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ग्रामीण सहकारी बैंकों में चेक आधारित लेन-देन हेतु ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए वित्तीय समावेशन निधि के अंतर्गत पॉज़िटिव पे सिस्टम को कार्यान्वयन करने के लिए वित्तीय सहायता

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पॉज़िटिव पे सिस्टम की शुरुआत दिनांक 01 जनवरी 2021 से की गई है. दिनांक 25 सितंबर 2020 के परिपत्र सं. डीपीएसएस. सीओ.आरपीपीडी.सं.309/0.07.005/2020-21 के माध्यम से रु.50,000/- या उससे अधिक राशि के चेक आधारित लेन-देन की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए राज्य सहकारी बैंक और जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों सहित सभी बैंकों के लिए यह सिस्टम लागू किया गया है. पॉज़िटिव पे सिस्टम (पीपीएस) से चेक क्लियरिंग प्रक्रिया में अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की जाती है जहां लाभार्थी क्लियरिंग के लिए चेक जमा करता है और प्रस्तुत चेक की तुलना ग्राहक के विवरण के साथ की जाती है अर्थात प्राप्तकर्ता का नाम, चेक की तिथि, चेक नंबर और राशि, आदि से संबंधित जानकारी पॉज़िटिव पे सिस्टम के माध्यम से प्रदान की जाती है.

2. ग्रामीण सहकारी बैंकों से प्राप्त अनुरोध के आधार पर, पीपीएस के कार्यान्वयन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए, वित्तीय समावेशन निधि के सलाहकार बोर्ड ने ग्रामीण सहकारी बैंकों में पीपीएस के कार्यान्वयन के लिए अनुदान सहायता प्रदान करने की योजना को मंजूरी दी है. इस योजना का विवरण निम्नानुसार है:

i) योजना: इस योजना का नाम “ग्रामीण सहकारी बैंकों में चेक आधारित लेन-देन हेतु ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए वित्तीय समावेशन निधि के अंतर्गत पॉज़िटिव पे सिस्टम को कार्यान्वयन करने के लिए वित्तीय सहायता.” है.

ii) लक्ष्य: इस योजना का लक्ष्य ग्रामीण सहकारी बैंकों द्वारा पॉज़िटिव पे सिस्टम सुविधा के कार्यान्वयन हेतु किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति करना है.

iii) पात्र संस्थाएं: सभी लाइसेन्स प्राप्त ग्रामीण सहकारी बैंक (राज्य सहकारी बैंक और जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक) जिन्होंने कोर बैंकिंग सोल्यूशंस लागू किया है और पहले से ही पॉज़िटिव पे सिस्टम लागू कर चुके है अथवा लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है ऐसी संस्थाएं इस योजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने के लिए पात्र है.

iv) अनुदान की सीमा: प्रत्येक ग्रामीण सहकारी बैंक के लिए रु.5.00 लाख की सीमा के अधीन, वास्तविक व्यय के 90% की सीमा तक प्रतिपूर्ति के आधार पर एकमुश्त सहायता प्रदान की जाएगी.

v) सहायता के घटक: सहायता के घटक बैंक के पास उपलब्ध सभी बैंकिंग चैनलों जैसे इंटरनेट बैंकिंग, एसएमएस, मोबाइल एप्प, एटीएम, आदि. में पॉज़िटिव पे प्रणाली प्रदान करने की दिशा में एक वर्ष के लिए एएमसी सहित एकबार सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन डेवलपमेंट, कार्यान्वयन लागत और परिचालन व्यय शामिल हैं.

vi) जागरूक करना: ग्रामीण सहकारी बैंकों को पॉज़िटिव पे प्रणाली योजना के बारे विविध माध्यमों अपने ग्राहकों को जैसे कि वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम, शाखा/कार्यालय में डिस्प्ले बोर्ड लगाकर, वेब साइट के माध्यम से, एटीएम, मोबाइल डेमो वैन आदि. के माध्यम से जागरूक करने की आवश्यकता है.

vii) अनुदान सहायता प्राप्त करने के लिए बैंकों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया :

क. बैंक नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों का दिनांक 23 अप्रैल 2019 के परिपत्र सं. 105/ डीएफ़आईबीटी-04/2019 के अनुबंध III और IV के अनुसार मंजूरी और दावे के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करें.

ख.वे बैंक जो इस योजना के अंतर्गत पहली बार वित्तीय समावेशन निधि की अनुदान सहायता प्राप्त करना चाहते है, उन्हें दिनांक 20 मार्च 2018 के परिपत्र सं. 52/डीएफ़आईबीटी-05/ 2018 के अनुसार नाबार्ड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओए) निष्पादित करना होगा.