Menu

हमारे बारे में

ABOUT NABARD


निदेशक मंडल

डॉ. अशोक गुलाटी

शैक्षणिक योग्यता
 
प्रोफेसर अशोक गुलाटी श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक हैं और उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की है.
 
प्रोफेशनल अनुभव
 
प्रोफेसर अशोक गुलाटी वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबधों पर भारतीय अनुसंधान परिषद (आईसीआरआईईआर) में कृषि के लिए इनफोसिस चेयर प्रोफेसर हैं. वे जाने-माने भारतीय कृषि अर्थशास्त्री और कृषि लागत एवं मूल्य (सीएसीपी) (भारत सरकार) (2011-14) आयोग के भूतपूर्व अध्यक्ष हैं.
 
वे अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) में 10 वर्षों से अधिक समय तक (2001-2011) निदेशक रहे. पहले वे बाजार, व्यवसाय और संस्था डिवीजन के प्रमुख (2001-2006) रहे और उसके बाद दिल्ली में आईएफपीआरआई के एशिया कार्यालय (2006-11) के प्रमुख रहे. आईएफपीआरआई में अपनी कार्यावधि के दौरान उन्होंने एशिया, अफ्रीका और लेटिन अमेरिका में अनुसंधान कार्य करते हुए और अनुसंधानों का मार्गदर्शन करते हुए व्यापक विश्वव्यापी अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने इन्स्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ में नाबार्ड चेयर प्रोफसर के रूप में भी काम किया (1998-2000), और इससे पहले वे 1991 से 1997 तक नेशनल काउन्सिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) में कृषि और ग्रामीण विकास के निदेशक/ मुख्य अर्थशास्त्री थे.
 
वे कई वर्षों तक भारत में नीति विश्लेषण एवं सलाह से जुड़े रहे. वे प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के आर्थिक सलाहकार परिषद के सबसे युवा सदस्य थे, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद और कर्नाटक के राज्य आयोजना बोर्ड के सदस्य थे. वर्तमान में (2016-17) में वे मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री के कृषि पर टास्क फोर्स के सदस्य भी हैं और समय-समय पर अनेक विशेषज्ञ समितियों के सदस्य रहे हैं.
 
वे "एन्डिंग हंगर एन्ड सस्टेनेबल एग्रीकल्चर" पर जी-20 के लिए टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष (जोकिम बॉन ब्राउन के साथ जो इसके अध्यक्ष है) (2017) भी हैं.
 
उपलब्धियां/ प्रमुख योगदान
 
उन्होंने भारत में शैक्षणिक एवं नीति सलाहकार दोनों रूपों में कार्य किया है. उन्होंने भारतीय एवं एशियन कृषि पर 13 पुस्तकें लिखी हैं. इसके अतिरिक्त, उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में अनेक शोध पत्र लिखे हैं. वे भारत के प्रमुख समाचार पत्रों में जाने-माने लेखक हैं और वर्तमान में वे इंडियन एक्सप्रेस और फाइनेंशियल एक्सप्रेस में "फ्रॉम प्लेट टू प्लाऊ" लिख रहे हैं.
वे नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चर साइन्स के फेलो हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ बॉन के सेन्टर फॉर डेवलपमेन्ट रिसर्च के विजिटिंग फेलो है.
 
उनके इस क्षेत्र में योगदान के लिए भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें 2015 में उच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया.