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केएफ़डबल्यू अप्रेजल मिशन के साथ बैठक
मुंबई | 25 February 2019 04:44 PM
“जैव कृषि और संधारणीय मत्स्यपालन” (ओएफ़एसए) पर नई परियोजना का मूल्यांकन करने के लिए 18 से 25 जनवरी 2019 को केएफ़डबल्यू से अप्रेजल मिशन ने नाबार्ड का दौरा किया.  उक्त दल ने 18 से 22 जनवरी 2019 के दौरान ओडिशा में यूपीएनआरएम II के अंतर्गत वित्तपोषित समन्वित मत्स्यपालन परियोजना का अध्ययन करने और बेंगलुरु में यूपीएनआरएम II के अंतर्गत वित्तपोषित सहजा ऑरगानिक्स के मॉडल का अध्ययन करने के लिए ओडिशा और बेंगलुरु का दौरा किया. तत्पश्चात् केएफ़डबल्यू अप्रेजल मिशन ने 23 से 25 जनवरी 2019 के दौरान नाबार्ड के प्रधान कार्यालय का दौरा किया और एफ़एसडीडी, एफ़एसपीडी, सी-टैग के कृषि और मत्स्यपालन के अधिकारियों और सीपीडी के अधिकारियों के साथ चर्चा की थी. संभाव्य परियोजना के मूल्यांकन से केएफ़डबल्यू से नाबार्ड को 50 मिलियन यूरो (अनुमानतः रु. 400 करोड़) का ऋण और 14.5 मिलियन करोड़ (अनुमानतः रु. 116 करोड़) का अनुदान मंजूर होगा.
 
नाबार्ड के प्रधान कार्यालय के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई जिनमें भारत में जैव कृषि और संधारणीय मत्स्यपालन (ओएफ़एसए) की व्यवहार्यता, संभावना, ओएफ़एसए कार्यक्रम की तर्कसंगत रूपरेखा (उद्देश्य और परिणाम), ओएफ़एसए का निर्धन अनुकूल डिजाइन, ओएफ़एसए कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए संस्थागत व्यवस्थाएँ, पर्यावरणीय और सामाजिक आकलन – ईएसजी नीति और ओएफ़एसए कार्यक्रम के अंतर्गत उसका कार्यान्वयन, ओएफ़एसए आदि के अंतर्गत उपलब्ध अनुदानों का उपयोग शामिल हैं. 
25 जनवरी 2019 को अप्रेजल मिशन ने श्री एच आर दवे, उप प्रबंध निदेशक, नाबार्ड को मिशन के प्राथमिक निष्कर्षों के बारे में अवगत कराया और नाबार्ड से ओएफ़एसए कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए अनुरोध किया. श्री एच आर दवे ने सुझाव दिया कि केएफ़डबल्यू कार्यक्रम से पूरे देश भर में जैव कृषि के क्षेत्र में नाबार्ड का प्रवेश होगा. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जैव परियोजनों को क्लस्टर आधार पर कार्यान्वित किया जाएगा ताकि किफायत का फायदा उठाया जा सके और जैव कृषि तथा संधारणीय मत्स्यपालन क्षेत्रों के अंतर्गत सरलीकरण, क्षमता निर्माण और सेक्टर तथा बाजार के विकास के लिए कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान का लाभ लिया जा सके. श्री एच आर दवे ने बताया कि ओएफ़एसए कार्यक्रम के रूप में नाबार्ड को एक अच्छा अवसर प्राप्त होगा और उन्होंने यह बताया कि कार्यक्रम का डिजाइन लचीला होना चाहिए और देश के हितधारकों के साथ परामर्श की आवश्यकता है. उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि वाटरशेड और आदिवासी परियोजनों को पूर्ण रूप से जैव परियोजना में परिवर्तित करने की संभाव्यता का पता लगाना ठीक होगा 
 
केएफ़डबल्यू, जर्मनी और भारत की टीमों साथ ही नाबार्ड के कारपोरेट आयोजना विभाग, कृषि क्षेत्र विकास विभाग और कृषि क्षेत्र नीति विभाग के अधिकारी इस बैठक में उपस्थित थे.