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भुगतान प्रणाली संबंधी डाटा का स्टोरेज – क्षेग्रा बैंकों और ग्रामीण सहकारी बैंकों द्वारा अनुपालन
बाह्य परिपत्र सं.29/डॉस-05 /2020            30 जनवरी 2020
संदर्भ सं. राबैं.डॉस/पीओएल / 3081 /जे-1/2019-20
अध्यक्ष 
 
सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 
प्रबंध निदेशक /मुख्य कार्यकारी अधिकारी 
सभी सहकारी बैंक 
सभी ज़िला मध्यवर्ती सहकारी बैंक 
 
प्रिय महोदय 
 
भुगतान प्रणाली संबंधी डाटा का स्टोरेज – क्षेग्रा बैंकों और ग्रामीण सहकारी बैंकों द्वारा अनुपालन
 
हम उपर्युक्त विषय पर आपका ध्यान दिनांक 06 अप्रैल 2018 के डीपीएसएस, आरबीआई के परिपत्र डीपीएसएस.सीओ.ओडी. सं. 2785/06.08.005/2017-18 की ओर आकृष्ट करते हैं। 
 
2. उपर्युक्त परिपत्र में निर्दिष्ट प्रावधानों के अनुसार सिस्टम प्रोवाइडर की ज़िम्मेदारी है कि वे इस परिपत्र के जारी होने के छह माह के भीतर उनके द्वारा संचालित भुगतान प्रणाली से संबन्धित पूरा डाटा भारत में स्टोर कराएं। इसके अतिरिक्त, यह सुनिश्चित करना बैंकों की ज़िम्मेदारी है कि उनके तृतीय पक्ष सेवा प्रदाता/ वेंडर इस प्रकार के डाटा का स्टोरेज केवल भारत में ही करते हैं और यदि कोई तृतीय पक्ष सेवा प्रदाता/वेंडर संदर्भित परिपत्र में निर्दिष्ट अपेक्षाओं का पालन नहीं करता है  तो संबंधित बैंक को नॉन-कम्प्लायंट बैंक माना जाएगा।                         
 
3. इस संबंध में, हम सूचित करते हैं कि
 
i. उक्त परिपत्र में इंगित अनुदेश भावी प्रभाव से लागू होंगे और यह परिपत्र भुगतान संबंधी डाटा भारत में रखने के बारे में बैंकों को पहले से जारी अनुदेश/ निदेश/ अनुमोदन को अधिक्रमित करेगा। 
ii. भुगतान संबंधी डाटा केवल भारत में रखे जाएंगे और भुगतान संबंधी डाटा की कॉपी भारत में रखने की अनुमति नहीं है। लेकिन, प्रोसेसिंग के प्रयोजन से विदेश में स्थित कोर बैंकिंग प्रणाली में डाटा के प्रवाह पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
iii. किसी ग्राहक द्वारा आरटीजीएस जैसे भुगतान लेनदेन के लिए इंटरनेट सुविधा पर लॉग-इन करने, एनवायरनमेंटल और को-सिंक्रोनस सूचना जिसका उपयोग ग्राहक और इंटरनेट बैंकिंग सिस्टम के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए अर्थात् भुगतान  लेनदेन की सूचना देने से पूर्व की सूचनाओं को भुगतान डाटा का हिस्सा नहीं माना जाएगा। लेकिन, जब कोई ग्राहक भुगतान लेनदेन आरंभ करता है और
/ या डेबिट लेनदेन को प्राधिकृत करता है और यह डेबिट लेनदेन भुगतान लेनदेन में परिवर्तित होता है तो इस लेनदेन से संबंधित डाटा को भुगतान डाटा का हिस्सा माना जाएगा। 
iv. वर्तमान में, बैंक के केवल अपने सिस्टम से किए गए इंटर-बैंक ट्रांसफर्स को भुगतान प्रणाली का हिस्सा नहीं माना जाता है।
v. स्विफ्ट (एसडबल्यूआईएफ़टी) माध्यम सहित अन्य माध्यमों से किए गए विदेशी लेनदेन संबंधी एंड-टू-एंड लेनदेन को भी भारत से बाहर रखा जा सकता है। यदि स्विफ्ट (एसडबल्यूआईएफ़टी) के माध्यम से देश के भीतर कोई लेनदेन किया जाता है तो इससे संबंधित एंड-टू-एंड लेनदेन डाटा को केवल भारत में ही रखा जाएगा। स्विफ्ट(एसडबल्यूआईएफ़टी) के माध्यम से विदेशी लेनदेन करने वाले बैंक भुगतान संबंधी एंड-टू-एंड लेनदेन के डाटा भारत में और विदेश दोनों जगह रख सकते हैं। विदेशी मनी-ट्रांसफर्स के मामले में भी यही प्रक्रिया लागू होगी।  
 
 4.  उपर्युक्त निर्दिष्ट दिशानिर्देशों के अनुपालन का आकलन करने के लिए एन्श्योर पोर्टल में “मिस्लेनियस (मिस)” शीर्ष के तहत ‘स्टोरेज ऑफ पेमेंट सिस्टम डाटा’ नामक एक रिटर्न उपलब्ध कराया गया है। इसमें रिटर्न संबंधी निम्नलिखित मानदंड हैं:-
वित्त वर्ष 2019-20
 
बारंबारता दैनिक आधार पर*
 
अवधि 31 दिसम्बर 2019
अवधि समाप्ति तिथि 31 दिसम्बर 2019
देय तिथि 15 फरवरी 2020
*: ‘यहाँ दैनिक आधार का आशय उस दिन से है।
 
5. बैंकों से नियमित आधार पर अनुपालन प्राप्त करने की दृष्टि से अगले वित्त वर्ष से इस रिटर्न को छमाही बना दिया जाएगा। 
 
6. सभी बैंकों को सूचित किया जाता है कि अपना रिटर्न नियत तारीख तक एन्श्योर पोर्टल में प्रस्तुत करें। 
 
7. कृपया इस परिपत्र की प्राप्ति सूचना हमारे संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को भेजें।
 
भवदीय 
(के.एस. रघुपति)
मुख्य महाप्रबंधक