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रास बैंकों के माध्यम से बहु सेवा केंद्र के रूप में पैक्स के लिए दीर्घावधि पुनर्वित्त नीति – वित्तीय वर्ष 2019-20
संदर्भ सं. राबैं.पुनर्वित्त /377 / पीपीएस-9/ 2019-20 
26 अप्रैल 2019 
 
परिपत्र सं.111/ पुनर्वित्त – 37/2019
 
1. मुख्य महाप्रबंधक/महाप्रबंधक/ प्रभारी अधिकारी
राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
सभी क्षेत्रीय कार्यालय  
2. निदेशक, बर्ड, लखनऊ
3. संयुक्त निदेशक, बर्ड, मंगलूर/बोलपुर  
4. प्रधानाचार्य, राष्ट्रीय बैंक स्टाफ़ महाविद्यालय, लखनऊ
 
प्रिय महोदय 
 
रास बैंकों के माध्यम से बहु सेवा केंद्र के रूप में पैक्स के लिए दीर्घावधि पुनर्वित्त नीति – वित्तीय वर्ष 2019-20
 
बहु-सेवा केंद्रों के रूप में कार्यरत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के वित्तपोषण के लिए राज्य सहकारी बैंकों को दीर्घावधि पुनर्वित्त प्रदान करने का निर्णय लिया गया है. प्राथमिक कृषि ऋण समितियां आधारभूत स्तर पर किसानों के लिए सेवा केंद्र (वन स्टॉप शॉप) हैं. किसानों को ऋण और अन्य सेवाएं प्रदान करने में इन समितियों की महत्‍वपूर्ण भूमिका है. समितियां सदस्य-संचालित संस्थाएं हैं जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए काम करती हैं. किसानों के करीब होने के कारण समितियां किसानों को अपनी फसल के लिए लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए फसलोपरांत सेवाएं प्रदान करने में महती भूमिका निभा सकती हैं. हमारे पुनर्वित्त का उद्देश्य प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को अपने कारोबार के पोर्टफोलियो में वृद्धि करने तथा स्वावलंबी बनने में समर्थ बनाना है. पुनर्वित्त की मंजूरी परियोजना के आधार पर दी जाएगी. राज्य सहकारी बैंक को अधिमानत: ‘क्लस्टर आधार’ पर विशिष्ट परियोजनाएं पूर्व मंजूरी के लिए नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करनी होंगी. रास बैंक को पुनर्वित्त की पात्रता के मानदंड वही होंगे जो दीर्घावधि पुनर्वित्त के लिए 25 मार्च 2019 के हमारे परिपत्र सं.77/ डीओआर-23/ 2019 में निर्धारित किए गए हैं. विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश अनुबंध में दिए गए हैं.  
 
क्षेत्रीय कार्यालय राज्य और जिला स्तर पर विभिन्न मंचों के माध्यम से इस उत्पाद का व्यापक प्रचार-प्रसार करें और इस नर्इ ऋण सीमा के अंतर्गत व्यवसाय के और अधिक अवसर बनाएं.
भवदीय 
(जी आर चिंताला)
मुख्‍य महाप्रबंधक 
अनुलग्‍नक  :    4  पृष्‍ठ   
 
अनुबंध 
 
रास बैंकों के माध्यम से बहु सेवा केंद्र के रूप में पैक्स के लिए दीर्घावधि पुनर्वित्त
परिचालनात्मक दिशानिर्देश 
 
1. पुनर्वित्त की मंजूरी 
पैक्स के परिचालन क्षेत्र में अधिमानतः क्लस्टर पद्धति वाली विशिष्ट परियोजनाओं के लिए रास बैंकों को पुनर्वित्त मंजूर किया जाता है. राज्‍य सहकारी बैंक राज्य/ जिला स्तर पर प्रस्तावों का समेकन कर समेकित प्रस्ताव नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत कर सकते हैं. 
यदि राज्‍य सहकारी बैंक पैक्स के माध्यम से क्षेत्र में संभावना रखने वाली किसी विशेष गतिविधि को बढ़ावा देना चाहता है तो वह पैक्स के स्तर पर लागत निर्दिष्ट करते हुए जिला-वार योजना तैयार कर सकता है और सहयोग दिए जाने के लिए पैक्स की संख्या निर्दिष्ट करते हुए निर्धारित प्रपत्र में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूरी के लिए प्रस्तुत कर सकता है. परियोजना की मंजूरी जिला-वार भौतिक और वित्त्तीय लक्ष्य निर्दिष्ट करते हुए की जाएगी. तथापि, ऋण का संवितरण पैक्स की पहचान के बाद किया जाएगा. 
 
2. पात्र गतिविधियां 
निम्नलिखित गतिविधियां पुनर्वित्त सहायता के लिए पात्र है. 
i. कृषि भंडारण केंद्र: वर्तमान भंडारण सुविधा के उन्‍नयन अथवा परक्राम्‍य भंडारागार रसीद प्रणाली के अनुसार सॉर्टिंग/ ग्रेडिंग इकाई के साथ नए गोदामों के निर्माण के लिए सहायता जिससे वे भंडारण रसीद जारी कर सकें.  इन रसीदों के आधार पर किसान भंडारागार में रखी फसल के समक्ष ऋण प्राप्‍त कर सकते हैं और अगली फसल के लिए खेती कर सकते हैं.  इस प्रकार, किसान अपनी नकद प्रवाह की स्थिति को प्रभावित किए बिना फसल बाद में बेहतर दाम के लिए रोक कर रख सकते हैं.
ii. भारत सरकार की पूंजी निवेश सब्सिडी (सीआईएसएस) योजना अथवा राज्‍य सरकार की अन्‍य किसी योजना के दायरे में न आने वाले अन्‍य निवेश वस्‍तुओं और उपभोग्‍य वस्‍तुओं के भंडारण के लिए गोदामों के निर्माण के लिए भी सहायता दी जा सकती है. 
iii. शीत भंडारगृहों की स्थापना : शीत भंडारगृह की स्‍थापना के लिए भी सहायता दी जा सकती है. नाबार्ड सब्सिडी का दावा करने की पात्र संस्‍था न होने के कारण ग्रामीण भंडारण योजना, राष्‍ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) / राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) योजनाओं अथवा ऐसी अन्‍य किसी योजना के अधीन प्राथमिक कृषि ऋण समितियां यदि सब्सिडी का दावा करती हैं तो ऋण आवेदन मध्‍सवर्ती सहकारी बैंक/ राज्‍य सहकारी बैंक के माध्‍यम से ऋण प्रदान किया जा सकता है. 
iv. कृषि सेवा केंद्र : सदस्‍यों की आवश्‍यकताओं के अनुसार पावर टिलर, लैंड लेवेलर, रोटरी स्‍लैशर, मूवर्स, सीड ड्रिल्लर, मल्टि क्रॉप प्‍लांटर, पैडी ट्रांस्‍प्‍लांटर, स्‍प्रेयर्स, कंबाइन हार्वेस्‍टर आदि की खरीद. इन उपकरणों को कस्‍टम हायरिंग/किराए पर देने से आमदनी होगी. डीजल पंप खेती के लिए एक प्रमुख निविष्टि होने के कारण डीजल पंप लगाने के लिए भी सहायता दी जाती है.  
v. कृषि प्रसंस्करण केंद्र 
प्राथमिक प्रसंस्करण– सॉर्टिंग, ग्रेडिंग यूनिट, वैक्सिंग / पॉलिशिंग यूनिट, प्रि-कूलिंग चेंबर आदि, ड्राइंग यार्ड, पैकेजिंग सुविधाएं, पोल्‍ट्री ड्रेसिंग यूनिट आदि के लिए भी सहायता दी जाएगी.
द्वितीयक प्रसंस्करण  – उत्‍पादों के मूल्‍य संवर्धन हेतु उदाहरणः मिनि राइस मिल, आटा चक्‍की, कृषि प्रसंस्‍करण सुविधा आदि. 
vi. कृषि सूचना केंद्र: मृदा और जल परीक्षण प्रयोगशाला, कृषि के विभन्‍न क्षेत्रों में विशेषज्ञों के पैनल से भुगतान आधारित सेवा प्रदान करने, सूचना प्रसार केन्‍द्र, किसानों के लिए प्रशिक्षण व्‍यवस्‍था के लिए भी सहायता दी जाएगी. किसानों को यह सुविधा शुल्‍क आधारित उपलब्‍ध होगी.
vii. कृषि परिवहन और विपणन सुविधाएं: उत्‍पाद की अधिप्राप्ति, संग्रहण और /अथवा प्रसंस्‍करण पश्‍चात् बाजार से प्रत्‍यक्ष जोड़ना, रूरल मार्ट की स्‍थापना, मालवाहक वाहन की खरीद आदि. विपणन कार्यक्षेत्र में कार्यरत अथवा इस गतिविधि के लिए इच्‍छुक प्राथमिक कृषि ऋण समितियां किसानों के लिए विपणन सुविधाओं का निर्माण कर सकती हैं. 
viii. उपभोक्ता भंडार और अन्य विविध गतिविधियां: ग्रामीण क्षेत्रों से जायज कीमत पर अन्‍य उपभोग्‍य वस्‍तुओं की नियमित आपूर्ति की मांग की जाती रही है. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को एक ऐसे केन्‍द्र के रूप में विकसित करने के लिए सहायता प्रदान की जा सकती है जहां वे कृषि उत्‍पादों/ कृषि निविष्टियों के साथ-साथ सभी प्रकार के उपभोग्‍य वस्‍तुओं की बिक्री/ विपणन कर सकते हैं. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को एलपीजी एजेंसी अथवा पेट्रोल पंप आउटलेट के लिए भी सहायता प्रदान की जा सकती है बशर्ते उनके पास इस कार्य के लिए आवश्‍यक लाइसेंस हो और वे लाइसेंस देने वाले प्राधिकारी के नियम व शर्तों को पूरा करते हों.  
ix. उत्‍पादक संगठन के रूप में चयनित सदस्‍यों को अल्‍पावधि मौकृप के तहत फसल ऋण के अलावा कृषि/ गैर कृषि क्षेत्र/ सेवा क्षेत्र की गतिविधियों के लिए ऋण देने हेतु प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को सहायता देनाः यदि प्राथमिक कृषि ऋण समितियां कृषि – संबद्ध गतिविधि के लिए चयनित सदस्‍यों को बॅकवर्ड अथवा फार्वर्ड लिंकेज के‍िलिए सहायता प्रदान करती है तो प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को अपने चयनित सदस्‍यों को इस प्रकार की गतिविधि के लिए उधार देने हेतु ऋण प्रदान किया जा सकता है. प्राथमिक कृषि ऋण समिति अपने चयनित सदस्‍यों को अनुमोदित ब्‍याज दर पर ऋण संवितरित करेगी.  इस कार्य को क्‍लस्‍टर आधार पर किया जा सकता है.
x. राज्‍य सहकारी बैंकों को पुनर्वित्त विभाग, प्र.का. द्वारा आबंटित बजट से पुनर्वित्त मंजूर किया जाएगा. ऋण की मंजूरी उक्त बजट से की जाएगी लेकिन निम्नलिखित गतिविधियों के लिए ऋण घटक दस प्रतिशत अनधिक की अनुदान सहायता पर विचार किया जा सकता है:
ज्ञान प्रसार केंद्र – एक पीसी की लागत (जरूरत के आधार पर
नयी व्यवसाय गतिविधि शुरू करने की आरंभिक प्रशासनिक लागत.
किसानों को किसी विशेष गतिविधि का प्रशिक्षण
यदि ऋण राज्‍य सहकारी बैंक/ जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंक को मंजूर किया गया है तो संबंधित बैंक समग्र सीमा के भीतर अनुदान घटक से दो प्रतिशत तक के परियोजना प्रबंधन व्यय को हिसाब में रख सकता है.
अनुदान एफएसडीडी से परिचालित होगा. इस संबंध में, बीआईडी के 29 /8/12 के परिपत्र संख्या 216 बीआईडी- 7 के माध्यम से जारी दिशानिर्देशों का अनुपालन किया जाएगा. परियोजना का मूल्यांकन उक्त परिपत्र में यथानिर्धारित रीति से किया जाएगा.
 
3. ब्याज दर 
पुनर्वित्त पर ब्याज दर नाबार्ड द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले संशोधनों के अधीन होगी. रास बैंकों को दीर्घावधि पुनर्वित्त पर वर्तमान में लागू ब्याज दर अगले संशो धन तक प्रभावी रहेगी. 
 
4. चुकौती 
पुनर्वित्त की चुकौती न्यूनतम 18 महीने से लेकर 5 वर्ष और अधिक की अवधि में की जाएगी.
 
 
5. प्रतिभूति 
 
प्रतिभूति सामान्य पुनर्वित्त करार के अनुसार होगी. रास बैंक अपनी आंतरिक नीति के अनुसार जिमस बैंक/ पैक्स से प्रतिभूति लेंगे.
 
6. योजनाबद्ध पुनर्वित्त के मामले में लागू अन्य सभी निबंधन और शर्तें अपरिवर्तित है. 
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