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मीडिया कक्ष

अहमदाबाद जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक में जमा किए गए / बदले गए विमुद्रीकृत नोट
मुंबई | June 2018
कुछ मीडिया रिपोर्टों में अहमदाबाद जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक में जमा किए गए विमुद्रीकृत नोटों के बारे में नाबार्ड द्वारा उपलब्ध कराए गए ब्योरों का उल्लेख किया गया है. इस संदर्भ में निम्नलिखित बातें स्पष्ट की जाती हैं: 
 
भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय के अन्तरिम निर्देशों और भारत सरकार के दिनांक 17 दिसंबर 2016 की अधिसूचना के आधार पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने 10 नवंबर से 14 नवंबर 2016 तक की अवधि में अहमदाबाद जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक  सहित जिन खातों में विमुद्रीकृत नोट जमा किए गए उन खातों के केवाईसी अनुपालन का सत्यापन करवाया गया है. नाबार्ड ने अहमदाबाद जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक  सहित जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों में सत्यापन का कार्य किया. 
 
10 नवंबर 2016 की भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार सभी जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों को अपने ग्राहकों से विमुद्रीकरण के दौरान विमुद्रीकृत नोटों को स्वीकार करने की अनुमति दी गई थी. अहमदाबाद जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक  के ग्राहक विमुद्रीकृत नोटों को बदलने/ जमा करने के लिए बैंक की शाखाओं में बहुत बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए जो बैंक में खातों के आकार और संख्या के अनुपात में ही था. इस जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक  के कुल 16 लाख जमा खातों में से केवल 1.60 लाख यानी 9.37% ग्राहकों ने ही नोट बदलने/ जमा करने का काम किया. इनमें से भी जिन खातों में नोट जमा किए/ बदले गए उनमें से 98.66% में रु. 2.5 लाख से कम रकम जमा की गई. बैंक के कुल खातों में से 0.09 % खाते ही ऐसे थे जिनमें रु. 2.5 लाख से अधिक रकम जमा की गई. अहमदाबाद डीसीसीबी में औसत जमा राशि रु. 46,795 थी जो गुजरात के 18 जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों की प्रति जमाकर्ता औसत राशि से कम है. 
इस अवधि में बैंक के 1.60 लाख ग्राहकों ने कुल रु. 746 करोड़ के विमुद्रीकृत नोट जमा किए/ बदले जो बैंक की कुल जमा राशि का केवल लगभग 15% होता है. 
 
प्रसंगवश महाराष्ट्र के जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों  में  लाए गए विमुद्रीकृत नोट गुजरात में जमा किए गए नोटों से अधिक थे जिसके बाद केरल के जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों का स्थान आता है. 
 
नाबार्ड ने अहमदाबाद जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक  में 100% सत्यापन किया जिससे यह तथ्य सामने आया कि बैंक ने विमुद्रीकृत नोटों को स्वीकार करते समय भारतीय रिज़र्व बैंक के सभी केवाईसी दिशानिर्देशों का अनुपालन किया था. विद्यमान दिशानिर्देशों के अंतर्गत अपेक्षा के अनुरूप नाबार्ड द्वारा किए गए सत्यापन की रिपोर्ट के अनुसार बैंक ने जहां भी अपेक्षित था एफ़आईयू-इंडिया को अपेक्षित नकदी लेनदेन रिपोर्ट (सीटीआर) और एसटीआर भी प्रस्तुत की थी. बैंक के ग्राहकों द्वारा जमा किए गए विमुद्रीकृत नोटों की औसत राशि अन्य बैंकों से कम रही है.  
 
अहमदाबाद और राजकोट सहित पूरे देश में संबन्धित जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों  द्वारा धारित विमुद्रीकृत नोटों के संतोषप्रद सत्यापन के आधार पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने इन जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों  द्वारा धारित विमुद्रीकृत नोटों को स्वीकार किया. भारतीय रिज़र्व बैंक ने संबन्धित जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों के खातों में आवश्यक क्रेडिट भी दिया. 
पश्चिमी, दक्षिणी और उत्तरी भारत में सहकारी ऋण संरचना अत्यंत सक्रिय रही है और बहुत बड़ी संख्या में छोटे जमकर्ताओं को सेवा देती है. 
 
अहमदाबाद जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक  का कुल व्यवसाय रु. 9,000 करोड़ से अधिक का है और यह देश के सर्वोच्च 10 जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों में से एक है. इस बैंक को सहकारी बैंकों के फेडरेशन द्वारा सर्वोत्कृष्ट कामकाज के लिए हाल ही में पुरस्कृत किया गया. इस बैंक की 194 शाखाएँ हैं जो गुजरात के जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों में सबसे अधिक हैं. इस जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक  में लगभग 16 लाख जमा खाते हैं और इसका जमा आधार रु. 5330 करोड़ है जो गुजरात के सभी बैंकों में सर्वाधिक है. 
किसानों के लिए अनुकूल इस बैंक ने किसानों के लिए बैंकिंग को और आसान बनाने के लिए मूल स्तर तक टेक्नोलोजी को अपनाया है. यह देश के उन गिने-चुने पहले जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों में से एक है जिन्होंने अपने ग्राहकों को सीमित इंटरनेट बैंकिंग सुविधा के अलावा मोबाइल बैंकिंग सुविधा दी है. अहमदाबाद जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक  उन थोड़े बैंकों में से एक है जिन्होंने अपने सभी उधारकर्ता किसान सदस्यों को रुपे किसान कार्ड (1.63 लाख) जारी किए हैं. बैंक के पास कहीं भी बैंकिंग की सुविधा प्रदान करने में सक्षम मजबूत और अच्छी तरह जाँची गई सीबीएस प्रणाली है. 200 माइक्रो एटीएम के अलावा इसके एटीएम की संख्या भी गुजरात के जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों में सर्वाधिक है. अपनी इन पहलकदमियों के कारण इस बैंक को वर्ष 2015-16 और 2016-17 में प्रौद्योगिकी अपनाने और वित्तीय समावेशन के लिए नाबार्ड से सर्वश्रेष्ठ बैंक के अवार्ड भी प्राप्त हुए हैं.  
 
लोगों तक पहुँचने के इन बड़े प्रयासों को चलाते हुए इस बैंक ने लगातार उच्च लाभप्रदता और शून्य निवल एनपीए बनाए रखा है जिसके कारण लगातार पिछले पाँच वर्षों से इसे लेखा परीक्षा रेटिंग में 'ए' श्रेणी प्राप्त होती रही है. बैंक की वित्तीय सुदृढ़ता के कारण इस बैंक ने पिछले तीन वर्षों से अपने शेयरधारकों को 15% लाभांश दिया है जो लाभांश की उच्चतम अनुमत सीमा है.