Menu

विशेष चल निधि सुविधा (एसएलएफ) के तहत पुनर्वित्त नीति: एनबीएफसी-एमएफआई
कोविद -19 महामारी ने एक अभूतपूर्व क्रम की घटनाओं द्वारा  एक  मानवीय संकट लाया है. सक्रिय रूप से, नाबार्ड ने व्यवधानों को कम करने और वित्तीय संस्थानों को ऋण के प्रवाह को बनाए रखने के लिए कई उपाय किए हैं और इस तरह किसानों और समाज के गैर-लाभकारी खंडों को उनकी ऋण जरूरतों को पूरा करने में मदद की है. इस संबंध में आरबीआई ने वित्तीय संस्थानों की तरलता की स्थिति को बढ़ाने में समर्थन के लिए आगे आया है और आरआरबी, सहकारी बैंकों और एमएफआई को पुनर्वित्त करने के लिए दिनांक 17 अप्रैल 2020 के पत्र  के माध्यम से नाबार्ड को रु 25,000 करोड़ का आवंटन किया है.
 
 2.  तदनुसार, दिनांक 13 अप्रैल 2020 के परिपत्र संख्या 92 / डीओआर -20 / 2020 के दिशानिर्देशों के आधार पर   एनबीएफसी-एमएफआई को विशेष चल निधि सुविधा (एसएलएफ) के तहत पुनर्वित्त दिया जाएगा. हालांकि , एसएलएफ एक वर्ष या उससे कम की अवधि के लिए है, लेकिन एमएफआई को हमारा पुनर्वित्त  18 महीने की अवधि के ऋण के रूप में होगा जिसकी पूर्ति हम स्वयम के धन से करेंगे. 
 
3. इस सुविधा के लिए भुगतान की अवधि 18 महीने होगी. हालाँकि, आरबीआई  से एसएलएफ  नाबार्ड को  पहले आहरण से एक साल की अवधि के लिए दी गयी है है और उस समय के दौरान इसे  वापस चुकाया जाना है। तदनुसार, उधार लेने वाले एमएफआई को इस  अवधि के अंत में एकमुश्त, शेष राशि की आनुपातिक राशि चुकानी होगी. पुनर्भुगतान की शेष राशि को एक या एक से अधिक किश्तों में मंजूरी पत्र  में चुकौती सारणी के अनुसार चुकाना है। दंड ब्याज और पूर्वभुगतान दंड पॉलिसी परिपत्र संख्या 92 / डीओआर -20 / 2020 के खंड 5 के अनुसार होगी।
 
4. इस सुविधा के तहत ब्याज दर अलको के  निर्णय के अनुसार और उपयोग किए गए स्रोत निधि के आधार पर होगी. सएलएफ सुविधा के तहत उपलब्ध निधियों की वर्तमान दर  रेपो रेट + 300 बीपीएस , जिसके ऊपर लागू जोखिम प्रीमियम लगेगा . नाबार्ड के अपने संसाधनों से प्रदान की गई पुनर्वित्त की राशि सामान्य ऋण दर पर लागू दर के अनुसार होगी
 
5 जहाँ एनबीएफसी-एमएफआई का कॉर्पोरेट / प्रमुख कार्यालय है वहाँ .  के क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से पुनर्वित्त प्रस्ताव नाबार्ड को प्रस्तुत किया जा सकता है .
 
6. यह परिपत्र नाबार्ड की वेबसार्इट www.nabard.org पर सूचना केंद्र टैब के अंतर्गत भी उपलब्ध है.
7. कृपया पावती दें.