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“बेहतर तकनीक, बेहतर फसल, बेहतर जीवन” पर सम्मेलन : श्री एच आर दवे, उप प्रबंध निदेशक का विशेष संबोधन
मुंबर्इ | September 2017
मुंबर्इ में 01 सितंबर 2017 को स्विस रे इंडिया एग्रिक्लचरल इन्श्योरन्स फोरम ने “बेहतर तकनीक, बेहतर फसल, बेहतर जीवन” पर एक सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें श्री एच आर दवे, उप प्रबंध  निदेशक ने विशेष वक्तव्य दिया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत में फसल बीमा की पारिस्थितिकी में तेजी से बदलाव हो रहा है. कृषि क्षेत्र में निवेश ऋण के घटने की जो प्रवृत्ति लंबे समय से चली आ रही थी वह अब बदलकर वृद्धि की ओर जा रही है; ग्रामीण क्षेत्रों में समाज के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास बुनियादी संरचनाओं के साथ-साथ भौतिक बुनियादी संरचनाओं के वित्तपोषण में उछाल आया है; सिंचार्इ के बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है. ये बदलाव भारत सरकार की प्राथमिकताओं के आधार पर प्रमुख नीतिगत परिवर्तनों से संचालित हो रहे हैं. नाबार्ड ग्रामीण बुनियादी संरचनाओं के लगभग 20% हिस्से के लिए निधि उपलब्ध कराता है और सिंचार्इ परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन के लिए निधियां जुटाता है. नाबार्ड ने हाल ही में जल के संरक्षण के लिए देश के पानी की कमी वाले 240 जिलों के 1 लाख गांवों में जल अभियान चलाया.  राज्य सरकारें ऐसे सहयोगों को मनरेगा जैसे सरकार प्रायोजित कार्यक्रमों के साथ जोड़ने पर विचार कर रही हैं. नाबार्ड बड़े पैमाने पर किसानों के संगठनों को बढ़ावा दे रहा है और नाबार्ड ने 30,000 से अधिक कृषक उत्पादक संगठनों के संवर्धन का लक्ष्य रखा है. ग्रीन क्लाइमेट फंड के लिए देश की एकमात्र राष्ट्रीय डेजिग्नेटेड एंटिटी के रूप में नाबार्ड आने वाले वर्षों में जलवायु की परिवर्तनीयता और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में अनुकूलन और शमन के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र सहयोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय निधियों को चैनलाइज करेगा.
 
श्री दवे ने फसल बीमा करने वाली कंपनियों की सेवाओं को लेकर किसानों की संतुष्टि का स्तर बढ़ाने की जरूरत के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि 50% किसानों ने कोर्इ संस्थागत ऋण नहीं लिया है और उनमें से अधिकांश किसानों के पास जोखिम के लिए कोर्इ सुरक्षा नहीं है. इसलिए उन्होंने यह सुझाव दिया कि बीमा कंपनियों को ऋण न लेने वाले किसानों को भी शामिल करने के लिए कदम उठाने चाहिए और उन्हें बटार्इदार किसानों और मौखिक पट्टेदारों की समस्याओं के समाधान का प्रयास भी करना चाहिए. उन्होंने बताया कि लगभग 2.5 लाख गांवों में इतनी ही संख्या में बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट हैं और भारत में फसल बीमा का दायरा बढ़ाने में उनका सहयोग लिया जा सकता है.

नीचे इस अवसर के कुछ फोटोग्राफ दिए गए हैं.