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नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 27 के अंतर्गत सहकारी ऋण संस्‍थाओं की शेयर पूंजी में अंशदान के लिए राज्‍य सरकारों को सावधि ऋण की मंजूरी – वर्ष 2019-20 के लिए नीति
संदर्भ सं.राबैं.डॉर- एसटी-पॉलिसी/ 3559 / ए.101/2019-20                              
1 अप्रैल 2019
परिपत्र सं. 93 / डॉर- 33/ 2019
राज्य सरकार के मुख्‍य सचिव 
सभी राज्‍य और केन्‍द्र शासित प्रदेश 
 
प्रिय महोदय, 
 
नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 27 के अंतर्गत सहकारी ऋण संस्‍थाओं की शेयर पूंजी में अंशदान के लिए राज्‍य सरकारों को सावधि ऋण की मंजूरी – वर्ष 2019-20 के लिए नीति
 
नाबार्ड अधिनियम 1981 की धारा 27 के अंतर्गत नाबार्ड सहकारी ऋण संस्‍थाओं अर्थात् राज्‍य सहकारी बैंकों, जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों, पैक्‍स/ कृषक सेवा समितियों/ लैम्‍प्‍स, राज्‍य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों की शेयर पूंजी में अंशदान के लिए प्रतिपूर्ति के आधार पर राज्‍य सरकारों को दीर्घावधि ऋण उपलब्‍ध कराता है.
 
2. हम सूचित करते हैं कि वर्ष 2019-20 की यह नीति वर्ष 2018-19 के लिए दिनांक 11 अप्रैल 2018 को जारी नीतिगत परिपत्र सं.68/डोर 14/2018 के अनुरूप ही है.  
 
3. इसके तहत प्रदत्‍त सहायता की परिचालन अवधि 01 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 होगी और इसके अंतर्गत वर्ष 2019-20 के दौरान शेयर पूंजी अंशदान के लिए राज्‍य सरकार द्वारा संवितरित राशि शामिल होगी.  
 
4. नाबार्ड से राज्‍य सरकारों को यह सुविधा 8.5% वार्षिक दर अथवा समय-समय पर नाबार्ड  द्वारा निर्धारित दर पर उपलब्‍ध कराई जाएगी.  
 
5. शेयर पूंजी अंशदान के लिए अंशदान करते समय राज्‍य सरकारों को निम्‍नलिखित बातों का ध्‍यान रखना चाहिएः 
 
(i) सहकारी ऋण संस्‍थाओं में सदस्‍य आधारित प्रक्रिया के संवर्धन पर बल देना 
 
सहकारी ऋण संस्‍थाओं की शेयर पूंजी में अंशदान के लिए राज्‍य सरकारों को सहायता प्रदान करने का मुख्‍य उद्देश्‍य इन संस्‍थाओं की अधिकतम उधार क्षमता (एमबीपी) को बढ़ाना है जिसे इनकी स्‍वाधिकृत निधियों के गुणक के रूप में मापा जाता है. इससे ये संस्‍थाएं अपने घटकों की ऋण आवश्‍यकताओं, विशेष रूप से कृषि ऋणों के लिए व्‍यापक आधार पर ऋण कार्यक्रम संचालित कर सकेंगी. इसके साथ ही, इन सहकारी ऋण संस्‍थाओं को वास्‍तविक रूप से एक लोकतांत्रिक, सदस्‍य आधारित और आत्‍मनिर्भर संस्‍था बनाने के लिए यह अपेक्षित है कि इसके सदस्‍यता आधार और सहकारी ऋण संस्‍थाओं के इक्विटी आधार को भी सदस्‍यों से शेयर पूंजी अंशदान संग्रहण से बढ़ाया जाए. 
 
(ii)   राज्‍य सरकारों द्वारा शेयर पूंजी अंशदान का वास्‍तविक आकलन 
 
राज्‍य सरकारें विभिन्‍न संस्‍थाओं को उनके ऋण कार्यक्रम और नाबार्ड द्वारा निर्धारित पात्रता, राज्‍य सरकार की शेयर पूंजी अंशदान संबंधी सीमा आदि को ध्‍यान में रखते हुए सहायता राशि के वास्‍तविक आकलन के बाद शेयर पूंजी प्रदान करें. 
 
6. राज्‍य सरकारें प्रतिपूर्ति के लिए निर्धारित प्रोफार्मा में पूर्ण रूप से भरे गए अपने आवेदन परिचालन अवधि के (अप्रैल 2019- मार्च 2020) भीतर नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में समय से प्रस्‍तुत करें. 
 
7. इस नीति की मुख्‍य बातें अनुबंध में इंगित हैं.  
 
8. कृपया इस परिपत्र की पावती हमारे क्षेत्रीय कार्यालय में भिजवाएं.  
 
भवदीय 
(जी आर चिंताला) 
मुख्‍य महाप्रबंधक
संलग्‍नकः 5 पृष्‍ठ  
 
अनुबंध
 
वर्ष 2019-20 के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, अधिनियम, 1981 की धारा 27 के अंतर्गत राज्य सरकारों को नाबार्ड द्वारा ऋणों की प्रतिपूर्ति को शासित करने वाली नीति – मुख्य बातें 
1.  पात्रता मानदंड और अधिकतम राशि
अ    राज्य सहकारी बैंक (रास बैंक)
(i)  अनर्जक आस्ति मानदंड
क.  31 मार्च 2018 को राज्य सहकारी बैंक की निवल अनर्जक आस्तियां 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए.  यदि 31 मार्च 2019 को स्थिति में सुधार आता है तो इसे माना जाएगा. 
ख.  पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अंडमान और निकोबार दीप समूह में कार्यरत राज्य सहकारी बैंकों को अनर्जक आस्ति मानदंडों में 5% की छूट प्रदान की जाती है.
(ii)  पूंजी की अधिकतम सीमा
क   राज्य सहकारी बैंक की चुकता पूंजी में राज्य सरकार का शेयर पूंजी में अंशदान 25% से अधिक न हो.
ख.  राज्य सरकार द्वारा राज्य सहकारी बैंक की कुल चुकता शेयर पूंजी के 25% से अधिक पूंजी अंशदान के लिए सहायता उपलब्ध है. यह सहायता अनुदान के रूप में दी जा सकती है और इसे ‘कैपिटल कन्वर्टिवल डिपाजिट’ के रूप में निर्धारित खाते में रखा जाए. यह राशि श्रेणी I पूंजी के अंतर्गत सीआरएआर के उद्देश्य से पात्र हैं. 
 ग.  सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र में राज्य सरकारों को एक विशेष मामले के रूप में राज्य सहकारी बैंकों की अंश पूंजी में 25% से अधिक अंशदान की अनुमति है. यदि यह बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (ससयला) की धारा 11(1) का पालन करने के लिए अपेक्षित हो. 
घ.  रास बैंक के शेयर पूंजी में अंशदान के लिए ऋण की मात्रा पर कोई  वार्षिक सीमा नहीं है. 
(iii)  बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (ससयला) की धारा 11(1) का अनुपालन
अ. सभी लाइसेंसशुदा राज्य सहकारी बैंक जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (ससयला) की धारा 11(1) का अनुपालन कर रहे हैं, पात्र होंगे. 
आ.  जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक( जिमस बैंक)
(i)  अनर्जक आस्ति मानदंड
क.  31 मार्च 2018 को जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की निवल अनर्जक आस्तियां 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए. यदि 31 मार्च 2019 को स्थिति में सुधार आता है तो इसे माना जाएगा.
ख.  पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में कार्यरत जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों को अनर्जक आस्ति मानदंडों में 5% की छूट प्रदान की जाती है. 
(ii)  पूंजी की अधिकतम सीमा
क.  जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के शेयर पूंजी में राज्य सरकार का अंशदान उसकी चुकता पूंजी के 25% से अधिक न हो. 
ख.  राज्य सरकार द्वारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की कुल चुकता शेयर पूंजी के 25% से अधिक पूंजी अंशदान के लिए सहायता उपलब्ध है.  यह सहायता अनुदान के रूप में दी जा सकती है और इसे ‘कैपिटल कन्वर्टिबल डिपाजिट’ के रूप में निर्धारित खाते में रखा जाए. यह राशि श्रेणी-I पूंजी के अंतर्गत सीआरएआर के उद्देश्य से पात्र हैं. 
ग.  जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों की शेयर पूंजी में अंशदान के लिए ऋण की मात्रा पर कोई  वार्षिक सीमा नहीं है. 
(iii)  बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (ससयला) की धारा 11 (1) का अनुपालन 
क.  सभी लाइसेंसशुदा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक जो बैंककारी विनियमन अधिनियम,1949 (ससयला) की धारा 11(1) का अनुपालन कर रहे हैं, पात्र होंगे. विशेष मामले के रूप में, जिन जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों को लाइसेंस नहीं मिला है, परंतु वे राज्य सरकार के पुनरुत्थान पैकेज के अंतर्गत आते हैं तो वे भी इस सहायता के लिए पात्र होंगे.
इ.  प्राथमिक कृषि ऋण समितियां( प्राकृऋस)
क.  30 जून 2018 अथवा 30 जून 2019 को, जो भी लाभप्रद हो, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के अतिदेय मांग के 60% से अधिक नहीं होने चाहिए. 
ख.  संबंधित वर्ष के लिए लेखा परीक्षा वर्गीकरण में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को ‘ए’ ‘बी’ और ‘सी’ वर्ग प्राप्त हुआ हो.  प्राथमिक कृषि ऋण समितियों की लेखा-परीक्षा कम से कम वर्ष 2016-17 के लिए पूरी हो चुकी हो और संबंधित राज्य सरकार ने बकाया लेखा परीक्षा पूरी करने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम प्रस्तुत किया हो.
ग.  राज्य सरकार का शेयर पूंजी में अंशदान चुकता पूंजी के 25% से अधिक न हो. 
घ.  प्राकृऋस की शेयर पूंजी में अंशदान के लिए ऋण की मात्रा पर कोई वार्षिक सीमा नहीं है. 
ई.  कृषक सेवा समितियां (कृसेस)
क.  30 जून 2018 अथवा 30 जून 2019 को, जो भी लाभप्रद हो, कृषक सेवा समितियों के अतिदेय, मांग के 60% से अधिक नहीं होने चाहिए. 
ख.  कृषक सेवा समिति के पास कृषक सेवा समिति योजना में बताए गए अनुसार एक पूर्णकालिक संवैतनिक प्रबंध निदेशक होना चाहिए और कम से कम 3 तकनीकी स्टाफ/ विषय से संबंधित विशेषज्ञ होने चाहिए.
ग. शेयर पूंजी में राज्य सरकार का अंशदान संस्था की चुकता पूंजी का 25% से अधिक न हो.  
उ.  बृहदाकार आदिवासी बहुउद्देशीय सहकारी समितियां  (लैंप्स)
क.  30 जून 2018 अथवा 30 जून 2019 को, जो भी लाभप्रद हो, बृहदाकार आदिवासी बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के अतिदेय, मांग के 75% से अधिक नहीं होने चाहिए. 
ख.  बृहदाकार आदिवासी बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के पास न्यूनतम 10,000 एकड़ भूमि होनी चाहिए तथा व्यवहार्य परिचालनों के लिए ऋणों की पर्याप्त संभावनाएं होनी चाहिए. 
ग. शेयर पूंजी में राज्य सरकार का अंशदान संस्था की चुकता पूंजी का 25% से अधिक न हो.  
ऊ.  राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (रासकृग्रावि) और  प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (प्रासकृग्रावि बैंक) 
क.  30 जून 2018 अथवा 30 जून 2019 को, जो भी लाभप्रद हो, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास (रासकृग्रावि) बैंक के अतिदेय मांग के 35% से अधिक नहीं होने चाहिए.
ख.  30 जून 2018 अथवा 30 जून 2019 को, जो भी लाभप्रद हो, प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास (प्रासकृग्रावि) बैंक के अतिदेय मांग के 50% से अधिक नहीं होने चाहिए. 
 ग.  प्रति रासकृग्रावि बैंक की प्रतिपूर्ति सहायता की वार्षिक अधिकतम सीमा रुपए 400 लाख और प्रति प्रासकृग्रावि बैंक के लिए रुपए 75 लाख होगी बशर्ते सहायता प्राप्त संस्था की चुकता पूंजी में राज्य सरकार का शेयर पूंजी अंशदान 50% से अधिक न हो.
II. ऋण सहायता की प्रतिपूर्ति के लिए अन्य शर्तें और निबंधन
(i)   परिचालन अवधि 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 होगी और वर्ष 2019-20 के दौरान अंश पूंजी अंशदान के लिए राज्य द्वारा किए गए संवितरण प्रतिपूर्ति के लिए इसमें शामिल होंगे. 
(ii)   प्रतिपूर्ति सहायता की चुकौती 12 वर्ष की अवधि में की जानी है.
(iii)  मूलधन की चुकौती 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को 10 समान वार्षिक किस्तों में की जानी है. यह चुकौती आहरण के तीसरे वर्ष से प्रारंभ होगी चाहे आहरण की तारीख कोई भी हो. 
किए गए आहरण देय तिथि
01 अप्रैल से 30 सितम्बर 1 अप्रैल 
01 अक्तूबर से 31 मार्च 1 अक्तूबर 
(iv)  संवितरित ऋणों के लिए एक 8.5% प्रतिवर्ष अथवा समय-समय पर नाबार्ड द्वारा निर्धारित दर पर ब्याज लिया जाएगा. 
(v)  ब्याज प्रतिवर्ष दो छमाहियों  01 अक्टूबर और 01 अप्रैल को अथवा जब ऋण पूर्ण रूप से चुका दिया जाता है तब देय होगी. 
(vi) मूलधन की चुकौती और ब्याज के भुगतान में चूक होने की स्थिति में राज्य सरकार नाबार्ड को जिस अवधि में चूक हुई है, उस अवधि के लिए 10.25% प्रति वर्ष की दर से चूक की राशि पर ब्याज अदा करने के लिए उत्तरदयी होगा.  दंडात्मक ब्याज दर समय-समय पर होने वाले संशोधनों के अधीन होगी. 
(vii) सहायता का प्रावधान लाभार्थी संस्था की निवल अंर्जक आस्तियों के स्तर/ वसूली निषपादन के आधार पर किया जाएगा, सभी प्रकार की ऋण संस्थाओं के लिए सहायता की प्रमात्रा व्यवसाय के अनुमानिक वास्तविक परिमाण पर निर्भर होगी.  
 (viii)  राज्य सरकार के लिए यह आवश्यक होगा कि वह नाबार्ड द्वारा प्रतिपूर्ति की जाने वाली प्रतिपूर्ति सहायता की राशि उधार लेने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 293 के खंड (1) और (3) के अनुसार भारत सरकार की सहमति के आदेश की एक प्रति प्रस्तुत करें. इसके अलावा, सहायता की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत करते समय इस आशय का एक प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा की प्रतिपूर्ति की जाने वाली राशि राज्य सरकार द्वारा उधार लेने के लिए राज्य के विधानमंडल द्वारा निर्धारित सीमा, यदि कोई हो, के भीतर है. 
(ix)  राज्य सरकार को प्रतिपूर्ति सहायता मांगते समय एक विवरण भी प्रस्तुत करना होगा जिसमें सहकारी ऋण संस्थाओं की अंश पूंजी में उनके द्वारा किए गए अंशदान के ब्यौरे दिए जाएंगे. ऋण आवेदन के प्रारूप ‘ए’ ‘बी’, ‘सी’, ‘ई’, ‘एफ’, ‘एल’ और ‘एन’ में थोड़े से संशोधन किए गये हैं. राज्य सरकार द्वारा ऋण आवेदन में ‘सरकारी अंशदान के लिए आवेदन’ के स्थान पर किए गए ‘सरकारी अंशदान की तारीख और राशि तथा राशि के लिए आवेदन’ लिखा जाएगा. 
(x)  आहरण लेने के समय, राज्य सरकार को एक विवरण प्रस्तुत करना होगा जिसमें किए गए अंश पूंजी अंशदान की राशि और अलग-अलग एजेंसियों द्वारा अंशदान प्राप्त करने की तारीख दर्शाई जाए. 
(III)  सामान्य
 रास बैंकों,  जिमस बैंकों, रासकृग्रावि बैंकों प्रासकृग्रावि बैंकों के मामले में संबंधित संस्था की लेखापरीक्षा बाकी न हो और वह कम से कम वर्ष 2017-18 तक पूरी हो चुकी हो. अन्य संस्थाओं अर्थात प्राथमिक कृषि ऋण (प्राकृऋ) समितियों, कृषक सेवा (कृसे) समितियों और बृहदाकार आदिवासी बहुउद्देशीय सहकारी समितियों (लैम्प्स) के मामले में,  वर्ष 2019-20 के दौरान सहायता के प्रावधान के लिए संबंधित संस्थाओं की लेखा-परीक्षा 2016-17 तक पूरी हो चुकी हो और संबंधित राज्य सरकार द्वारा लेखा परीक्षा पूरी कराने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया.