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सूक्ष्‍म ऋण नवप्रवर्तन विभाग


सूक्ष्‍म ऋण नवप्रवर्तन विभाग

1. उत्पत्ति
 
सूक्ष्म ऋण नवप्रवर्तन विभाग का उद्देश्य विभिन्न उत्पादों और डिलिवरी चैनलों के माध्यम से कम लागत में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के निर्धन समूहों को वहां निरंतर वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में सहयोग देना है जहां तक अभी वित्तीय सेवाएं नहीं पहुंची हैं. इस विभाग की स्थापना 1998 में हुई जब स्वयं सहायता समूह बैंक - सहबद्धता के नवोन्मेषी कार्यक्रम को राष्ट्रव्यापी पैमाने पर मुख्यधारा में लाया गया. 
 
नाबार्ड देश के ग्रामीण क्षेत्रों में  वित्तीय सेवाओं से वंचित गरीबों को  विभिन्न सूक्ष्म वित्त नवोन्मेषों के माध्यम से कम लागत पर दीर्घकालिक रूप से  वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य को सामने रखकर  सूक्ष्म ऋण नवप्रवर्तन विभाग के माध्यम से देश में सूक्ष्म वित्त प्रयासों को सुगम बनाने वाली एजेंसी और मेंटर के रूप में काम कर रहा है. 
 
2.  विभाग के मूल कार्य
 
नाबार्ड लगातार सभी हितधारकों को एक मंच पर लाने और इस कार्य को आगे बढ़ाने में उन्हें समर्थ बनाने के लिए उनके क्षमता निर्माण पर ध्यान देता रहा है. इसका परिणाम यह हुआ है कि भारत में विभिन्न पद्धतियों के माध्यम से सूक्ष्म वित्त के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है. जैसे कि:  
 
क.  स्वयं सहायता समूह - बैंक सहबद्धता कार्यक्रम का प्रबंधन
 
विभिन्न अनुसंधान अध्ययनों के निष्कर्षों और नाबार्ड द्वारा कार्यान्वित एक कार्य अनुसंधान परियोजना के आधार पर स्वयं सहायता समूह बैंक – सहबद्धता कार्यक्रम को वित्तीय सेवाओं से वंचित और अन्यथा ऋण लेने में अक्षम ग्रामीण परिवारों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने के लिए कम लागत वाले तंत्र के रूप में विकसित किया गया. निर्धन लोगों के 500 समूहों को औपचारिक वित्तीय संस्थाओं के साथ जोड़ने की प्रायोगिक परियोजना के रूप में 1992-93 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम आज ग्राहक-आधार और पहुंच दोनों दृष्टियों से संसार का सबसे बड़ा सूक्ष्म वित्त कार्यक्रम बन चुका है.
 
एनजीओ सेक्टर ने बैंकों के साथ एसएचजी के क्रेडिट लिंकेज को व्यवस्थित, पोषण और सक्षम करके स्वयं सहायता समूह प्रचार संस्थान (SHPI) के रूप में काम करने की एक प्रमुख भूमिका निभाई है। नाबार्ड ने बाद में ग्रामीण वित्तीय संस्थानों (आरआरबी, डीसीसीबी, पीएसीएस, फार्मर्स क्लब, एसएचजी फेडरेशन, एनजीओ-एमएफआई, व्यक्तिगत ग्रामीण स्वयंसेवक, आदि) सहित कई अन्य संस्थाओं को एसएचजी-बीएलपी के साथ जोड़ा।
 
इन हितधारकों को नाबार्ड से प्रचार अनुदान सहायता के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।यह बचत-नेतृत्व वाला माइक्रोफाइनेंस मॉडल अब देश में लगभग 12.4 करोड़ परिवारों को कवर करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा समन्वित वित्तीय समावेशन कार्यक्रम बन गया है।95% से अधिक समूह विशेष रूप से महिला समूह होने के साथ, इस कार्यक्रम ने देश में महिला सशक्तीकरण को बहुत अधिक बढ़ावा दिया है। 31 मार्च 2020 तक की स्थिति अंत में दी गई है।
 
ख. महिला एसएचजी विकास निधि
  
नाबार्ड गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से पिछड़े और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में भारत सरकार द्वारा घोषित महिला एसएचजी विकास निधि को लागू कर रहा है। गैर सरकारी संगठन बैंकों के साथ महिला एसएचजी के प्रचार और ऋण लिंकेज में एक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। 
 
ग.  संयुक्त देयता समूहों का वित्तपोषण
 
संयुक्त देयता समूह ऐसे छोटे/ सीमांत/ बटाईदार किसानों/ आस्ति विहीन निर्धनों का मूल रूप से एक ऋण समूह है जिनके पास खेती की जमीन का स्वत्वाधिकार नहीं होता. ये 04 से 10 सदस्यों के अनौपचारिक समूह हैं जो समान प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में लगे होते हैं और जो बैंकों से लिए जाने वाले ऋणों को सम्मिलित रूप से चुकाने का वचन देते हैं. संयुक्त देयता समूह का वित्तपोषण नाबार्ड ने 2004-05 में 13 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के सहयोग से देश के 8 राज्यों में प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू किया. बाद में  2006 में इस योजना को  बैंकिंग प्रणाली की मुख्यधारा में लाया गया. 
संयुक्त देयता समूह को वित्त देने वाले बैंकों को शत प्रतिशत पुनर्वित्त सहायता देने के अतिरिक्त नाबार्ड इस योजना के अंतर्गत सभी हितधारकों में जागरूकता उत्पन्न करने और उनके क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता देता है. नाबार्ड बैंकों को और इन समूहों का संवर्धन करने वाली अन्य संस्थाओं को भी समूहों के गठन और पोषण के लिए अनुदान सहायता प्रदान करता है. 
 
घ.  एसएचजी का डिजिटलीकरण – ई-शक्ति
 
एमसीआईडी ने एसएचजी स्तर पर खातों और अन्य रिकॉर्डों की पुस्तकों को डिजिटाइज़ करने के लिए इशकती नामक एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। ये डिजीटल रिकॉर्ड बैंकों को उपलब्ध कराए जाते हैं जो बैंकों को एसएचजी के साथ व्यापार करने में आसानी प्रदान करते हैं। पायलट को 2 जिलों में लॉन्च करने के बाद, 31 मार्च 2018 तक प्रोजेक्ट ईशक्ति का विस्तार 100 जिलों में किया गया और इसे लगभग 150 जिलों को कवर करने के लिए विस्तारित किया जा रहा है। इस प्रकार 250 जिलों को कवरेज प्रदान किया गया। इशकती के तहत उपलब्धियों का विवरण www.eshakti.nabard.org पर देखा जा सकता है।
 
3. विभाग की प्रमुख उपलब्धियां
 
  • आजीविका विकास: एसएचजी सदस्यों को आजीविका गतिविधियों को करने में सक्षम करने के लिए, नाबार्ड गैर-सरकारी संगठनों और अन्य उपयुक्त संस्थानों के माध्यम से सूक्ष्म उद्यम विकास कार्यक्रमों (एमईडीपी) और आजीविका और उद्यम विकास कार्यक्रमों (एलईडीपी) के लिए समर्थन प्रदान कर रहा है।
  • प्रकाशन: विभाग एसएचजी - बैंक लिंकेज और अन्य माइक्रोफाइनेंस गतिविधियों से संबंधित विभिन्न प्रकाशनों को नियमित आधार पर लाता है। "भारत में माइक्रोफाइनेंस की स्थिति" सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक प्रकाशन में से एक है, जिसका उपयोग अनुसंधान विद्वानों, नीति नियोजकों, सरकारी विभागों आदि द्वारा संदर्भ दस्तावेज के रूप में किया जाता है।
  • ब्याज निवारण योजना: ग्रामीण विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिला एसएचजी के लिए ब्याज अधीनता योजना का प्रशासन एमसीआईडी द्वारा किया जाता है।
  • सहयोगी एजेंसियों जैसे कि बैंक, गैर सरकारी संगठन, सरकारी विभागों और अन्य संस्थानों के कर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए सहायता।
  • बैंकों के साथ एसएचजी और जेएलजी के गठन और ऋण लिंकेज के लिए गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संस्थानों को अनुदान सहायता प्रदान करना।
  • सभी हितधारकों जैसे बैंकर्स, सरकारी एजेंसियों, गैर सरकारी संगठनों के भागीदारों और अधिक महत्वपूर्ण रूप से SHG सदस्यों के लाभ के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, सेमिनार और कार्यशालाओं आदि का समर्थन और प्रायोजित करना।
 
एसएचजी-बैंक लिंकेज कार्यक्रम की उपलब्धियां - 2019-20
 

क्र.सं.

विवरण

कुल

भौतिक

वित्तीय

(सं. लाख में)

( करोड़ में)

1

बैंकों के साथ बचत-सहबद्ध एसएचजी की कुल संख्या-31 मार्च 2020 की स्थिति 

102.43

26,152.05

(i)

कुल एसएचजी में से पूर्णत: महिला एसएचजी

88.32

23,320.55

(ii)

कुल एसएचजी में से एनआरएलएम/ एसजीएसवाई के तहत एसएचजी

57.89

14,312.70

(iii)

कुल एसएचजी में से एनयूएलएम/ एसजेएसआरवाई के तहत एसएचजी

4.69

1,523.57

2

2019-20 में ऋण-सहबद्ध एसएचजी की कुल संख्या

31.46

77,659.35

(i)

कुल एसएचजी में से पूर्णत: महिला एसएचजी

28.84

73,297.56

(ii)

कुल एसएचजी में से एनआरएलएम/ एसजीएसवाई के तहत एसएचजी

20.49

52,183.73

(iii)

कुल एसएचजी में से एनयूएलएम/ एसजेएसआरवाई के तहत एसएचजी

1.59

3,406.22

3

31 मार्च 2020 को बकाया ऋण वाले एसएचजी की कुल संख्या

56.77

1,08,075.07

(i)

कुल एसएचजी में से पूर्णत: महिला एसएचजी

51.12

1,00,620.71

(ii)

कुल एसएचजी में से एनआरएलएम/ एसजीएसवाई के तहत एसएचजी

36.89

67,717.07

(iii)

कुल एसएचजी में से एनयूएलएम/ एसजेएसआरवाई के तहत एसएचजी

2.67

5,466.87

4

31 मार्च 2020 को प्रति एसएचजी औसत बकाया ऋण राशि ( में)

1,90,371.18

5

2019-20 में प्रति एसएचजी औसत संवितरित ऋण राशि    ( में)

2,46,850.92

6

31 मार्च 2020 तक शामिल परिवार (अनुमानित)

1,241

7

एमआईएस प्रस्तुत करने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की संख्या (संख्या में)

470

8

संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) – डेटा

(i)

2019-20 में संवर्धित जेएलजी

41.80

(ii)

2019-20 में संवर्धित जेएलजी को संवितरित ऋण

83,102.95

(iii)

31 मार्च 2020 को संचयी रूप से संवर्धित जेएलजी

92.56

1,54,853.09

9

नाबार्ड से सहायता

(i)

साझेदार संस्थाओं का क्षमता निर्माण

 

एसएचजी-बीएलपी और जेएलजी के अंतर्गत

 

2019-20 में आयोजित कार्यक्रमों की संख्या (केवल संख्या)

3,592

 

2019-20 में शामिल प्रतिभागियों की संख्या (लाख में)

1.53

 

31 मार्च 2020 तक प्रशिक्षित प्रतिभागियों की संचयी संख्‍या (लाख में)

40.45

 

महिला एसएचजी के अंतर्गत (वामपंथी अतिवाद प्रभावित और पिछड़े जिलों में)

 

2019-20 में आयोजित कार्यक्रमों की संख्या (केवल संख्या)

1,152

 

2019-20 में शामिल प्रतिभागियों की संख्या (लाख में)

0.69

(ii)

पुनर्वित्त सहायता

 

2019-20 में बैंकों को पुनर्वित्त

15,434.00

 

31 मार्च 2020 तक जारी संचयी पुनर्वित्त

78,594.00

(iii)

एमएफ़आई को परिक्रामी निधि सहायता और पूंजी सहायता 

 

31 मार्च 2020 को बकाया परिक्रामी निधि सहायता

3.61

 

31 मार्च 2020 को बकाया पूंजी सहायता 

3.59

 

2019-20 में एनबीएफ़सी-एमएफ़आई को संवितरित पुनर्वित्त 

2,460.00

(iv)

एसएचजी-बीएलपी के अंतर्गत एसएचजी के संवर्धन के लिए स्वयं सहायता संवर्धन संस्थाओं को अनुदान सहायता

 

2019-20 में मंजूर अनुदान सहायता

6.74

 

31 मार्च 2020 तक संचयी मंजूरी

417.68

(v)

महिला एसएचजी विकास योजना के अंतर्गत 31 मार्च 2020 तक एसएचजी के संवर्धन के लिए एंकर एनजीओ को मंजूर संचयी अनुदान सहायता

204.38

(vi)

31 मार्च 2020 तक जेएलजी के संवर्धन के लिए जेएलजी संवर्धन संस्थाओं को मंजूर संचयी अनुदान सहायता

201.60

 
 
 
संपर्क सूचना
 
श्रीमती आर शेरिंग
मुख्य महाप्रबंधक
चतुर्थ तल, ‘डी’ विंग
सी- 24,  ‘जी’ ब्लॉक
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई – 400 051
फोन: 022-2653 0084 
ई-मेल: mcid@nabard.org