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संगठन सेटअप


संगठन सेटअप

शैक्षिक योग्यता
 
डॉ. हर्ष कुमार भनवाला 18 दिसंबर 2013 से राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष पद पर आसीन हैं. उन्होंने आईआईएम - अहमदाबाद से प्रबंधन में स्‍नातकोत्‍तर शिक्षा पूरी की और वे प्रबंधन में पीएच.डी. हैं. उन्हें तामिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयम्बटूर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्‌ - केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान (आईसीएआर-सीआईएफ़ई), मुंबई ने विज्ञान में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है. 

व्यावसायिक अनुभव: 
 
डॉ हर्ष कुमार भनवाला ने कृषि और सिंचाई आधारभूत संरचना के निर्माण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में निरंतर काम किया है. उन्होंने दीर्घावधि सिंचाई निधि (एलटीआईएफ) के माध्यम से सिंचाई के लिए और डेयरी आधारभूत संरचना विकास निधि (डीआईडीएफ) के माध्यम से डेयरी के लिए आधारभूत संरचना के वित्तपोषण हेतु परियोजनाबद्ध पद्धति की शुरुआत की. उनके कुशल नेतृत्व में, नाबार्ड की आस्तियाँ रु.2,32,760 करोड़ से बढ़कर रु.4,87,500 करोड़ हो गई हैं. नाबार्ड ने लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के साथ मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुँच को और अधिक व्यापक बनाया है. 
 
उनके मार्गदर्शन में विश्व के सबसे बड़े सूक्ष्मवित्त कार्यक्रम – ‘स्वयं सहायता समूह - बैंक लिंकेज कार्यक्रम’ (एसएचजी-बीएलपी) के डिजिटाइजेशन की शुरुआत की गई. एसएचजी के डिजिटाइजेशन के कार्यक्रम ‘ई-शक्ति’ को देश के 100 जिलों में कार्यान्वित किया गया है. एसएचजी के सदस्यों के खातों के डिजिटाइजेशन के परिणामस्वरूप पारदर्शिता बढ़ी है और ऋणों के मूल्यांकन में बैंकरों के भरोसे में भी वृद्धि हुई है. इससे लोगों को बिना किसी परेशानी के ऋण और अन्य बैंकिंग सेवाएं देने में मदद मिली है जिसका सकारात्मक प्रभाव लाखों निर्धन परिवारों पर हुआ है. डिजिटाइज किए गए खाते आधार से भी जुड़े हैं जिसके कारण सिबिल जैसी ऋण सूचना कंपनियाँ एसएचजी के सदस्यों के ऋण की पिछली जानकारी जेनेरेट करने में समर्थ हुई हैं.     
 
उनके मार्गदर्शन में, नाबार्ड ने देश में अपनी तरह के पहले सर्वेक्षण – नाबार्ड अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण (नाफिस) 2016-17 की संकल्पना तैयार की, उसकी रूप-रेखा बनाई और उसे संचालित किया. इस सर्वेक्षण में समग्रतामूलक तरीके से वित्तीय समावेशन से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया गया. इस सर्वेक्षण में 245 जिलों के 40,000 से अधिक कृषि और गैर-कृषि परिवारों को नमूने के रूप में लिया गया और उनकी आजीविका (आय, व्यय आदि) के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय पहलुओं को भी शामिल किया गया. 
 
नाबार्ड ने पूर्व-निर्धारित सेक्टरों में सफल स्टार्ट-अप उद्यमों की पहचान करने और उन्हें सहयोग देने के उद्देश्य से कृषि-व्यवसाय उद्भवन केंद्रों की स्थापना के लिए प्रायोगिक परियोजना भी शुरु की है. 
 
उनके नेतृत्व में नाबार्ड ने यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) के अडाप्टेशन फंड बोर्ड और ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) द्वारा राष्ट्रीय कार्यान्वयनकर्ता एंटिटी के रूप में मान्यता प्राप्त की.    
 
डॉ भनवाला बोर्ड के सदस्य के रूप में राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न संस्थाओं का मार्गदर्शन करते हैं जिनमें प्रमुख हैं - निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी नियम (डीआईसीजीसी), ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आणंद (इरमा), भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम-रोहतक) रोहतक, लघु कृषक कृषि-व्यापर कंसोर्टियम (एसएफएसी), राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (एनसीडीसी) और राष्ट्रीय बैंक प्रबंध संस्थान (एनआईबीएम). वे बैंकर ग्रामीण विकास संस्थान (बर्ड), नबार्ड कन्सलटेंसी सर्विसेज  (नैबकॉन्स) और नाबार्ड पर्यवेक्षण बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं. वे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 24 देशों की 84 संस्थाओं के एसोसिएशन - एशिया-पेसिफिक रूरल एंड एग्रीकल्चरल क्रेडिट एसोसिएशन (अप्राका) के उपाध्यक्ष भी हैं जो ग्रामीण वित्त के क्षेत्र में सहकारिता को बढ़ावा देता है और सूचना तथा विशेषज्ञता के पारस्परिक विनिमय में सहयोग करता है.   
 
नाबार्ड में कार्यभार ग्रहण करने के पहले वे इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फिनांस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) के अध्यक्ष रहे जो आधारभूत संरचना के वित्तपोषण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भारत सरकार द्वारा संवर्धित राष्ट्र-स्तरीय विकास वित्त संस्था (डीएफआई) है. उन्होंने आधारभूत संरचना के वित्तपोषण के लिए ऋण वृद्धि उत्पाद विकसित करने के कार्य का नेतृत्व किया जो भारत में अपनी तरह का पहला कदम था. 
 
2000 से 2005 के दौरान, डॉ. भनवाला दिल्ली राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक रहे और उनके नेतृत्व में वहाँ की टीम ने बैंक की स्थिति को ठीक करने में सफलता पाई. 
 
 समाचार-पत्रों में प्रकाशित रचनाएँ: 
 
  • बिजनेस लाइन-18 अगस्त 2017- सस्टेनेबल फार्मिंग, द ओनली वे आउट 
  • फाइनेंसियल एक्सप्रेस- 25 जनवरी 2019- एड्रेसिंग रीजनल इम्बैलेंसेज इन एग्रीकल्चर क्रेडिट इन इंडिया.   
महत्वपूर्ण वक्तव्य:  
  • आईसीएआर- एनआईएपी के वार्षिक दिवस पर दसवाँ दयानंद झा स्मारक वक्तव्य : ‘एग्रीकल्चर इन करेंट कंटेक्स्ट – अपॉर्च्युनिटीज एंड चैलेंजेज’. 
  • नवकृष्ण चौधरी सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज, भुवनेश्वर में नवकृष्ण चौधरी स्मारक वक्तव्य: ‘चैलेंजेज इन फिनांसिंग स्मॉल एंड मार्जिनल फार्मर्स इन इंडिया विद स्पेशन रेफरेंस टु ईस्टर्न इंडिया’.
  • एनडीआरआई, करनाल में डॉ. एन एन दस्तूर स्मारक वक्तव्य: ‘ लिवरेजिंग एनिमल वेल्थ फॉर स्मॉल फार्मर्स’ प्रॉस्परिटी’.      
 
 
मीडिया: