Menu

वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए दीर्घावधि पुनर्वित्त नीति- जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक
संदर्भ सं. राबैं.पुनर्वित्त /376/ पीपीएस-9/ 2019-20 
26 अप्रैल 2019 
परिपत्र सं.110 / पुनर्वित्त – 36/ 2019
 
1. मुख्य महाप्रबंधक/महाप्रबंधक/ प्रभारी अधिकारी
राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
सभी क्षेत्रीय कार्यालय  
2. निदेशक, बर्ड, लखनऊ
3. संयुक्त निदेशक, बर्ड, मंगलूर/बोलपुर
4. प्रधानाचार्य, राष्ट्रीय बैंक स्टाफ़ महाविद्यालय, लखनऊ
 
प्रिय महोदय 
 
वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए दीर्घावधि पुनर्वित्त नीति- जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक
 
कृपया “वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए दीर्घावधि पुनर्वित्त नीति” विषय पर 11 अप्रैल 2019 का हमारा परिपत्र सं.83/ पुनर्वित्‍त-29/ 2018 देखें. निम्नलिखित प्रमुख मानदंडों के साथ पुनर्वित्त नीति जारी रखने का निर्णय लिया गया है:
 
1. पुनर्वित्त सुविधा का स्वरूप 
विभिन्न प्रयोजनों के लिए बैंकों द्वारा किए गए संवितरण के संबंध में बैंकों को निम्नलिखित दो सुविधाओं के अंतर्गत पुनर्वित्त सहायता प्रदान की जाती है. 
 
1.1 स्‍वतः पुनर्वित्त सुविधा (एआरएफ)
स्‍वतः पुनर्वित्त सुविधा के अंतर्गत बैंक, स्‍वीकृति-पूर्व औपचारिकताओं की विस्तृत प्रक्रिया से गुजरे बिना नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं. इसमें बैंकों से यह अपेक्षित है कि वे प्राप्त प्रस्तावों का अपने स्तर पर मूल्यांकन करें और उधारकर्ता का वित्तपोषण करें. तत्पश्चात् बैंक विभिन्‍न प्रयोजनों हेतु संवितरित ऋण का उल्‍लेख करते हुए नाबार्ड से घोषणा आधार पर (आहरण आवेदन) पुनर्वित्त का दावा कर सकते हैं. ऐसे मामलों में नाबार्ड पुनर्वित्त की स्‍वीकृति और संवितरण साथ-साथ करता है. स्वचलित पुनर्वित्त सुविधा पुनर्वित्त की प्रमात्रा, बैंक ऋण या कृषि क्षेत्र (एफएस) और कृषीतर क्षेत्र के तहत सभी प्रकार की परियोजनाओं के लिए कुल वित्तीय परिव्यय की बिना किसी उच्चतम सीमा के दी जाती है.
 
1.2 पूर्व-स्‍वीकृति प्रक्रिया 
यदि बैंक स्‍वीकृति-पूर्व प्रक्रिया के अंतर्गत पुनर्वित्त सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं तो उन्हें परियोजनाओं को नाबार्ड के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करना होगा. इन परियोजनाओं की स्‍वीकृति से पहले नाबार्ड उनकी तकनीकी व्यवहार्यता, वित्तीय लाभप्रदता और बैंक की दृष्टि से योग्यता निर्धारित करने के लिए मूल्यांकन करता है.
 
2. पात्रता मानदंड 
 
2.1     नाबार्ड द्वारा विकसित ‘जोखिम आकलन मॉड्यूल’ के अनुसार जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों को एनबीडी1 से एनबीडी 9 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है इनमें से सिर्फ एनबीडी1, एनबीडी2 और एनबीडी3 के रूप में वर्गीकृत मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक हमारे पुनर्वित्‍त के लिए पात्र होंगे. राज्‍य/ बैंक के समग्र आबंटन के भीतर पुनर्वित्‍त की मात्रा की कोई सीमा नहीं होगी. 
2.2.    जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक का पूंजी पर्याप्‍तता अनुपात – सीआरएआर  9% होना चाहिए  
2.3.    जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक की शुद्ध अनर्जक आ‍िस्त्यिां – नेट एनपीए 6.00 % से कम होनी चाहिए. 
2.4.    जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक पिछले  (वर्ष 2016-17, 2017-18 और 2018-19) तीन वर्षों के दौरान ‍लाभ में होना चाहिए. 
2.5 01 अप्रैल 2019 से 30 सितंबर 2019 के दौरान पात्रता मानदंड और जोखिम आकलन 31.03.2018 अथवा 31.03.2019 (यदि उपलब्ध हो) के अनुसार उनकी लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर निर्धारित की जाएगी. 01 अक्‍तूबर 2019 से 31 मार्च 2020 तक वह 31.03.2019 की लेखापरीक्षित वित्तीय स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाएगा. ऐसे क्षेग्रा बैंकों को 01 अक्‍तूबर 2019 को अथवा उसके बाद मंजूर या आहरण की अनुमति उन जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों को होगी जिनकी लेखापरीक्षा पूर्ण हो चुकी हो और जिन्होंने संबंधित लेखा परीक्षा रिपोर्ट नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की हो. 
2.6     लेखापरीक्षा रिपोर्ट और नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट में उल्लिखित वित्‍तीय स्थिति में किसी प्रकार के परिवर्तन की स्थिति में बैंक की पुनर्वित्‍त पात्रता का आकलन उसी के अनुरूप किया जाएगा. 
2.7 पात्रता मानदंड सरकार प्रायोजित योजनाओं सहित कृषि क्षेत्र और कृषीतर क्षेत्रों के अधीन पुनर्वित्‍त आहरण पर लागू होंगे. 
 
3.    पात्र प्रयोजन 
 
3.1 कृषि, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग और बैंक के बही खातों में बकाया और आहरण आवेदन तिथि को जिनकी शेष परिपक्वता अवधि 18 महीनों से अधिक है वे ऋण पुनर्वित्त के लिए पात्र होंगे.
3.2 कृषि क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के अंतर्गत शामिल की गई गतिविधियों की सूची अनुबंध I में दी गई है. सूची निदर्शी है और न कि सम्पूर्ण. अनुबंध में उल्लेख न की गई गतिविधियों को भी शामिल किया जा सकता है यदि वे कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक हों. 
3.3    बल क्षेत्र  
बल क्षेत्रों में भूमि विकास, लघु और सूक्ष्म सिंचार्इ, जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण, मत्स्यपालन, पशुपालन, स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह/ रैतु मित्र समूह (आरएमजी), कृषि-क्लिनिक्स और कृषि-व्यवसाय केंद्र, ग्रामीण आवासन, कृषि-प्रसंस्करण, परती भूमि विकास, शुष्क भूमि खेती, ठेका खेती, क्षेत्र विकास योजनाएं, बागान और बागवानी, कृषि-वानिकी, बीज उत्पादन, ऊतक संवर्धन, पौध उत्पादन, कृषि-विपणन आधारभूत सुविधाएं (शीत भंडारण, गोदाम, मार्केट यार्ड आदि सहित), कृषि उपकरण, गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत, वाटरशेड क्षेत्रों में वित्तपोषण और पहले से कार्यान्वित किए जा रहे आदिवासी विकास कार्यक्रम शामिल हैं.
बैंकों को, बागान और बागवानी क्षेत्र के अंतर्गत नवोन्मेषी/ बल क्षेत्रों की विभिन्न गतिविधियों जैसे नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉली हाउस/ ग्रीन हाउस में उच्च मूल्य/ विदेशी प्रजातियों की सब्जियां, कट फ्लावर के उत्पादन, मशरूम के उच्च तकनीक निर्यातोन्मुख उत्पादन इकाइयों, ऊतक संवर्धन प्रयोगशालाओं की स्थापना सब्जियों और फलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रिसिजन फार्मिंग, ब बागान/फलोत्‍पादन और बागवानी फसलों के लिए ड़्रिप सिंचार्इ व्यवस्था जैसी प्रणालियों की स्थापना जैसी गतिविधियों के वित्तपोषण को प्राथमिकता प्रदान देनी चाहिए.
3.4 बहु-उद्देशीय सेवा केंद्रों के रूप में प्राथमिक कृषि ऋण समितियां–पैक्‍स – जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों के कार्य क्षेत्र में पैक्‍स की विशिष्‍ट परियोजनाओं, संभव हो तो ’क्‍लस्‍टर दृष्टिकोण’ पर पुनर्वित्‍त सहायता की स्‍वीकृति दी जाएगी. पुनर्वित्‍त सहायता हेतु पात्र गतिविधियों की सूची अनुबंध II में दी गई है. 
पुनर्वित्‍त विभाग, प्रधान कार्यालय द्वारा आबंटित बजट में से जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक को पुनर्वित्‍त की स्‍वीकृति दी जाएगी. उक्‍त बजट से ऋण की स्‍वीकृति दी जाएगी जबकि निम्‍नलिखित गतिविधियों के लिए ऋण की मात्रा के अधिकतम 10%  तक की सहायता अनुदान के रूप में दी जा सकती हैः 
सूचना प्रसारण केन्‍द्र – (आवश्‍यकता आधिरित) एक पर्सनल कम्‍प्‍यूटर की लागत.
नई व्‍यापार गतिविधि शुरू करने के लिए आरंभिक प्रशासनिक खर्च 
किसानों को गतिविधि विशिष्‍ट प्रशिक्षण
जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक को स्‍वीकृत ऋण की स्थिति में संबंधित बैंक समग्र सीमा के भीतर अनुदान घटक में से 2%  तक की राशि परियोजना प्रबंधन व्‍यय के रूप में रख सकता है. 
अनुदान का परिचालन कृषि क्षेत्र नीति विभाग करेगा. इस संबंध में बीआईडी से 29 अगस्‍त 2012 के परिपत्र सं.216 / बीआईडी - 07 के माध्‍यम से जारी दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा.   परियोजना का मूल्‍यांकन उक्‍त परिपत्र में निर्धारित अनुदेशों के अनुसार किया जाएगा. 
 
4. पुनर्वित्त की सीमा  
 
पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों, पर्वतीय क्षेत्र, पूर्वी राज्यों, लक्षद्वीप और छत्तीसगढ़ के लिए पुनर्वित्त की प्रमात्रा सभी प्रयोजनों के लिए पात्र बैंक ऋणों के 100% होगी. अन्य क्षेत्रों के लिए पुनर्वित्त की सीमा निम्नानुसार होनी चाहिए.
क) क्रम सं.3.3 में किए गए उल्लेख के अनुसार सभी बल क्षेत्रों के लिए 100%;
ख) सभी अन्य विविधीकृत प्रयोजनों और कृषक साथी योजना के लिए 95%.
 
5. ब्याज दर 
5.1   पुनर्वित्त पर ब्याज  
नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्त पर ब्याज की दरों का निर्धारण समयावधि, वर्तमान बाजार दर, जोखिम अवधारणा आदि के आधार पर किया जाएगा और समय-समय पर इसमें संशोधन किया जा सकता है.  सभी जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों को नाबार्ड द्वारा विकसित ‘जोखिम आकलन मॉड्यूल’ के अनुसार 9 जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है. तदनुसार, पुनर्वित्‍त की ब्‍याज दर के अलावा निर्धारित जोखिम प्रीमियम लगाया जाएगा.    
5.2   दंडात्मक ब्याज
चूक होने पर, जिस दर पर पुनर्वित्त वितरित किया गया था उससे वार्षिक 2.00% अधिक अतिरिक्त ब्याज दर चूक की राशि पर चूक की अवधि के लिए लगार्इ जाएगी.
5.3   पुनर्वित्त के अवधि-पूर्व भुगतान के लिए दंड : पुनर्वित्त के अवधि-पूर्व भुगतान पर दंड की दर 2.50% प्रति वर्ष होगी और भुगतान की निर्धारित तारीख से पहले किए गए भुगतान से देय किस्त की वास्तविक तारीख तक की सम्पूर्ण अवधि (न्यूनतम 6 माह) के लिए प्रत्येक देय किस्त के लिए दंडात्मक ब्याज प्रभारित किया जाएगा. अवधि पूर्व भुगतान तीन कार्य दिवस का नोटिस दिए जाने के बाद ही किया जा सकता है. पूर्व भुगतान की अन्‍य शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी.  
 
6.   चुकौती अवधि 
पुनर्वित्त की चुकौती अवधि 18 महीनों (न्यूनतम) से 5 वर्ष या उससे अधिक होगी और उसकी चुकौती छमाही आधार पर की जाएगी और जिसकी देय तिथियां 31 जनवरी और 31 जुलाई होंगी. ब्याज की अदायगी छमाही आधार पर अर्थात् प्रत्येक वर्ष 01 फरवरी और 01 अगस्त की जाएगी. 
 
7.   प्रतिभूति 
जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों को केवल राज्‍य सरकार की गारंटी के समक्ष पुनर्वित्‍त सहायता दी जाएगी. सरकारी गारंटी नहीं मिलने पर सरकारी प्रतिभूतियों/ अनुमोदित प्रतिभूति या अनुसूचित बैंकों अथवा अच्‍छा कार्य कर रहे (पिछली लेखा परीक्षा के अनुसार ए/बी लेखा परीक्षा वर्गीकृत) राज्‍य सहकारी बैंकों से जारी मीयादी जमा रसीदों की गिरवी जैसी वैकल्पिक प्रतिभूतियों पर विचार किया जा सकता है बशर्ते इस संबंध में नाबार्ड द्वारा निधारित नियम व शर्तों का अनुपालन करना होगा.  
 
8.   अन्‍य नियम और शर्तें 
i. पुनर्वित्‍त के निबंधनों व शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्थल पर सत्यापन/ जांच का अधिकार नाबार्ड को होगा.
ii. वर्तमान नियमों और विनियमों का अनपालन और पुनर्वित्‍त के नियम व‍ शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के‍िलिए नाबार्ड को स्‍वयं या (उधारकर्ता के खर्च पर) किसी अन्‍य संस्‍था के माध्‍यम से बैंक की बहियों और अन्‍य संबंधित सामग्री की विशेष लेखापरीक्षा का अधिकार होगा. 
iii. अंतर बैंक और अंतर शाखा खातों के समाधान में छह महीने के अधिक की अवधि के विलंब से पुनर्वित्‍त सहायता अवरूद्ध हो सकती है. 
iv. नाबार्ड समय-समय पर किए गए संशोधनों के अनुसार इस प्रकार अन्‍य नियम व शर्तें लागू कर सकता है.
 
9.    इस नए उत्‍पाद को अपने राज्‍य के सभी जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों में परिचालित करें और ‘कम जोखिम श्रेणी’ वाले बैंकों से व्‍यापार बढ़ाने के लिए प्रभावी उपाय करें.   
 
10. कुपया पावती दें.
 
भवदीय,
(जी आर चिंताला)
मुख्‍य महाप्रबंधक 
अनुलग्‍नक  :   4 पृष्‍ठ    
अनुबंध I
1. कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियां शामिल हैं: 
i. भूमि विकास 
ii. लघु और सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप सिंचाई 
iii. जल बचाव और जल संरक्षण उपकरण 
iv. डेयरी 
v. मुर्गी पालन  
vi. मधुमक्खी पालन 
vii. रेशम उत्पादन 
viii. मत्स्यपालन 
ix. पशुपालन 
x. स्वयं सहायता समूहों / संयुक्त देयता समूहों / रैतु मित्र समूहों को दिए गए ऋण 
xi. शुष्क भूमि कृषि 
xii. ठेका खेती 
xiii. बागान और बागबानी 
xiv. कृषि वानिकी 
xv. बीज उत्पादन 
xvi. टिश्यू कल्चर प्लांट प्रोडक्शन 
xvii. कारपोरेट किसानों, कृषि और संबद्ध गतिविधियों में प्रत्‍यक्ष रूप से संलग्‍न किसानों के कृषक उत्‍पादक संगठन/ कंपनियां/ साझेदार फर्म कृषक सहकारी संस्‍थाओं को समग्र रूप से रु.2 करोड़ प्रति उधारकर्ता तक के ऋण 
xviii. कृषि उपकरण 
xix. उच्च मूल्य/ विदेशी प्रजातियों की सब्जियों का उत्‍पादन, नियंत्रित परिस्थितियों अर्थात् पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस में कट फ्लावर्स का उत्‍पादन 
xx. मशरूम, जैसे उच्‍च निर्यात उन्‍मुख उत्‍पादन इकाई लगाना, टिश्यूकल्चर प्रयोगशालाएं सब्जियों और फलों की उत्पादकता में वृद्धि के लिए प्रीसीज़न फार्मिंग 
2. पुनर्वित्त में निम्नलिखित अन्य गतिविधियां शामिल हैं:  
i. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने वाले निर्माण और सेवा क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) 
ii. कृषि क्लिनिक्स व कृषि व्यवसाय केन्द्र 
iii. ग्रामीण आवास 
iv. कृषि प्रसंस्करण 
v. मृदा संरक्षण और वाटरशेड विकास
vi. कृषि विपणन आधारभूत संरचना (शीत भंडारण, गोदाम, मार्केट यार्ड, सिलोस आदि सहित) किसी भी क्षेत्र/ स्‍थान में  
vii. गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत
viii. पहले से ही कार्यान्वित किए गए वाटर शेड और जनजाति विकास कार्यक्रमों के कार्यक्षेत्र में वित्तपोषण
ix. प्लांट टिशू कल्चर और कृषि जैव प्रोद्यौगिकी, बीज उत्पादन, जैव कीटनाशक, जैव-उर्वरक और वर्मी कम्पोस्टिंग का उत्पादन
x. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), कृषि सेवा समिति (एफएसएस) और बडे आकार की आदिवासी बहुउद्देशीय समितियों  (एलएएमपीएस) को आगे ऋण देने के लिए बैंक ऋण
xi. सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों को कृषि क्षेत्र में आगे ऋण देने के लिए बैंकों को ऋण की स्वीकृति 
xii. खादी ग्राम उद्योग (केवीआई) KVI 
xiii. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रमीण विद्यालय, स्वास्थ्य उपचार सुविधा, पेयजल की सुविधा, स्वच्छता सुविधा और अन्य सामाजिक आधारभूत सुविधाएं 
xiv. सौर आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, जैव खाद आधारित ऊर्जा जेनेरेटर, पवन मिल, सूक्ष्म हाईडल प्लांट जैसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन और सड़क प्रकाश व्‍यवस्‍था और दूर दराज के गांवों में विद्युतीकरण जैसे अपारंपरिक ऊर्जा आधारित सार्वजनिक जन सुविधाएं 
xv. कृषक साथी योजना 
xvi. क्षेत्र विकास योजना 
3. कृषि और ग्रामीण विकास के संवर्धन में सहायक अन्य कोई गतिविधि जिसका उल्‍लेख ऊपर न किया हो, को भी शामिल किया जा सकता है.
अनुबंध II
बहु-उद्देशीय सेवा केन्‍द्रों के रूप में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों –पैक्‍स को पुनर्वित्‍त सहायता हेतु पात्र गतिविधियां निम्‍नानुसार हैं
 र कृषि भंडारण – एगो स्‍टोरेज केन्‍द्रः वर्तमान भंडारण सुविधा के उन्‍नयन अथवा परक्राम्‍य भंडारागार रसीद प्रणाली के अनुसार सॉर्टिंग/ ग्रेडिंग इकाई के साथ नए गोदामों के निर्माण के लिए सहायता जिससे वे भंडारण रसीद जारी कर सकें.  इन रसीदों के आधार पर किसान भंडारागार में रखी फसल के समक्ष ऋण प्राप्‍त कर सकते हैं और अगली फसल के लिए खेती कर सकते हैं.  इस प्रकार, किसान अपनी नकद प्रवाह की स्थिति को प्रभावित किए बिना फसल बाद में बेहतर दाम के लिए रोक कर रख सकते हैं.    
भारत सरकार की पूंजी निवेश सब्सिडी (सीआईएसएस) योजना अथवा राज्‍य सरकार की अन्‍य किसी योजना के दायरे में न आने वाले अन्‍य निवेश वस्‍तुओं और उपभोग्‍य वस्‍तुओं के भंडारण के लिए गोदामों के निर्माण के लिए भी सहायता दी जा सकती है. 
ii. शीत भंडारगृह की स्‍थापनाः शीत भंडारगृह की स्‍थापना के लिए भी सहायता दी जा सकती है. नाबार्ड सब्सिडी का दावा करने की पात्र संस्‍था न होने के कारण ग्रामीण भंडारण योजना, राष्‍ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) / राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) योजनाओं अथवा ऐसी अन्‍य किसी योजना के अधीन प्राथमिक कृषि ऋण समितियां यदि सब्सिडी का दावा करती हैं तो ऋण आवेदन मध्‍सवर्ती सहकारी बैंक/ राज्‍य सहकारी बैंक के माध्‍यम से ऋण प्रदान किया जा सकता है. 
iii. कृषि सेवा केन्‍द्र – एग्रो सर्विस केन्‍द्रः सदस्‍यों की आवश्‍यकताओं के अनुसार पावर टिलर, लैंड लेवेलर, रोटरी स्‍लैशर, मूवर्स, सीड ड्रिल्लर, मल्टि क्रॉप प्‍लांटर, पैडी ट्रांस्‍प्‍लांटर, स्‍प्रेयर्स, कंबाइन हार्वेस्‍टर आदि की खरीद. इन उपकरणों को कस्‍टम हायरिंग/किराए पर देने से आमदनी होगी. डीजल पंप खेती के लिए एक प्रमुख निविष्टि होने के कारण डीजल पंप लगाने के लिए भी सहायता दी जाती है.      
iv. कृषि–प्रसंस्‍करण केन्‍द्र
प्राथमिक प्रसंस्‍करण- सॉर्टिंग, ग्रेडिंग यूनिट, वैक्सिंग / पॉलिशिंग यूनिट, प्रि-कूलिंग चेंबर आदि, ड्राइंग यार्ड, पैकेजिंग सुविधाएं, पोल्‍ट्री ड्रेसिंग यूनिट आदि के लिए भी सहायता दी जाएगी. 
द्वितीयक प्रसंस्‍करण – उत्‍पादों के मूल्‍य संवर्धन हेतु उदाहरणः मिनि राइस मिल, आटा चक्‍की, कृषि प्रसंस्‍करण सुविधा आदि  
v. कृषि सूचना प्रसार केन्‍द्र- मृदा और जल परीक्षण प्रयोगशाला, कृषि के विभन्‍न क्षेत्रों में विशेषज्ञों के पैनल से भुगतान आधारित सेवा प्रदान करने, सूचना प्रसार केन्‍द्र, किसानों के लिए प्रशिक्षण व्‍यवस्‍था के लिए भी सहायता दी जाएगी. किसानों को यह सुविधा शुल्‍क आधारित उपलब्‍ध होगी.   
vi. कृषि-परिवहन और विपणन सुविधाएं- उत्‍पाद की अधिप्राप्ति, संग्रहण और /अथवा प्रसंस्‍करण पश्‍चात् बाजार से प्रत्‍यक्ष जोड़ना, रूरल मार्ट की स्‍थापना, मालवाहक वाहन की खरीद आदि. विपणन कार्यक्षेत्र में कार्यरत अथवा इस गतिविधि के लिए इच्‍छुक प्राथमिक कृषि ऋण समितियां किसानों के लिए विपणन सुविधाओं का निर्माण कर सकती हैं.  
उपभोक्‍ता भंडार और अन्‍य विविध गतिविधयां- ग्रामीण क्षेत्रों से जायज कीमत पर अन्‍य उपभोग्‍य वस्‍तुओं की नियमित आपूर्ति की मांग की जाती रही है. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को एक ऐसे केन्‍द्र के रूप में विकसित करने के लिए सहायता प्रदान की जा सकती है जहां वे कृषि उत्‍पादों/ कृषि निविष्टियों के साथ-साथ सभी प्रकार के उपभोग्‍य वस्‍तुओं की बिक्री/ विपणन कर सकते हैं. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को एलपीजी एजेंसी अथवा पेट्रोल पंप आउटलेट के लिए भी सहायता प्रदान की जा सकती है बशर्ते उनके पास इस कार्य के लिए आवश्‍यक लाइसेंस हो और वे लाइसेंस देने वाले प्राधिकारी के नियम व शर्तों को पूरा करते हों.  
उत्‍पादक संगठन के रूप में चयनित सदस्‍यों को अल्‍पावधि मौकृप के तहत फसल ऋण के अलावा कृषि/ गैर कृषि क्षेत्र/ सेवा क्षेत्र की गतिविधियों के लिए ऋण देने हेतु प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को सहायता देनाः यदि प्राथमिक कृषि ऋण समितियां कृषि – संबद्ध गतिविधि के लिए चयनित सदस्‍यों को बॅकवर्ड अथवा फार्वर्ड लिंकेज के‍िलिए सहायता प्रदान करती है तो प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को अपने चयनित सदस्‍यों को इस प्रकार की गतिविधि के लिए उधार देने हेतु ऋण प्रदान किया जा सकता है. प्राथमिक कृषि ऋण समिति अपने चयनित सदस्‍यों को अनुमोदित ब्‍याज दर पर ऋण संवितरित करेगी.  इस कार्य को क्‍लस्‍टर आधार पर किया जा सकता है.