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अल्पावधि (अन्य) के तहत विभिन्न प्रयोजनों के वित्तपोषण के लिए नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अल्पावधि पुनर्वित्त का प्रावधान - वर्ष 2021-22 के लिए नीति

कृपया दिनांक 16 अप्रैल 2020 के राबै.डॉर/35/ ए-1(एसटी-अन्य)/2020-21 (परिपत्र संख्या 108 /डॉर-33/2020) और इसके बाद जारी संशोधनों का संदर्भ ग्रहण करें, जिसमें फसलों के विपणन, आरएलपी के आधार पर मौसमी कृषि परिचालनों से इतर कुछ अनुमोदित प्रयोजनों के लिए संबन्धित प्रयोजनों के वित्तपोषन हेतु क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए समेकित अल्पावधि (अन्य) सीमा की मंजूरी संबंधी नाबार्ड की नीति के बारे में सूचित किया गया था.

2.इन नीतिगत दिशानिर्देशों को वर्तमान वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भी जारी रखा गया है. 2021-22 के दौरान नाबार्ड द्वारा अल्पावधि (अन्य) पुनर्वित्त संबंधी प्रावधानों को अनुबंध-I में निर्दिष्ट किया गया है. विभिन्न प्रयोजनों के लिए
अभी लागू मूल्यांकन मानदंडों आवश्यक परिवर्तनों के साथ अनुबंध- II में इंगित किया गया है.

3. नाबार्ड से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त सहायता नाबार्ड द्वारा समय-समय पर सूचित की गई ब्याज दर के अनुसार उपलब्ध होगी.

4. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक वर्ष 2021-22 के लिए अपनी अल्पावधि (अन्य) ऋण सीमा की मंजूरी के लिए निर्धारित प्रोफ़ार्मा में पूर्ण रूप से भरा अपना आवेदन नाबार्ड के संबन्धित क्षेत्रीय कार्यालय को तत्काल भिजवाने की व्यवस्था करें ताकि ऋण सीमा समय पर मंजूर की जा सके.

5. कृपया इस परिपत्र की पावती हमारे संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को भिजवाएं.

अनुबंध I

सामान्य नियम व शर्तें – क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

1.अल्पावधि (अन्य) सीमा की परिचालन अवधि

वर्ष 2021-22 के लिए एसटी (अन्य) सीमा की परिचालन अवधि 01.04.2021 से 31.03.2022 तक होगी.

2.समेकित सीमा की स्वीकृति

अल्पावधि (अन्य) के तहत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को फसलों के विपणन के वित्तपोषण के लिए, वास्तविक वाणिज्यिक या व्यापार लेनदेन, कारीगरों (हथकरघा बुनकरों के अलावा) और ग्राम / कुटीर / छोटे क्षेत्र के उद्योगों के उत्पादन और विपणन गतिविधियों, कमजोर वर्गों से संबंधित व्यक्तियों (जैसा कि आरबीआई ने दिनांक 04 सितंबर 2020 के अपने परिपत्र एफ़आईडीडी.सीओ.प्लान.बीसी.जे/04.09.01/2021 द्वारा परिभाषित किया है) जो कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां के इनपुट के वितरण सहित व्यापार / व्यवसाय / सेवा गतिविधियों में लगे हुए हैं, के वित्तपोषण के लिए एक समेकित सीमा मंजूर की जाएगी. इन उद्देश्यों के लिए प्रदत्त समग्र सावधि ऋण (जो अन्यथा नाबार्ड की स्वचालित पुनर्वित्त योजना के तहत पात्र हैं) अल्पावधि (अन्य) ऋण सीमा के तहत पुनर्वित्त के लिए पात्र नहीं हैं.

3.अन्य पात्र उद्देश्य

i.प्रति किसान 3 लाख रुपये से अधिक के अल्पावधि फसल ऋण.

ii.कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए अल्पावधि स्वर्ण ऋण

iii. कृषि संबद्ध गतिविधियों के लिए अल्पावधि ऋण

iv. पेशेवरों और स्वरोजगार हेतु कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए अल्पावधि ऋण

v. एसआरटीओ के वार्षिक रखरखाव हेतु कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए अल्पावधि ऋण

vi. गैर कृषि प्रयोजनों/वास्तविक व्यापार आदि के लिए सोने के समक्ष अल्पावधि ऋण > 50000 रुपये (उपभोग उद्देश्यों के अलावा विशुद्ध रूप से अन्य ऋणों के लिए)

vii. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए अल्पावधि ऋण.

viii. सामाजिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की कार्यशील पूंजी की आवश्यकता के लिए अल्पावधि ऋण

4.पात्रता मानदंड

4.1. लेखापरीक्षा

वर्ष 2019-20 के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की लेखा परीक्षा पूरी हो जानी चाहिए और वित्तीय विवरणों के साथ संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट, वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में ऋण आवेदन पर विचार करने के लिए नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की जानी चाहिए. तथापि, यदि 2020-21 की लेखा परीक्षा पूरी हो जाती है, तो पहली तिमाही में सीमा तय करने के लिए इस पर विचार किया जाएगा. इसके अलावा 31.03.2021 की स्थिति में, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की लेखापरीक्षा पूरी की जानी चाहिए और उसकी रिपोर्ट 30.06.2021 तक प्रस्तुत की जानी चाहिए. 01.07.2021 को या उसके बाद पुनर्वित्त की स्वीकृति/आहरण की अनुमति केवल उन्हीं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को दी जाएगी, जिन्होंने पात्रता मानदंडों के संबंध में संतोषजनक स्थिति के अधीन, लेखा परीक्षा पूरी की है और संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत कर दी है.

4.2नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की आंतरिक जोखिम रेटिंग

4.2.1 विशेष रूप से जरूरतमंद कृषि क्षेत्र को अधिक ऋण देने को प्रोत्साहित करने की भावना को ध्यान में रखते हुए, यह निर्णय लिया गया है कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए सीआरएआर, शुद्ध एनपीए और शुद्ध लाभ के प्रारंभिक मानदंड में छूट दी जाए और उन सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अल्पावधि पुनर्वित्त प्रदान किया जाए जिनकी आंतरिक जोखिम रेटिंग श्रेणी एनबीडी1 से एनबीडी7 है.

4.2.2 सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की जोखिम रेटिंग नाबार्ड द्वारा जोखिम प्रबंधन विभाग (आरएमडी) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के आधार पर की जाएगी और एनडीबी1 से एनडीबी7 की जोखिम रेटिंग प्राप्त करने वाले आरआरबी अतिरिक्त अल्पावधि (अन्य) के तहत पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.

4.3 पहली तिमाही अर्थात 01 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 के दौरान पात्रता मानदंड 31.03.2020 या 31.03.2021 (यदि लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति उपलब्ध हो) के अनुसार बैंक की लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति पर आधारित होगा. 01 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2022 तक, पात्रता मानदंड 31.03.2021 को लेखा परीक्षित वित्तीय स्थिति पर आधारित होगा. 01.07.2021 को या उसके बाद मंजूरी/आहरण की अनुमति केवल उन्हीं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को दी जाएगी, जिन्होंने लेखा परीक्षा पूरी कर ली है और नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को संतोषजनक लेखा परीक्षा रिपोर्ट जमा कर दी है, जब तक कि विशेष मामले के रूप में अन्यथा अनुमति न दी जाए.

4.4 सांविधिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट में दर्शाये वित्तीय विवरणों के आधार पर किया जोखिम रेटिंग का मूल्यांकन पात्रता का आधार बनेगा. हालांकि, लेखापरीक्षा रिपोर्ट और नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट के बीच किसी भी भिन्नता की स्थिति में, नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट पात्रता के लिए मान्य होगी. बैंक के नियंत्रण से बाहर किसी भी कारण से, यदि बैंक पात्रता मानदंड को पूरा करने में असमर्थ है तो नाबार्ड पर्याप्त सुविधा /सुरक्षा के साथ कम पात्रता मानदंडों पर विचार कर सकता है.

5.पुनर्वित्त की मात्रा

नाबार्ड पात्र उद्देश्यों के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वास्तविक ऋण कार्यक्रम के आधार पर उनकी समेकित ऋण सीमा स्वीकृत करेगा. (फसलों के विपणन / मौसमी कृषि परिचालन के अलावा अन्य अनुमोदित उद्देश्य). बैंक अपने वास्तविक ऋण कार्यक्रम का मूल्यांकन प्रत्येक गतिविधि के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार करेंगे. पिछले वर्ष के दौरान सभी उद्देश्यों के तहत जारी ऋणों को आरएलपी के रूप में माना जा सकता है, जिसमें उचित वृद्धि (पिछले 3 वर्षों के दौरान औसत वृद्धि) शामिल है. यदि पिछले वर्षों के दौरान कोई संवितरण नहीं हुआ है, तो बैंक वित्तीय वर्ष के दौरान अल्पावधि (अन्य) गतिविधियों के लिए अपने अनुमानों/योजना के आधार पर अपने आरएलपी का आकलन करेंगे. उद्देश्य पर ध्यान दिए बिना 12 महीने की अवधि के लिए आहरण की अनुमति दी जा सकती है.

5.1मंजूरी के लिए पुनर्वित्त की मात्रा निम्नानुसार रहेगी:
सामान्य क्षेत्र
नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की जोखिम रेटिंग पात्र सीमा
[वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
एनबीडी1 – एनडीबी4 90%
एनबीडी5 – एनडीबी7 85%
एनबीडी8 – एनडीबी9 पात्र नहीं

5.2पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक निवल एनपीए में रियायत के साथ अतिरिक्त ऋण सीमा के लिए निम्नानुसार पात्र होंगे:

नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की जोखिम रेटिंग पात्र सीमा
[वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
एनबीडी1 – एनडीबी4 95%
एनबीडी5 – एनडीबी7 90%
एनबीडी8 – एनडीबी9 पात्र नहीं

5.3 पूर्वी क्षेत्र अर्थात बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ राज्यों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28 जिलों में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (भारत सरकार की बीजीआरईआई योजना के तहत) अतिरिक्त ऋण सीमा के लिए निम्नानुसार पात्र होंगे:

नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की जोखिम रेटिंग पात्र सीमा
[वास्तविक ऋण कार्यक्रम (आरएलपी) के प्रतिशत के रूप में]
एनबीडी1 – एनडीबी4 95%
एनबीडी5 – एनडीबी7 90%
एनबीडी8 – एनडीबी9 पात्र नहीं

5.4 इस ऋण व्यवस्था के तहत पुनर्वित्त को बैंक के स्वामित्व वाली निधि के रूप में माना जाएगा और केसीसी पशुपालन और मत्स्य पालन डब्ल्यूसी ऋण के 2 लाख रुपये तक के ऋण और केसीसी के तहत 3 लाख रुपये तक अल्पावधि ऋण की कुल सीमा के लिए ब्याज सहायता योजना दिशानिर्देशों के अनुसार ब्याज सहायता के लिए पात्र होगा.

6.अल्पावधि वित्तपोषण के लिए ऋण सीमा – फसलों के विपणन, पशुपालन, मत्स्य पालन क्षेत्र और कुछ अनुमोदित उद्देश्य (अन्य)

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक फसलों के विपणन के लिए, और कारीगरों (हथकरघा बुनकरों के अलावा) और गांव / कुटीर / छोटे क्षेत्र के उद्योगों के उत्पादन और विपणन गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए, वास्तविक वाणिज्यिक या व्यापार लेनदेन के वित्तपोषण के लिए, कमजोर वर्ग से संबंधित व्यक्तियों (जैसा कि आरबीआई ने दिनांक 04 सितंबर 2020 के अपने मास्टर परिपत्र एफ़आईडीडी.सीओ.प्लान.बीसी.जे/04.09.01/2021 द्वारा परिभाषित किया है, और जो कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए इनपुट के वितरण सहित व्यापार / व्यवसाय / सेवा गतिविधियों में लगे हुए हैं) के वित्तपोषण के लिए अपनी ऋण सीमा आवश्यकताओं को इंगित कर सकते हैं और समेकित ऋण सीमा आवेदनों में अलग से और उपर्युक्त कार्यक्रमों के तहत प्रदान किए गए ऋणों के संबंध में अलग-अलग खातों के और मांग संग्रह शेष (डीसीबी) के रजिस्टरों को बनाए रखते हैं.

7.परिचालन अवधि / आहरण योग्य राशि

ऋण सीमा की परिचालन अवधि 01.04.2021 से 31.03.2022 तक होगी. स्वीकृत ऋण सीमा(एं) नकद ऋण सहायता की प्रकृति में हैं और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक आवश्यकतानुसार कितनी ही बार आहरण और चुकौती कर सकते हैं, बशर्ते खाते(तों) में बकाया स्वीकृत ऋण सीमा से अधिक न हो. खाते(तों) में बकाया शेष राशि मांग पर चुकानी होगी. ऋण सीमा पर प्रत्येक आहरण को एक अलग ऋण के रूप में माना जाएगा और आम तौर पर आहरण की तारीख से 12 महीने की अवधि के भीतर चुकाना होगा. बैंकों को पिछले 12 महीनों के दौरान जारी किए गए पात्र ऋणों के लिए पुनर्वित्त की अनुमति दी जाएगी (एनओडीसी विवरण के अनुसार) बशर्ते ऐसे ऋणों के लिए पुनर्वित्त का लाभ नहीं उठाया गया हो.

8.पुनर्वित्त पर ब्याज दर

8.1ब्याज दर

पुनर्वित्त पर ब्याज दरें नाबार्ड द्वारा समय-समय पर तय की जाएंगी. ब्याज त्रैमासिक अंतराल पर प्रत्येक तिमाही की पहली तारीख यानी 01 जुलाई, 01 अक्टूबर, 01 जनवरी और 01 अप्रैल को हर साल, पहले की तरह या पूरी मूलधन राशि की चुकौती पर देय है.

8.2चूक की स्थिति में दंडात्मक ब्याज़

चूक की स्थिति में, जिस ब्याज दर पर पुनर्वित्त संवितरित किया गया था, उससे 2% प्रति वर्ष अधिक की दंडात्मक ब्याज, चूक की राशि पर और उस अवधि के लिए जिसके लिए चूक बनी रहती है, वसूल किया जाएगा. दंडात्मक ब्याज दरें समय-समय पर संशोधन के अधीन हैं.

9.परिचालनात्मक अनुशासन

9.1 नाबार्ड ऋण संवितरण या एनओडीसी के बारे में गलत डेटा की सूचना की वजह से बैंक द्वारा लिए गए अतिरिक्त पुनर्वित्त को 3 दिनों के भीतर 1% प्रति वर्ष के दंडात्मक ब्याज के साथ वापस मांगते हुए पुनर्वित्त की अनुमेय मात्रा से अधिक निकासी के मामले में गंभीरता से विचार करेगा.

9.2गैर अतिदेय कवर

क.क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कुल एनओडीसी के आधार पर यानी एक साथ लिए गए सभी उद्देश्यों के लिए स्वीकृत सीमाओं के समक्ष आहरण कर सकते हैं. प्रत्येक उद्देश्य के तहत बैंकों को अलग एनओडीसी बनाकर रखना है. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को मासिक एनओडीसी विवरण प्रस्तुत करना होगा जिसका फॉर्मेट दिनांक 26.05.1999 के परिपत्र संख्या एनबी.पीसीडी(ओपीआर)/662(ए)/ए.137 (विशेष)/1999-2000 के अनुबंध (समय-समय पर संशोधित) में दिया गया है और इसमें उद्देश्यों को इंगित किया गया हो और यह अगले महीने की 20 तारीख तक प्रत्यक्ष रूप से या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यालय तक पहुंच जाए.

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ख.क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा आहरण इस शर्त के अधीन होगा कि वर्तमान आहरण सहित बकाया उधार पिछले महीने के अंतिम शुक्रवार को उपलब्ध एनओडीसी से अधिक न हो. इसके साथ साथ, प्रत्येक निकासी के समय, एनओडीसी की उपलब्धता के संबंध में निर्धारित प्रारूप में एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा.

9.3एनओडीसी की कमी पर अतिरिक्त ब्याज

एनओडीसी में कमी के मामले में, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को एनओडीसी में घटित कमी को पूरा करना होगा. यदि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक इस तरह की कमी के घटित होने की तारीख से एक महीने के भीतर इस कमी को पूरा करने में विफल रहता है, तो 1% प्रति वर्ष की दर से अतिरिक्त ब्याज एनओडीसी में कमी की राशि पर कमी की अवधि के लिए यानी उस तारीख तक प्रभारित किया जाएगा, जब तक कमी की राशि को नियमित नहीं किया जाता है.

9.4 बकाया ऋणों में मूलधन और ब्याज का पृथक्करण

पहले की तरह, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक बकाया राशि से ब्याज घटक (अतिदेय / गैर-अतिदेय ब्याज) को अलग कर सकते हैं और नाबार्ड से पुनर्वित्त सहायता की पात्रता तय करने के लिए, ऋण सीमा आवेदन और आहरण आवेदन दोनों के लिए अपने आवेदन में केवल मूलधन ऋण राशि का उल्लेख करें. इसके अलावा, पहले की तरह, मासिक एनओडीसी विवरण में केवल ऋण के मूलधन के हिस्से (जारी, वसूल, बकाया और अतिदेय) की सूचना दी जानी चाहिए.

9.5 चूक की अदायगी

मूलधन की चुकौती,ब्याज के भुगतान और/ या किसी अन्य देय राशि के भुगतान में नाबार्ड के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, नाबार्ड से किसी भी पुनर्वित्त सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे, जब तक कि संबंधित चूक दूर नहीं की जाती.

10. निरीक्षण का अधिकार

नाबार्ड क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के खाता बहियों का निरीक्षण करने/ करवाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

11. विशेष लेखा परीक्षा करवाने का अधिकार

नाबार्ड के पास स्वयं या अन्य एजेंसियों के माध्यम से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री की विशेष लेखा परीक्षा कराने का अधिकार यह सुनिश्चित करने के लिए होगा कि बैंक द्वारा खातों और अन्य प्रासंगिक सामग्री को नियम और विनियमों के अनुसार बनाए रखा जाता है और पुनर्वित्त के नियमों और शर्तों का पालन किया जाता है.

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अनुबंध II

अल्पावधि (अन्य) के तहत नाबार्ड से पुनर्वित्त सहायता के प्रावधान के लिए पात्र गतिविधियों के लिए मूल्यांकन मानदंड – क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

(अ) फसलों का विपणन
1. उद्देश्य

1.1 कुछ समय के लिए उपज को अपने पास रख कर उत्पादकों को उनकी उपज के लिए एक लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए उचित अवसर प्रदान करना.

1.2कृषि उपज को गिरवी रखकर और/या कृषि उपज के लिए देय खरीद मूल्य से फसलों के विपणन के लिए प्रदान किए गए ऋणों में से उत्पादन ऋण की वसूली की सुविधा प्रदान करना.

2. कार्यक्षेत्र

2.1 किसानों द्वारा अपने/किराए के गोदामों, निजी गोदामों/शीत भंडारण इकाइयों/गोदामों, शीत भंडारण इकाइयों या केंद्रीय/राज्य भंडारण निगमों और कृषि उत्पाद विपणन समितियों के गोदामों में रखी गई कृषि उपज की गिरवी के समक्ष अग्रिम. एनडब्ल्यूआर/ ई-एनडब्ल्यूआर रसीदों की गिरवी पर जारी अग्रिम भी पात्र हैं.

2.2 फसलों में खाद्यान्न फसलें, नकदी फसलें, बागान और बागवानी फसलें शामिल हैं

2.3केंद्र/राज्य सरकारों की पीडीएस और खरीद योजनाएं इस योजना के दायरे से बाहर होंगी.
यह योजना केवल वास्तविक खेतीहर किसानों के लिए लागू है. व्यापारी, व्यवसायी, कमीशन एजेंट आदि इस योजना के अंतर्गत शामिल होने के पात्र नहीं हैं.

3. पात्र ऋणकर्ता

बागवानी और बागान फसलों सहित मौसमी कृषि कार्यों में लगे सभी किसान, भले ही उन्होंने बैंकों से उत्पादन ऋण प्राप्त किया है या नहीं.

4. ऋण की मात्रा (वास्तविक ऋण कार्यक्रम)

4.1 ऋण प्रति किसान ₹ 10.00 लाख की सीमा के अधीन गिरवी रखी गई वास्तविक उपज के मूल्य के 75% से अधिक नहीं होना चाहिए.

4.2 गिरवी रखी गई वास्तविक उपज का मूल्य प्रचलित बाजार मूल्य या सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम खरीद मूल्य, जो भी कम हो, के आधार पर निर्धारित किया जाए.

4.3 बैंकों को फसलों के विपणन के लिए दिए गए ऋण से बकाया उत्पादन ऋण, यदि कोई हो, की वसूली करनी होगी.

5.मार्जिन

व्यक्तिगत किसानों को गिरवी ऋण पर 25% का सामान्य मार्जिन।

6.बैंको को पुनर्वित्त सहायता

6.1 पुनर्वित्त सहायता नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 21(4) के साथ पठित धारा 21(1)(i) के अंतर्गत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के वचन पत्र के समक्ष, बैंक द्वारा लिखित रूप में घोषणा प्रस्तुत करने के अधीन उपलब्ध होगी जिसमें दिए गए ऋण और अग्रिमों के उद्देश्य निहित हों (और ऐसे अन्य विवरण जो नाबार्ड द्वारा आवश्यक हो सकते हैं)

6.2 किसानों को कृषि उपज गिरवी रखने के समक्ष दिए गए अग्रिमों को मौसमी कृषि कार्यों (एसएओ) के वित्तपोषण के उद्देश्य से लिए गए उधारों के कवर के रूप में और इसके विपरीत नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि नाबार्ड द्वारा बैंकों को एसएओ और फसलों के विपणन के लिए अलग-अलग ऋण सीमा स्वीकृत की जाती है.

7. अन्य नियम व शर्तें

7.1 बैंक उधारकर्ताओं से निम्नलिखित की माँग करेंगे:

गिरवी रखी गई उपज का आग, चोरी आदि के जोखिम के समक्ष पर्याप्त रूप से बीमा किया गया है.

उत्पाद आसानी से पहचाना जा सके और उस तक पहुँच सुलभ हो.

ऐसे उपाय करें ताकि उचित भंडारण, संरक्षण, सुरक्षा के साथ-साथ गिरवी रखी गई उपज की गुणवत्ता भी सुनिश्चित रहे.

7.2 कृषि उपज को गिरवी रखकर फसलों के विपणन के लिए ऋण की स्वीकृति भारतीय रिजर्व बैंक के चयनात्मक ऋण नियंत्रण निर्देशों, यदि कोई हो, के अनुपालन के अधीन होगी.

7.3 ऋण के प्रभावी अंतिम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए, विपणन मौसम के दौरान, बैंकों को फसल कटाई के बाद कृषि उपज को गिरवी रखकर फसलों के विपणन के लिए ऋण की मंजूरी में आवश्यक सावधानी बरतनी होगी और ऐसे ऋण आमतौर पर उन फसलों के विपणन मौसम में ही समाप्त हो जाते हैं जिन फसलों के लिए उन्हें मंजूरी दी गई है.

7.4 बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके पास गिरवी रखा गया माल उचित और सुरक्षित गोदामों/ शीत भंडारण/ गोदामों में रखा गया है. बैंक के पास गिरवी रखी गई उपज उसकी प्रभावी अभिरक्षा में होनी चाहिए.

7.5 फसलों के विपणन के लिए ऋणों की पूर्ण/आंशिक अदायगी के बाद बैंक किसानों की गिरवी रखी गई उपज का पूरा/आनुपातिक हिस्सा तुरंत उन्हें जारी करेंगे.

7.6 बैंकों को मासिक अंतराल पर गिरवी रखे स्टॉक का विवरण रखना चाहिए और ऐसे सभी विवरणों को बैंकों के अभिलेखों में रखा जाना चाहिए जो आवश्यकता पड़ने पर नाबार्ड द्वारा सत्यापन के लिए उपलब्ध हों.

7.7 बैंकों को प्रभावी पर्यवेक्षण और निरीक्षण के लिए एक प्रणाली बनानी होगी, जो गिरवी रखी गई उपज की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी. गिरवी रखी गई उपज का सत्यापन बैंक स्टाफ द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय-समय पर किया जाए.

7.8 डब्लूडीआरए द्वारा मान्यता प्राप्त गोदामों द्वारा जारी एनडब्ल्यूआर/ई-एनडब्ल्यूआर रसीदों की गिरवी पर बैंकों द्वारा दिए गए ऋण भी पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.

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