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सूक्ष्म ऋण नवोन्मेष
भारत में सूक्ष्म वित्त प्रयासों को सुविधा जनक बनाने के लिए नाबार्ड अपने सूक्ष्म ऋण नवप्रवर्तन विभाग के माध्यम से अपनी भूमिका निभाता रहा है. इस विभाग का उद्देश्य है, विभिन्न सूक्ष्म वित्त नवोन्मेषों के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं से अब तक वंचित ग्रामीण निर्धनों को कम लागत पर दीर्घकालिक रूप में वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना. 
 
नाबार्ड विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाने और अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए उनके क्षमता निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहा है. नाबार्ड के प्रयासों का भारत के सूक्ष्म वित्त क्षेत्र के विकास पर गहरा प्रभाव रहा है. नाबार्ड ने इसके लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए हैं: 
 
स्वयं सहायता समूह – बैंक सहबद्धता कार्यक्रम (एसएचजी-बीएलपी)
 
विभिन्न अनुसंधान अध्ययनों में की गर्इ टिप्पणियों और नाबार्ड द्वारा चलार्इ एक कार्य अनुसंधान परियोजना के निष्कर्षों के आधार पर एसएचजी-बीएलपी मॉडल वित्तीय सेवाओं से वंचित और वित्तीय सेवाओं के योग्य न माने जाने वाले निर्धन परिवारों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने के एक किफायती तंत्र के रूप में विकसित हुआ है. निर्धनों के 500 समूहों को औपचारिक वित्तीय संस्थाओं से सहबद्ध करने की प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू हुआ यह कार्यक्रम आज ग्राहक आधार और पहुंच की दृष्टि से संसार का सबसे बड़ा सूक्ष्म वित्त कार्यक्रम बन गया है. उन समूहों को अच्छा समूह माना जाता है जो स्वयं सहायता के पांच सूत्रों का पालन करते हैं. ये पांच सूत्र हैं – समूह की नियमित बैठकें करना, समूह के भीतर नियमित रूप से बचत करना, सदस्यों की मांग के आधार पर आंतरिक ऋण परिचलन करना, ऋण की समय पर चुकौती करना और लेखा बहियों को सही ढंग से रखना. ये समूह कर्इ वर्षों से बैंकों के अच्छे ग्राहक सिद्ध हुए हैं. 
 
स्वयं सहायता समूहों को संगठित करने, उनका पोषण करने और उन्हें बैंकों से जोड़ने की भूमिका निभाते हुए स्वयं सहायता संवर्धन संस्थाओं (एसएचपीआर्इ) के रूप में गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) क्षेत्र ने प्रमुख भूमिका निभार्इ है. नाबार्ड ने बाद में अन्य संस्थाओं को भी एसएचपीआर्इ के रूप में शामिल किया, जैसे, ग्रामीण वित्तीय संस्थाएं (क्षेग्रा बैंक, जिमस बैंक, पैक्स), किसान क्लब, स्वयं सहायता समूहों के महासंघ, एकल ग्रामीण वालंटियर आदि. इन हितधारकों को नाबार्ड की संवर्धनात्मक अनुदान सहायता से समूहों के संवर्धन का कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया. यह बचत आधारित सूक्ष्म वित्त मॉडल विश्व का सबसे बड़ा समन्वित वित्तीय समावेशन कार्यक्रम बन गया है जिसमें देश के लगभग 100 मिलियन परिवार शामिल हैं. समूहों में से 86% समूह पूर्णत: महिला समूह हैं और इसतरह इस कार्यक्रम ने देश में महिलाओं के सशक्तीकरण की महत्वपूर्ण आवश्यकता की पूर्ति में योगदान किया है. 
 
इस आंदोलन की अगुआर्इ करने और इसे संवर्धनात्मक सहायता देने के अलावा नाबार्ड ने सभी हितधारकों अर्थात् बैंकरों, सरकारी एजेंसियों, एनजीओ साझेदारों और सबसे महत्वपूर्ण एसएचजी के सदस्यों के लाभ के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और कार्यशालाओं के आयोजन के माध्यम से बैंक और सरकार दोनों स्तरों पर नीतिगत पक्ष पोषण के माध्यम से इस आंदोलन के अनुकूल सहयोगपूर्ण वातावरण का निर्माण किया है. नाबार्ड बैंकों को एसएचजी के वित्तपोषण के लिए 100% पुनर्वित्त सहायता दे रहा है.
 
समय-समय पर परिचालन को लेकर जो समस्याएं उत्पन्न होती रहीं उनके समाधान के लिए बाद में उत्पाद के स्तर पर कर्इ परिवर्तन किए गए, जैसे समूह में स्वैच्छिक बचत की अनुमति देना, एसएचजी को उधार देने में कैश क्रेडिट / ओवरड्राफ्ट प्रणाली मंजूर करना, एसएचजी के भीतर ही संयुक्त देयता समूह के गठन की अनुमति देना, जोखिम शमन प्रणालियों में सुधार लाना, एसएचजी की दूसरे स्तर की संस्थाओं का गठन करना आदि. इसके अलावा, एसएचजी के सदस्यों को आजीविका गतिविधियां शुरू करने में सहयोग करने में नाबार्ड सूक्ष्म उद्यम विकास कार्यक्रमों (एमर्इडीपी) और आजीविका एवं उद्यम विकास कार्यक्रमों (एलर्इडीपी) को सहयोग देता रहा है. 
नाबार्ड भारत सरकार द्वारा घोषित की गर्इ विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन कर रहा है और कार्यान्वयन में सहयोग दे रहा है.  नामत: वित्त मंत्रालय का पिछड़े और वामपंथी अतिवाद से  प्रभावित जिलों में महिला एसएचजी का संवर्धन और ग्रामीण विकास मंत्रालय का राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम).  
 
सूक्ष्म वित्त संस्थाएं (एमएफआर्इ)
 
नाबार्ड वित्तीय दृष्टि से वंचित लोगों को सूक्ष्म वित्त उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक तरीकों को सफलतापूर्वक सहयोग देता रहा है. देश में सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के विकास के चरण में नाबार्ड ने नर्इ उभर रही संस्थाओं को क्षमता निर्माण, पूंजी और परिक्रामी निधि सहायता दी थी. फिलहाल नाबार्ड, एनबीएफसी-एमएफआर्इ को उनके पात्र ऋणों के समक्ष रियायती पुनर्वित्त दे रहा है. 

संयुक्त देयता समूहों का वित्तपोषण (जेएलजी)
 
नाबार्ड ने 13 क्षेग्रा बैंको के सहयोग से 8 राज्यों में 2004-05 में जेएलजी के वित्तपोषण को प्रायोगिक आधार पर शुरू किया था. वर्ष 2006 में इस योजना को बैंकिंग प्रणाली की मुख्य धारा में लाया गया. जेएलजी 4 से 10 सदस्यों का ऐसा अनौपचारिक समूह है जिसके सदस्य समान प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में लगे हों और जो बैंकों से लिए गए ऋणों को सम्मिलित रूप से चुकाने का वचन दें. जेएलजी मूलत: ऐसे छोटे / सीमांत / पट्टाधारी किसानों / परिसंपत्तिहींन निर्धनों का ऋण समूह है जिनके पास खेती की जमीन का मालिकाना हक नहीं होता. जेएलजी के सदस्यों द्वारा नियमित बचत करना पूरी तरह स्वैच्छिक होता है और उनकी ऋण जरूरतें वित्तीय संस्थाओं से ऋण के माध्यम से पूरी की जाती हैं और यह ऋण आपसी गारंटी के समक्ष वैयक्तिक या समूह ऋण हो सकता है. 
 
वित्तपोषक बैंकों को 100% पुनर्वित्त सहायता देने के अलावा नाबार्ड इस योजना के तहत सभी हितधारकों को जागरुकता और क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता देता है. नाबार्ड बैंकों और जेएलजी का संवर्धन करने वाली अन्य संस्थाओं (जेएलजीपीआई) को जेएलजी के गठन और उनके संपोषण के लिए अनुदान सहायता भी देता है. 
 
नाबार्ड फिनान्शियल सर्विसेज लि. (नैबफिन्स)
 
नैबफिन्स का प्रवर्तन करते हुए नाबार्ड ने यह अवधारणा रखी थी कि नैबफिन्स एक ऐसी आदर्श सूक्ष्म वित्त संस्था के रूप में विकसित की जाएगी जो अन्य संस्थाओं के लिए अभिशासन के मानक गढ़ेगी, अनुकरणीय पारदर्शिता के साथ काम करेगी और ब्याज की विवेकसम्मत / अल्प दर पर अपना परिचालन करेगी. यह एक एनबीएफसी-एमएफआर्इ है जिसने नवंबर 2009 में काम करना शुरू किया.  
नाबार्ड नैबफिन्स का प्रमुख शेयर धारक है और कर्नाटक सरकार, केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, फेडरल बैंक और धनलक्ष्मी बैंक इसके अन्य शेयर धारक हैं. नैबफिन्स अपने प्रशिक्षित व्यवसाय और विकास कॉरस्पॉडेंट्स (बीडीसी) के माध्यम से एसएचजी को ऋण देता है. यह महासंघों जैसे द्वितीय स्तर के संगठनों को ऋण उपलब्ध कराता है. नाबार्ड ने नैबफिन्स को पुनर्वित्त सहायता देना जारी रखा है. नैबफिन्स के बारे में विस्तृत जानकारी www.nabfins.org पर देखी जा सकती है. 
 
ग्राहकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए सहायता 
 
बैंकरों, एनजीओ, सरकारी अधिकारियों, एसएचजी के सदस्यों और प्रशिक्षकों जैसे विविध हितधारकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की आवश्यकता को समझते हुए नाबार्ड ने 31 मार्च 2015 की स्थिति के अनुसार लगभग 34.13 लाख प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया है और इस तरह कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत बैक अप टीम तैयार की है. इसके अलावा नाबार्ड ने विद्यमान प्रशिक्षण मॉड्यूलों में संशोधन किया है और जीआर्इजेड़ के साथ मिलकर एसएचजी-बीएलपी के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम संशोधित हैण्डबुक तैयार की है. 
 
सूक्ष्म उद्यम विकास कार्यक्रम (एमर्इडीपी)  
 
नाबार्ड ऐसे परिपक्व एसएचजी के लिए जिन्हें बैंकों से वित्तपोषण मिल चुका हो, आवश्यकता आधारित कौशल विकास कार्यक्रमों को 2006 से सहायता देता रहा है. एमर्इडीपी कार्यस्थल पर ही दिया जाने वाला कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य कौशल में कमी को दूर करने और एसएचजी के सदस्यों द्वारा पहले से ही की जाने वाली उत्पादन गतिविधियों का इष्टतम लाभ सुनिश्चित करने के लिए उन्हें प्रशिक्षित करना है. इसके अंतर्गत कृषि / गैर कृषि / सेवा क्षेत्र की ऐसी गतिविधियों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण हेतु पात्र प्रशिक्षण संस्थाओं और एसएचपीआर्इ को अनुदान सहायता दी जाती है जिनसे वैयक्तिक आधार पर या सामूहिक रूप से सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना की जा सके. पिछले वर्षों में 12531 एमर्इडीपी के माध्यम से लगभग 3.47 लाख एसएचजी सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है.
 
आजीविका एवं उद्यम विकास कार्यक्रम (एलर्इडीपी) 
 
एसएचजी सदस्यों के लिए आजीविका के साधनों के निर्माण पर अकेले कौशल उन्नयन प्रशिक्षण का सीमित प्रभाव होता है – इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए और एसएचजी सदस्यों के लिए दीर्घकालिक आजीविको विकास के लिए और साथ ही कौशल उन्नयन के इष्टतम लाभ को प्राप्त करने के लिए दिसंबर 2015 में आजीविका एवं उद्यम विकास कार्यक्रम (एलर्इडीपी) नाम की नर्इ योजना आरंभ की. इस कार्यक्रम में क्लस्टर आधार पर आजीविका संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इसमें कौशल निर्माण के लिए सघन प्रशिक्षण, पुनश्चर्या प्रशिक्षण, बैकवर्ड, फॉरवर्ड लिंकेज और आरंभिक मार्गदर्शन और सहयोग के लिए प्रावधान है. इसमें संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को शामिल किया जाता है और एसएचजी सदस्यों को आरंभ से अंत तक समाधान उपलब्ध कराया जाता है. इसे परियोजना आधार पर कार्यान्वित किया जाना है जिसमें निकट स्थित गांवों के क्लस्टर में 15 से 30 समूहों को शामिल किया जाता है जिनमें से एसएचजी सदस्यों का चयन किया जाता है.
 
कौशल उन्नयन प्रशिक्षण 25 से 30 सदस्यों के बैच में दिया जाता है और इसमें कृषि और अनुषंगी गतिविधियों के साथ-साथ ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र गतिविधियों को शामिल किया जाता है. एलर्इडीपी से न केवल दीर्घकालिक आजीविका का संवर्धन किया जाएगा बल्कि संवर्धनात्मक सहायता का पूरा लाभ लिया जाएगा. नाबार्ड कौशल उन्नयन कार्यक्रमों, प्रदर्शन इकार्इ की स्थापना और आवश्यकता आधारित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए अनुदान सहायता उपलब्ध कराएगा.
 
भारत के पिछड़े और वामपंथी अतिवाद प्रभावित जिलों में महिला एसएचजी के संवर्धन की योजना 
 
माननीय वित्त मंत्री द्वारा 2011-12 के केंद्रीय बजट में की गई घोषणा के बाद भारत सरकार के साथ मिलकर मार्च-अप्रैल 2012 से भारत के पिछड़े और वामपंथी अतिवाद प्रभावित 150 जिलों में महिला एसएचजी के संवर्धन की योजना कार्यान्वित की जा रही है. योजना का लक्ष्य ऐंकर एजेंसी की सहायता से इन जिलों में लाभप्रद और आत्म-निर्भर महिला एसएचजी बनाना है. ऐंकर एजेंसी इन समूहों को संवर्धित करेगी और उन्हें बैंक ऋण दिलवाएगी, उनका निरंतर आरंभिक मार्गदर्शन और सहयोग करेगी, उन्हें आजीविका उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी और ऋण की चुकौती की जिम्मेदारी भी लेगी, योजना के अंतर्गत एसएचपीआर्इ के रूप में काम करने के अलावा, ऐंकर एजेंसी से यह भी अपेक्षा है कि वह नोडल कार्यान्वयनकर्ता बैंकों के लिए बैंकिंग / बिजनेस फैसिलिटेटर के रूप में काम करेगी.  
 
वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार ने रु.500 करोड़ की घोषित अनुदान सहायता के साथ नाबार्ड ने इस योजना के कार्यान्वयन के लिए एक समर्पित निधि स्थापित की जिसका नाम महिला स्वयं सहायता समूह विकास निधि है. इस निधि में प्रति ऐंकर एजेंसी रु.10,000 की दर से सहायता दी जाएगी साथ ही, इस निधि से प्रचार-प्रसार, प्रशिक्षण और अन्य क्षमता निर्माण प्रयासों के लिए सहायता दी जाएगी.
 
इस योजना की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नानुसार हैं: 
 
  • परियोजना के कार्यान्वयन के लिए इस प्रकार के प्रत्येक जिले में अग्रणी बैंक प्रबंधक नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक और जिला स्तरीय परामर्श समिति के साथ विचार-विमर्श कर ऐंकर एनजीओ / सहायता देने वाली एजेंसी का चयन करेगा. 
  • सीबीएस सुविधा से युक्त बैंक शाखाओं के माध्यम से यह योजना कार्यान्वित की जाएगी. 
  • चुनी गर्इ बैंक शाखा ऐंकर एनजीओ / सहायता देने वाली एजेंसी के साथ एक सहमति ज्ञापन निष्पादित करेगी. 
  • चुना गया एनजीओ प्रति महिला एसएचजी रु.10,000 की अधिकतम अनुदान सहायता के लिए पात्र होगा. 
  • नए संवर्धित महिला स्वयं सहायता समूहों को दिए जाने वाले सभी ऋण अधिमानत: कैश क्रेडिट के रूप में होंगे. 
  • नाबार्ड परियोजना के अंतर्गत प्रमुख हितधारकों के लिए आवश्यकता के आधार पर जागरुकता और क्षमता विकास कार्यक्रम करेगा. 
31 मार्च 2016 की स्थिति के अनुसार संवर्धित महिला एसएचजी की संख्या 1.88 लाख और ऋण सहबद्ध एसएचजी की संख्या 1.04 लाख है. 
 
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