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वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए पुनर्वित्त नीति – प्राथमिक शहरी सहकारी बैंक – (पीयूसीबी)
सं. राबैं. पुनर्वित्‍त/ 375 / पीपीएस-9/ 2019-20  
26 अप्रैल 2019 
परिपत्र सं.109/ पुनर्वित्‍त – 35/ 2019
          
प्रबंध निदेशक 
सभी अनुसूचित प्राथमिक शहरी सहकारी बैंक 
महोदया / प्रिय महोदय  
 
वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु योजनाबद्ध ऋण के लिए पुनर्वित्त नीति – प्राथमिक शहरी सहकारी बैंक – (पीयूसीबी)  
 
 वित्त वर्ष 2019-20 के लिए प्राथमिक शहरी सहकारी बैंकों के योजनाबद्ध ऋण के लिए पुनर्वित्त नीति को अंतिम रूप दिया गया है और  यह इसमें संलग्न है. इस संबंध में यह नीति सभी वर्तमान नीतियों का अधिक्रमण करती है.
 
2. परिपत्र नाबार्ड की वेबसाइट www.nabard.org पर टैब सूचना सेंटर के अंतर्गत उपलब्ध है. 
3. कृपया पावती दें.
भवदीय,
(जी आर चिंताला) 
मुख्य महाप्रबंधक 
संलग्‍न : 5 पृष्‍ठ 
 
वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए योजनाबद्ध ऋणीकरण के लिए पुनर्वित्त नीति
1. प्रस्तावना 
नाबार्ड, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 की धारा 25(i)(क) के प्रावधानों के अधीन अनुमोदित वित्तीय संस्थाओं को कृषि क्षेत्र में निवेश गतिविधियों, अनुषंगी गतिविधियों और ग्रामीण कृषीतर क्षेत्र आदि को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त ऋण प्रदान करने के लिए उनके संसाधनों के अनुपूरक के रूप में दीर्घावधि पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता है.
2. उद्देश्य 
कृषि क्षेत्र में पूंजी निर्माण को सहायता करना जिससे कृषि क्षेत्र की प्रगति का संवर्धन हो सके.
प्रमुख गतिविधियों के संवर्धन के लिए ऋण प्रदान करना. 
संयुक्त देयता समूहों और स्वयं सहायता समूहों की ऋण आवश्यकताओं की पूर्ति. 
कृषीतर क्षेत्र गतिविधियों को सहायता कर ग्रामीण इलाकों में वैकल्पिक रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहन देना. 
3. पुनर्वित्त सुविधा का स्वरूप 
निम्नलिखित दो सुविधाओं के अंतर्गत विभिन्न प्रयोजनों के लिए बैंकों द्वारा किए गए संवितरण के संबंध में बैंकों को पुनर्वित्त सहायता प्रदान की जाती है. 
3.1 स्‍वतः पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ)
स्‍वतः पुनर्वित्त सुविधा के अंतर्गत बैंक, स्‍वीकृति-पूर्व औपचारिकताओं की विस्तृत प्रक्रिया से गुजरे बिना नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं. इसमें बैंकों से यह अपेक्षित है कि वे प्राप्त प्रस्तावों का अपने स्तर पर मूल्यांकन करें और उधारकर्ता का वित्तपोषण करें. तत्पश्चात् बैंक विभिन्‍न प्रयोजनों हेतु संवितरित ऋण का उल्‍लेख करते हुए नाबार्ड से घोषणा आधार पर (आहरण आवेदन) पुनर्वित्त का दावा कर सकते हैं. ऐसे मामलों में नाबार्ड पुनर्वित्त की स्‍वीकृति और संवितरण साथ-साथ करता है.
स्वचलित पुनर्वित्त सुविधा पुनर्वित्त की प्रमात्रा, बैंक ऋण या कृषि क्षेत्र (एफएस) और कृषीतर क्षेत्र के तहत सभी प्रकार की परियोजनाओं के लिए कुल वित्तीय परिव्यय की बिना किसी उच्चतम सीमा के दी जाती है.
3.2 पूर्व-स्‍वीकृति प्रक्रिया 
यदि बैंक स्‍वीकृति-पूर्व प्रक्रिया के अंतर्गत पुनर्वित्त सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं तो उन्हें परियोजनाओं को नाबार्ड के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करना होगा. इन परियोजनाओं की स्‍वीकृति से पहले नाबार्ड उनकी तकनीकी व्यवहार्यता, वित्तीय लाभप्रदता और बैंक की दृष्टि से योग्यता निर्धारित करने के लिए मूल्यांकन करता है.
4. पात्रता मानदंड 
4.1 नाबार्ड से पुनर्वित्त के आहरण के लिए पात्रता मानदंडों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ‘’वित्‍तीय रूप से सशक्‍त और सुव्‍यवस्थित प्रबंधित‘’ के रूप में वर्गीकृत किए जाने के लिए निर्धारित निम्‍नलिखित शर्तों का पालन करने वाले प्राथमिक शहकरी सहकारी बैंक, नाबार्ड से पुनर्वित्‍त प्राप्‍त करने के लिए पात्र होंगेः 
क. पूंजी पर्याप्‍तता अनुपात – सीआरएआर 10% से कम नहीं होना चाहिए. 
ख. सकल अनर्जक आस्तियां – एनपीए 7% से कम और निवल अनर्जक आस्तियां 3% से अधिक नहीं होनी चाहिए. 
ग. अनुसूचित बैंक होना चाहिए.
घ. लेखापरीक्षा श्रेणी ‘ए’ या ‘बी’ होनी चाहिए.  
ङ. पूर्वगामी चार वर्षों (2015-16, 2016-17, 2017-18 और 2018-19) में से कम-से-कम तीन वर्षों में शुद्ध लाभ कमाना चाहिए और पिछले वर्ष (2018-19) में शुद्ध हानि नहीं होनी चाहिए.
च. पिछले वित्‍तीय वर्ष में प्रारक्षित नकद अनुपात-सीआरआर और / अथवा सांविधिक तरलता अनुपात – एसएलआर को बनाए रखने में कोई चूक नहीं होनी चाहिए. 
छ. कोर बैंकिंग समाधान (सीबीएस) को पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए.
4.2 01 अप्रैल 2019 से 30 सितंबर 2019 के दौरान पात्रता मानदंड 31.03.2018 अथवा 31.03.2019 (यदि उपलब्ध हो) के अनुसार उनकी लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर निर्धारित की जाएगी. 01 अक्‍तूबर 2019 से 31 मार्च 2020 तक वह 31.03.2019 की लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाएगा. ऐसे क्षेग्रा बैंकों को 01 अक्‍तूबर 2019 को अथवा उसके बाद मंजूर या आहरण की अनुमति उन प्राथमिक शहकरी सहकारी बैंकों को होगी जिनकी लेखापरीक्षा पूर्ण हो चुकी हो और जिन्होंने संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की हो. 
5. पात्र प्रयोजन 
5.1 कृषि, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग और बैंक के बही खातों में बकाया और आहरण आवेदन तिथि को जिनकी शेष परिपक्वता अवधि 18 महीनों से अधिक है वे ऋण पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.
5.2 कृषि क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल की गई गतिविधियों की सूची अनुबंध I में दी गई है. सूची निदर्शी है और न कि सम्पूर्ण. अनुबंध में उल्लेख न की गई गतिविधियों को भी शामिल किया जा सकता है यदि वे कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक हों. 
5.3 बल क्षेत्र  
बल क्षेत्रों में भूमि विकास, लघु और सूक्ष्म सिंचार्इ, जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण, मत्स्यपालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह/ रैतु मित्र समूह (आरएमजी), कृषि-क्लिनिक्स और कृषि-व्यवसाय केंद्र, ग्रामीण आवासन, कृषि-प्रसंस्करण, परती भूमि विकास, शुष्क भूमि खेती, ठेका खेती, क्षेत्र विकास योजनाएं, बागान और बागवानी, कृषि-वानिकी, बीज उत्पादन, ऊतक संवर्धन, पौध उत्पादन, कृषि-विपणन आधारभूत सुविधाएं (शीत भंडारण, गोदाम, मार्केट यार्ड आदि सहित), कृषि उपकरण, गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत, वाटरशेड क्षेत्रों में वित्तपोषण और पहले से कार्यान्वित किए जा रहे आदिवासी विकास कार्यक्रम शामिल हैं.
बैंकों को, बागान और बागवानी क्षेत्र के अंतर्गत नवोन्मेषी/ बल क्षेत्रों की विभिन्न गतिविधियों जैसे नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉली हाउस/ ग्रीन हाउस में उच्च मूल्य/ विदेशी प्रजातियों की सब्जियां, कट फ्लावर के उत्पादन, मशरूम के उच्च तकनीक निर्यातोन्मुख उत्पादन इकाइयों, ऊतक संवर्धन प्रयोगशालाओं की स्थापना सब्जियों और फलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रिसिजन फार्मिंग, ब बागान/फलोत्‍पादन और बागवानी फसलों के लिए ड़्रिप सिंचार्इ व्यवस्था जैसी प्रणालियों की स्थापना जैसी गतिविधियों के वित्तपोषण को प्राथमिकता प्रदान देनी चाहिए.
6. पुनर्वित्त की सीमा  
सिक्किम, पर्वतीय क्षेत्र (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मीज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा), पूर्वी राज्यों (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह), लक्षद्वीप और छत्तीसगढ़ के लिए पुनर्वित्त की प्रमात्रा सभी प्रयोजनों के लिए पात्र बैंक ऋणों के 100% होगी. अन्य क्षेत्रों के लिए पुनर्वित्त की सीमा निम्नानुसार होनी चाहिए. 
क) क्रम सं.5.3 में किए गए उल्लेख के अनुसार सभी बल क्षेत्रों के लिए 100%;
ख) सभी अन्य विविधीकृत प्रयोजनों और कृषक साथी योजना के लिए 95%.
7. ब्याज दर 
7.1 पुनर्वित्त पर ब्याज  
नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्त पर ब्याज की दरों का निर्धारण समयावधि, वर्तमान बाजार दर, जोखिम अवधारणा आदि के आधार पर किया जाएगा और समय-समय पर इसमें संशोधन किया जा सकता है. 
7.2 दंडात्मक ब्याज
चूक होने पर, जिस दर पर पुनर्वित्त वितरित किया गया था उससे वार्षिक 2.00% अधिक अतिरिक्त ब्याज दर चूक की राशि पर चूक की अवधि के लिए लगार्इ जाएगी.
7.3 पुनर्वित्त के अवधि-पूर्व भुगतान के लिए दंड : पुनर्वित्त के अवधि-पूर्व भुगतान पर दंड की दर 2.50% प्रति वर्ष होगी और भुगतान की निर्धारित तारीख से पहले किए गए भुगतान से देय किस्त की वास्तविक तारीख तक की सम्पूर्ण अवधि (न्यूनतम 6 माह) के लिए प्रत्येक देय किस्त के लिए दंडात्मक ब्याज प्रभारित किया जाएगा. अवधि पूर्व भुगतान तीन कार्य दिवस का नोटिस दिए जाने के बाद ही किया जा सकता है.  
8. चुकौती अवधि 
पुनर्वित्त की चुकौती अवधि 18 महीनों (न्यूनतम) से 5 वर्ष या उससे अधिक होगी और उसकी चुकौती अर्ध-वार्षिक आधार पर की जाएगी और जिसकी देय तिथियां 31 जनवरी और 31 जुलाई होंगी. ब्याज की अदायगी छमाही आधार पर अर्थात् प्रत्येक वर्ष 01 फरवरी और 01 अगस्त की जाएगी. 
9. प्रतिभूति 
पुनर्वित्त या अन्य माध्यमों से दिए गए ऋणों और अग्रिमों के लिए प्रतिभूति नाबार्ड द्वारा सामान्य पुनर्वित्त करार (जीआरए)/ मंजूरी पत्र में विनिर्दिष्ट मानदंडों के अनुसार रहेगी. इसके अलावा, प्राथमिक शहरी सहकारी बैंक द्वारा नाबार्ड के पक्ष में एक विधिवत अधिदेश प्राप्त किया जाए.   
10. अन्‍य नियम और शर्तें 
10.1 नाबार्ड से पुनर्वित्‍त लेने वाले प्राथमिक शहरी सहकारी बैंकों की वित्‍तीय स्थिति की जांच और लेखापरीक्षित तुलन पत्र, लेखापरीक्षा रिपोर्टें, बही खातों और संबंधित दस्‍तावेजों की जांच के माध्‍यम से बैंकों की सामान्‍य कार्यप्रणाली की जांच के लिए नाबार्ड इन बैंकों का छमाही दौरा करेगा.  
10.2 प्राथमिक शहरी सहकारी बैंकों को दौरे पर आए अधिकारियों को सभी प्रकार की जानकारी उपलब्‍ध करानी होगी. 
10.3 पुनर्वित्‍त के निबंधनों व शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्थल पर सत्यापन/ जांच का अधिकार नाबार्ड को होगा.
10.4 वर्तमान नियमों और विनियमों का अनपालन और पुनर्वित्‍त के नियम व‍ शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के‍िलिए नाबार्ड को स्‍वयं या (उधारकर्ता के खर्च पर) किसी अन्‍य संस्‍था के माध्‍यम से बैंक की बहियों और अन्‍य संबंधित सामग्री की विशेष लेखापरीक्षा का अधिकार होगा. 
11.  वर्तमान में लागू अन्‍य सभी निबंधन व शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी.