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प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत के उपाय हेतु मार्गनिर्देश- अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन) ऋण का मध्यावधि ऋण में परिवर्तन- वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए पुनर्वित्त नीति
सं. सं. राबैं.पुनर्वित्त (एसटी पॉलिसी)/  3558  / ए-10 / 2019-20                      
1 अप्रैल 2019
परिपत्र सं. 92 / पुनर्वित्त – 32 / 2019
 
1. अध्यक्ष,
    सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 
2. अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक,
    क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के सभी प्रायोजक बैंक 
 
प्रिय महोदय,
 
प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत के उपाय हेतु मार्गनिर्देश- अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन) ऋण का मध्यावधि ऋण में परिवर्तन- वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए पुनर्वित्त नीति
 
कृपया दिनांक 11 अप्रैल 2018 के हमारे परिपत्र संख्या 71/ डीओआर-17/ 2018 का संदर्भ ग्रहण करें जिसमें वर्ष 2018-19 के लिए पुनर्वित्त नीति के दिशानिर्देश भेजे गये हैं, जिसमें प्राकृतिक आपदा के कारण फसल नष्ट होने पर किसानों को राहत उपलब्ध करवाने के लिए अल्पावधि ऋणों को मध्यावधि ऋणों में परिवर्तन करना तथा पुनश्चरणीकरण/ वर्तमान मध्यावधि ऋण (परिवर्तन) ऋणों का पुनः अनुसूचीकरण करने के दिशानिर्देश दिए गये हैं. नीति की समीक्षा की गई तथा यह निर्णय लिया गया है कि उक्त नीति तथा उसमें उल्लिखित नियम एवं शर्तें व्यापक रूप से वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए भी जारी रखे जाएं. 
 
2. वर्ष 2019-20 के लिए मध्यावधि परिवर्तन/ पुननिर्धारण/ पुनः अनुसूचीकरण ऋणों की ब्याज की दरें समय-समय पर संशोधन की शर्त के अधीन होगी. वर्तमान ब्याज दर न्यूनतम 8.10% जो बैंक द्वारा अंतिम उधारकर्ताओं से ली जाने वाली ब्याज से 300 बेसिस पॉइंट्स कम होगी और बैंकों द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के मार्गनिर्देशों का पालन किए जाने की शर्त के अधीन होगी.  
 
3.  कृपया हमारे क्षेत्रीय कार्यालय को अनुबंध I और II सहित इस परिपत्र की पावती भेंजे. 
 
भवदीय,
(जी आर चिंताला)
मुख्य महाप्रबंधक
अनुलग्नक: 5 पृष्ठ 
 
अनुबंध I
 
प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत उपायों के लिए दिशानिर्देश- अल्पावधि (मौसमी कृषि परिचालन) ऋणों का मध्यावधि – क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए वर्ष 2019-20 के लिए पुनर्वित्त नीति 
 
1. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की व्यक्तिगत ऋण सीमा की मंजूरी की जाएगी. 
2. पात्रता मानदंड:
वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु अल्पावधि (मौकृप) ऋण सीमा के मंजूरी के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड मध्यावधि (परिवर्तन) ऋणों की मंजूरी के लिए भी लागू होंगे, जो निम्नानुसार है: 
(क) लेखा-परीक्षा: वर्ष 2017-18 के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की लेखा-परीक्षा पूरी हो चुकी हो और उससे संबंधित वित्तीय विवरणों के साथ सापेक्ष लेखा परीक्षा रिपोर्ट, नाबार्ड को प्राप्त हो चुकी हो. जहां 2018-19 की लेखा परीक्षा पूरी हो चुकी है और लेखा परीक्षा रिपोर्ट जारी की जा चुकी हो वहां संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट वित्तीय विवरणों के साथ नाबार्ड को प्रस्तुत की जाए. 
(ख)  सीआरएआर का अनुपालन 
31.03.2018 के स्थिति के अनुसार सीआरएआर 9% या उससे अधिक होनी चाहिए. वे क्षेग्रा बैंक जिनकी दिनांक 31.03.2018 को सीआरएआर 9% से कम है परंतु दिनांक 31.03.2019 को सीआरएआर 9% से अधिक है वे भी इसके लिए पात्र होंगे. 
3. एसएफ/ एमएफ/ ओएफ के लिए केवल वर्तमान अल्पावधि फसल ऋण 5 वर्षों की अधिकतम अवधि तक परिवर्तन के लिए पात्र होंगे.
4. अनुबंध II में दी गई निर्धारित कुछ शर्तों तथा इस संबंध में समय-समय पर जारी अन्य अनुदेशों की अनुपालना होने की स्थिति में ऋण के परिवर्तन/ पुननिर्धारण / पुनःअनुसूचीकरण के लिए नाबार्ड से पुनर्वित्त उपलब्ध होगा. मध्यावधि (परिवर्तन) की शेयरिंग पैटर्न निम्नानुसार होगा:
नाबार्ड पुनर्वित्त- 70%, क्षेग्रा बैंक का अंश - 5% और प्रायोजक बैंक का अंश- 25%
बीमा दावों में नाबार्ड का आनुपातिक हिस्सा, यदि कोई हो, उसे सामान्य बीमा निगम (जीआईसी)/ अन्य बीमा कंपनियों द्वारा निपटाए जाने के बाद तुरंत नाबार्ड को देना होगा. इसके अलावा मध्यावधि (परिवर्तन) सहायता, नाबार्ड अधिनियम 1981 की धारा-22 में निहित प्रावधानों के अनुसार, 33% से 50% के बीच की फसल हानि के मामले में 2 वर्ष की अवधि, और 50% या उससे अधिक की फसल हानि (इस अवधि में एक वर्ष की अधिस्थगन अवधि परिवर्तन/ पुननिर्धारण / पुनः अनुसूचीकरण में शामिल होंगी) के मामले में अधिकतम 5 वर्ष के अवधि तक सीमित रहेंगी.  
5. मध्यावधि (परिवर्तन/ पुननिर्धारण / पुनः अनुसूचीकरण) ऋण के लिए बैंकों को दिए जाने वाले पुनर्वित्त के विस्तार के अन्य निबंधन और शर्तें निम्नानुसार है: 
क) वर्ष 2019-20 के लिए मध्यावधि (परिवर्तन/ पुननिर्धारण / पुनः अनुसूचीकरण) ऋण पर पुनर्वित्त की ब्याज दर नाबार्ड द्वरा समय-समय पर निर्धारित की जाएगी.( वर्तमान ब्याज दर बैंकों द्वारा अंतिम लाभार्थी से प्रभारित की जाने वाली दर से 300 बेसिस पॉइंट कम है. यह दर 8.10% वार्षिक की न्यूनतम ब्याज दर तथा बैंकों द्वारा इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अधीन होगी.)
मूलधन की चुकौती और ब्याज के भुगतान में चूक होने की स्थिति में, क्षेग्रा बैंक नाबार्ड को चूक की अवधि के लिए चूक की राशि पर 10.25% प्रति वर्ष के हिसाब से ब्याज देने के लिए उत्तरदायी होगा. दंडात्मक ब्याज दरें समय-समय पर संशोधित की जाएंगी. 
ख) सामान्यतः मंजूरी की तारीख से 1 से 3 माह का समय नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्त के आहरण के लिए दिया जाता है ताकि बैंक आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर सके, आवश्यकता पड़ने पर प्रत्येक मामले के गुण-दोष के आधार पर यह अवधि बढ़ाई जा सकती है. रिपोर्टिंग के प्रयोजन के लिए अवधि 01.04.2019 से 31.03.2020 मानी जाएगी. 
ग) राजस्व प्राधिकारियों/ राज्य सरकार द्वारा भूराज्स्व का स्थगन/ की माफी 
6. जिन प्रभावित उधारकर्ताओं के अल्पावधि (मौकृप) ऋणों को मध्यावधि (परिवर्तन) ऋण के रूप में परिवर्तित किया गया है, उन्हें अगली फसल उगाने के लिए उनकी पात्रता, वित्तमान, चुकौती क्षमता आदि के आधार पर नए फसल ऋण दिए जाएंगे. 
7. प्राकृतिकापदाओं से प्रभावित कृषि ऋणों के मामले में विवेकपूर्ण मानदंडों और एनपीए वर्गीकरण के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन किया जाना चाहिए. 
8.    परिवर्तन का प्रस्ताव किसान के स्तर पर वास्तविक परिवर्तन की तारीख से एक वर्ष के भीतर नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत किया जाना चाहिए. 
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अनुबंध II
मध्यावधि (मौकृप) ऋण के परिवर्तन की अनुमति के लिए औपचारिकताएं/ पूर्वापेक्षाएं 
परिवर्तन सुविधाएं प्रदान करने के लिए निम्नलिखित औपचारिकताएं/ पूर्वपेक्षाओं को पूरा करने का सुझाव है: 
1.(क) प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राज्य सरकार 
i)   सूखा प्रबंधन मैनुअल में उल्लिखित प्रक्रियाओं को अपनाए और उसमें निहित विभिन्न मापदण्डों/ सूचकांकों के आधार पर सूखा की घोषणा का निर्णय लें. इस प्रकार की घोषणाओं में जिन आंकड़ों के आधार पर यह घोषणा की गई, राज्य सरकार द्वारा अपनायी गई प्रक्रियाओं तथा किस सीमा तक फसल की हानि हुई है, उसका विस्तार से उल्लेख किया जाए. 
अथवा 
ii) राष्ट्रीय कृषि बीमा कार्यक्रम के अनुसार फसल कटाई के प्रयोग किए जाएं. यह प्रक्रिया बीमे के लिए फसलों को पात्र घोषित करने और परिशिष्ट के अनुसार जारी प्रमाणपत्रों में फसल-वार हानि के प्रतिशत को दर्शाते हुए ‘अन्नेवारी (जो भी नाम हो) घोषित करने से पहले की एक शर्त है. 
(ख) अन्य आपदाओं की स्थिति में:  फसल कटाई के प्रयोगों के माध्यम से हानि का आकलन किया जाए जिसमें स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख किया जाए कि क्षेत्र/ तालुका/ मंडल/ ब्लॉक (जो भी मामला हो) में फसल की हानि 33% या उससे अधिक है ताकि बैंकों से ऋण के पुनःअनुसूचीकरण की मांग की जा सके. अत्यंत खराब परिस्थितियों में जैसे भयंकर बाढ आदि की स्थिति में जब यह स्पष्ट दिखाई देता है कि खड़ी फसलों का अधिकांश नुकसान हुआ हो और/ या भूमि और अन्य आस्तियों की बड़े पैमाने पर क्षति हुई हो, राज्य सरकार/ जिला कलेक्टर को इस स्थिति पर राज्य स्तरीय बैंकिंग समिति/ जिला परामर्श समिति की बैठकों में गहन विचार-विमर्श करना चाहिए और राज्य के संबंधित सरकारी पदाधिकारी/ जिला कलेक्टर को फसल कटाई प्रयोगों के माध्यम से ‘अन्नेवारी’ (या जिस किसी नाम से फसल नुकसान के प्रतिशत का उल्लेख होता हो) का आकलन न करने के बारे में स्पष्ट करना चाहिए और आंखों देखी/ दृष्टि प्रभावों के आधार पर प्रभावित जनता को जरूरतों के लिए राहत पहुंचाने के निर्णय से समिति के सदस्यों को अवगत कराना चाहिए. 
दोनों ही मामलों में, इस तरह की घोषणाओं पर कार्य शुरू करने से पहले जिला परामर्श समिति राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को इस बात से आश्वस्त होना चाहिए कि फसल का नुकसान 33% या उससे अधिक हुआ है. 
2.  सामान्यतः बैंक किसान-उधारकर्ताओं से प्राकृतिक आपदा के वर्ष में देय फसल ऋणों के मूलधन/ मध्यावधि (परिवर्तन) ऋणों की किस्तों का परिवर्तन/ पुननिर्धारण / पुनःअनुसूचीकरण करें. तथापि, फसलों के बहुत बड़े नुकसान की घोषणा राज्य सरकार द्वारा की गई हो और इसे राज्य स्तरीय बैंकर समिति/ कार्य दल/ इस उद्देश्य के लिए गठित संचालन समिति द्वारा स्वीकार किया गया हो. छोटे किसानों/ सीमांत किसानों से देय ब्याज जो परिवर्तन/ पुननिर्धारण / पुनः अनुसूचीकरण के लिए पात्र ऋण है कि ब्याज की राशि को एक वर्ष के लिए आस्थगित किया जा सकता है. इसके अलावा, अन्य किसानों के मामले में ब्याज के आस्थगन का निर्णय, बिना उच्च्तर वित्तीय एज्न्सियों से वित्त सहायता लिए, बैंक स्वयं ले सकते हैं यदि उनके संसाधन इसके लिए अनुकूल हो. 
3. आर्थिक संपत्तियों के नुकसान और उससे होने वाली हानि के कारण पुनःसंरचित ऋणों की चुकौती अवधि आपदा की गंभीरता और इसकी पुनरावृति के आधार पर भिन्न हो सकती है. यदि हानि 33% और 50% के बीच हो तो बैंक अधिकतम 2 वर्ष (1 वर्ष की अधिस्थगन अवधि सहित) तक की चुकौती अवधि के लिए अनुमति दे सकते हैं. यदि फसल की 50% या उससे अधिक हानि हुई हो तो चुकौती के पुनर्निर्धारण अवधि को अधिकतम 5 वर्ष (1 वर्ष की अधिस्थगन अवधि सहित) तक बढ़ाया जा सकता है. 
4. पुनर्निर्धारण के सभी मामलों में, कम से कम एक वर्ष की अधिस्थगन अवधि पर विचार किया जाए. इसके अलावा, इस प्रकार के पुनर्निर्धारित ऋणों के लिए बैंक अतिरिक्त संपार्श्विक प्रतिभूति पर जोर न दें. 
5. बैंकों द्वारा परिवर्तन/ पुननिर्धारण / पुनः अनुसूचीकरण ऋणों के मामले में, बैंक कोई अतिरिक्त ब्याज की उगाही न करें और यदि पहले ही इस प्रकार का ब्याज लगाया गया है तो उसे माफ करने पर विचार करें. 
अनुबंध-II का परिशिष्ट
यह प्रमाणित किया जाता है कि वर्ष के दौरान खरीफ/रबी* मौसम की खड़ी फसलों को (प्राकृतिक आपदा के प्रकार का उल्लेख करें) के कारण निम्नलिखित गांवों में नुकसान हुआ था और "अन्नेवारी" के रूप में पैदावार 6 आनों अर्थात्‌ सामान्य पैदावार से 50% से कम/ 33% से 50% के बीच (अर्थात्‌......%) थी. (जो भी लागू हो) 
क्र. सं. गाव का नाम प्रभावित फसल का नाम प्रतिशत अथवा आना के रूप में फसल के नुकसान की मात्रा 
1 क)
ख)
ग)
2
3
* जो लागू नहीं है उसे काट दें.
यह भी प्रमाणित किया जाता है कि भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा जनवरी 1980 में नियुक्त ‘प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में अल्पावधि उत्पादन ऋणों को मध्यावधि और दीर्घावधि ऋणों में परिवर्तित करने के लिए फसल के पैदावार के निर्धारण की ‘वैज्ञानिक पद्धति’ पर कार्यदल की विभिन्न अनुशंसाओं के आधार पर अन्नेवारी निर्धारण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है और ‘अन्नेवारी’ की घोषणा करते समय निम्नलिखित संकल्पना/ आधार विशेष का पालन किया गया है.
(क) क्षेत्र की संकल्पना: पैदावार का निर्धारण करने के लिए क्षेत्र की संकल्पना का पालन किया जाता है अर्थात्‌ जिले के 70% क्षेत्र में जो फसले ली जाती है, केवल उन्हीं की गणना की जाती है. 
(ख) पैदावार की तुलना: प्रभावित वर्ष की पैदावार की तुलना पिछले पांच वर्ष की औसत पैदावार के साथ की जाती है.
(ग) वैज्ञानिक पद्धति: वैज्ञानिक पद्धति अर्थात् फसल कटाई से संबंधित प्रयोगों के माध्यम से औसत फसल पैदावार का अनुमान लगाया जाता है. 
(घ) अन्नेवारी: प्रभावित क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर फसल/ फसलों की पैदावार की तुलना के आधार पर  जिला स्तरीय समिति ने प्रमाणित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई रहित फसल के मामले में पैदावार 50 % या उससे अधिक/ 33% से 50% (जो भी लागू हो) के बीच कम हो गई है और तदनुसार, राजस्व विभाग ने इन क्षेत्रों के लिए "अन्नेवारी" की घोषणा की है.
जिला कलेक्टर / प्राधिकृत राजस्व अधिकारी के हस्ताक्षर और मुहर  
दिनांक: