Circulars

पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्रों (सीएसपी)/ बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) हेतु संशोधित प्रोत्साहन योजना
 

08 जलुाई 2025

संदर्भसं. राबैं.प्रका.डीएमएफ़आई/54627 -54637/ डीएमएफ़आई-23/2025-26

पररपत्र सं. 165 / डीएमएफ़आई -06/2025

अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक/ मुख्य कार्यपालक अधिकारी
सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंक और भुगतान बैंक सहित)/ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक/ राज्य सहकारी बैंक/ जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक
(अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड)
 
महोदया/महोदय,
 
पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्रों (सीएसपी)/ बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) हेतु संशोधित प्रोत्साहन योजना

वित्तीय सेवाएँ विभाग (डीएफ़एस), भारत सरकार द्वारा गठित बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) के कामकाज पर अनुप्रवर्तन समिति ने दिनांक 13 अक्तूबर 2022 को आयोजित अपनी तीसरी बैठक में यह सुझाव दिया था कि नाबार्ड द्वारा एक योजना बनाई जाए जिससे दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) को क्षतिपूर्ति प्रदान की जा सके। तदनुसार, पूर्वोत्तर राज्यों में कार्यरत ग्राहक सेवा केन्द्रों (सीएसपी)/ बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) हेतु एक योजना लागू की गई थी। तत्पश्चात् इस योजना को पहाड़ी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया गया था।

2. इसी क्रम में यह सूचित किया जाता है कि उपर्युक्त योजना को बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) के कामकाज पर निगरानी समिति से प्राप्त सुझावों तथा विभिन्न हितधारकों द्वारा साझा किए गए सुझावों के अनुरूप संशोधित किया गया है।

3. जैसा की आपको विदित है, इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि बैंकों द्वारा पहले से दिए जा रहे निर्धारित कमीशन और परिवर्तनीय कमीशन के अतिरिक्त होगी। यह राशि व्यक्तिगत बीसी या बीसी एजेंट या सीएसपी ऑपरेटर, जिसे अब से "ऑपरेटर" कहा जाएगा, को सीधे देय होगी, जो लेनदेन की सुविधा प्रदान करने के साथ लेनदेन के न्यूनतम स्तर को पूरा करता है।

4. संशोधित योजना का विवरण निम्नानुसार है:

क) परिचालन अवधि: संशोधित योजना दिनांक 01 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगी और यह दिनांक 31 मार्च 2026 तक परिचालन में रहेगी।

ख) पात्र संस्थाएँ: यह योजना पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड) में कार्यरत सभी बैंकों के लिए लागू होगी।

ग) पात्र व्यक्ति: बैंकों द्वारा नियुक्त किए गए ऑपरेटर या कॉर्पोरेट बीसी के माध्यम से बैंकों द्वारा नियुक्त किए गए ऑपरेटर। दूसरे शब्दों में सेवा प्रदान करने वाला व्यक्ति प्रोत्साहन के लिए पात्र होगा, न कि वह एजेंसी जिसने उन्हें नियुक्त किया है। ऑपरेटर एकल प्रोत्साहन के लिए पात्र होगा, भले ही उसके द्वारा सेवा प्रदान किए गए गांवों की संख्या एक से अधिक हो।

घ) पात्र स्थान: जनगणना 2011 के अनुसार ग्रामीण केन्द्रों, अर्थात् टीयर 5 एवं टीयर 6 केन्द्रों (जनसंख्या 9,999 तक) में कार्यरत ऑपरेटर।

ड) योजना के तहत प्रोत्साहन राशि का दावा करने हेतु पात्रताः पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में बैंकों के ऑपरेटर को औसतन प्रति माह 30 या उससे अधिक वित्तीय लेनदेन करने पर ₹1500/- प्रति माह का वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।

5.सहयोग हेतु पात्र गतिविधियाँ: ऑपरेटर आउटलेट पर उपलब्ध कराई जा सकने वाली व्यापक गतिविधियों की सांकेतिक सूची अनुबंध 1 में दी गई है।

6.नाबार्ड से प्रतिपूर्ति का दावा करने की प्रक्रिया:

क) सभी पात्र ऑपरेटरों को प्रति ऑपरेटर ₹1500/- प्रतिमाह की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

ख) बैंकों को उस राज्य में नाबार्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा जहाँ ऑपरेटर अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। बैंकों को नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है। बैंकों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदन का प्रारूप संलग्न है (परिशिष्ट-I)।

ग) नाबार्ड की स्वीकृति मिलने पर बैंकों को तिमाही आधार पर ऑपरेटरों को प्रोत्साहन का भुगतान करना होगा और तिमाही के समापन के एक महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप (परिशिष्ट-II) में तिमाही के लिए प्रतिपूर्ति दावा प्रस्तुत करना होगा।

घ) बैंक उन ऑपरेटरों के लिए प्रोत्साहन का दावा करने के पात्र होंगे जो पूरी तिमाही के लिए उनके साथ जुड़े थे। तथापि एक तिमाही के दौरान बीच में शामिल किए गए नए ऑपरेटरों के लिए न्यूनतम एक महीने का कार्यनिष्पादन ध्यान में रखा जाएगा।

ड) ऑपरेटर द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन की मासिक औसत संख्या की गणना करने के लिए तिमाही में ऑपरेटर द्वारा किए गए कुल वित्तीय लेनदेन को ऑपरेटर की नियुक्ति के 3 या वास्तविक महीनों की संख्या से विभाजित किया जाएगा (न्यूनतम 1 महीने के अधीन)।

च) बैंकों को संबंधित तिमाही के अंत से 30 दिनों के भीतर एक घोषणा प्रस्तुत करनी होगी कि उन्होंने पात्र ऑपरेटर के बैंक खाते में प्रोत्साहन राशि जमा कर दी है।

छ) बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी शाखाओं द्वारा तिमाही आधार पर और नियंत्रक कार्यालयों द्वारा अर्द्ध वार्षिक आधार पर ऑपरेटरों के कार्यनिष्पादन की समीक्षा की जाए जिससे कार्यनिष्पादन का जायजा लिया जा सके तथा मार्गदर्शन और समस्या निवारण प्रदान किया जा सके।

ज) सभी लाभार्थी ऑपरेटरों को संबंधित बैंकों द्वारा जन धन दर्शक पोर्टल, बीसी रजिस्ट्री पोर्टल या डीएफएस/ आईबीए/भारतीय रिजर्व बैंक/नाबार्ड द्वारा बनाए गए किसी भी ऐसे पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।

7. अन्य महत्वपूर्ण शर्तें:

क) बैंकों को स्वयं-निर्धारित लक्ष्य स्थापित करके वित्तीय रूप से वंचित क्षेत्रों में ऋण प्रवाह को बढ़ाने के लिए भरसक प्रयास करने चाहिए।

ख) योजना के तहत सभी ऑपरेटरों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के तहत कवर किया जाए।

ग) बैंकों को ऑपरेटरों के लिए समूह चिकित्सा बीमा योजना प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

घ) बैंकों को प्रत्येक वंचित गांव के 5 किलोमीटर के दायरे में ऑपरेटरों को रखने को प्राथमिकता देने हेतु अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ संपर्क किया जाए।

8.यह परिपत्र इस योजना से संबन्धित पिछले परिपत्रों, नामतः दिनांक 11 अगस्त 2023 का परिपत्र सं. 171/ डीएफ़आईबीटी-04/2023, दिनांक 26 अप्रैल 2024 का परिपत्र सं. 77/डीएफ़आईबीटी -01/2024, तथा दिनांक 26 नवंबर 2024 के परिपत्र सं. 285/डीएफ़आईबीटी-05/2024 और परिपत्र सं. 286/डीएफ़आईबीटी -06/2024 का अधिक्रमण करता है।

भवदीया

(सुसीला चिंतला)

मुख्य महाप्रबन्धक