Menu
14 जनवरी 2019 को एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट बैंक ऑफ चाइना के अधिकारियों के साथ बैठक
मुंबई | 14 January 2019 03:07 PM
इंस्टीट्यूट ऑफ रुरल फ़ाइनेंस अँड डेवलपमेंट (आईआरएफ़डी), एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट बैंक ऑफ चाइना के तीन अधिकारियों की टीम 14 से 22 जनवरी 2019 तक कृषि वित्त में नाबार्ड के अनुभवों का अध्ययन करने और भारत में कृषि और ग्रामीण वित्त व्यवस्था को जानने के लिए दौरे पर आई हुई है. प्रतिनिधि मण्डल नाबार्ड का गहन अध्ययन करेगा जिसमें संगठनात्मक संरचना, व्यवसाय परिचालनों, जोखिम प्रबंधन, सरकार के साथ संबंध, सरकारी सहायता/ सब्सिडी आदि शामिल है. 
 
उप प्रबंध निदेशक (एच आर दवे) महोदय और सीपीडी, एफ़एसपीडी, एफ़एसडीडी, एमसीआईडी, ओएफ़डीडी और नैबकोन्स के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट बैंक ऑफ चाइना के प्रतिनिधि मण्डल के साथ बैठक की. प्रतिनिधि मण्डल का नाबार्ड और संबन्धित संस्थाओं का दौरा एडीबीसी/ आईआरएफ़डी के साथ सहयोग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा. 
 
उप प्रबंध निदेशक महोदय ने प्रतिनिधि मण्डल का स्वागत किया और उनके साथ बातचीत की. उप प्रबंध निदेशक महोदय ने प्रतिनिधि मण्डल के सदस्यों को नाबार्ड के कार्यों और देश का विकास बैंक होने के नाते ग्रामीण बाज़ारों और ग्रामीण वातावरण की कमियों को कम करने के लिए नाबार्ड किस प्रकार कार्य कर रहा है इसकी विस्तृत जानकारी दी. उप प्रबंध निदेशक महोदय ने यह भी समझाया कि नाबार्ड किस प्रकार जिला-वार ऋण, परियोजना संसाधनों को निर्धारित करता है और किस प्रकार कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को सीधे ऋण प्रदान करने के लिए पुनर्वित्त को एक साधन के रूप में उपयोग करता है. नाबार्ड राज्य सरकारों को ऋण प्रदान कर ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास को भी प्राथमिकता देता है. उप प्रबंध निदेशक महोदय ने ग्रामीण सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पर्यवेक्षण, संस्थागत विकास और संस्था निर्माण, कृषि और ग्रामीण वित्त में अनुसंधान और विकास में अनुभवों तथा देश में जलवायु वित्तपोषण में नाबार्ड की अग्रणी भूमिका के बारे में भी जानकारी दी. आगे उप प्रबंध निदेशक महोदय ने यह बताया कि किस प्रकार नाबार्ड जैसी ज्ञान पर आधारित संस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों की ओर से भविष्य की कल्पना करती है और किस प्रकार सेक्टरों के लिए अत्यावश्यक संसाधनों को उपलब्ध कराती है.