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वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति – क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (क्षेग्रा बैंक)
सं.राबैं. NB.पुनर्वित्‍त /3203 / पीपीएस - 9 / 2018-19        
25 मार्च 2019
परिपत्र सं.76/पुनर्वित्‍त - 22 / 2019       
अध्यक्ष 
सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक  
 
महोदया/ महोदय,
 
वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए योजनाबद्ध ऋण वितरण हेतु पुनर्वित्त नीति – क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (क्षेग्रा बैंक) 
 
वित्त वर्ष 2019-20 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दिया गया है और इसे हम इसके साथ भेज रहे हैं. यह नीति इस संबंध में वर्तमान नीतियों का अधिक्रमण करती है.
 
2. यह परिपत्र नाबार्ड की वेबसार्इट www.nabard.org पर टैब इन्फर्मेशन सेंटर के अंतर्गत उपलब्ध है. 
3. कृपया पावती दें.
भवदीय 
(जी आर चिंताला)  
मुख्य महाप्रबंधक  
संलग्‍नक : 7 पृष्‍ठ   
    योजनाबद्ध ऋण वितरण के लिए पुनर्वित्त नीति  - वित्तीय वर्ष 2019-20
 
1. परिचय 
नाबार्ड, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 की धारा 25(i)(क) के प्रावधानों के अधीन अनुमोदित वित्तीय संस्थाओं को कृषि क्षेत्र में निवेश गतिविधियों, अनुषंगी गतिविधियों और ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र आदि को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त ऋण प्रदान करने के लिए उनके संसाधनों के अनुपूरक के रूप में दीर्घावधि पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता है.
2. दीर्घावधि पुनर्वित्त प्रदान करने के उद्देश्य निम्नानुसार हैं 
कृषि क्षेत्र के संवर्धन को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि पूंजी निर्माण को सहयोग देना.  
ऋण प्रवाह को बल क्षेत्र की गतिविधियों के संवर्धन हेतु ले जाना. 
संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की ऋण जरूरतों को पूरा करना. 
कृषीतर क्षेत्र की गतिविधियों के लिए सहयोग देकर ग्रामीण क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार की सुविधाओं का संवर्धन. 
3. निभाव की प्रकृति  
बैंकों को उनके द्वारा विभिन्‍न प्रयोजनों के लिए किए गए संवितरण के संबंध में पुनर्वित्‍त सहायता निम्‍नलिखित दो प्रकार से प्रदान की जाती है:   
3.1  स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ) 
स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों को पूर्व-स्वीकृति की औपचारिकताओं की व्यापक प्रक्रिया से गुजरे बिना नाबार्ड से वित्तीय निभाव प्राप्त कराती है. गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों से अपेक्षा है कि वे अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन करेंगे और उधारकर्ता को वित्त प्रदान करेंगे. इसके बाद बैंक नाबार्ड से घोषणा (आहरण आवेदन) के आधार पुनर्वित्त के लिए दावा करेगा. आवेदन में पुनर्वित्त दावे के विभिन्न उद्देश्यों और संवितरित ऋण राशि का उल्लेख रहेगा. ऐसे मामलों में नाबार्ड पुनर्वित्त की स्वीकृति और संवितरण एक साथ करेगा.
कृषि क्षेत्र (एफएस) और कृषीतर के अधीन सभी परियोजनाओं के लिए पुनर्वित्‍त, बैंक ऋण अथवा कुल वित्‍तीय परिव्‍यय की मात्रा की किसी उच्‍चतम सीमा के बिना स्‍वतः पुनर्वित्‍त सहायता प्रदान की जाती है.  
3.2  पूर्व मंजूरी 
बैक अगर पूर्व मंजूरी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्वित्त का लाभ लेना चाहे तो, इन्हें नाबार्ड के अनुमोदन हेतु परियोजना प्रस्तुत करना आवश्यक है. मंजूरी से पूर्व इसकी तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक साध्यता का निर्णय करने के लिए नाबार्ड इन परियोजनाओं का मूल्यांकन करेगा. 
4. पात्रता मानदंड 
4.1 नाबार्ड से पुनर्वित्त के आहरण के लिए पात्रता मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है. वर्ष 2019-20 के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड निम्नानुसार हैं: 
(i) न्यूनतम (सीआरएआर) के 9% के मानदंड का अनुपालन.
(ii) निवल अनर्जक आस्तियां (एनपीए) बकाया निवल ऋणों/ अग्रिमों के 15% से अधिक न हों. इसके अलावा पूरे बैंक की एनपीए की स्थिति की गणना की जाएगी. 
(iii)    बैंक निवल लाभ में हो.
4.2 1 अप्रैल 2019 से 30 जून 2019 के दौरान पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन 31.03.2018 अथवा 31.03.2019 (यदि 31.03.2019 की लेखा परीक्षित स्थिति उपलब्ध है) के अनुसार उनके लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाएगा. 1 जुलाई 2019 से 31 मार्च 2020 तक वह 31.03.2019 की लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाएगा. ऐसे क्षेग्रा बैंकों को 1 जुलाई 2019 को अथवा उसके बाद मंजूर या आहरण की अनुमति तभी प्रदान की जाएगी जिनकी लेखा परीक्षा पूर्ण हो चुकी हो और जिन्होंने संबन्धित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबन्धित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की हो. 
4.3 लेखा परीक्षा रिपोर्ट और नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट में उल्लिखित वित्तीय मानदंडों में किसी भी प्रकार के परिवर्तन किए जाने की स्थिति में पात्रता निर्धारण के लिए नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट को माना जाएगा. 
4.4 सनदी लेखाकार के विधिवत् प्रमाणपत्र और क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा उस पर संस्तुति के साथ विधिवत् रिपोर्ट के पश्चात् ही वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान वित्तीय मानदंडों में किसी भी प्रकार के संशोधन पर विचार किया जाएगा. 
4.5 सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के साथ कृषि और कृषीतर क्षेत्र दोनों के अंतर्गत पुनर्वित्त आहरण के लिए पात्रता मानदंड लागू होंगे.  
5. पात्र प्रयोजन 
5.1 कृषि, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग और बैंक के बही खातों में बकाया और आहरण आवेदन तिथि को जिनकी शेष परिपक्वता अवधि 18 महीनों से अधिक है वे ऋण पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.
5.2 कृषि क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल की गई गतिविधियों की सूची अनुबंध I में दी गई है. सूची निदर्शी है और न कि सम्पूर्ण. अनुबंध में उल्लेख न की गई गतिविधियों को भी शामिल किया जा सकता है यदि वे कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक हों. 
5.3 बल क्षेत्र 
बल क्षेत्र में भूमि विकास, लघु व सूक्ष्म सिंचाई, जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण, मत्स्य पालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह /रैतु मित्र समूह (आरएमजी), एग्री  क्लिनिक  और एग्री बिजनेस सेंटर, ग्रामीण आवास, कृषि प्रसंस्करण, बंजर भूमि विकास, शुष्क भूमि कृषि, ठेका कृषि, क्षेत्र विकास योजनाएं, बागान और बागबानी, कृषि वानिकी, बीज उत्पादन, टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन, कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीतगृह, गोदाम, मार्केट यार्ड आदि सहित) कृषि उपकरण, अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत, पहले लागू किए गए वाटरशेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में वित्तपोषण शामिल हैं.  
बैंकों को बागान और बागवानी क्षेत्रों के अंतर्गत विविध गतिविधियों के लिए नवोन्मेषी/बल क्षेत्रों जैसे उच्च मूल्यवाली विदेशी प्रजातियों वाली सब्जियां, नियंत्रित स्थितियों जैसे पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस में उगने वाले कटफ्लावर्स, मशरूम, टिश्यूकल्चर लैब जैसे हाइटेक निर्यातोन्मुख उत्पाद यूनिटों की स्थापना, सब्जियों और फलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रीसीज़न फार्मिंग, फलोद्यान और बागान फसलों के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना हेतु वित्तपोषण को प्राथमिकता देनी चाहिए.
6. पुनर्वित्त की सीमा  
सिक्किम, पर्वतीय क्षेत्र (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मीज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा), पूर्वी राज्यों (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह), लक्षद्वीप और छत्तीसगढ़ के लिए पुनर्वित्त की प्रमात्रा सभी प्रयोजनों के लिए पात्र बैंक ऋणों के 100% होगी. अन्य क्षेत्रों के लिए पुनर्वित्त की सीमा निम्नानुसार होनी चाहिए ;
क) क्रम सं.5.3 में किए गए उल्लेख के अनुसार सभी बल क्षेत्रों के लिए 100%;
ख) सभी अन्य विविधीकृत प्रयोजनों और कृषक साथी योजना के लिए 95%.
7. पुनर्वित्त की सीमा – पात्रता मानदंड   
7.1 पुनर्वित्त की मात्र जोखिम रेटिंग मॉड्यूल के अनुसार निर्धारित की जाएगी और एनबीडी 1 से एनबीडी 9 में वर्गीकृत की जाएगी. पुनर्वित्त की मात्र का वर्ग-वार विवरण नीचे दिया गया है : 
मानदंड पुनर्वित्त की मात्रा  
एनबीडी 1 से एनबीडी 3 (अंक >60 और < 100) राज्य/ बैंक के लिए समग्र आबंटन की शर्त पर पुनर्वित्त की मात्र अप्रतिबंधित रहेगी. 
एनबीडी 4 (अंक > 50 और < 60) 
पुनर्वित्त की मात्रा पिछले वर्ष के दौरान आहरित पुनर्वित्त से 40 % अधिक रहेगी बशर्ते बैंक का वास्तविक ऋण वितरण कार्यक्रम नाबार्ड को स्वीकार्य हो और राज्य के लिए समग्र आबंटन के अंतर्गत हो /  संबंधित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा वर्ष 2017-18 के दौरान मीयादी ऋणों हेतु वितरित आधार स्तरीय ऋण का 90%, इसमें से जो भी अधिक हो.
एनबीडी 5 (अंक > 40 और < 50)
पुनर्वित्त की मात्रा पिछले वर्ष के दौरान आहरित  पुनर्वित्त से 25% अधिक रहेगी बशर्ते बैंक का वास्तविक ऋण वितरण कार्यक्रम नाबार्ड को स्वीकार्य हो और राज्य के लिए समग्र आबंटन के अंतर्गत हो /  संबंधित  क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा वर्ष 2017-18 के दौरान मीयादी ऋणों हेतु वितरित आधार स्तरीय ऋण का 80%, इसमें से जो भी अधिक हो.
एनबीडी 6 से एनबीडी 9 (अंक < 40) बैंक पुनर्वित्त के लिए पात्र नहीं होगा. 
7.2 पूर्वी क्षेत्र के राज्यों (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह), सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र, पर्वतीय राज्यों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), एवं लक्षद्वीप तथा छत्तीसगढ़ में ऋण-प्रवाह में वृद्धि करने की दृष्टि से श्रेणी-वार पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं : 
मानदंड पुनर्वित्त की मात्रा 
एनबीडी 1 से एनबीडी3 (अंक >60 और < 100)
राज्य/ बैंक के लिए समग्र आबंटन की शर्त पर पुनर्वित्त की मात्र असीमित रहेगी. 
एनबीडी 4 और एनबीडी5 (अंक >40 और < 60)
पुनर्वित्त की मात्रा पिछले वर्ष के दौरान आहरित  पुनर्वित्त से 40 % अधिक /  संबंधित  क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा वर्ष 2017-18 के दौरान मीयादी ऋणों हेतु वितरित आधार स्तरीय ऋण का 90%, इसमें से जो भी अधिक हो.
एनबीडी 6 से एनबीडी9 (अंक < 40) 
बैंक पुनर्वित्त के लिए पात्र नहीं होगा.
8. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का विलयन 
8.1 विलय किए गए बैंकों हेतु वर्ष 2019-20 के लिए पुनर्वित्त की मंजूरी नए/ विलय किए गए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की अधिसूचना की तिथि को 31 मार्च 2018 की स्थिति के अनुसार की गर्इ विशेष लेखापरीक्षा या समेकित लेखापरीक्षा की स्थिति के अनुसार निर्दिष्ट वित्तीय के आधार पर होगी. इसके अलावा, यदि 31.03.2019 की स्थिति के अनुसार सांविधिक लेखा परीक्षा की स्थिति उपलब्ध हो, तो बैंको को ऋण सीमा मंजूर करने पर विचार किया जाएगा. 
8.2 समामेलित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को जिन्हें अभी भारतीय रिजर्व बैंक के द्वितीय अनुसूची में शामिल किया जाना है, उन्हें विशेष मामले के रूप में पुनर्वित्त प्रदान किया जाएगा जब तक कि उनका अनुसूचीकरण नहीं हो जाता है. तथापि, यदि नाबार्ड अपने निरीक्षण के पश्चात भारतीय रिजर्व बैंक को इन समामेलित संस्थाओं के लिए अनुसूचीकरण की अनुशंसा करने में असमर्थ होता है अथवा भारतीय रिजर्व बैंक उनके अनुसूचित होने की हैसियत को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लेता है तो नाबार्ड ऐसे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से एक्सपोज़र की राशि की सीमा तक अतिरिक्त प्रतिभूति की मांग कर सकता है अथवा बकाया पुनर्वित्त राशि उपचित ब्याज/ भुगतान न किए गए ब्याज सहित लौटाने के लिए कह सकता है.   
9. ब्याज दर 
9.1 पुनर्वित्त पर ब्याज  
नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्त पर ब्याज की दरों का निर्धारण समयावधि, वर्तमान बाजार दर, जोखिम अवधारणा आदि के आधार पर किया जाएगा और समय-समय पर इसमें संशोधन किया जा सकता है. सभी क्षेग्रा बैंकों को नाबार्ड द्वारा तैयार किए गए जोखिम आकलन मॉड्यूल के अनुसार 9 जोखिम वर्गों में वर्गीकृत किया गया है. तदनुसार निर्धारित जोखिम प्रीमियम पुनर्वित्त पर ब्याज की दर से अधिक प्रभारित किया जाएगा. 
9.2 दंडात्मक ब्याज:
चूक होने पर, जिस दर पर पुनर्वित्त वितरित किया गया था उससे वार्षिक 2.00% अधिक अतिरिक्त ब्याज दर चूक की राशि पर चूक की अवधि के लिए लगार्इ जाएगी.
9.3 पुनर्वित्त के अवधि-पूर्व भुगतान के लिए दंड : पुनर्वित्त के अवधि-पूर्व भुगतान पर दंड की दर  2.50% प्रति वर्ष होगी और भुगतान की निर्धारित तारीख से पहले किए गए भुगतान से देय किस्त की वास्तविक तारीख तक की सम्पूर्ण अवधि (न्यूनतम 6 माह) के लिए प्रत्येक देय किस्त के लिए दंडात्मक ब्याज प्रभारित किया जाएगा. अवधि पूर्व भुगतान तीन कार्य दिवस का नोटिस दिए जाने के बाद ही किया जा सकता है.  
10. चुकौती अवधि 
पुनर्वित्त की चुकौती अवधि 18 महीनों (न्यूनतम) से 5 वर्ष या उससे अधिक होगी और उसकी चुकौती अर्ध-वार्षिक आधार पर की जाएगी और जिसकी देय तिथियां 31 जनवरी और 31 जुलाई होंगी. ब्याज की अदायगी छमाही आधार पर अर्थात् प्रत्येक वर्ष 01 फरवरी और 01 अगस्त की जाएगी. 
11. प्रतिभूति 
पुनर्वित्त या अन्य माध्यमों से दिए गए ऋणों और अग्रिमों के लिए प्रतिभूति नाबार्ड द्वारा सामान्य पुनर्वित्त करार (जीआरए)/ मंजूरी पत्र में विनिर्दिष्ट मानदंडों के अनुसार रहेगी. इसके अलावा, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक द्वारा नाबार्ड के पक्ष में एक विधिवत अधिदेश प्राप्त किया जाए.   
12. अनुप्रवर्तन  
12.1 नाबार्ड को पुनर्वित्त के निबंधन व शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजन से परियोजना स्थल पर सत्यापन/ जांच करने का अधिकार होगा.  
12.2 लागू नियम व विनियमों और बैंक द्वारा पूर्वोक्त के निबंधन व शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नाबार्ड को स्वयं अथवा अन्य संस्थाओं के माध्यम (उधारकर्ता की लागत पर) से बैंकों के बही खातों और अन्य संबन्धित सामाग्री की विशेष लेखा परीक्षा का अधिकार होगा. 
13.   वर्तमान अन्य नियम व शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं होगा. 
 
अनुबंध I
1. कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियां शामिल हैं: 
i. भूमि विकास 
ii. लघु और सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप सिंचाई
iii. जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण 
iv. डेयरी Dairy
v. मुर्गी पालन  
vi. मधुमक्खी पालन 
vii. रेशम उत्पादन 
viii. मत्स्यपालन 
ix. पशुपालन 
x. स्वयं सहायता समूहों / संयुक्त देयता समूहों / रैतु मित्र समूहों को दिए गए ऋण 
xi. शुष्क भूमि कृषि 
xii. ठेका खेती 
xiii. बागान और बागबानी 
xiv. कृषि वानिकी 
xv. बीज उत्पादन 
xvi. टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन 
xvii. कारपोरेट किसानों, कृषि और संबद्ध गतिविधियों में प्रत्‍यक्ष रूप से संलग्‍न किसानों के कृषक उत्‍पादक संगठन/ कंपनियां/ साझेदार फर्म  कृषक सहकारी संस्‍थाओं को समग्र रूप से ₹2 करोड़ प्रति उधारकर्ता तक के ऋण 
xviii. कृषि उपकरण 
xix. उच्च मूल्य/ विदेशी प्रजातियों की सब्जियों का उत्‍पादन, नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस में कट फ्लावर्स का उत्‍पादन 
xx. मशरूम, जैसे उच्‍च निर्यात उन्‍मुख उत्‍पादन इकाई लगाना, टिश्यूकल्चर प्रयोगशालाएं सब्जियों और फलों की उत्पादकता में वृद्धि के लिए प्रीसीज़न फार्मिंग 
2. पुनर्वित्त में निम्नलिखित अन्य गतिविधियां शामिल हैं:  
i. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने वाले निर्माण और सेवा क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) 
ii. कृषि क्लिनिक्स व कृषि व्यवसाय केन्द्र 
iii. ग्रामीण आवास 
iv. कृषि प्रसंस्करण 
v. मृदा संरक्षण और वाटरशेड विकास
vi. कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, गोदाम, मार्केट यार्ड, सिलोस आदि सहित) किसी भी क्षेत्र/ स्‍थान में  
vii. गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत,
viii. पहले से ही कार्यान्वित किए गए वाटर शेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के कार्यक्षेत्र में वित्तपोषण
ix. प्लांट टिशू कल्चर और कृषि जैव प्रोद्यौगिकी, बीज उत्पादन, जैव कीटनाशक, जैव-उर्वरक और वर्मी कम्पोस्टिंग का उत्पादन
x. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), कृषि सेवा समिति (एफएसएस) और बडे आकार की आदिवासी बहुउद्देशीय समितियों  (एलएएमपीएस) को आगे ऋण देने के लिए बैंक ऋण  
xi. सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों को कृषि क्षेत्र में आगे ऋण देने के लिए बैंकों को ऋण की स्वीकृति खादी ग्राम उद्योग (केवीआई)
xii. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रमीण विद्यालय, स्वास्थ्य उपचार सुविधा, पेयजल की सुविधा, स्वच्छता सुविधा और अन्य सामाजिक आधारभूत सुविधाएं 
xiii. सौर आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, जैव खाद आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, पवन मिल, सूक्ष्म हाईडल प्लांट जैसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन और सड़क प्रकाश व्‍यवस्‍था और दूर दराज के गांवों में विद्युतीकरण जैसे अपारंपरिक ऊर्जा आधारित सार्वजनिक जन सुविधाएं 
xiv. कृषक साथी योजना 
xv. क्षेत्र विकास योजना 
3. कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक अन्य कोई गतिविधि जिसका उल्‍लेख ऊपर न किया हो, को भी शामिल किया जा सकता है.