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वित्तीय समावेशन

विहंगावलोकन 
 
हाल के दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था में सामान्य रूप से और बैंकिंग सेवाओं में विशेष रूप से तेजी से प्रगति हुई है.परंतु,आबादी का एक बहुत बड़ा वर्ग, खासकर समाज का  कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग अभी भी वित्तीय क्षेत्र द्वारा दी जानेवाली अति प्राथमिक अवसरों और सेवाओं के दायरे से बाहर रह गया .
 
वित्तीय समावेशन से संबन्धित मुद्दों के समाधान के लिए भारत सरकार ने डॉ. सी रंगराजन की अध्यक्षता में 'वित्तीय समावेशन समिति " का गठन किया था .इस समिति ने दिनांक 04 जनवरी 2008 को माननीय केन्द्रीय वित्त मंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी .
 
वित्तीय समावेशन समिति ने वित्तीय समावेशन को " कमजोर वर्गों और निम्न आय वर्ग के लोगों को उनकी आवश्यकतानुसार वहाँ करने योग्य लागत पर समय से वित्तीय सेवाएँ तथा पर्याप्त ऋण उपलब्ध सुनिश्चित कराने की एक प्रक्रिया " के रूप में परिभाषित किया है.
 
अन्य बातों के साथ समिति ने नाबार्ड में दो निधियां - वित्तीय समावेशन निधि (एफ़आईएफ़) और वित्तीय समावेशन प्रौद्योगिकी निधि (एफ़आईटीएफ़ ) बनाने की भी सिफारिश की है .
 
विभाग के मुख्य कार्य 
 
विभाग की मुख्य गतिविधियों में वित्तीय समावेशन समिति की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय समावेशन निधि (एफ़आईएफ़) और वित्तीय समावेशन प्रौद्योगिकी निधि (एफ़आईटीएफ़) के दायरे में राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय सुविधाओं से वंचित आबादी के लिए वित्तीय समावेशन के एजेंडे को आगे बढ़ाना है.इसका कार्यान्वयन क्रमशः एफआईएफ और एफआईटीएफ के लिए गठित दो सलाहकार बोर्डों के मार्गदर्शन में किया जा रहा है .

वित्तीय  समावेशन  निधि (एफआईएफ ) से सहायता  के लिए  प्राथमिकता के  आधार पर गतिविधियां  / संस्थाएं  
 
  • प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) सहित सहकारी संस्थाओं का प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण 
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों  / व्यवसाय प्रतिनिधियों (बीसी) / व्यवसाय सुगमकर्ताओं (बीएफ) के कर्मचारियों का प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण 
  • सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के द्वारा वित्तीय साक्षरता केन्द्रों की स्थापना 
  • वित्तीय साक्षरता अभियान / कार्यक्रम
  • फील्ड स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने वाली परियोजनाएं एवं सूक्ष्म बीमा / पेंशन हेतु खाते खोलने में सहायता करना 
  • वित्तीय साक्षरता पर जेनेरिक सामग्री विकसित करना वित्तीय समावेशन प्रौद्योगिकी निधि (एफआईटीएफ) से सहायता के लिए प्राथमिकता आधार पर गतिविधियां / संस्थान  
  • कोर बैंकिंग सोल्यूशन (सीबीएस) लागू करने के लिए कमजोर राज्य सहकारी बैंकों  (एससीबी) / मध्यवर्ती सहकारी बैंकों (सीसीबी) / शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को सहायता प्रदान करना 
  • सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित सोल्यूशंस लागू करने हेतु राज्य सहकारी बैंकों / जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) / क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को सहायता प्रदान करना 
  • कमजोर सहकारी बैंकों / क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को एटीएम स्थापना हेतु सहायता
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों- दोनों के लिए आईसीटी एनेब्ल्ड किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) 
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों / सहकारी बैंकों को आधार एनेब्ल्ड भुगतान प्रणाली (एईपीएस ) पर लाना 
कोर्पस और निधियों  के स्रोत 
 
प्रत्येक निधि में रु. 500 करोड़ का एक समग्र कोष (कॉर्पस) होता है, जिसमें आरंभ में भारत सरकार,भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) का 40:40:20 के अनुपात में अंशदान है.निधि के उपयोग के आधार पर अधिकतम पांच साल की अवधि में चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता प्रदान की जानी थी .परंतु, रिजर्व बैंक ने अब यह फैसला किया है कि दिनांक 01 अप्रैल 2012 से  आरआईडीएफ और एसटीसीआरसी  के तहत बैंकों में नाबार्ड के लिए 0.5% से अधिक  जमाराशि के रूप में उपलब्ध सापेक्षित मार्जिन को एफआईएफ में जमा किया जाएगा  और  एफआईटीएफ निधियों के लिए एफआईएफ से अंतरण किए जायेगें.
 
भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि एफआईएफ और एफआईटीएफ को इसी तरह की मार्जिन से प्रबंधित किया जाय और उनके द्वारा कोई  अंशदान नहीं किया जाएगा.
 
अतिरिक्त जानकारी
 
प्रारूप
 
वित्तीय समावेशन के लिए वित्तीय साक्षरता सामग्री
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