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वित्तीय समावेशन
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उज्ज्वल भारत की आशा
कर्नाटक
पहल
संयुक्त देयता समूहों का संवर्धन
लाभार्थी
हरियाणा राज्य के रेवाड़ी ज़िले की सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएँ
चुनौती
बेरोज़गारी और कम आय
सामाजिक पिछड़ापन एवं जातिवाद की प्रबलता
आर्थिक स्वतंत्रता के सीमित विकल्प
उपाय
नाबार्ड ने रेवाड़ी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक (डीसीसीबी) को शामिल कर संयुत देयता समूहों का गठन कराया
प्रत्येक संयुक्त देयता समूहों के सदस्य को ₹30,000 का ऋण प्रदान किया गया ताकि वे अपनी पसंद के आजीविका विकल्प अपना सकें
प्रारंभिक चरण में नाबार्ड और डीसीसीबी द्वारा निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई एवं सहयोग प्रदान किया गया
प्रभाव
महिलाओं की मासिक आय में वृद्धि – ₹6,000 से ₹8,000 के बीच
ऋण से अन्य पारिवारिक सदस्यों को भी लाभ मिला
लघु उद्योग इकाइयों की स्थापना
महिला लाभार्थियों में स्पष्ट उद्देश्य की भावना विकसित हुई