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नाबार्ड ने अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की
नई दिल्ली | 16 August 2018 04:45 PM
डॉ.  राजीव कुमार, उपाध्यक्ष, नीति आयोग ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में नाबार्ड की अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट को जारी करने में नाबार्ड के प्रयासों की सराहना करते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि देश में सभी नीति निर्माताओं के लिए यह रिपोर्ट सहायक दस्तावेज़ सिद्ध होगी. 
 
इस सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि आजीविका गतिविधियों पर निर्भर रहने वाले परिवारों की तुलना में कृषि परिवारों के कार्य से जुड़े परिवारों की आय उच्चतर है. यह सर्वेक्षण वर्ष 2015-16 से संबन्धित था जिसमें 29 राज्यों के 245 जिलों के 2016 गांवों के 1,87,518 लोगों को शामिल किया गया. 
 
ग्रामीण परिवारों की आय के स्तरों के आकलन के अलावा सर्वेक्षण में ऋण, बचत, निवेश, बीमा, पेंशन और अलग-अलग व्यक्तियों की वित्तीय प्रवृत्ति और व्यवहार जैसे पहलुओं को शामिल किया गया था. 
 
डॉ. एच के भनवाला, अध्यक्ष, नाबार्ड ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में कहा कि वित्तीय समावेशन और ग्रामीण आजीविका के सभी पहलुओं को एकत्रित करने वाला यह सर्वेक्षण पथप्रदर्शक प्रयास है. उन्होंने यह भी बताया कि नाबार्ड प्रत्येक 3 वर्ष पर यह सर्वेक्षण करेगा. 
इस अवसर पर श्री एस के पट्टनायक, सचिव, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय; डॉ. नचिकेत मोर; प्रो. विजय शर्मा, अध्यक्ष, सीएसीपी; श्री एच आर दवे, उप प्रबंध निदेशक, नाबार्ड और विभिन्न कार्य क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.