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सीबीएस स्थापना के बाद अल्पावधि सहकारी ऋण संरचना में मानव संसाधन पर गठित समिति की अनुशंसाएँ – नीति
कृपया दिनांक 31 दिसंबर 2009 के हमारे परिपत्र सं. राबैं.आईडीडी. कोऑप.एसटी(पी)/1874/वी-77/ 2009-10 [परिपत्र सं.222/आईडीडी-17/2009] का अवलोकन करें जिसके माध्यम से आपको अल्पावधि सहकारी ऋण संरचना में मानव संसाधन से जुड़े पहलुओं पर एस. के. मित्रा समिति की अनुशंसाओं से अवगत कराया गया था. अल्पावधि सहकारी बैंकिंग के परिवेश में व्यापक बदलाव को देखते हुए मानव संसाधन आकलन आदि से जुड़े कुछ पहलुओं पर पुनर्विचार करना आवश्यक समझा गया. तदनुसार, नाबार्ड द्वारा अल्पावधि सहकारी ऋण संरचना के अंतर्गत सहकारी बैंकों में मानव संसाधन की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने, श्रम शक्ति संबंधी आवश्यकता का आकलन करने के साथ-साथ स्टाफ में विद्यमान कुशलता और उनके काम के लिए आवश्यक कुशलता के बीच अंतर का आकलन करने के लिए नाबार्ड द्वारा श्री आर अमरलोरपावनाथन, उप प्रबंध निदेशक, नाबार्ड की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था ताकि सीबीएस स्थापना के बाद बैंकों का प्रबंधन प्रभावी रूप से किया जा सके.  
 
2. उक्त समिति में राज्य सरकार और सहकारी बैंकों के प्रतिनिधि शामिल किए गए थे.  समिति ने पूरे देश में सहकारी संस्थाओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया था. इसकी अंतिम रिपोर्ट की प्रतियां पहले ही सभी हितधारकों को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं. 
 
3.  नैफ़्सकॉब ने इस रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया था जिसमें उसके शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकारों, राज्य सहकारी बैंकों और चुनिन्दा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों के प्रतिनिधि भी शामिल थे. इस संगोष्ठी की चर्चाओं में उभर कर आने वाले विचारों / सुझावों की उक्त समिति की सिफारिशों के आलोक में समीक्षा की गई. समिति की प्रमुख सिफारिशें सुगम प्रचालन के लिए अनुलग्नक में दी जा रही हैं.  
 
4. नीतिगत दिशानिर्देशों को और अधिक स्पष्टता से समझने के लिए ‘सीबीएस स्थापना के बाद अल्पावधि सहकारी ऋण संरचना में मानव संसाधन का आकलन’ – विषय पर गठित समिति की रिपोर्ट (नाबार्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध है) का अवलोकन किया जा सकता है. 
 
5. समिति की अनुशंसाओं में राष्ट्रीय स्तर पर सहकारी बैंकों के समक्ष उपस्थित होने वाली समस्याओं के समाधान सुझाए गए हैं. बैंक अपनी मानव संसाधन नीति तैयार करते समय इन दिशानिर्देशों में यथोचित संशोधन कर सकते हैं. 
 
6. उक्त रिपोर्ट में अल्पावधि सहकारी ऋण संरचना में मानव संसाधन से संबंधित मामलों पर सिफारिशों के अलावा प्रबंधन और सुधार जैसे अन्य महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया गया है. बैंक इन पर भी विचार कर सकते हैं. 
 
7. बैंकों से अनुरोध है कि वे अनुमोदन और अंगीकरण के लिए संबंधित पत्र और अनुलग्नक, अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप यथावश्यक संशोधनों सहित, बैंक के बोर्ड के समक्ष रखें. इस संबंध में की गई कार्रवाई के बारे में नाबार्ड को सूचित किया जाए.
 
भवदीया
(सरिता अरोरा)
मुख्य महाप्रबंधक
संलग्नक : यथोक्त