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वित्‍तीय वर्ष 2019-20 के लिए योजनाबद्ध पुनर्वित्त नीति - गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान
संदर्भ सं. राबैं. पुनर्वित्‍त / 3206 / पीपीएस -156 / 2018-19
25 मार्च 2019 
परिपत्र सं.79/ पुनर्वित्‍त - 25 / 2019 
                        
मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी 
सभी गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी- सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान  
 
महोदया/ प्रिय महोदय,
 
वित्‍तीय वर्ष 2019-20 के लिए योजनाबद्ध पुनर्वित्त नीति  - गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान  
 
वित्त वर्ष 2019-20 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी- सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान के पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दिया गया है और इसे हम इसके साथ भेज रहे हैं. यह नीति इस संबंध में वर्तमान नीतियों का अधिक्रमण करती है.
 
2.  इस परिपत्र को नाबार्ड की वेबसार्इट www.nabard.org पर टैब इन्फर्मेशन सेंटर के अंतर्गत रखा गया है. 
 
3. कृपया पावती दें.
भवदीय 
(जी आर चिंताला)
मुख्‍य महाप्रबंधक 
संलग्‍नक :   5 पृष्‍ठ  
 
      योजनाबद्ध ऋण वितरण के लिए पुनर्वित्त नीति  - वित्तीय वर्ष 2019-20
 
1. परिचय 
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 की धारा 25 (i) (ए) के प्रावधानों के अंतर्गत   नाबार्ड  अनुमोदित वित्तीय संस्थानों को दीर्घावधि पुनर्वित्त उपलब्ध करा रहा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किसान, स्वयं सहायता समूह, संयुक्त देयता समूह और कृषि के लिए अन्य, संबद्ध गतिविधियां, ग्रामीण आवास के साथ-साथ ग्रामीण ऑफ-फार्म सेक्टर गतिविधियों के लिए उनके द्वारा अपने संसाधनों द्वारा दिये गए दीर्घकालिक ऋणों को परिशिष्ठ करना है. 
 
2.   दीर्घावधि पुनर्वित्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य निम्नप्रकार हैं:: 
 
कृषि क्षेत्र के संवर्धन को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि पूंजी निर्माण को सहयोग देना.  
ऋण प्रवाह को बल क्षेत्र की गतिविधियों के संवर्धन हेतु ले जाना. 
संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की ऋण जरूरतों को पूरा करना. 
कृषीतर क्षेत्र की गतिविधियों के लिए सहयोग देकर ग्रामीण क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार की सुविधाओं का संवर्धन. 
 
3.   निभाव की प्रकृति 
 
गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान  (एनबीएफसी-एमएफआई) को उनके द्वारा विभिन्‍न प्रयोजनों के लिए किए गए संवितरण के संबंध में पुनर्वित्‍त सहायता निम्‍नलिखित दो प्रकार से प्रदान की जाती है:
 
3.1 स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ)      
 
स्वचालित पुनर्वित्त सुविधा गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्थानों  (एनबीएफसी-एमएफआई) को पूर्व-स्वीकृति की औपचारिकताओं की व्यापक प्रक्रिया से गुजरे बिना नाबार्ड से वित्तीय निभाव प्राप्त कराती है. गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्थानों  (एनबीएफसी-एमएफआई) से अपेक्षा है कि वे अपने स्तर पर प्रस्तावों का मूल्यांकन करेंगे और उधारकर्ता को वित्त प्रदान करेंगे. इसके बाद बैंक नाबार्ड से घोषणा (आहरण आवेदन) के आधार पुनर्वित्त के लिए दावा करेगा. आवेदन में पुनर्वित्त दावे के विभिन्न उद्देश्यों और संवितरित ऋण राशि का उल्लेख रहेगा. ऐसे मामलों में नाबार्ड पुनर्वित्त की स्वीकृति और संवितरण एक साथ करेगा.
 
3.2 पूर्व मंजूरी 
 
गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान  (एनबीएफसी-एमएफआई) अगर पूर्व मंजूरी प्रणाली के अंतर्गत पुनर्वित्त का लाभ लेना चाहे तो, इन्हें नाबार्ड के अनुमोदन हेतु परियोजना प्रस्तुत करना आवश्यक है. मंजूरी से पूर्व इसकी तकनीकी साध्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक साध्यता का निर्णय करने के लिए नाबार्ड इन परियोजनाओं का मूल्यांकन करेगा. 
 
4. पात्रता मानदंड
 
समय-समय पर नाबार्ड से पुनर्वित्त आहरण के लिए पात्रता मानदंडों की समीक्षा की जाती है.  वर्ष 2019-20 के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं.
4.1  पंजीकरणः संस्‍था के पास भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1949 की धारा 45-Iए के अधीन एक अनुमोदित वित्‍तीय संस्‍था के रूप में कार्य करने के लिए जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र होना चाहिए.
4.2   ग़ैर-बैंकिंग वित्‍तीय संस्‍थाओं का प्रकारः जमाराशियां लेने वाली और जमाराशियां न लेने वाली दोनों ही ग़ैर-बैंकिंग वित्‍तीय संस्‍थाएं- सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान नाबार्ड से पुनर्वित्‍त लेने के लिए पात्र होंगी. 
4.3  कारोबार अवधिः ऋण स्‍वीकृति तिथि को संस्था कम-से-कम पिछले 5 वर्ष से ऋण देने के कारोबार में कार्यरत होनी चाहिए. 
4.4  पूंजी पर्याप्‍तता अनुपात (सीआरएआर) -  संस्था का पूंजी पर्याप्‍तता अनुपात (कैपिटल एडिक्‍वेसी रेश्‍यो) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित सीमा के अनुसार होना चाहिए (वर्तमान में यह 15% है).
4.5 निवल लाभः गत 4 वर्षों में (वर्ष 2015-16, वर्ष 2016-17, वर्ष 2017-18, वर्ष 2018-19 में से तीन वित्‍तीय वर्ष) से कम से कम 3 वित्‍तीय वषों में निवल लाभ होना चाहिए बशर्तें पूर्वगामी (वर्ष 2018-19 में) निवल हानि नहीं होनी चाहिए.  
4.6 निवल अनर्जक आस्तियां:  निवल अनर्जक आस्तियों (एनपीए) का स्तर 4% या इससे कम होनी चाहिए.  
4.7  संस्था के संगठन ज्ञापन (मेमोरैंडम ऑफ़ एसोसिएशन) में उच्‍चतर वित्‍तीय संस्‍थाओं से ऋण लेने का प्रावधान होना चाहिए. 
4.8 ग़ैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी (एनबीएफसी) - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान की ग्रेडिंग 
i. ग़ैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी- सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान नाबार्ड से पुनर्वित्‍त प्राप्‍त करने के लिए ग़ैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी की न्‍यूनतम ग्रेडिंग सर्वोच्‍च ग्रेडिंग से एक ग्रेड कम हो (अर्थात् एमएफआर 2/एमएफ2 या के इसके बराबर). यह ग्रेडिंग क्रिसिल या भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) अनुमोदित कोई अन्‍य ग्रेडिंग संस्‍था. 
ii. सिक्किम सहित पूर्वोत्‍तर राज्यों के मामले में पात्रता मानदंड में रियायत देते हुए सर्वोच्‍च  ग्रेडिंग से दो पायदान कम हो सकती है (अर्थात् एमएफआर 3 तक).
iii.   ग़ैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्‍थान से आचार संहिता आकलन (सीओसीए) अपेक्षित है और आवेदन की प्रस्तुति के समय इसे प्रस्तुत करना होगा. 
4.9  01 अप्रैल 2019 से 30 जून 2019 अवधि के लिए 31 मार्च 2018 अथवा 31 मार्च 2019 की (यदि 31 मार्च 2019 की स्थिति की लेखापरीक्षा उपलब्‍ध हो तो) लेखापरीक्षित वित्‍तीय स्थिति के आधार पर पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन किया जाएगा.  01 जुलाई 2019 से 31 मार्च 2020 तक की अवधि के लिए 31 मार्च 2019 की लेखापरीक्षित वित्‍तीय स्थिति पर पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन आ‍धारित होंगे. 01 जुलाई 2019 को या इसके बाद केवल उन्‍हीं बैंकों को स्‍वीकृति और आहरण की अनुमति होगी जिन्‍होंने लेखापरीक्षा पूरी कर ली है.  
4.10   वित्‍तीय वर्ष 2019-20 के दौरान यदि कोई सुधार होता है तो सनदी लेखाकार (चार्टर्ड एकाउंटंट) से विधिवत् प्रमाणपत्र और क्षेत्रीय कार्यालय से इसी प्रकार की सिफारिश प्राप्‍त होने पर प्रस्‍तावों पर विचार किया जाएगा.  
4.11   कृषि और कृषीतर क्षेत्रों दोनों के अधीन पुनर्वित्‍त के आरहण के लिए पात्रता मानदंड लागू होंगे.   
4.12    उधारकर्ता को ऋण की लागत के मामले में गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्थानों  (एनबीएफसी-एमएफआई) को भारतीय रिजर्व बैंक से 01 सितंबर 2016 को जारी जारी मास्‍टर परिपत्र सं. आरबीआई/ डीएनबीआर/ 2016-17/44 (मास्‍टर डायरेक्‍शन डीएनबीआर.पीडी.007/03.10.119/ 2016-17) और आरबीआई/ डीएनबीआर/2016-17 /45 (मास्‍टर डायरेक्‍शन डीएनबीआर. पीडी. 008/ 03.10.119/ 2016-17) (समय-समय पर यथा संशोधित) का पालन करना चाहिए.  
5. पात्र प्रयोजन 
कृषि संबद्ध गतिविधियों, ग्रामीण आवास और ग्रामीण कृषीतर क्षेत्रों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों, स्‍वयं सहायता समूहों, संयुक्‍त देयता समूहों और अन्‍य को दिए गए दीर्घावधि ऋण, सूक्ष्‍म, छोटे, मध्‍यम उद्यम (एमएसएमई) और आहरण आवेदन तिथि को 18 महीने से अधिक  शेष परिपक्‍व अवधि वाले गैर- बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों के बही खातों में बकाया अन्‍य पात्र ऋणों के लिए दिए गए दीर्घावधि ऋण पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.   
6. ब्‍याज दर
6.1 पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज दरः पुनर्वित्‍त की ब्‍याज दर का निर्धारण पुनर्वित्त की अवधि, वर्तमान बाजार दर, जोखिम अवधारणा इत्यादि के आधार पर किया जाएगा और इसमें समय-समय पर परिवर्तन किया जाएगा.  सभी गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्थानों को नाबार्ड द्वारा तैयार किए गए जोखिम आकलन मॉड्यूल के आधार पर 9 जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है. तद्नुसार निर्धारित जोखिम प्रीमियम पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज दर से अधिक प्रभारित किया जाएगा.  
6.2 दंडात्‍मक ब्‍याजः चूक की स्थिति में, चूक की अवधि के लिए और चूक की राशि पर संवितरित पुनर्वित्‍त की निर्धारित ब्‍याज दर से 2% प्रति वर्ष अधिक की दर से दंडात्‍मक ब्‍याज लिया जाएगा.
6.3 पुनर्वित्‍त की अवधि-पूर्व चुकौती के लिए दंडः अवधि-पूर्व चुकौती की स्थिति में शेष अवधि के लिए 2.50% प्रति वर्ष और प्रत्‍येक किस्‍त के लिए पूर्व चुकौती की तिथि से चुकौती की वास्‍तविक तिथि तक की पूर्ण अवधि (न्‍यूनतम 6 महीने) तक के लिए अलग से दंडात्मक ब्याज लिया जाएगा. न्‍यूनतमक 3 कार्य दिवस की सूचना देने के बाद पूर्व चुकौती की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. 
7. चुकौती अवधि 
पुनर्वित्‍त के लिए चुकौती अवधि न्‍यूनतम 18 महीने(न्‍यूनतम) और 5 वर्ष या उससे अधिक होगी. चुकौती हर वर्ष छमाही आधार पर 31 जनवरी / 31 जुलाई को की जाएगी. पुनर्वित्‍त पर ब्‍याज का भुगतान हर वर्ष छमाही आधार पर 01 फ़रवरी और 01 अगस्‍त को करना होगा. मासिक / तिमाही आधार पर ब्याज भुगतान के विकल्प उपलब्ध हैं. 
8. प्रतिभूति मानदंड 
गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्था के लिए प्रतिभूति के मानदंड निम्‍नानुसार निर्धारित किए गए हैं :
i.   प्रतिभूति निम्‍नानुसार होगी 
एम.एफ.आर 1/एम.एफ 1 ग्रेडिंग वाली संस्‍थाओं को जारी पुनर्वित्‍त का 1.12 गुना 
एम.एफ.आर 2/एम.एफ 2 ग्रेडिंग वाली संस्‍थाओं को जारी पुनर्वित्‍त का 1.18 गुना 
एम.एफ.आर 3/एम.एफ 3 ग्रेडिंग वाली संस्‍थाओं को जारी पुनर्वित्‍त का 1.25 गुना 
ii. प्रतिभूति के मूल्‍य में कमी यदि कोई हो, की पूर्ति अतिरिक्‍त प्रतिभूतियों के माध्‍यम से की जाएगी ताकि नाबार्ड की देयताओं के संबंध में उपर्युक्‍त पुनर्वित्‍त बकाया न्‍यूनतम 1.12/1.18/1.25 गुना तक की पर्याप्‍त प्रतिभपूति उपलब्‍ध हो सके. 
iii. सभी प्रतिभूतियां आय अर्जक आस्तियों से संबंधित ही होनी चाहिए. 
iv. पुनर्वित्त से दिए गये ऋणों के लिए गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्था को उधारकर्ताओं से ली गई प्रतिभूतियों को नाबार्ड के न्‍यास के रूप में अपने पास रखना होगा.
v. नाबार्ड के साथ सामान्‍य पुनर्वित्‍त क़रार का निष्‍पादन करना 
vi. गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्था के मुख्‍य बैंकर के पास रखे गए चालू खाते को नामे करने का अधिदेश.
vii. निर्धारित प्रपत्र में निदेशक-मंडल द्वारा पारित संकल्‍प.
viii. नाबार्ड के पक्ष में बही ऋण का समनुदेशन और पुनर्वित्‍त से बनी आस्तियों पर कंपनी निबंधक के पास भार का पंजीकरण. तथापि, आवश्‍यकता हो तो, लिए गए पुनर्वित्‍त हेतु ली गई आस्तियों पर पूर्ण अधिकार देने के बजाय विशेष मामले के रूप में पूर्ण अधिकार के स्‍थान पर हम गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी - सूक्ष्‍म वित्‍तीय संस्था की आस्तियों पर समरूप (पारी-पसू) अधिकार को स्‍वीकार कर सकते हैं.
ix. बही ऋण के समनुदेशन के लिए विधिवत हस्ताक्षरित और मुद्राकिंत करार, सुपुर्दगी पत्र और मांग वचन पत्र (डीपीएन) फार्मेट्स, ऋण/ प्रतिभूति की पावती.
x. जहां भी संभव हो कारपोरेट गारंटी / वैयक्तिक गारंटी प्रस्‍तुत की जाएगी. 
9. अनुप्रवर्तन  
पुनर्वित्‍त के निबंधनों व शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्थल पर सत्यापन/ जांच का अधिकार नाबार्ड को होगा.
10.  वर्तमान में लागू अन्‍य सभी निबंधन व शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी.