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वित्तीय समावेशन निधि – नवीन दृष्टिकोण
सं.सं. राबैं. डीएफआईबीटी/ 83-556/ डीएफआईबीटी- 23/ 2019-20                             23 अप्रैल 2019 
परिपत्र संख्या. 105/ डीएफआईबीटी-04/ 2019
अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक/ अध्यक्ष/ मुख्य कार्यपालक अधिकारी 
अनुसूचित वाणिज्य बैंक 
(अनुसूचित लघु वित्त बैंक और पेमेंट बैंक सहित) 
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 
राज्य सहकारी बैंक 
जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक 
 
महोदया/ प्रिय महोदय, 
 
वित्तीय समावेशन निधि – नवीन दृष्टिकोण 
 
पिछले दशक में वित्तीय समावेशन निधि का उपयोग अत्यावश्यक वित्तीय साक्षरता के प्रसार के साथ-साथ बैंकों में आवश्यक वित्तीय समावेशन संबंधी आधारभूत संरचना उपलब्ध कराने के लिए किया जाता रहा है. इस अवधि के दौरान सभी हितधारकों  के सम्मिलित प्रयायों के कारण वित्तीय जागरूकता बढ़ाने और वित्तीय सेवा प्रदान करने के क्षेत्र में अच्छी प्रगति हुई है. हालांकि, अब भी ऐसे कई क्षेत्र हैं जो वित्तीय समावेशन से अछूते हैं और जहां बैंकों में तकनीक को पर्याप्त रूप से अपनाया नहीं गया है. इसके कारण वित्तीय सेवाओं का साम्यिक प्रसार नहीं हुआ है. विभिन्न क्षेत्रों और बैंकों के विकास से जुड़ी इस विषमता को दूर करने की दृष्टि से  वित्तीय समावेशन के लिए एक नई रणनीति अपनाना आवश्यक है. इसलिए, चालू वित्त वर्ष 2019-20 और इसके आगे एफआईएफ से सहायता के  लिए एक अलग रणनीति बनाई जा रही है. 
 
2. नवीन रणनीति 
 
इस रणनीति में विभिन्न पिछड़े जिलों पर अधिक बल दिया गया है, जो विभिन्न भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के चलते पिछड़े रहे हैं. इन्हें अब विशेष बल प्राप्त जिलों (एसएफडी) के रूप में परिभाषित किया गया है. इन एसएफडी में सभी महत्वाकांक्षी जिले, एलडब्ल्यूई जिले और पहाड़ी राज्यों के जिले, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह और पूर्वोत्तर क्षेत्र के जिले भी शामिल हैं. वर्तमान में देश में 313 एसएफडी हैं (अनुबंध I). इन एसएफडी में कार्यान्वित परियोजनाओं के लिए एफआईएफ से अनुदान सहायता को कार्यान्वयनकर्ता बैंक द्वारा किए गए पात्र व्यय का 90% तक बढ़ाया गया है. वर्तमान नीति के अनुसार अन्य जिलों में परियोजनाओं के लिए अनुदान 
 
सहायता अनुसूचित लघु वित्त बैंकों  (एसएफबी) और पेमेंट बैंक (पीबी) सहित अनुसूचित वाणिज्य बैंकों (एससीबी), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) और ग्रामीण सहकारी बैंक (आरसीबी) के लिए पात्र व्यय का क्रमशः 60%, 80% और 90% तक सीमित  होगा.
 
3. योजना
 
एफआईएफ के अंतर्गत योजनाओं को तीन व्यापक समूह में वर्गीकृत किया गया है, नामत: (i) सामान्य रूप से उपलब्ध मानक योजनाएं, (ii) विशेष परियोजनाएं और (iii) सरकारी योजनाएं.  
 
3.1 सामान्य रूप से उपलब्ध मानक योजनाएं
 
इस समूह में 14 योजनाएं हैं जो सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी. तथापि, इन योजनाओं के अंतर्गत मंजूर परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए इनकी मंजूरी की तिथि से एक निश्चित अवधि निर्धारित होगी. इन योजनाओं में वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग प्रौद्योगिकी अंगीकरण, विनियामक और कनेक्टिविटी तथा पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर से संबंधित कार्यकलाप शामिल हैं. इन योजनाओं से संबंधित ब्यौरे अनुबंध II में इंगित हैं. 
 
3.2 विशेष परियोजनाएं
 
विशेष परियोजनाएं 'प्रायोगिक परियोजनाएं' होती हैं जिन्हें परियोजना आधार पर मंजूर किया जाता है और जिनके परियोजना विशिष्ट लक्ष्य और परिणाम होते हैं. पूर्व मंजूर प्रायोगिक परियोजनाएं - बैंक सखी, बीसी प्रशिक्षण, सीएफएल आदि के लिए प्रशिक्षण और कुछ परियोजनाएं जिनकी मंजूर प्रतिबद्धता में कुछ शेष रहा गया है, उन्हें इस वर्ग में शामिल किया गया है. 
 
3.3 सरकारी योजनाएं
 
सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन यथा अपेक्षित नाबार्ड, प्रधान कार्यालय द्वारा किया जाएगा. वर्तमान में 30 सितम्बर 2019 तक आधार एनरोलमेन्ट और अपडेट केन्द्रों तथा 20 लाख भीम आधार पे उपकरणों के लिए सहायता उपलब्ध है. 
 
4. वित्तीय समावेशन का दृष्टिकोण
 
इस नवीन रणनीति के माध्यम से लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बैंकों को क्षेत्रों की पहचान करने के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए, समुचित योजना तैयार करनी चाहिए, अपने प्रस्ताव मंजूरी के लिए नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में प्रस्तुत करना चाहिए और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन करना चाहिए, परिणामों की मॉनीटरिंग करनी चाहिए और नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय से पात्र व्यय का दावा प्राप्त करना चाहिए. सभी बैंकों से अनुरोध है कि वे वित्तीय समावेशन निधि से वित्तीय साक्षरता और समावेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर के भौतिक और वित्तीय सहायता के लिए के लिए अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार करें और यह सुनिश्चित करें कि ये योजनाएं बैंक की वित्तीय समावेशन योजनाओं, ग्राम पंचायत विकास योजना और राज्य के पिछड़े जिलों और प्रखंडों के लिए चिह्नित बल क्षेत्र के अनुरूप हों. इसे उद्देश्य को पूरा  करने की दृष्टि से यह निर्णय लिया गया है कि चालू वर्ष और इसके आगे अनुसूचित वाणिज्य बैंकों सहित सभी बैंक वित्तीय समावेशन निधि के अंतर्गत अपने प्रस्ताव नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में (कुछ अपवादों को छोड़कर) प्रस्तुत करेंगे ताकि इन योजनाओं के राज्य-वार कार्यान्वयन पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सके और वांछित परिणामों की अच्छी तरह से मॉनीटरिंग की जा सके.
 
5. मॉनीटरिंग
 
वित्तीय समावेशन निधि के अंतर्गत मंजूर परियोजनाओं के कार्यान्वयन की मॉनीटरिंग नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा तिमाही आधार पर की जाएगी. इस कार्य को पूरा करने के लिए दौरे और अध्ययन भी करवाए जाएंगे तथा इस संबंध में प्राप्त फीडबैक एसएलबीसी के मंच पर साथ साझा किए जाएंगे.  इसके अतिरिक्त, यह भी निर्णय लिया गया है कि नाबार्ड रु.25 करोड़ से अधिक की मंजूर और जारी वित्तीय सहायता वाली सभी परियोजनाओं का किसी तीसरे पक्ष से कार्योत्तर मूल्यांकन करवाएगा.
 
6. प्रस्ताव
 
6.1 परियोजना प्रस्ताव और दावे के फार्मेट को सरल बना दिया गया है और इन्हें इसके साथ संलग्न (अनुबंध III और IV) किया गया है. 
 
6.2 यह परिपत्र जारी होने की तिथि से प्रभावी होगा और इन योजनाओं के लिए पूर्व के मानदंडों के स्थान पर संशोधित मानदंड लागू होंगे. इस परिपत्र के पूर्व मंजूर सभी चालू परियोजनाएं अपनी मंजूरी की शर्तों के अनुसार चलाई जाएंगी. पूर्ण होने के उपरांत ये परियोजनाएं बंद हो जाएंगी. इस संबंध में किसी प्रकार के स्पष्टीकरण के लिए संबंधित मंजूरीकर्ता कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है.
 
भवदीय
 
(एल.आर.रामचंद्रन )
मुख्य महाप्रबंधक
अनुबंध  :
i. एसएफडी की सूची
ii. सामान्य रूप से उपलब्ध मानक योजनाएं
iii. प्रस्ताव फार्मेट
iv. दावा फार्मेट