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जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता निधि योजना, 2014 – बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 26 ए

कृपया दिनांक 27 मई 2014 के भारतीय रिज़र्व बैंक के परिपत्र सं. डीबीओडी. सं. डीईएएफ़ सेल. बीसी. 114/ 30.01.002/ 2013-14, दिनांक 7 फरवरी 2012 के परिपत्र सं. डीबीओडी. सं. लेग. बीसी. 81/ 09.07.005/ 2011-12 और दिनांक 2 फरवरी 2015 के परिपत्र सं. डीबीआर. सं. डीईए निधि सेल. बीसी. 66/ 30.01.002/ 2014-15 का संदर्भ लें जिनमें दस वर्षों से अधिक अवधि के निष्क्रिय खातों के संदर्भ में रिकार्डों के रखरखाव और निधियों के अंतरण के संबंध में विस्तृत अनुदेश जारी किए गए थे.

2. जैसा कि दिनांक 27 मई 2014 के परिपत्र के अनुच्छेद सं. 02 में इंगित किया गया है, भारत में 10 वर्षों की अवधि से निष्क्रिय खाते में जमा राशि का दस वर्षों से अधिक अवधि के लिए दावा न की गई किसी जमाराशि को दस वर्ष समाप्त होने के बाद से तीन महीनों की अवधि के भीतर बैंक द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के डीईएएफ़ खाते में जमा किया जाना अपेक्षित है.

3. योजना के अनुच्छेद सं. 5 के अनुसार बैंक द्वारा विधिवत् निर्धारित फॉर्म और समुचित रूप से लेखापरीक्षित विवरणियाँ भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत की जानी चाहिएं. बैंकों से अपेक्षित है कि वे ग्राहक-वार विवरण का भी रखरखाव करें जिनका सत्यापन संगामी लेखापरीक्षकों द्वारा किया जाए और संगामी लेखापरीक्षकों से वार्षिक प्रमाणपत्र प्राप्त कर उसे भारतीय रिज़र्व बैंक को भेजा जाए जिसमें समेकन की शुद्धता को प्रमाणित किया जाए तथा बैंक के वित्तीय विवरणों में यथोचित प्रकटन किया जाए.

4. दिशानिर्देशों में उल्लिखित समयावधि के लिए उपर्युक्त विवरणियों से संबंधित रिपोर्ट यदि शून्य भी हो तब भी बैंकों द्वारा अनिवार्यतः भारतीय रिज़र्व बैंक को भेजी जाएगी.

5. बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949/ बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (ससयला) की धारा 26(ए) के अंतर्गत दावा न की गई शेष राशियों का डीईएएफ़ में अंतरण सांविधिक आवश्यकता है और यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि दिशानिर्देशों का पालन न करने को नियामक के अनुदेशों का उल्लंघन माना जाएगा.

6. तथापि, नाबार्ड द्वारा किए गए सांविधिक निरीक्षणों के दौरान इंगित किए जाने के बावजूद उक्त अधिनियम के प्रावधानों और भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुपालन में निम्नानुसार कमियाँ पाई गईं:

i.बैंक के पास यथोचित राशि की पहचान करने, राशि की गणना और उसके अंतरण और भारतीय रिज़र्व बैंक को निर्धारित समयसीमा के भीतर विवरणियाँ प्रस्तुत करने के लिए उचित व्यवस्था/ प्रक्रिया नहीं है.

ii.डीईएएफ़ खाते में राशि अंतरित करने से पहले दिशानिर्देशों के अनुसार आवश्यक ग्राहक-वार विवरण, अंतरित राशि, ब्याज की गणना आदि का संगामी लेखा परीक्षकों द्वारा सत्यापन नहीं किया जाता है.

iii.समेकन की शुद्धता को प्रमाणित करने से संबंधित वार्षिक प्रमाणपत्र सांविधिक लेखा परीक्षकों से प्राप्त नहीं किए गए और भारतीय रिज़र्व बैंक को अग्रेषित नहीं किए गए.

iv.वित्तीय विवरणों में उचित प्रकटन नहीं किया गया और आकस्मिक देयताओं के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया था.

v.अधिवर्षिता, स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति अथवा व्यक्ति की मृत्यु के संबंध में पहचान किए गए एकल संपर्क बिन्दु व्यक्ति का विवरण अद्यतन नहीं किया गया है.

vi.बैंक की वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए अपेक्षानुसार राशियों को पूर्ण रूप से अंतरित नहीं किया गया था.

vii.बैंक की वेबसाइट आदि पर इस प्रकार के खातों का विवरण प्रदर्शित करना आदि.

7. चूँकि संवैधानिक प्रावधानों के लगातार और जानबूझ कर उल्लंघन को नियामक द्वारा गंभीरता से लिया जाएगा, यह दोहराया जाता है कि बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक के उक्त परिपत्रों में निहित अनुदेशों का कड़ाई से पालन करें और बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 26 और 26 ए के प्रावधानों का पूर्णतः पालन करें.

8. कृपया आपके राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश में हमारे क्षेत्रीय कार्यालय को इस परिपत्र की प्राप्ति की सूचना भिजवाएँ.