस / लैंप्स के बुनकर सदस्यों सहित ग्रामीण कारीगर

12.अल्पावधि - रासायनिक उर्वरकों और अन्य कृषि आदानों की खरीद, भंडारण और वितरण.

13.सोसायटी और पैक्स के लिए अल्पावधि कार्यशील पूंजी ऋण

14.सामाजिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की कार्यशील पूंजी की आवश्यकता के लिए अल्पावधि ऋण

एसटीसीबी स्तर पर समेकित सीमा को उप-सीमाओं में अलग करते समय प्रत्येक उद्देश्य/उप-उद्देश्य के तहत पिछले वर्ष के दौरान अधिकतम बकाया राशि को भी ध्यान में रखा जाए.

6.परिचालन अवधि / आहरण योग्य राशि

ऋण सीमा की परिचालन अवधि 01.04.2021 से 31.03.2022 तक होगी. स्वीकृत ऋण सीमा(एं) नकद ऋण सहायता की प्रकृति में हैं और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक आवश्यकतानुसार कितनी ही बार आहरण और चुकौती कर सकते हैं, बशर्ते खाते(तों) में बकाया स्वीकृत ऋण सीमा से अधिक न हो. खाते(तों) में बकाया शेष राशि मांग पर चुकानी होगी. ऋण सीमा पर प्रत्येक आहरण को एक अलग ऋण के रूप में माना जाएगा और आम तौर पर आहरण की तारीख से 12 महीने की अवधि के भीतर चुकाना होगा. बैंकों को पिछले 12 महीनों के दौरान जारी किए गए पात्र ऋणों के लिए पुनर्वित्त की अनुमति दी जाएगी (एनओडीसी विवरण के अनुसार) बशर्ते ऐसे ऋणों के लिए पुनर्वित्त का लाभ नहीं उठाया गया हो.

7.पुनर्वित्त पर ब्याज दर

7.1ब्याज दर

पुनर्वित्त पर ब्याज दरें समय-समय पर नाबार्ड द्वारा सूचनानुसार समीक्षा के अधीन हैं. ब्याज त्रैमासिक अंतराल पर प्रत्येक तिमाही की पहली तारीख यानी 01 जुलाई, 01 अक्टूबर, 01 जनवरी और 01 अप्रैल को हर साल, पहले की तरह या पूरी मूलधन राशि की चुकौती पर देय है.

7.2चूक की स्थिति में दंडात्मक ब्याज़

चूक की स्थिति में, जिस ब्याज दर पर पुनर्वित्त संवितरित किया गया था, उससे 2% प्रति वर्ष अधिक की दंडात्मक ब्याज, चूक की राशि पर और उस अवधि के लिए जिसके लिए चूक बनी रहती है, वसूल किया जाएगा. दंडात्मक ब्याज दरें समय-समय पर संशोधन के अधीन हैं.

8.परिचालनात्मक अनुशासन

8.1अधिक आहरण

नाबार्ड ऋण संवितरण या एनओडीसी के बारे में गलत डेटा की सूचना की वजह से बैंक द्वारा लिए गए अतिरिक्त पुनर्वित्त को 3 दिनों के भीतर 1% प्रति वर्ष के दंडात्मक ब्याज के साथ वापस मांगते हुए पुनर्वित्त की अनुमेय मात्रा से अधिक निकासी के मामले में गंभीरता से विचार करेगा.

8.2गैर अतिदेय कवर

क.प्रत्येक उद्देश्य के तहत बैंकों को अलग एनओडीसी बनाकर रखना है. मंजूर सीमा पर निकासी की अनुमति नाबार्ड द्वारा एसटीसीबी को कुल एनओडीसी के आधार पर पात्र एसटीसीबी शाखाओं और डीसीसीबी से संबंधित प्रत्येक उद्देश्य के अंतर्गत पहले की तरह दी जाएगी, जिनके पास एसटीसीबी से उधार बकाया है. हालांकि, बैंकों को एनओडीसी की निगरानी करने की आवश्यकता होगी और यदि समग्र एनओडीसी उपलब्ध है तो कोई अतिरिक्त ब्याज प्रभारित नहीं किया जा सकता है. एसटीसीबी को अगले महीने की 20 तारीख तक प्रत्यक्ष रूप से या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डीसीसीबी-वार स्थिति दर्शाते हुए मासिक एनओडीसी विवरण प्रस्तुत करना होगा.

ख.राज्य सहकारी बैंकों द्वारा आहरण इस शर्त के अधीन होगा कि वर्तमान आहरण सहित बकाया उधार पिछले महीने के अंतिम शुक्रवार को उपलब्ध एनओडीसी से अधिक न हो. इसके साथ साथ, प्रत्येक निकासी के समय, एनओडीसी की उपलब्धता के संबंध में निर्धारित प्रारूप में एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा.

8.3एनओडीसी की कमी पर अतिरिक्त ब्याज

एनओडीसी में कमी के मामले में, राज्य सहकारी बैंक को एनओडीसी में घटित कमी को पूरा करना होगा. यदि राज्य सहकारी बैंक इस तरह की कमी के घटित होने की तारीख से एक महीने के भीतर इस कमी को पूरा करने में विफल रहता है, तो 1% प्रति वर्ष की दर से अतिरिक्त ब्याज एनओडीसी में कमी की राशि पर कमी की अवधि के लिए यानी उस तारीख तक प्रभारित किया जाएगा, जब तक कमी की राशि को नियमित नहीं किया जाता है.

8.4डीसीसीबी द्वारा एसटीसीबी के प्रति चूक

यदि इस ऋण व्यवस्था के तहत कोई डीसीसीबी लगातार 3 महीने से अधिक की अवधि के लिए एसटीसीबी के प्रति चूक करता है, तो संबंधित एसटीसीबी को उस डीसीसीबी की सीमा को परिचालित करने की अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी, जब तक कि चूक का नियमन न किया जाए.

8.5चूक की अदायगी

मूलधन की चुकौती, ब्याज के भुगतान और/ या किसी अन्य देय राशि के भुगतान में नाबार्ड के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहने वाले राज्य सहकारी बैंक, नाबार्ड से किसी भी पुनर्वित्त सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे, जब तक कि संबंधित चूक दूर नहीं की जाती.

9.निरीक्षण का अधिकार

नाबार्ड क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के खाता बहियों का निरीक्षण करने/ करवाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

10.विशेष लेखा परीक्षा करवाने का अधिकार

नाबार्ड के पास स्वयं या अन्य एजेंसियों के माध्यम से सहकारी बैंकों (राज्य सहकारी बैंक/पात्र जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक) के खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री की विशेष लेखा परीक्षा कराने का अधिकार यह सुनिश्चित करने के लिए होगा कि बैंक द्वारा खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री को नियम और विनियमों के अनुसार बनाए रखा जाता है और पुनर्वित्त के नियमों और शर्तों का पालन किया जाता है.

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अनुबंध – II

अल्पावधि (अन्य) के तहत नाबार्ड से पुनर्वित्त सहायता प्रदान करने के लिए पात्र गतिविधियां - सहकारी बैंक

ए. कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए कार्यशील पूंजी की आवश्यकता
1. पात्र गतिविधियां

1.1 इस उप-समूह के तहत पुनर्वित्त के लिए नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21 (1) (i) और (ii) के तहत कवर की जाने वाली गतिविधियां पात्र होंगी। सामान्यत निम्नलिखित गतिविधियां पात्र होंगी :

ए. सोने की प्रतिभूति और फसलों पर चार्ज के अतिरिक्त अन्य प्रतिभूति के समक्ष कृषि प्रयोजनों के लिए ऋण

बी. भूमि /अन्य संपार्श्विक गिरवी रखने पर कृषि प्रयोजनों के लिए सहकारी बैंकों द्वारा प्रदान की गई परिक्रामी नकद ऋण सुविधा

सी. कृषि से संबंधित गतिविधियों के लिए प्रदत्त कार्यशील पूंजी ऋण

डी. कृषि के व्यावसायीकरण, निर्यात, मूल्यवर्धन आदि के लिए उच्च वित्तमान वाले किसानों को दी जाने वाली अल्पावधि ऋण सहायता।

1.2 फसल ऋण प्रणाली के तहत जारी किए गए अल्पावधि फसल ऋण जो नाबार्ड से एसटी (एसएओ) ऋण सीमा के तहत कवर किए जाने के पात्र हैं, उन्हें कवर नहीं किया जाएगा।

बी. एसटी - वास्तविक वाणिज्यिक या व्यापार लेनदेन के वित्तपोषण के लिए पुनर्वित्त (जैसा कि नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21(1)(iv) में निहित है)। इसमें ये भी शामिल है:

i) पेशेवर और स्वरोजगार में लगे लोगों की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए अल्पावधि ऋण

ii) एसआरटीओ के लिए वार्षिक रखरखाव हेतु अपेक्षित कार्यशील पूंजी के लिए एसटी ऋण

iii) गैर कृषि प्रयोजनों /बोनाफाइड ट्रेडिंग आदि के लिए सोने के एवज में एसटी ऋण > 50000 रुपये (विशुद्ध रूप से उपभोग प्रयोजनों के अतिरिक्त अन्य ऋणों के लिए)

2. ऋण की मात्रा (यथार्थपरक ऋण वितरण कार्यक्रम)

राज्य सहकारी बैंक के लिए समेकित ऋण सीमा पात्र सीसीबी के यथार्थपरक ऋण वितरण कार्यक्रम के संदर्भ में निर्धारित की जाएगी।

3. प्रतिभूति

3.1 सीसीबी द्वारा राज्य सहकारी बैंक के पक्ष में निष्पादित टाइम प्रॉमिसरी नोट्स (टीपीएन) और राज्य सहकारी बैंक द्वारा नाबार्ड के पक्ष में एक घोषणा जिसमें उन उद्देश्यों को निर्धारित किया गया था जिनके लिए उसने ऋण और अग्रिम दिए हैं।

3.2 इस संबंध में आरबीआई द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंक उधारकर्ताओं से ऐसी प्रतिभूति ले सकते हैं जो उचित और आवश्यक हो।उधार देने वाले बैंक को दृष्टिबंधक / गिरवी/ मोर्टगेज़ रखी गई प्रतिभूति पर नाबार्ड का प्रभार होगा.

4.उधार लेने वाले एसटीसीबी/सीसीबी नाबार्ड को कवर स्टेटमेंट और अन्य विवरण प्रस्तुत करेंगे, जैसा कि नाबार्ड द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जाता है.
C. फसलों का विपणन
1. उद्देश्य

1.1 उत्पादकों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य हेतु उचित अवसर प्रदान करना ताकि वे अपनी उपज को कुछ समय के लिए अपने पास रख सकें।

1.2.कृषि उपज को गिरवी रखने और / या कृषि उपज के लिए देय खरीद मूल्य से फसलों के विपणन के लिए प्रदान किए गए ऋणों में से उत्पादन ऋण की वसूली की सुविधा प्रदान करना।

2. कार्यक्षेत्र

2.1 कृषकों ((दोनों अर्थात पैक्स के सदस्यों के साथ-साथ गैर-सदस्यों)से संबंधित कृषि उत्पादों को गिरवी रखने पर अग्रिम (या तो समितियों के माध्यम से या सीधे एसटीसीबी/सीसीबी द्वारा) पैक्स/विपणन समितियों/अन्य समितियों/ वेयरहाउस/कृषि उत्पाद विपणन समितियों/ सहकारी समितियों/अन्य संस्थाओं के स्वामित्व वाली शीत भंडारण इकाइयों के अपने/किराए पर लिए गए गोदामों/निजी गोदामों या गोदामों में रखा गया है।

2.2 प्रसंस्करण/प्रसंस्करण-सह-विपणन/विपणन समितियों द्वारा कृषकों (पैक्स के सदस्य और गैर-सदस्य दोनों) की कृषि उपज की एकमुश्त खरीद।

2.3Marketing of crops may include food grain crops, cash crops, plantation and horticultural crops.

2.3 फसलों के विपणन में खाद्यान्न फसलें, नकदी फसलें, रोपण और बागवानी फसलें शामिल हो सकती हैं।

2.4 केंद्र/राज्य सरकारों की पीडीएस योजनाएं इस योजना के दायरे से बाहर होंगी।

2.5 नाबार्ड से पुनर्वित्त सहायता के साथ फसलों के विपणन के वित्तपोषण के लिए योजना का लाभ केवल वास्तविक कृषकों, पैक्स के सदस्यों और गैर-सदस्यों दोनों के लिए है; और बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यापारियों/व्यवसायियों आदि को योजना के तहत वित्तपोषित न किया जाए ।

3. कृषि उपज के एवज में बैंकों से ऋण के लिए लाभार्थी

सभी कृषक (पैक्स के उधार लेने वाले और गैर-उधार लेने वाले सदस्य, साथ ही मौसमी कृषि कार्यों में लगे हुए पैक्स के गैर-सदस्य)

4. ऋण की मात्रा (यथार्थपरक ऋण वितरण कार्यक्रम)

4.1 गिरवी रखे गए वास्तविक उपज के मूल्य के 75% से अधिक नहीं, प्रति कृषक सदस्य 10.00 लाख रुपये की अधिकतम सीमा के अधीन।

4.2 गिरवी रखे गए वास्तविक उत्पादों का मूल्य निर्धारण प्रचलित बाजार दर या सरकार द्वारा घोषित खरीद मूल्य जो भी कम हो, के आधार पर किया जा सकता है,

4.3 कृषि उपज को गिरवी रखकर फसलों के विपणन के लिए किसानों को एसटीसीबी/सीसीबी द्वारा प्रत्यक्ष वित्त भी नाबार्ड के परिपत्र संख्या एनबी.डीओएस.सीएमए/ 768/ए.75/2008-09 परिपत्र सं. 68 / डीओएस-10/2008 12 मई 2008 के तहत निर्धारित एक्सपोजर मानदंडों के अधीन होगा.

4.4 फसलों के विपणन के लिए दिए गए ऋण से उत्पादन ऋण और वसूली योग्य अन्य देय राशि की कटौती की जानी चाहिए और इस प्रकार वसूल की गई राशि को तत्काल संबंधित पैक्स/सीसीबी को हस्तांतरित किया जाना चाहिए।

5. मार्जिन आवश्यकताएं:

5.1 उपज गिरवी रखने पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए समितियों को ऋण

ए. उधारकर्ता और समिति के बीच:
25% का सामान्य मार्जिन (जैसा कि ऊपर पैरा 4.1 के अनुसार बनाए रखा जाना आवश्यक है)

बी. समिति और बैंक के बीच:
आम तौर पर कोई अलग मार्जिन निर्धारित नहीं किया जाता है, क्योंकि सदस्यों के स्तर पर 25% का मार्जिन बनाए रखने की आवश्यकता होती है.

5.2 उपज की एकमुश्त खरीद के लिए समितियों को ऋण:

ए. समिती और बैंक के बीच: प्रचलित आरबीआई निर्देशों के अनुसार उपज के गिरवी /दृष्टिबंधक के समक्ष विवेकपूर्ण मार्जिन।

बी. बैंकों द्वारा व्यक्तिगत किसानों को प्रत्यक्ष ऋण:
25% का सामान्य मार्जिन (जैसा कि ऊपर पैरा 4.1 के अनुसार बनाए रखा जाना आवश्यक है)

6. अन्य नियम और शर्तें:

6.1 प्रसंस्करण-सह-विपणन समिति द्वारा उत्पादक सदस्यों से ली गई उपज एक वर्ष में संसाधित कुल उपज का 75% से कम नहीं होनी चाहिए।

6.2 शुद्ध प्रसंस्करण समिति के मामले में, उत्पादकों का संगठन वही होना चाहिए और यह एक लघु उद्योग इकाई की परिभाषा के दायरे में आना चाहिए । इसके अतिरिक्त, प्रसंस्कृत कुल उपज का कम से कम 75 प्रतिशत उत्पादक सदस्यों का होना चाहिए।

6.3 भारतीय रिजर्व बैंक के चयनात्मक ऋण नियंत्रण निर्देशों, यदि कोई हो, के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं के मामले में, कृषि उपज को गिरवी रखकर फसलों के विपणन के लिए ऋण की मंजूरी ऐसे निर्देशों के अनुपालन के अधीन होगी।

6.4 कृषि उपज को गिरवी रखने पर समितियों / किसानों को दिए गए अग्रिमों को एसएओ के वित्तपोषण के लिए लिए गए उधारों के लिए कवर के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि दोनों प्रयोजनों के लिए अलग-अलग ऋण सीमाएं स्वीकृत की गई हैं ।

6.5 विपणन समिति / पैक्स को गिरवी रखी गई उपज उसकी प्रभावी अभिरक्षा में होनी चाहिए। इसी प्रकार, सीसीबी द्वारा काश्तकारों को सीधे वित्त के मामले में, गिरवी रखी गई उपज बैंक की प्रभावी अभिरक्षा में होनी चाहिए। एक बार जब फसलों के विपणन के लिए ऋण (और संबंधित फसल ऋण) चुका दिया जाता है, तो किसानों के पास अपने स्वयं के विपणन करने के लिए समिति / बैंक से अपनी उपज वापस लेने का विकल्प हो सकता है।

6.6 उधारकर्ता वित्तपोषण बैंकों द्वारा निर्धारित गुणवत्ता और भंडारण आवश्यकताओं का पालन करेंगे। वित्तपोषण बैंक को गिरवी रखे गए स्टॉक को अलग से रखा जाएगा और इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरती जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, आग, चोरी आदि के जोखिम को कवर करने के लिए स्टॉक का पर्याप्त रूप से बीमा किया जाना चाहिए।

6.7 जहां आवश्यक हो, ग्रेडिंग, पूलिंग, प्रसंस्करण और बिक्री का संचालन इस तरह से समन्वित किया जाना चाहिए कि वह उस अवधि के भीतर समाप्त हो जाए जिसके लिए योजना के तहत फसलों के विपणन के लिए ऋण की अनुमति दी जाती है और किसी भी स्थिति में ऐसे ऋण को बारह महीने से अधिक की अवधि के लिए नहीं बढ़ाया जा सकता है।

6.8 बैंकों को रिपोर्ट के महीने के बाद प्रत्येक महीने की 15 तारीख तक कृषि उपज की गिरवी पर फसलों के विपणन के लिए उधारकर्ताओं को दिए गए ऋणों के संबंध में उधार लेने वाली समितियों से अपेक्षित मासिक स्टॉक विवरण प्राप्त करना चाहिए और ऐसे सभी विवरणों को सीसीबी के पास रिकॉर्ड में रखा जाना चाहिए और इन्हें एसटीसीबी और नाबार्ड द्वारा सत्यापन के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

6.9 डब्लूडीआरए द्वारा मान्यता प्राप्त गोदामों द्वारा जारी एनडब्ल्यूआर रसीदों /ई एनडब्ल्यूआर रसीदों को गिरवी रखने पर बैंकों द्वारा दिए गए ऋण भी पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे।

डी. औद्योगिक सहकारी समितियां (बुनकरों के अतिरिक्त )

(ए) वित्तीय सहायता का स्वरूप

सूक्ष्म उद्यमों, लघु उद्यमों और मध्यम उद्यमों, कुटीर और ग्रामोद्योग, हथकरघा के 22 स्वीकृत व्यापक समूहों को नाबार्ड द्वारा प्रदान की जाने वाली पुनर्वित्त सुविधाओं की महत्वपूर्ण विशेषताएं निम्नानुसार हैं:

(i) नाबार्ड द्वारा सीसीबी/डीआईसीबी की ओर से एसटीसीबी को केवल सूक्ष्म उद्यमों, छोटे उद्यमों और मध्यम उद्यमों के उत्पादन और विपणन गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए और कुटीर और ग्रामीण औद्योगिक सहकारी समितियों को भी ऋण सीमा स्वीकृत की जाती है। क्रेडिट सीमा के किसी भी हिस्से का उपयोग किसी ऐसी समिति के वित्तपोषण के लिए नहीं किया जाना है, जिसकी गतिविधियों में विपणन के अतिरिक्त स्वयं या उसके सदस्यों द्वारा निर्माण या प्रसंस्करण शामिल नहीं है। इसके अतिरिक्त, अनुमोदित सूक्ष्म उद्यमों, छोटे उद्यमों और मध्यम उद्यमों की खरीद और विपणन गतिविधियों में लगे क्षेत्रीय / राज्य स्तर के संघों के वित्तपोषण के लिए और कुटीर और ग्राम औद्योगिक सहकारी समितियों के लिए भी नाबार्ड द्वारा एसटीसीबी को ऋण सीमा स्वीकृत की जाती है.

(ii) नाबार्ड द्वारा केवल व्यवहार्य या संभावित रूप से व्यवहार्य सूक्ष्म उद्यमों, छोटे उद्यमों और मध्यम उद्यमों और कुटीर और ग्रामीण औद्योगिक सहकारी समितियों के वित्तपोषण के लिए पुनर्वित्त सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। व्यवहार्यता का आकलन करते समय, सहकारी समिति की वित्तीय स्थिति के अतिरिक्त, वार्षिक उत्पादन का स्तर, पिछले वर्ष बिक्री में कारोबार, उपलब्ध शुद्ध डिस्पोजेबल संसाधनों आदि के आधार पर आवश्यक मार्जिन प्रदान करने के लिए समिति की क्षमता को ध्यान में रखा जाना है।

(iii) सीसीबी / डीआईसीबी या एसटीसीबी, जैसा भी मामला हो, उनके बकाया अग्रिमों के समक्ष एसटीसीबी को पुनर्वित्त के माध्यम से ऋण और अग्रिम प्रदान किए जाते हैं और संबंधित संस्थानों की ओर से एसटीसीबी को क्रेडिट सीमा स्वीकृत की जाती है। यहां उल्लिखित बकाया गैर-अतिदेय बकाया होगा और इसमें गैर-नवीनीकृत नकद ऋण सीमा के तहत राशि शामिल नहीं होगी।

(iv) बैंकों द्वारा समितियों को दी गई वित्तीय सहायता के लिए निर्धारित मार्जिन के रखरखाव के अधीन उधार लेने वाली समितियों के पास पर्याप्त स्टॉक-इन-ट्रेड होना चाहिए।

(बी.) कार्यशील पूंजी के मूल्यांकन के लिए मानदंड (यथार्थपरक ऋण वितरण कार्यक्रम)

I. कॉयर के अतिरिक्त, अन्य औद्योगिक सहकारी समितियां

(i) प्राथमिक औद्योगिक सहकारी समितियां (बुनकरों के अतिरिक्त )

प्राथमिक औद्योगिक सहकारी समितियों (बुनकरों के अतिरिक्त ) की कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं का आकलन वर्ष के दौरान अनुमानित उत्पादन के 40% पर किया जाना है अर्थात पिछले वर्ष के उत्पादन या पिछले 3 वर्षों के उत्पादन का औसत, जो भी अधिक हो, साथ ही इसमें 20% और जोड़ा जाना है बशर्ते पिछले वर्ष के दौरान की बिक्री उस वर्ष में उत्पादन के 60% से कम नहीं थी. ऐसे मामलों में जहां बिक्री कम थी, क्रेडिट सीमा को आनुपातिक रूप से कम किया जाना है।

(ii) क्षेत्रीय/राज्य स्तरीय संघ

सूक्ष्म उद्यमों, लघु उद्यमों और मध्यम उद्यमों के क्षेत्रीय/राज्य स्तरीय संघों और कुटीर और ग्राम औद्योगिक सहकारी समितियों के लिए भी, खरीद और विपणन के लिए कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं का आकलन वर्ष के दौरान अनुमानित बिक्री के 50% पर किया जाना है। यानी पिछले वर्ष की बिक्री या पिछले 3 वर्षों की बिक्री का औसत, जो भी अधिक हो इसमें 20%और जोड़ा जाना है. क्रेडिट सीमा फेडरेशन के स्वामित्व वाले फंड के 3 गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए।

II प्राथमिक कॉयर सहकारी समितियां

प्राथमिक कॉयर सहकारी समितियों की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए मानदंड निम्नानुसार हैं:

(i) प्राथमिक कॉयर सहकारी समितियों के मामले में, भूसी और कॉयर के अनुमानित उत्पादन की गणना पिछले वर्ष के उत्पादन या पिछले तीन वर्षों के औसत उत्पादन, जो भी अधिक हो, पर अलग-अलग की जानी है, साथ ही इसमें 20%और जोड़ा जाना है और सरकार से अल्पावधि उधार के तहत उनकी ऋण आवश्यकताओं का मूल्यांकन भूसी के अनुमानित उत्पादन के 75% और कॉयर यार्न के अनुमानित उत्पादन का 331/3% (एक तिहाई) बकाया घटा कर , यदि कोई हो, पर किया जाना है।

(ii) मैट और मैटिंग समितियों के मामले में, सरकार से अल्पावधि उधारों के तहत, ऋण आवश्यकताओं को अनुमानित उत्पादन से बकाया यदि कोई है, को घटाकर 331/3% (एक तिहाई) पर निकाला जाना है।

(iii) सेंट्रल कॉयर मार्केटिंग सोसाइटी के मामले में, क्रेडिट सीमा वर्ष के दौरान अनुमानित बिक्री के 40% से अधिक नहीं होनी चाहिए अर्थात पिछले वर्ष के दौरान वास्तविक बिक्री या पिछले 3 वर्षों की बिक्री का औसत, जो भी अधिक हो तथा इसमें 20%और जोड़ा जाना है. क्रेडिट सीमा सोसायटी के स्वाधिकृत नि‍धियों के 3 गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए।

(सी) मार्जिन आवश्यकता

आम तौर पर, सीसीबी/डीआईसीबी को दृष्टिबंधक अग्रिमों के लिए 40% और गिरवी अग्रिमों के लिए 25% का सामान्य मार्जिन रखते हुए, प्राथमिक औद्योगिक सहकारी समितियों को दृष्टिबंधक/गिरवी आधार पर अग्रिम धनराशि देनी चाहिए। मार्जिन आवश्यकताओं को 10% तक कम किया जा सकता है बशर्ते राज्य सरकार सीसीबी / डीआईसीबी के पक्ष में एक गारंटी निष्पादित करने के लिए सहमत हो, मार्जिन में 10% से 40% तक की कमी और 25% हाइपोथेकेशन और गिरवी अग्रिम के लिए क्रमशः। यह गारंटी नाबार्ड को प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक सामान्य गारंटी के अतिरिक्त होगी जहां नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21 (3) (क) के तहत पुनर्वित्त प्रदान किया जाता है।

ई. सूक्ष्म उद्यमों, लघु उद्यमों और मध्यम उद्यमों, कुटीर और ग्रामोद्योग हथकरघा, वन श्रम सहकारी समितियों के 22 अनुमोदित व्यापक समूहों में से किसी एक या अधिक में लगी श्रम अनुबंध सहकारी समितियां, लघु वन उपज के संग्रहण और विपणन में लगी वन श्रम सहकारी समितियां, ग्रामीण क्षेत्रों में सिविल कार्य में लगी श्रम अनुबंध सहकारी समितियां

1. पात्र गतिविधियां

ए. सूक्ष्म उद्यमों, लघु उद्यमों और मध्यम उद्यमों, कुटीर और ग्रामोद्योग, हथकरघा के 22 अनुमोदित व्यापक समूहों में से किसी एक या अधिक में माल के विपणन, निर्माण या प्रसंस्करण में लगी श्रम अनुबंध सहकारी समितियां

बी. लघु वनोपज के संग्रहण एवं विपणन में लगी वन श्रम सहकारी समितियां।

सी. ग्रामीण क्षेत्रों में सिविल कार्य के लिए लगी श्रम संविदा सहकारी समितियां।

2. क्रेडिट की मात्रा (यथार्थपरक ऋण वितरण कार्यक्रम)

इन समितियों की कार्यशील पूंजी की आवश्यकता (यथार्थपरक ऋण वितरण कार्यक्रम ) का आकलन उनके द्वारा की गई गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा, जो निम्नलिखित के अधीन होगा:

(i) सरकार की गारंटी के बिना स्वामित्व निधियों के बराबर और सरकारी गारंटी के साथ स्वामित्व निधियों के 3 गुना के बराबर नकद ऋण सीमा स्वीकृत की जा सकती है।

(ii) उपर्युक्त के अतिरिक्त, सरकारी/अर्ध-सरकारी निकायों के साथ निष्पादित ठेकों और उनके समक्ष लंबित बिलों के 70 प्रतिशत तक की राशि को वित्तीय मंजूरी दी जा सकती है, बशर्ते ऐसे बिल 3 महीने से अधिक समय से लंबित न हों।

3. मार्जिन की आवश्यकता

आम तौर पर, सीसीबी को दृष्टिबंधक अग्रिमों के लिए 40% और गिरवी अग्रिमों के लिए 25% का सामान्य मार्जिन रखते हुए, संबंधित प्राथमिक सहकारी समितियों को दृष्टिबंधक/गिरवी आधार पर धनराशि अग्रिम देनी चाहिए तथापि, यदि सीसीबी जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) की लघु ऋण (लघु उद्योग) गारंटी योजना, 1981 में शामिल हो गया है, तो गिरवी और दृष्टिबंधक अग्रिम दोनों के लिए मार्जिन आवश्यकता को 10% तक कम किया जा सकता है।अन्य मामलों में भी, मार्जिन आवश्यकताओं को 10% तक कम किया जा सकता है, बशर्ते राज्य सरकार दृष्टिबंधक और गिरवी अग्रिमों के लिए क्रमशः 10% से 40% और 25% से अधिक मार्जिन में कमी के लिए सीसीबी के पक्ष में एक गारंटी निष्पादित करने के लिए सहमत है. है।यह गारंटी नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा21(3)(ए) के तहत पुनर्वित्त प्रदान करने के लिए नाबार्ड को प्रस्तुत की जाने वाली अपेक्षित सामान्य गारंटी के अतिरिक्त होगी.

एफ. पैक्स/एफएसएस/लैंपस के बुनकर सदस्यों सहित ग्रामीण कारीगर

(ए) वित्तीय सहायता का स्वरूप

(i) पैक्स/एफएसएस/एलएएमपीएस में एक पूर्णकालिक प्रबंधक/सचिव/प्रबंध निदेशक होना चाहिए। समितियों को पिछले सहकारी वर्ष के दौरान लेखापरीक्षा में 'ए' या 'बी' श्रेणी में रखा गया हो। 'सी' श्रेणी की समितियों के मामले में, सीसीबी उन्हें आरसीएस की विशेष सिफारिश पर ही वित्तपोषित कर सकते हैं, जिसमें समिति के कामकाज में सुधार के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख हो।

(ii) सीसीबी द्वारा पैक्स/एफएसएस/लैंप के वित्तपोषण के लिए और उनके ग्रामीण कारीगर और बुनकर सदस्यों को ऋण देने के लिए एसटीसीबी को ऋण सीमा के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

(iii) वित्तीय सहायता का लाभ केवल पैक्स/एफएस/लैंप के बुनकर सदस्यों सहित ऐसे ग्रामीण कारीगरों के उत्पादन और विपणन या सर्विसिंग गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए ही प्राप्त किया जा सकता है जो अनुमोदित सूक्ष्म उद्यमों, लघु उद्यमों और मध्यम उद्यमों, कुटीर और ग्राम उद्योगों या हथकरघा बुनाई उद्योग के 22 व्यापक समूहों में से किसी एक में लगे हुए हैं और व्यवहार्य आधार पर काम कर रहे हैं ।

(iv) कार्यशील पूंजी प्रयोजनों के लिए बुनकरों सहित ग्रामीण कारीगरों को दी गई वित्तीय सहायता को कारीगरों के औजारों, स्टॉक, कच्चे माल और तैयार माल के दृष्टिबंधन द्वारा सुरक्षित और समिति के दो सदस्यों की प्रतिभूति द्वारा सुरक्षित किया जाना चाहिए।

(v) सीसीबी पर अतिदेय के स्तर से संबंधित पात्रता मानदंड लागू नहीं होते हैं और ग्रामीण कारीगरों और बुनकर सदस्यों को पैक्स / एफएसएस / एलएएमपीएस के माध्यम से वित्तपोषित करने के लिए ऋण सीमाएं स्वीकृत की जाती हैं, भले ही संबंधित सीसीबी के अतिदेय का स्तर कुछ भी हो। तथापि, सीसीबी को ऐसे अग्रिमों के संबंध में अतिदेय स्थिति की बारीकी से निगरानी करनी चाहिए।

(बी) कार्यशील पूंजी का आकलन करने के लिए मानदंड (यथार्थपरक ऋण वितरण कार्यक्रम)

ग्रामीण कारीगरों/बुनकर सदस्यों के वित्तपोषण के लिए समितियों की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं का आकलन अनुमानित उत्पादन के 40% (अर्थात पिछले वर्ष के उत्पादन या पिछले तीन वर्षों के उत्पादन का औसत, जो भी अधिक हो, इसमें 20% जोड़ा जाना है ) पर किया जाता है, बशर्ते पिछले वर्ष के दौरान बिक्री उस वर्ष के उत्पादन के 60% से कम नहीं थी। जहां बिक्री कम होती है, वहां क्रेडिट सीमाएं आनुपातिक रूप से कम कर दी जाती हैं। ग्रामीण कारीगर की गतिविधि के लिए ऋण पात्रता का आकलन करने में, वार्षिक उत्पादन का स्तर, बिक्री कारोबार, कच्चे माल, तैयार माल, उपकरण आदि के दृष्टिबंधक के माध्यम से प्रतिभूति की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाना है। उत्पादित माल आसानी से विपणन योग्य होना चाहिए। जहां कच्चा माल ग्रामीण कारीगरों से संबंधित नहीं है और कार्यकलाप एक सेवा गतिविधि है, ऐसे मामलों में ग्रामीण कारीगरों को औज़ार और उपकरण खरीदने के लिए निवेश ऋण और अधिकतम 3 महीने की अवधि के लिए श्रम शुल्क, किराया, बिजली / ईंधन आदि के लिए कार्यशील पूंजी प्रदान की जा सकती है।

(सी) मार्जिन की आवश्यकता

आम तौर पर, सीसीबी को दृष्टिबंधक अग्रिमों के लिए 40% और गिरवी अग्रिमों के लिए 25% का सामान्य मार्जिन रखते हुए, पैक्स/एफएसएस/लैंपस को दृष्टिबंधक/गिरवी आधार पर धनराशि अग्रिम देनी चाहिए तथापि, यदि सीसीबी जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) की लघु ऋण (लघु उद्योग) गारंटी योजना, 1981 में शामिल हो गया है, तो गिरवी और दृष्टिबंधक अग्रिम दोनों के लिए मार्जिन आवश्यकता को 10% तक कम किया जा सकता है।अन्य मामलों में भी, मार्जिन आवश्यकताओं को 10% तक कम किया जा सकता है, बशर्ते राज्य सरकार दृष्टिबंधक और गिरवी अग्रिमों के लिए क्रमशः 10% से 40% और 25% से अधिक मार्जिन में कमी के लिए सीसीबी के पक्ष में एक गारंटी निष्पादित करने के लिए सहमत है।यह गारंटी नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा21(3)(ए) के तहत पुनर्वित्त प्रदान करने के लिए नाबार्ड को प्रस्तुत की जाने वाली अपेक्षित सामान्य गारंटी के अतिरिक्त होगी.

जी. रासायनिक उर्वरकों और अन्य कृषि इनपुट्स की खरीद, भंडारण और वितरण

1. क्रेडिट की मात्रा (यथार्थपरक ऋण वितरण कार्यक्रम):

ए. नकद और कैरी आधार पर रासायनिक उर्वरकों और अन्य कृषि आदानों का खुदरा वितरण

नकद भुगतान पर तत्काल आपूर्ति' के आधार पर उर्वरक/इनपुट वितरण में लगे पैक्स/पीसीएमएस आदि की ऋण आवश्यकताओं का आकलन पिछले कैलेंडर वर्ष में उर्वरकों/इनपुटों की दो महीने की औसत बिक्री पर किया जाएगा।

बी. राज्य के स्वामित्व वाले संघों/राज्य/शीर्ष सहकारी विपणन समितियों की खरीद और विपणन गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए राज्य सहकारी बैंकों के लिए पुनर्वित्त का प्रावधान

1. उद्देश्य

विपणन संघ और सहकारी समितियां, कृषि व्यवसाय और विभिन्न कृषि वस्तुओं के मूल्य/आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

बड़ी संख्या में किसान, उत्पादक संगठन और प्राथमिक समितियां इन संस्थानों पर अपनी उपज के विपणन और इनपुट आपूर्ति, मूल्यवर्धन और भंडारण सुविधाओं जैसी मूल्य वर्धित सेवाओं के लिए निर्भर हैं।

इन संघों और सहकारी समितियों को विपणन कार्यों के लिए मौसमी और समय पर अल्पकालिक ऋण सुविधा की आवश्यकता होती है ताकि उनके द्वारा दैनिक कार्यों का संचालन किया जा सके.

2. पात्र संस्थान:

ए. राज्य एजेंसियां /समितियां

बी. राज्य सिविल आपूर्ति निगम

सी. राज्य सहकारी कृषि। मार्केटिंग फेडरेशन (मार्कफेड)

डी. राज्य कृषि उद्योग निगम

इ. राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित अन्य राज्य सहकारी समितियां / संघ

एफ. उर्वरकों/कृषि आदानों की थोक खरीद, भंडारण और वितरण में लगे हुए राज्य/शीर्ष सहकारी विपणन समिति / संघ

3. पात्र गतिविधियां

ए. खाद्यान्नों, दालों और मोटे अनाजों की खरीद

बी. बीज, उर्वरक और अन्य कृषि, आदानों का भंडारण और वितरण

4. संघों / समितियों के लिए पात्रता मानदंड:

ए. यह राज्य अधिनियमों द्वारा स्थापित या गठित होना चाहिए और प्रदत्त पूंजी का प्रमुख हिस्सा राज्य सरकार के पास या राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित होना चाहिए।

बी. पिछले तीन वर्षों के दौरान अर्जित लाभ होना चाहिए,संचित हानि नहीं

सी. राज्य सरकार की गारंटी के साथ समर्थित होने पर खराब वित्तीय स्थिति वाली संस्थाओं पर विचार किया जा सकता है।

डी. भारतीय रिजर्व बैंक की खाद्य ऋण व्यवस्था के तहत केंद्र/राज्य सरकारों की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और खरीद योजनाएं इस योजना के दायरे से बाहर होंगी।

5. ऋण का स्वरूप:

5.1 स्वीकृत ऋण सीमा नकद ऋण सीमा के रूप में होगी है। प्रत्येक आहरण को एक अलग ऋण के रूप में माना जाएगा और आम तौर पर इसे आहरण की तारीख से 12 महीने की अवधि के भीतर चुकाना होगा।

6. ब्याज दर:

6.1 पुनर्वित्त की ब्याज दर नाबार्ड द्वारा समय-समय पर संशोधन के अधीन है. ब्याज प्रत्येक तिमाही के पहले दिन अर्थात 1 जुलाई, 1 अक्तूबर, 1 जनवरी और 1 अप्रैल को त्रैमासिक अंतराल पर देय होता है, या पूरी मूल राशि की चुकौती पर देय होता है।

7. पुनर्वित्त की मात्रा

7.1 पुनर्वित्त की मात्रा 80% से 95% के बीच होगी जैसा कि परिपत्र के अनुबंध I के पैराग्राफ 4 में वर्णित है।

8. मार्जिन आवश्यकताएं:

Prudential margins against pledge / hypothecation of produce as per RBI instructions in vogue.

भारतीय रिजर्व बैंक के प्रचलित निर्देशों के अनुसार उपज के गिरवी/दृष्टिबंधन के समक्ष विवेकपूर्ण मार्जिन।

9. अन्य नियम और शर्तें:

9.1 भारतीय रिजर्व बैंक के चयनात्मक ऋण नियंत्रण निर्देश, यदि कोई हैं, के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं के मामले में, कृषि उपज को गिरवी रखकर फसलों के विपणन के लिए ऋण की मंजूरी ऐसे निर्देशों के अनुपालन के अधीन होगी।

9.2 फेडरेशन को वित्तपोषण बैंकों द्वारा निर्धारित गुणवत्ता और भंडारण आवश्यकताओं का पालन करना होगा। वित्तपोषक बैंक को गिरवी रखे गए स्टॉक को अलग से रखा जाएगा और इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरती जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त स्टॉक को आग, चोरी आदि के जोखिम से बचाने के लिए इसका पर्याप्त रूप से बीमा किया जाना चाहिए।

9.3 जहां आवश्यक हो, ग्रेडिंग, पूलिंग, प्रसंस्करण और बिक्री का संचालन इस तरह से समन्वित किया जाना चाहिए कि वह उस अवधि के भीतर समाप्त हो जाए जिसके लिए योजना के तहत फसलों के विपणन के लिए ऋण की अनुमति दी जाती है और किसी भी स्थिति में ऐसे ऋण को बारह महीने से अधिक की अवधि के लिए नहीं बढ़ाया जा सकता है।

9.3 बैंकों को रिपोर्ट के महीने के बाद प्रत्येक माह की 15 तारीख तक दिए गए ऋणों के संबंध में उधार लेने वाले संघों/समितियों से अपेक्षित मासिक स्टॉक विवरण प्राप्त करना चाहिए और ऐसे सभी विवरणों को सीसीबी के पास रिकॉर्ड में रखा जाना चाहिए और एसटीसीबी और नाबार्ड द्वारा सत्यापन के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

9.4 बैंकों द्वारा फेडरेशनों / समितियों को दी गई वित्तीय सहायता निर्धारित मार्जिन के अधीन पर्याप्त स्टॉक/स्टॉक-इन-ट्रेड द्वारा समर्थित होनी चाहिए।

9.5 एसटीसीबी/सीसीबी द्वारा प्रस्तुत किए गए आहरणों को स्टॉक विवरण द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए।

9.6 अल्पावधि (अन्य) प्रयोजनों के लिए लागू दस्तावेज

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